Tuesday, January 27, 2026
मेक इन इंडिया में क्या हो रहा है? यूरोपीय सामान पर टैक्स खत्म, रक्षा क्षेत्र के लिए अडाणी को हजारों करोड़ का नया लोन मिलेगा? ब्राजिल के साथ समझौता आग में घी डालने का काम नहीं करेगा?
श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब भी चीन और अमेरिका के साथ तनाव के समाचार देखते हैं तो उनको भारतीय बाजार नजर आता है और मेक इन इंडिया के नाम पर योजना ले आते हैं। अब अमेरिका और रूस से हथियार नहीं मिल रहे तो गौतम अडाणी के समूह को रक्षा क्षेत्र में उतार दिया है। अब वे ब्राजील के साथ नया एयरक्रॉफ्ट तैयार करेंगे। ब्राजील के साथ अमेरिका के रिश्ते इन दिनों सर्द मौसम में गर्मी रखे हुए हैं, यह कदम आग में घी डालने का काम नहीं करेगा? ब्राजील और भारत गणराज्य दोनों ही ब्रिक्स समूह के सदस्य देश हैं।
शुक्रवार को सप्ताह के आखरी दिन शेयर बाजार ने अडाणी समूह को करीबन सवा लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। शेयर बाजार धड़ाम से नीचे गिरे तो संभवत: अडाणी समूह में निवेश करने वाली सरकारी कंपनियों को भी नुकसान हुआ होगा, जो अभी तक किसी मीडिया रिपोर्ट में सामने नहीं आया।
उसी दिन भारतीय रिजर्व बैंक ने यह मान लिया कि बैंकों के पास तरलता की कमी है और आरबीआई ने सवा लाख करोड़ रुपये के नये लोन बैंकों को जारी करने के लिए बाजार में राशि भेजने का निर्णय लिया। इस तरह से अडाणी समूह को एक सहारा तो मिल गया, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियां समूह को नया लोन नहीं दे रही हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है कि अडाणी समूह ने ब्राजील के साथ समझौता किया है और दोनों देश मिलकर रक्षा क्षेत्र के लिए जंगी जहाज तैयार करेंगे। यह तब है जब ब्राजील का नाम कहीं भी यह नहीं दर्शाता कि वह रूस, अमेरिका और फ्रांस की तरह हथियारों जैसे फाइटर जेट का निर्माण करता है।
इसके बावजूद समझौता हुआ और नयी कंपनी पहले से ही तैयार कर ली गयी थी। इस तरह से दोनों कंपनियां मेक इन इंडिया के नाम पर काम करेंगी। क्या यह कंपनी अपाचे और चिनूक, एफ 16, 35, मिराज, एमयू सीरिज जैसे हैलीकॉप्टर या जंगी हवाई जहाज बना सकती हैं।
पैसे की कोई कमी नहीं है क्योंकि आरबीआई पहले ही सवा लाख करोड़ रुपये बाजार में नये सिरे से जारी करने के लिए तैयार है।
एक तरफ तो भारत सरकार मेक इन इंडिया का प्रचार कर रही है तो दूसरी तरफ यूरोपीय संघ समझौता किया गया है, जिसमें संघ के उत्पादों पर टैक्स खत्म किया जा रहा है। इसको मदर ऑफ डील का नाम दिया गया। यह दो तरफ की राजनीति बता रही है कि सरकार के पास नया करने के लिए कुछ भी नहीं है। दबाव है तो कम किया जाये।
अभी अगले महीने फ्रांस के साथ रक्षा डील भी की जानी है जिसमें सवा तीन लाख करोड़ या इससे ज्यादा का रक्षा समझौता होगा। क्या यह समझौता मेक इन इंडिया का हिस्सा होगा। भाषण देने के लिए तो कहा जा सकता है, हां। लेकिन हकीकत में राफेल कंपनी या फ्रांस अपनी तकनीक भारत को देने को तैयार नहीं होगा।
अमेरिका को भडक़ाने की कार्यवाही करार
अमेरिका के एक थिंक टैंक का कहना है कि अमेरिका ने जैसे ही गौतम अडाणी पर दर्ज मुकदमे में दबाव बढ़ाया, उसी समय ही मेक इन इंडिया के नाम पर नया समझौता सामने आया। इस तरह से अमेरिका के खिलाफ इसको उकसावे वाली कार्यवाही माना जा रहा है। ध्यान रहे कि हाल ही में जिनेवा में भारत के पीएम नहीं गये थे, वहां पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी आये हुए थे।
अमेरिका ने भारत पर भारी-भरकम टैक्स लगाया हुआ है लेकिन 6 माह से ज्यादा समय गुजर जाने के बावजूद न कोई डील हुई और न ही शिखर वार्ता। दोनों देशों के नेताओं के पास मिलने के लिए अनेक मौके आये थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
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