Saturday, February 28, 2026

 

आई एम नॉट ओबामा : ट्रम्प, बुश के संसद को दिये गये भाषण के अंश सामने आये



श्रीगंगानगर। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दो दिन पहले सोशल मीडिया पर बयान दिया था, आई एम नॉट ओबामा! इसका अर्थ समझने के लिए काफी मेहनत की आवश्यकता महसूस हुई क्योंकि आज प्रात: भारतीय समयानुसार 9 बजे अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से हमला कर दिया। 

राष्ट्रपति ट्रम्प ने ऐसा क्यों बयान दिया कि ईरान, आई एम नॉट ओबामा। इसका अर्थ समझने के लिए अमेरिकी संसद के इतिहास के पन्नों को देखा गया। 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति ने संसद के संयुक्त सत्र को रात के समय संबोधित किया था। जून में आयोजित कार्यक्रम में बुश ने कहा था, ईरान से अमेरिका को सबसे बड़ा खतरा है। इस तरह से उन्होंने मध्य पूर्व एशिया में घटित होने वाले घटनाक्रम पर प्रकाश डाला था। 

राष्ट्रपति बुश के इस बयान के बाद भी हालांकि न तो बुश और न ही उनके बाद 8 साल तक राष्ट्रपति रहने वाले ईरान पर कार्यवाही की गयी। उस घटना के 23 साल बाद अमेरिका ने ईरान पर 28 फरवरी 2026 को हमला किया। 

राष्ट्रपति ट्रम्प  ने फिर से ईरान से उत्पन्न होने वाले खतरों बारे अवगत करवाया और बताया कि तेहरान ने अमेरिकंस के लिए सदैव खतरा उत्पन्न किया है। अमेरिका के लोगों और सैनिकों की हत्या की घटनाओं का भी उन्होंने सिलसिलेवार वर्णन किया। राष्ट्रपति ट्रम्प और बुश दोनों के ही बयान ऑनलाइन उपलब्ध हैं और उनको पढ़ा, देखा व सुना जा सकता है। 


Friday, February 27, 2026

 

तालिबान भस्मासुर कैसे बन गया? युद्ध के समय कोई मित्र क्यों नहीं आया?

श्रीगंगानगर। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में स्थानीय लड़ाकों को तैयार किया जिसका नाम तालिबान रखा गया। इनका काम सोवियत संघ के साथ गौरिल्ला युद्ध करना था। सोवियत सेना की वापसी और उसके विघटन के बाद रूस महाशक्ति के रूप में सामने आया। 

तालिबान, उस समय भी था जब अमेरिका में वल्र्ड ट्रेड टॉवर को निशाना बनाया गया और उस समय भी था जब भारत के एक वायुयान का अपहरण कर उसको कंधार लाया गया था। इस विमान अपहरण के समय यह देखने वाला होगा कि पहले अमृतसर, फिर लाहौर और अंत में कंधार ले जाया गया। अमृतसर बाबा नानक का शहर है। लाहोर भगवान श्रीराम के पुत्र लव द्वारा बसाया गया शहर है और कंधार जो पहले गंधार कहलाता था, महाभारत के समय युद्ध का एक बड़ा कारण बना था। 

खबर अब यह है कि पाकिस्तान ने जिस तालिबान को संवारा, प्रशिक्षित किया, अब वही उसके खिलाफ हथियार उठा रहा है। अमेरिका या नाटो की सेना के बाद तालिबान ने एक सप्ताह से भी कम समय में अफगानिस्तान की सत्ता पर दुबारा कब्जा कर लिया था। 

भारत के साथ तालिबान के राजनयिक संबंध हैं। भारत गणराज्य की सरकार दवा, गेहूं और अन्य खाद्य पदार्थ का सहयोग करती है, इस कारण इस्लामाबाद यह मानता है कि तालिबान के पीछे अब भारत है। 

युद्ध को दो दिन हो गये हैं लेकिन भारत सरकार ने उस तक कोई सहायता नहीं पहुंचायी है, इस तरह से सैन्य सहायता नहीं मिलने के कारण अफगान पाक के सामने कमजोर हो गया है तो दूसरी ओर रावलपिंडी का यह बयान भी फिका हो गया कि भारत मदद कर रहा है। 

