Monday, January 19, 2026
दुनिया भर में आर्थिक भूकम्प लाने वाले ट्रम्प की हत्या की साजिश का सूत्रधार कौन था? नेटफ्लिक्स की ‘तस्करी’ क्या भारत की मौजूदा व्यवस्था की पौल खोल पायी?
श्रीगंगानगर। वर्ष 2024 में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान स्विंग स्टेट पेंसेलेविया मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ हत्या की साजिश रची गयी और गोली उनके कान को निशाना बनाते हुए निकल गयी। अगर निशानेबाज का निशाना नहीं चूकता तो? इस वारदात के एक व्यक्ति को एफबीआई ने कुछ ही समय के अंतराल पर गिरफ्तार कर लिया था किंतु इसकी साजिश किन लोगों ने रची थी, यह जानना आवश्यक है और अभी तक यह जानकारी दुनिया के सामने पेश भी नहीं की गयी है कि सूत्रधार कौन था?
एफबीआई, सीआईए, सीक्रेट सर्विस और अन्य 26 खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी नहीं है कि सूत्रधार कौन थे और कहां बैठे हैं। हमलावरों को पहले ही यकीन हो गया था कि अगर ट्रम्प जीत जाते हैं तो व्हाइट हाउस पूरी दुनिया में आर्थिक जगत की तस्वीर बदल देगा।
अब वही हो रहा है। क्वांटम कम्प्युटिंग के लिए बहुत सारे देश तैयार नहीं है। ब्लॉक चेन के लिए भी काम नहीं हुआ है और यही अमेरिका की सबसे बड़ी जीत का मार्ग प्रशस्त करने वाली है। चीन हो या यूरोपीय संघ तकनीक के मामले में अभी भी वे अमेरिका से दशकों पीछे हैं।
सिर्फ एक कमांड से दर्जनों या सैकड़ों या हजारों अथवा इससे भी कहीं ज्यादा बैंक दिवालिया हो जायेंगे। प्राइवेट बैंकों का चलन दुनिया भर में हो रहा है और यही ब्लैक, ग्रीन मनी का सबसे बड़ा स्रोत बने हुए हैं। हवाला कारोबार भी धड़ल्ले से हो रहा है।
अब जब हम कम्युटर और आर्थिक दौर में जी रहे हैं तो यह समझ लेना चाहिये कि अमेरिका इस दौर की महान शक्ति बन चुका है और एक साल के भीतर वह हो गया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। क्वांटम फायनेंस सिस्टम लागू होने के बाद अब एनईएसऐरा और जीईएसऐरा जैसे एक्ट भी प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसा नहीं है कि दुनिया को जानकारी नहीं थी या नहीं है। वे ट्रम्प का तोड़ नहीं निकाल पाये और अब वे काफी पीछे हो गये हैं। ग्रीनलैण्ड या यूक्रेन के नाम पर एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। इन सबका अब कोई असर नहीं होने वाला है। तीर हाथ से निकल चुका है और टारगेट को प्राप्त करने के लिए बस चंद कदम की दूरी पर है।
ओरेंजलैण्ड हो जायेगा नाम
ग्रीनलैण्ड को प्राप्त करने के बाद सबसे पहले नाम बदला जा सकता है। ट्रम्प पहले मैक्सिको की खाड़ी का नाम अमेरिका की खाड़ी कर चुके हैं। अब पनामा नहर और ग्रीनलैण्ड पर चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति स्पष्ट कर चुके हैं कि वे नाम बदलकर ओरेंजलैण्ड करेंगे और प्रत्येक नागरिक को एक-एक लाख डॉलर की राशि भी देंगे जो भारतीय मुद्रा में करीबन 90 लाख रुपये हो जायेंगे।
‘तस्करी’ क्या भारतीय व्यवस्था पर चोट करती है?
भारत में बंदरगाह और एयरपोर्ट का निजीकरण कर दिया जा रहा है और इसका नुकसान देश की अर्थव्यवस्था को भी हो रहा है। क्योंकि इससे ठेकेदार फर्म का हस्ताक्षेप सीधे तौर पर सरकारी सेवाओं में भी हो जाता है। अब बात की जाये तो सामने आ रहा है नेटफ्लिक्स की फिल्म तस्करी में सोने की तस्करी किस प्रकार की जाती है और हो रही है। प्रवर्तन अधिकारी किस तरह से उनके साथ अटैच होते हैं। पूरी व्यवस्था की जानकारी नाट्य रुपांतरण के जरिये दी गयी है।
ध्यान रहे कि गौतम अडाणी के पास भारत में अनेक एयरपोर्ट और बंदरगाह हैं जबकि दुबई में उनके भाई प्रवीण अडाणी बिजनेस करते हैं।
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