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ब्रिटेन का दबाव ‘ट्रम्प’ पर काम नहीं आया

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न्यूयार्क। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को धमाका कर दिया। कभी जय-वीरू की दोस्ती कहने वाले अब मुंह छिपाये घूम रहे हैं क्योंकि भारत गणराज्य की सरकार ट्रम्प प्रशासन के साथ डील नहीं कर पायी और अब दो अगस्त से भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाया जायेगा।  मोदी प्रशासन ने अमेरिका से ज्यादा ब्रिटेन को तवज्जो दी थी और उसके साथ खुला व्यापार समझौता कर लिया। इसके तहत दोनों देशों के उत्पाद खरीद और बेचे जा सकेंगे। उन पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। अमेरिका के साथ यह समझौता भारत गणराज्य की सरकार नहीं कर पायी।  विदेश नीति एक बार फि से हार गयी। मोदी सरकार चाहती थी कि ब्रिटेन अमेरिका और उनके बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाये। इस कारण करीबन सात साल बाद मोदी फिर से ब्रिटेन पहुंच गये। प्रधानमंत्री केरी स्टारर्मर के साथ बैठक की। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहुंच गये और दोनों नेताओं के बीच समझौते पर काम नहीं हो पाया।  कीर स्टारर्मर के सामने ही डोनाल्ड ट्रम्प ने लंदन के मेयर को बेवकूफ कह दिया। ट्रम्प ने दिखा दिया कि वे यहां पर ट्रेड डील करने आये हैं न कि मोदी की वकालत का पा...

दक्षेस को लोन देकर अपनी जय-जयकार करवाने वाले मोदी के देश में सरकारी स्कूल की छत गिरी

श्रीगंगानगर। मालदीव देश में अपनी जय-जयकार करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करीबन 5 हजार करोड़ रुपये का लोन दे रहे थे, उससे कुछ समय पहले राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक सरकारी विद्यालय की छत गिर गयी और सात लोगों की मौत की खबर सरकार की ओर से दी गयी।  भारत गणराज्य में लाखों लोग सडक़ों की फुटपाथ पर रात गुजारते हैं। जिस देश में 30 करोड़ परिवारों के पास अपना घर नहीं है, उस देश का प्रधानमंत्री अपनी जय-जयकार करवाने के लिए अनेक देशों को लोन दे रहा है। इसकी भरपाई टैक्स आतंकवाद के रूप में की जा रही है। जीएसटी, वैट, आयकर, टोल टैक्स जैसे न जाने कितने रूप इस आतंकवाद को दिये गये हैं।  राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से स्कूली बच्चों सहित 7 जनों की मौत हो गयी। यह सवाल दुनिया को हिला देने वाला है। भारत सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का दावा करते हुए नये हाइवेज की चर्चा करती है किंतु यह कभी नहीं जाना जाता कि पुराने निर्माण कार्यों की अवधि/सीमा पूरी हो चुकी है और उनके सुधार किये जाने की आवश्यकता है।  राजस्थान में जर्जर भवन की यह एकमात्र घटना नहीं है। श्रीगंगानगर में एक ...

क्या जगदीप धनखड़ के जीवन को खतरा?

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श्रीगंगानगर। उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के उपरांत से ही जगदीप धनखड़ की मुलाकात मीडिया और किसी भी राजनीतिक दल से नहीं हो पायी है। किसी को भी उपराष्ट्रपति कार्यालय-निवास में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह से नजरबंद करने का रहस्य क्या है? भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता होने के नाते वे करीबन पांच साल तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। ममता बनर्जी के साथ उनका वॉकयुद्ध जारी रहता था और वे आखिर में उपराष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंच गये। तीन साल का वक्त बदल चुका था। अब दो सालों के लिए नया वाइस प्रेजीडेंट का चुनाव होना है।  नई दिल्ली में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ही भाजपा को चला रहे थे और तीसरे व चौथे नंबर के लिए राजनाथ सिंह व जेपी नड्डा के बीच दौड़ चल रही थी। गुजरात मॉडल का असर कम हो रहा था तो एमपी से शिवराजसिंह चौहान को लाया गया और उनको नया अध्यक्ष बनाने की तैयारी की जा रही थी।  मध्यप्रदेश का मॉडल भी देश में असर नहीं दिखा रहा था और मोदी-शाह एण्ड एसोसिएट की पकड़ धीमी हो रही थी, क्योंकि अपनी विदेश और रक्षा नीति के कारण ही मोदी खुद को शाबाशी देते हुए 56 ईंच का सीना का जुमला राजनी...

नैतिकता शब्द को जिंदा कर गये उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़

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श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने अपने पद से इस्तीफा देकर नैतिकता को एक बार पुन: जीवित कर दिया। राजनीति में नैतिकता कई सालों से गुम हो गयी थी। उनके इस्तीफा के उपरांत अनेक सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने बड़े पद से धनकड़ का मोह कैसे भंग हो गया।  कुछ माह पूर्व एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान धनकड़ ने शिवराज सिंह चौहान को संबोधित करते हुए सवाल किया था कि किसान आंदोलन पिछले साल भी चल रहा था, इस साल भी चल रहा है। इसका क्या कारण हैं? इस अशांत माहौल को शांत किया जाये।  उपराष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह ही एक बार फिर सनसनी फैला दी थी कि देश में माहौल लोकतंत्र के लायक नहीं रहा है। यह चंद शब्द ने पूरी दुनिया का ध्यान उनकी ओर खींचा था। उन्होंने इस तरह का बयान देकर नरेन्द्र मोदी की सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। इस बीच ही गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की विमान हादसे में मौत हो गयी।  उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने 6 महीने के कार्यकाल पूरा होने पर जश्र मना रहे थे और इसके कुछ घंटों उपरांत ही समाचार आ गया कि उपराष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर आसीन ...