अफगान तालिबान के पास वायुसेना नहीं है। अमेरिकी जहाज हैं एफ 16 आदि, उसका संचालन करना उनको नहीं आता। इस तरह से पाकिस्तान के सामने वह कमजोर हो जाता है और इस्लामाबाद की तरह सीमा पार जाकर उसके घर में घुसकर हमला  नहीं कर पा रहा है। सेना भी कम है और हथियार भी पाक के बराबर नहीं है। 

भारत अगर मदद कर रहा होता तो आधुनिक हथियार और वायुसेना का कम से कम एक कमांड तैयार कर चुका होता और फाइटर जेट भी दिये होते। 

कुल मिलाकर पाक के साथ युद्ध के मामले में अफगानिस्तान ने पहले ही दिन वार्ता की मांग कर डाली। हालांकि शाम होते-होते एक बार फिर से यह समाचार आ रहे हैं कि तालिबान पुन: तैयार हो गया है। युद्ध कर रहा है।  


Wednesday, February 25, 2026

 

भारत और अमेरिका के बीच एक फिर ठन गयी है, सौलर पैनल पर 128 प्रतिशत टैक्स,



श्रीगंगानगर। भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच खटास बढ़ती जा रही है और संयुक्त राज्य अमेरिका  ने भारत पर सौर ऊर्जा से संबंधित उपकरणों के आयात पर 126 प्रतिशत टैक्स लागू किया है। इसके साथ ही यूएसए ने ‘स्टॉप इनसाइडर टे्रड एक्ट’ का भी प्रावधान किया है। यह बिल कानून बनने वाला है। 

चीनी सामान की भारत में एक बार फिर भरमार हो रही है। पानीपत का हैण्डक्राफ्ट उद्योग इस का जीवित प्रमाण है जहां पर निर्माण से संबंधित उद्योग धंधे प्रभावित हो रहे हैं और एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 80 प्रतिशत तक कारखाने बंद हो गये हैं और चीन से सामान आयात किया जा रहा है। 

इसी तरह से सौर ऊर्जा को लेकर भी यही चर्चा है कि भारत में उत्पादन की बजाय चीन से सामान को आयात किया जाता है और उसको अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर के कारण ऐसा होता है। 

इस तरह के समाचारों के बीच अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सौर ऊर्जा से संबंधित उपकरणों पर 126 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। 

इससे पहले भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर सहमत हो गये थे किंतु सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रम्प के फैसलों को पलट दिया था तो राष्ट्रपति ने 15 प्रतिशत ग्लोबल टैक्स का प्रावधान कर दिया। ट्रम्प ने कहा, भारत पहले 100 अरब के व्यापार में आयात कर नहीं देता था किंतु अमेरिका पर लगाया जाता था अब उल्टा हो गया है। 

इस तरह से दोनों देशों के बीच एक बार फिर से ठन गयी है क्योंकि भारत गणराज्य की सरकार ने वाशिंगटन के साथ होने वाली टे्रड डील संबंधित वार्ता को भी स्थगित कर दिया था। 


महानगरों में दूध की भारी कमी फिर भी डील नहीं, क्यों?

अभी कुछ दिन पहले ही राजस्थान के तीन शहरों में 14 हजार लीटर नकली दूध बरामद किया गया। तीन शहरों से यह बरामदगी हुई और अगर इसको आधा दर्जन या एक दर्जन जिलों में छापामारी की जाती तो यह मात्रा कई गुणा तक बढ़ सकती थी। 

जयपुर, दिल्ली, मुम्बई सहित बड़े शहरों की जनसंख्या हर दिन बढ़ती जा रही है और उस समय दूध आसपास के शहरों से मंगवाया जाता है जो हजारों या इससे कहीं ज्यादा मात्रा में होता है। 

मांग के मुकाबले भारत में दूध का उत्पादन कम हो गया है, यह सरकारी आकड़े हैं, इसके बावजूद दूध उत्पादन बढ़ावा देने के लिए सरकार के पास कोई परिणाम नहीं है। 

इस तरह की स्थिति होने के बावजूद डेयरी उद्योग को संरक्षण देने के लिए अभी विदेशी संस्थानों को दूध एक्सपोर्ट की अनुमति नहीं दी गयी है। यह भय दिखाया जा रहा है कि इससे स्थानीय पशुपालकों को नुकसान होगा। यह नहीं दिखाया जा रहा कि दूध की कमी के कारण नकली दूध बाजार में आ रहा है जो सिंथेटिक होने के कारण अनेक लोगों को बीमारियां दे रहा है। 

