Thursday, January 29, 2026
अमेरिका ने चारों दिशा से घेरा, ईरानी सेना को पहली खेप में मिले 1 हजार ड्रोन, सरकारी एजेंसियां कितने दिन संभालेंगी शेयर बाजार, यूरोपीय बाजार में भारतीयों का कितना निवेश-जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही सरकार?
श्रीगंगानगर। हवाला या अन्य रूट से हजारों या लाखों करोड़ रुपये यूरोपीय बाजार में भारतीयों के निवेश हैं? अनेक नेताओं के संस्थान वहां फल-फूल रहे हैं। अगर दुनिया की सबसे बड़ी खबर की ओर रुख किया जाये तो सामने आता है अमेरिकी सेना की बड़ी खेप का ईरान के चारों दिशाओं में पहुंच जाना। 40 हजार सैनिक इस समय तेहरान में शांति बनाये रखने के लिए विभिन्न युद्धपोत अथवा अन्य क्षेत्रों में तैनात किये गये हैं।
यूरोप और भारत गणराज्य की सरकार के बीच हुए समझौते का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है तो यह क्यों नहीं बताया जा रहा कि इससे मध्यमवर्गीय परिवारों को फायदा नहीं होने वाला। यूरोपीय बाजार अपनी लग्जरी लाइफ के लिए जाने जाते हैं और लग्जरी उत्पाद जब भारतीय बाजार में प्रवेश करेंगे तो यूरोप को भारतीय मुद्रा में कनवर्ट करने पर यह मिडिल क्लास फैमिली की अप्रोच से बाहर हो जायेंगे। वहीं अपर क्लास जब खरीद करेगी तो यही धन विदेश जायेगा और रुपये पर दबाव और बढ़ जायेगा।
रुपये पर जब-जब दबाव आयेगा तो इसका सीधा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर सीधा पड़ेगा।
अगर आज के हालात को देखा जाये तो आर्थिक स्थिति की गणना इस प्रकार की जाती है कि जितनी महंगाई होगी, विकास दर उतनी दर से बढ़ेगी। अमेरिका में महंगाई की दर 2 प्रतिशत दर के आसपास रहती है। इसी से वहां पर विपक्ष शोर मचाती है जबकि विकासशील देशों में तो हालात और खराब होते हैं। सरकार अपने स्तर पर आकड़े जारी करती है और उसको मानकर ही योजनाएं बनायी जाती हैं जिससे दो वर्ग की खाई में अंतर हर दिन, हर पल बढ़ता जा रहा है।
वीआईपी क्लचर जिम्मेदार क्यों नहीं?
नरेन्द्र मोदी सरकार का गठन जब 2014 में हुआ तो वीआईपी क्लचर के खिलाफ माहौल बनाया गया था और सरकार ने अधिकारियों की गाडिय़ों से लाल या नीली बत्ती लगाने पर रोक लगा दी थी। इस कृत्रिम कार्यवाही से सरकार ने बल्ले-बल्ले करवा ली, लेकिन इसका आम आदमी को कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि वीआईपी क्लचर आज भी जिंदा है।
प्रमाण देखना है तो ज्यादा दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। पिछले सप्ताह ही एक दिन में गौतम अडाणी के समूह को 1.3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान शेयर बाजार में हुआ। अडाणी समूह में सबसे बड़ा निवेश सरकारी एजेंसियों ने किया हुआ है और इस भरपाई को पूरा करने के लिए सरकार ने तुरंत ब्रिक्स देश के ब्राजील के साथ ऐसा समझौता किया कि अडाणी समूह के शेयरों में फिर से काल्पनिक तेजी लायी गयी। ब्राजील और अडाणी समूह मिलकर रक्षा क्षेत्र में युद्धक विमानों का निर्माण करेंगे। ब्राजील का नाम अमेरिका की तरह विश्वास और सार्थकता से परिपूर्ण विमान निर्माण के लिए नहीं जाना जाता।
ब्राजील के साथ समझौते की खबर को प्रमुखता से प्रसारित किया गया और अडाणी समूह फिर से शेयर बाजार में बड़ा खिलाड़ी बन गया। साप्ताहंत के आखिरी दिन से पहले गुरुवार 29 जनवरी 2026 को एक बिलियन डॉलर से ज्यादा का फायदा शेयर बाजार से हुआ है।
इस तरह से अडाणी समूह में एक बार पुन: तेजी का दौर आरंभ हो गया। कुछ माह पहले भी अमेरिकी मैग्जीन ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट के माध्यम से प्रकाशित किया था कि शैल कंपनियों के माध्यम से निवेश होता है हालांकि अडाणी समूह ने इसका खंडन किया था।
यूरोपीय बाजार में हुए निवेश पर श्वेत पत्र जारी हो
काला धन विदेशों से लाने का नारा 2014 के चुनावों में दिया गया था और 11 साल बाद सरकार अभी तक यह नहीं बता पायी कि आजादी के बाद 2010 तक कितना पैसा देश से बाहर गया और 2010 से 2025 तक कितना निवेश हवाला या अन्य मद से यूरोपीय बाजार में हुआ।
इस संबंध में कोई जानकारी सामने नहीं आयी। ब्लैक, ग्रे मनी देश से बाहर जा रही है और सरकार के पास इस संबंध में कोई तथ्य नहीं हो, यह संभव नहीं है। सरकार के पास जो जानकारी है, उसको व्हाइट पेपर के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहिये।
रिजर्व बैंक को एक ही दिन में एक ट्रिलियन रुपये से ज्यादा की खेप जारी करने का विचार क्यों आया?
