Sunday, January 18, 2026

 

अमेरिका और ईरान युद्ध के मुहाने पर, मिनेसोटा में भी नैशनल गार्ड होंगे तैनात





श्रीगंगानगर। ईरान में इस्लामी शासन समाप्त करने आदि की मांग को लेकर आंदोलन में शामिल पांच हजार लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया है। रॉयटर समाचार एजेंसी ने मरने वालों की अधिकारिक जानकारी दुनिया के समक्ष पेश की है। 

लोकतंत्र के लिए जंग करने वाले लोगों को यह नहीं पता था कि उनके वोट से ही बनी सरकार इतनी निर्दयी हो सकती है कि गोलियां चलाकर पांच हजार मतदाताओं की जान तक ले सकती है। वहीं जानकारी यह भी आ रही है कि मरने वाले अधिकांश जेनरेशन-जैड से संबद्ध थे। 

युवाओं की मौत और उनके शव देखकर रूह कांप गयी है। ईरान में आंदोलन महंगाई के खिलाफ आरंभ हुआ था और फिर यह ईरान में इस्लामी सत्ता को समाप्त करने की मांग को लेकर बदल गया। हालांकि ईरान विदेशी हस्ताक्षेप का आरोप लगा रहा था लेकिन आंदोलन उग्र होता जा रहा था। 

जिन युवाओं ने जिस जोश के साथ वोट देकर सरकार बनायी थी, उसी सरकार ने उनकी आवाज दुनिया तक नहीं पहुंचे, इसके लिए इंटरनेट सेवाओं को निलम्बित कर दिया और समाचार सेवाओं को भी सेंसर कर दिया। 


अमेरिका का रूख क्या कहता है

अमेरिका ने अपने जंगी जहाज ईरानी क्षेत्र से लगते प्रशांत महासागर में भेज दिये हैं और वहां पर स्थायी शांति के लिए हजारों सैनिक तथा सैकड़ों की तादाद में हवाई जहाज लगाये गये हैं। ईराक से अपने सैनिकों और जहाजों को निकाल लिया गया है। यह सुरक्षा की दृष्टि से उठाया गया कदम बताया गया है। इस तरह से 20 सालों से भी अधिक समय बाद पहली बार ईराक अमेरिका की सेना से विहिन हो गया है। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सोमवार को व्हाइट हाउस में आयेंगे। साप्ताहंत अवकाश के लिए वे फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित अपने आवास मार ए लागो चले गये थे।

यह तय माना जा रहा है कि अब ईरान और अमेरिका आमने-सामने हो चुके हैं और कभी भी जंग की आवाज सुनाई दे सकती है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ईरानी जनता को बहादुर बताते हुए कहा है कि येरूशलम उनकी सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और हर समय हर परिस्थिति के लिए तैयार है। 

इसका सीधा सा अर्थ यह हो गया है कि ईरान की इस्लामी सत्ता को हटाने के लिए इजरायल अब युद्ध के लिए अमेरिका के साथ या अलग से भी तैयार है। 

ट्रम्प ने भी इजरायल से पहले इरानी जनता को संबोधित किया था और कहा था कि उनके लिए सहायता रवाना कर दी गयी है जो जल्दी ही उनके पास पहुंच जायेगी। 

मिनेसोटा में 1500 गार्ड तैनाती को हरी झण्डी

मिनेसोटा में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 1500 गार्ड की तैनाती की जा रही है। पेंटागन ने व्हाइट हाउस से मिले आदेशों के बाद तैयारियां आरंभ कर दी हैं। पेंटागन ईरान पर भी नजर रखे हुए है और वहां पर जंगी जहाजों को तैनात कर चुका है। 

मिनेसोटा में इस समय हालात सामान्य नहीं कहे जा सकते हैं और इस बात का इल्म राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी है। उन्होंने इसमें निजी तौर पर रुचि लेते हुए पेंटागन को नैशनल गार्ड की नियुक्ति की है। इससे पहले न्यूयार्क और कैलीफोर्निया में भी नैशनल गार्ड को नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति ट्रम्प कहते हैं कि अवैध लोग अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और अब वे अमेरिकी लोगों को ही लूटपाट के लिए निशाना बना सकते हैं। उनकी सुरक्षा आवश्यक है। स्थानीय पुलिस के अतिरिक्त यह नियुक्तियां की गयी हैं। 1500 गार्ड के साथ-साथ आईस नामक प्रवर्तन एजेंसी के एजेंट्स भी अवैध लोगों को गिरफ्तार करने के लिए कार्यरत हैं।


राफेल खरीद के लिए बिड लगायी गयी?

अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आ रही है कि भारत सरकार ने 121 राफेल खरीद के लिए सार्वजनिक तौर पर खरीद बिक्री के लिए विज्ञप्ति जारी की थी।  किसी अन्य देश या एजेंसी का भी प्रस्ताव आया था। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार फ्रांस के साथ एक बड़ा रक्षा समझौता करना चाहती है जिसमें एक साल के बजट का करीबन 10 प्रतिशत अर्थात करीबन चार लाख करोड़ रुपये का रक्षा सौदा शामिल है। 

अमेरिका ने अपाचे और चिनूक हैलीकॉप्टर का सौदा होने के बाद भी युक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई नहीं की है और रूस के साथ रक्षा सौदा नहीं हो पाया जिस तरह की उम्मीद भारत की मोदी सरकार कर रही थी। वह समनाटो समझौता संभवत: चाहते थे। वहीं रूस की कुछ शर्तों को भी पूरा नहीं किया जा सका था। 

इस तरह से बड़ा हथियार निर्माता फ्रांस रह गया था। चीन से भारत हथियार खरीद नहीं सकता। वहीं फ्रांस के साथ समझौता होने से पहले ही चीन स्टेट भी अपनी नाराजगी को सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित कर रहा है। वह दुनिया को अपनी ताकत भी दिखा रहा है। 


क्यूएफएस को लेकर नेताओं की हलचल तेज

अमेरिका में इस समय एक बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और वह स्विफ्ट (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंकों के वित्तीय लेन-देन करने वाली वॉयर) को भी ब्लॉक चेन आधारित नयी तकनीकी व्यवस्था पर ले गया है। क्वांटम फायनेंस सिस्टम पर आने के कारण अमेरिका सभी अन्य देशों से अलग होकर काम कर रहा है। अगर अमेरिका क्यूएफएस को बंद कर देता है तो पूरी दुनिया का बाजार सिस्टम धराशायी हो जायेगा। 

दुनिया में बहुत से ऐसे ट्रस्ट (न्यास) हैं जो हकीकत में कोई कार्य नहीं करते किंतु उनके खातों में हजारों बिलियन डॉलर्स हैं। अब समझा जा सकत है कि नया विश्व युद्ध मिसाइलों से नहीं दिमाग से भी लड़ा जा सकता है। 








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