मिलावट अकेले दूध में नहीं है बल्कि दूध निर्मित खोया, पनीर और घी आदि में भी है। नकली दूध, नकली उत्पाद, यह कहानी हकीकत बन गयी है। 


स्टॉप इंटरनल ट्रेड एक्ट की चर्चा

राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह को अमेरिका की संसद में भाषण दिया तो उन्होंने डेमोक्रेटिक नेता नेैनसी पेलोसी की भी आलोचना की, जो कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं, उनकी आलोचना को मौजूदा डेमोक्रेट्स ने भी खड़े होकर अभिवादन किया। 

वहीं स्टॉप इंटरनल ट्रेड एक्ट की भी चर्चा हुई। इस दौरान ही यह समाचार आ गया कि अमेरिका ने भारत पर सौर ऊर्जा पर 126 प्रतिशत टैक्स लगा दिया है। 


वोटर आईडी-सेव अमेरिका एक्ट अभी भी डेमोक्रेट्स के पास

वोटर आईडी को चुनावों में अनिवार्य किये जाने वाले एक्ट, सेव अमेरिका बिल को निचले सदन हाउस ने तो मंजूरी दे दी है किंतु अभी तक यह सीनेट से पास नहीं हो पाया है। इसका कारण है कि सीनेट से किसी भी बिल को पास करवाने का अर्थ होता है 60 सदस्यों का समर्थन। रिपब्लिकन के पास 52 सदस्य हैं। 8 कम हैं। यह डेमोक्रेट ही पास करवा सकते हैं और वे फिलहाल रुचि नहीं ले रहे हैं जिससे यह बिल लटका हुआ है। 


Monday, February 23, 2026

 

इजरायल की यात्रा पीएम मोदी के लिए सबसे अहम!



श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की कैबिनेट सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं को हिन्दू प्रचारक होने का दावा करने के लिए विदेशी नेताओं को श्री मद्भागवत गीता महाग्रंथ की कॉपी भेंट करते हैं। गीता प्रेस को वे सम्मानित करते हैं। इस तरह से वे प्रचार करते हुए एक हिन्दूवादी नेता की छवि को बनाये रखने का दावा करते हुए 12 साल से शासन कर रहे हैं किंतु सत्य यह है कि इजरायल यात्रा यह भी बतायेगी कि उन्होंने श्री मद्भागवत गीता को अपने जीवन में अपनाया हुआ है, क्योंकि 2047 तो छोडिय़े 2027 भी पीएम के लिए मुश्किल होने वाला है और भारत सरकार की नीतियों के कारण देश के लोग भी अकारण युद्ध का सामना कर सकते हैं। 

नरेन्द्र मोदी 10 सालों से अनेक बार कह चुके हैं कि इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतनयाहू उनके सबसे प्रिय मित्र हैं। अब वे उसी मित्र से मिलने के लिए 25 फरवरी को नई दिल्ली से रवाना होंगे और 26 फरवरी को देश लौटेंगे। इससे पहले वे येरूशलम में संसद को भी संबोधित कर सकते हैं। 

दो दिन की यात्रा के दौरान वे वहां से लौटेंगे तो उत्तरी अमेरिकी देश के प्रधानमंत्री मार्क कोर्नी उनकी यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे होंगे।


मध्य एशिया में तनाव के बीच करेंगे यात्रा

पीएम मोदी उस समय मध्य एशिया की यात्रा पर जा रहे हैं जब वहां पर तनाव बना हुआ है। इससे पहले उन्होंने 22 अप्रेल 2025 को सउदी अरब की यात्रा की थी। वे सउदी की सीमा में प्रवेश करनेवाले थे कि टीवी पर समाचार आरंभ हो गये कि मोदी को एस्कौर्ट करने के लिए अरब के फाइटर जेट पहुंच गये हैं और हवा में अनेक जेट भी दिखाये गये। स्वागत सत्कार के बाद अभी उन्होंने दोपहर का भोजन भी नहीं किया था कि पहलगाम में आतंकवादी हमले की सुर्खियां दुनिया के सामने पहुंच गयीं। 

पीएम वहां से बिना भोजन और मेजबान नेताओं से मिले बगैर वहां से रवाना हो गये और नई दिल्ली पहुंचकर एयरपोर्ट पर ही उन्होंने जो अल्पाहार लेना था, वह लिया और इसके बाद तनावपूर्ण स्थिति की समाचार आ गयी। सउदीअरब ने पाकिस्तान के सिर पर हाथ रख दिया। अब दोनों देश नाटो की तरह मित्र हो गये हैं। एक पर हमला तो दूसरे पर हमला समझा जायेगा। 


इजरायल यात्रा क्या कहती है?

