Saturday, January 31, 2026
गुड-बैड आतंकवाद का मंत्र क्यों भूल गयी भारत सरकार, सोने-चांदी में सट्टाबाजी पर अंकुश नहीं लगा पा रही सरकार-गरीब हिन्दू से मंगलसूत्र भी छीन गया
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की सरकार पाकिस्तान पर आरोप लगाती है कि वह गुड-बैड टैरेरिज्म का मूल्यांकन करती है जबकि आतंकवाद की कोई परिभाषा नहीं होती। अब वही भारत सरकार तालिबान को जिस प्रकार स्पोर्ट कर रही है, क्या वह नीति अपनायी जा रही है जो अब तक पाक निभाता आया है। वहीं हिन्दू गरीब परिवार से मंगलसूत्र का अधिकार भी छीन गया, सरकार ने कोई कदम उठाया हो, यह नजर नहीं आया।
अफगानिस्तान में इस समय आतंकवादी के रूप में संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित तालिबान की सत्ता है। जो सरकार अफगानी नागरिकों ने लोकतंत्र के जरिये चुनी थी, वह गिराकर उस पर कब्जा किया गया। अब मीडिया रिपोर्ट में महिलाओं की आवाज सुनाई दे रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि महिलाओं के स्कूल जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अगर महिलाएं स्कूल-कॉलेज नहीं जा पायेंगी तो वह डॉक्टर-इंजीनियर कैसे बन पायेंगी। अफगानिस्तान में शरिया कानून है और वहां पर महिला किसी गैर पुरुष को अपना चेहरा नहीं दिखा सकती। काबुल हो या कंधार सब जगह महिला चिकित्सकों की कमी दिखाई दे रही है और गर्भवती महिलाओं को परेशानी ज्यादा हो रही है। संस्थागत प्रसव न के बराबर हो गये हैं।
सरेआम लोगों को आशिंक अपराध पर सूली पर चढ़ाया जा रहा है। मानवाधिकार का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। माहौल को पढ़ा जा सकता है, समझा जा सकता है और देखा जा सकता है।
मानवाधिकार संगठन लगातार आवाज उठा रहे हैं। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग की जा रही है और इस बीच यह जानकारी आती है कि दिल्ली के भीतर तालिबान ने राजदूत कार्यालय आरंभ कर दिया है। भारत के साथ उसके राजकीय रिश्ते स्थापित हो गये हैं। यूएन, अमेरिका, यूरोप और भारत सरकार ने खुद अभी तक तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है। वहां की पब्लिक को रामभरोसे छोड़ दिया गया है।
दक्षिण एशिया उप महाद्वीप के देश प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति की पहचान रहे हैं। अब अफगान जनता को गैर लोकतांत्रिक सरकार के हाथ सुपुर्द कर उसको सहायता भेजना भी एक सवाल खड़े करता है।
भारत सरकार अभी तक पाकिस्तान गणराज्य की सरकार की आलोचना करती आयी है कि वह भारत को भेजे जाने वाले आतंकवाद को अच्छा कहता है और पाकिस्तान तालिबान को गंदा आतंकवाद बताता है। भारत में पाक समर्थित जैशे मोहम्मद, लश्करे तैयबा सहित कई आतंकवादी संगठन सक्रिय रहे हैं। इनको पाक मुजाहिद्दीन के नाम से पुकारता है। वहीं पाकिस्तान में तालिबान पाकिस्तान नाम से आतंकवादी संगठन है। इसके अतिरिक्त बलोचिस्तान में भी अनेक संगठन सक्रिय है जो बंदूक की आवाज पर बात करता है।
पाक को अच्छे-बुरे की नसीहत देते-देते भारत सरकार की विदेश नीति भी देश के मूल मंत्र को भूल गयी कि आतंकवाद की कोई परिभाषा नहीं होती और बंदूक की नोक पर खून बहाने वाले किसी भी सभ्य समाज के हिस्से नहीं हो सकते।
सोना-चांदी की महंगाई गरीब आदमी को मार गयी
भारत में इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। सोने का भाव एक साल के भीतर ही 60 हजार से 1.80 लाख तक पहुंच गया। यह कैसे हो गया। क्या सरकार सो रही थी? अगर मीडिया रिपोर्ट को स्वीकार किया जाये तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो 18 से 20 घंटे तक कार्य करते हैं, फिर यह जादू कैसे हो गया।
सोना भारतीय संस्कृति की पहचान है। बेटियों और बहू को सोने के आवश्यक गहने दिये जाते हैं जिनमें सुहागन की पहचान के प्रतीक मंगलसूत्र भी शामिल है। अब वह मंगलसूत्र बनवाना भी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बहुत मुश्किल काम हो गया है।
सोने ने दो दिनों के भीतर काफी उतार-चढ़ावा देखे। हालांकि अभी भी भाव आसमान को छू रहे हैं।
सोना आम भारतीय की पहुंच से बाहर हो रहा था और सरकार आंखें बंद किये हुए थी, यह कैसे संभव हुआ। 2024 के चुनावों में नरेन्द्र मोदी जो मौजूदा पीएम भी हैं, कह रहे थे कि कांग्रेस की सरकार आ गयी तो महिला के गले से मंगलसूत्र गायब हो जायेगा। भाजपा की सत्ता फिर से स्थापित हुई लेकिन हिन्दुत्व की बात करने वाली पार्टी के राज में ही मंगलसूत्र गायब हो गया। हाथों की चूडिय़ां और मंगनी की रस्म को पूर्ण करने वाली रिंग भी गायब हो गयी है।
अब तो चांदी के गहने पर सोने की परत चढ़ाना भी आसान नहीं रहा है क्योंकि वह भी लाखों की बात हो गयी है।
सरकार ने 2 फरवरी को बजट पेश करना है, उस दिन सरकार कस्टम ड्यूटी कम कर सकती है लेकिन इससे कितना असर पड़ेगा।
असल में सरकार को तुरंत ऑनलाइन सट्टेबाजी के प्रतीक एमसीएक्स आदि पर प्रतिबंध लगाना चाहिये और आम आदमी की जरूरतों सोना-चांदी, जिंस आदि को बाहर निकालना चाहिये। नहीं तो जैसे हिन्दू महिला के माथे से मंगलसूत्र और हाथ से रिंग गायब हुई है, मोदी-शाह की जोड़ी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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