आरबीआई ने शुक्रवार अर्थात 23 जनवरी को तरलता की कमी बताते हुए 1.25 ट्रिलियन रुपये जारी करने का निर्णय लिया। इसी दिन ही तो अडाणी समूह को इतना ही नुकसान एक दिन में हुआ था।
बाजार में तरलता की कमी है, यह रिजर्व बैंक ने भी स्वीकार कर लिया, इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी एक बैठक में यह कह चुकी है। जो धन 70 या इससे ज्यादा समय से बाजार में था, वह यूरोप या अन्य देशों में पहुंच गया? यह सवाल है। क्योंकि सवा लाख करोड़ रुपये जैसे ही बाजार में आयेगा यह लोन के नाम पर कुछ धनपतियों को बांट दिया जायेगा। लेकिन इसका असर मार्केट पर नजर आयेगा और महंगाई फिर से उछाल की ओर कदम बढ़ायेगी।
ईरान-अमेरिका युद्ध के लिए औपचारिक घोषणा ही बाकी?
खाड़ी के देशों में 40 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात कर दिये गये हैं। वहीं चारों दिशाओं में विमान वाहक युद्धपोत तैयार हैं जिन पर दर्जनों या सैकड़ों की संख्या में विमान, हैलीकॉप्टर आदि तैनात हैं। अरब क्षेत्र में अमेरिका ने बहुदिवसीय युद्धक अभ्यास भी आरंभ कर दिया है। इस तरह से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की संभावना अब सीमित नहीं रही है।
एक रिपोर्ट में रॉयटर ने बताया कि 1 हजार से ज्यादा ड्रोन ईरानी सेना को पहली खेप में उपलब्ध करवाये गये हैं। दूसरी ओर अमेरिका इन ड्रोन और मिसाइलों से अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए मिसाईल रोधी हथियारों को तैनात कर रही है ताकि हवा में ही मिसाइलों या ड्रोन को समाप्त किया जा सके।
पाकिस्तान : पीएम क्यों डरे हुए हैं सेना प्रमुख से
गुरुवार 29 जनवरी को पाक के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ असीम मुनीर के साथ एक कार्यक्रम में थे और उस दौरान उन्होंने मुनीर की तारीफ के कसीदे पढ़ दिये। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उपस्थिति में शरीफ ने कहा था कि ट्रम्प साहब आप मुनीर की ओर देखकर मुस्करा दीजिये नहीं तो वह मुझे मार भी सकता है। यह शब्द भले ही उस समय एक जोक जैसे लग रहे हों लेकिन गुरुवार को यह शब्द सच साबित होते नजर आये।
पाकिस्तान ने अपनी एयरलाइन को बेच दिया है। इसके बदले में पाक को सिर्फ 200 मिलियन डॉलर ही मिलेंगे, शेष राशि निजी क्षेत्र की कंपनी के कर्ताधर्ता विकास व अन्य कार्यों पर खर्च करेंगे। यह राशि पाक की मुद्रा में 1.80 अरब रुपये है।
शहबाज ने कहा कि एयरलाइन की बिक्री में सेना के प्रमुख मुनीर का बहुत बड़ा योगदान है और यह एयरलाइन की बिक्री उनके कारण ही संभव हो पायी है। उन्होंने मुनीर को बधाई भी दी। इसी से समझा जा सकता है कि मुनीर के दबाव में पीएम है। वे हर समय उनके जयकारे लगा रहे हैं।
पाक की सेना के साथ सउदी अरब ने समझौता भी किया हुआ है यह समझौता सम-नाटो कहलाता है। इसके बाद यमन बॉर्डर पर अरब की ओर से पाक सेना को तैनात किया गया है।
यूएई के राष्ट्रपति मास्को पहुंचे
रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने गुरुवार 29 जनवरी को यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद अल निहान का क्रेमलिन में स्वागत किया। दोनों नेताओं ने आपसी हितों पर चर्चा की और विश्व के हालात पर भी प्रकाश डाला।
मोहम्मद बिन जायेद अल निहान की यह यात्रा इसलिए चर्चा में आ गयी है क्योंकि पिछले दिनों ही वह भारत की यात्रा पर आये थे और मात्र 3 घंटे ही नई दिल्ली में रूके थे। इसके उपरांत पाक के राष्ट्रपति आसिफ जरदारी यूएई पहुंचे। इस तरह से यूएई नेता सभी पक्षों से वार्ता कर रहे हैं तो इसका सामरिक व राजनीतिक महत्व बन जाता है।
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