इजरायल के प्रधानमंत्री नेतनयाहू हाल ही में वाशिंगटन की यात्रा से लौटे हैं। वे वहां विदेश मार्को रूबियो, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अलग-अलग मुलाकात कर उनके विचारों के साथ लौटे हैं। 

इसमें कहने में कोई संकोच नहीं है कि अमेरिका और भारत गणराज्य की सरकार के बीच इस समय ऐसा तनाव है, जो पहले कभी नहीं रहा। कोल्ड वॉर जारी है। यह कभी भी युद्ध का रूप ले सकता है। 

पिछले कुछ दिनों के भीतर ही तनावपूर्ण क्षण भी आये और उस समय लगा था कि दोनों तरफ के फाइटर हवा में नजर आ सकते हैं। 

अब इजरायल के पीएम नेतनयाहू से पीएम मोदी से मिलेंगे तो पर्दे के पीछे जो बात होगी वह डोनाल्ड ट्रम्प के दिये गये संदेश और बदले में प्राप्त प्रतिक्रिया ही होगी। पर्दे के सामने भले ही पीएम मोदी को जो भी सम्मान मिले, लेकिन पर्दे के पीछे का असली खेला होगा और यह क्या होगा, अभी इसकी कल्पना की जा सकती है। 

कल्पना यही है कि अमेरिका टैरिफ के अलावा भी भारत से कुछ हासिल करना चाहता है। भारत सरकार के पास पेट्रोल के कुएं तो है नहीं, इस कारण वह हमला कर रहा हो। न ही उसको भारत की भौतिकी सम्पत्ति से कोई लगाव है। जिसके लिए यह तनाव बना हुआ है। अमेरिका भारत सरकार की नीतियों से बिलकुल प्रसन्न नहीं है और वाशिंगटन-क्रेमलिन के बनाये गये दबाव का ही परिणाम है कि 18 प्रतिशत तक जीएसटी को सीमित कर दिया गया। सरकार पर दबाव है कि वह टोल नीति में भी परिवत्रन करे क्योंकि श्रीगंगानगर से मुम्बई तक ट्रक के एक राउंड के 20 से 25 हजार तक का टोल लग रहा है। 

यह महंगाई जनता को खायी जा रही है। आय कमजोर होती जा रही है और सडक़ ठेकेदार, सीमेंट कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचाया जा रहा है। इस तरह से अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है जिससे लूट की दुकानों को बंद किया जा सके। लगभग हर मंत्री ने अपने लिये एक दुकान को खोल कर रखा हुआ है।

रूस ने हथियार देने से मना कर दिया

अगर रूस की मीडिया रिपोर्ट और थिंक टैकं के विचारों को सामने लाकर समझा जाये तो सामने आता है कि ब्लादीमिर का ‘जोरदार स्वागत’ के बाद भी मास्को ने हथियारों से संबंधित समझौता नहीं किया। इसी तरह से अमेरिका भी फाइटर जेट को बेचने से बच रहा था। 

क्या कहता है गीता का ज्ञान 

श्री मद्भागवत गीता का ज्ञान यही कहता है कि एक सच्चा मित्र वही है जो उचित परामर्श दे जो उसकी और उसके मुल्क की तरक्की करे। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के साथ अपना रिश्ता बनाये रखने के लिए या उसको मजबूत करने के लिए अपनी बहन सुभद्रा का विवाह परिवार की सहमति के बिना कर दिया था। युद्ध के मैदान में पूरा ज्ञान दिया। उसी तरह से नेतनयाहू की जो उचित सलाह हो उसको मोदी को स्वीकार करना चाहिये। जो उचित नहीं लगे उसको छोड़ देना चाहिये। 

पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति से सीधा मिलने से परहेज कर रहे हैं। इस तरह से इजरायल एक मध्यस्थ की भूमिका में है। 


Thursday, February 19, 2026

 

एआई समिट में अडाणी-अम्बानी 210 अरब डॉलर निवेश करेंगे, दोनों की नेटवर्थ 200 अरब डॉलर की नहीं, फोब्र्स और ब्लूमबर्ग दोनों की रिपोर्ट के अनुसार


श्रीगंगानगर। भारत में एआई समिट का आयोजन आज सम्पन्न हो गया। शिखर सम्मेलन में आईटी सैक्टर के कई नेता आये थे और समिट सम्पन्न हुई तो शेयर बाजार धड़ाम गिर गया। बाजार को शायद समिट में ज्यादा निवेश की आशा थी। वहीं रुपया भी 91 को पार कर गया है पहले यह 90 रुपये तक पहुंच गया था। 92 को पार करने के बाद आरबीआई ने हस्ताक्षेप किया था और इससे बाजार में रुपये की हालत में सुधार हुआ था। 

एआई शिखर सम्मेलन के दौरान गौतम अडाणी ने 100 अरब डॉलर के निवेश का एलान किया। मुकेश अम्बानी ने 110 अरब डॉलर। 

वहीं ब्लूमबर्ग और फोब्र्स की रियल टाइम सूची के अनुसार दोनों के पास 210 अरब की  नेटवर्थ नहीं है। मुकेश अम्बानी 100 अरब डॉलर के मालिक हैं तो गौतम अडाणी के पास दोनों इंडेक्स में 90 अरब डॉलर भी नहीं दिखाये गये हैं। 

इसका अर्थ यह है कि भारत के दोनों सबसे अमीर भारतीय अपनी प्रमुख कंपनियों के मालिकाना हक के बावजूद इतनी सम्पत्ति नहीं रखते कि 210 अरब डॉलर का निवेश किया जाये। इतना निवेश करने के लिए देशी बैंकों या बाजार से विभिन्न रूप में फंड जुटाना होगा। 

इन शब्दों के अर्थ को समझने की आवश्यकता है। 

वहीं शेयर बाजार में 12 सौ अंकों की ज्यादा गिरावट को दर्ज किया गया है। 


Wednesday, February 18, 2026

 

जीडीपी के ट्रिलियनस के स्थान पर भारतीयों की औसत आय पर क्यों नहीं होती चर्चा, भारत में महिलाओं का औसत वजन 50 के आसपास




श्रीगंगानगर। वर्ष 2022 तक भारत को पांच ट्रिलियन की बनाये जाने का एलान 2017 के बाद आरंभ हो गया था और 2026 आरंभ हुए दो माह हो चुके हैं इसके बाद भी जीडीपी पांच ट्रिलियन की नहीं हुई। अब 2047 के विकसित भारत का सपना दिखाया जा रहा है और भारतीयों की औसत आय पर चर्चा नहीं हो रही। 

भारत सरकार जो इस समय एक साथ 114 लड़ाकू विमान खरीद करने के लिए समझौता कर रही है। यह उसी भारत के विकसित भारत की तस्वीर दिखाने की कोशिश है। 

भारतीयों को कल की तस्वीर दिखाई जा रही है। वह तस्वीर जो आज से 21 साल बाद कम से कम 10 प्रतिशत भारतीय उस समय पर शायद उपस्थित भी नहीं हो सकेंगे। उनको आज दवा, सम्मानजनक पेंशन, उचित देखभाल की आवश्यकता है और इस सोशल सिक्योरिटी के लिए सरकार ने शायद बजट को कम कर दिया है। 


शब्दों का हेरफेर

भारतीयों का कई विकसित राष्ट्रों में ट्रिलियनस रुपये या डॉलर में ब्लैकमनी है। यह भारत के कुल बजट का कई गुणा है। शायद जीडीपी के बराबर या उससे भी कहीं ज्यादा। क्योंकि जीडीपी अभी पांच ट्रिलियन की नहीं हुई है। 

शब्दों का हेरफेर कर वह दिखाया जाता है जो पहले कभी चर्चा का विषय नहीं बना और फिर इसको जनमानस तक पहुंचा दिया जाता है। पूरा जोर लगाया जाता है और प्रचारक अपने पेट पर हाथ रख लेते हैं। 

कभी भारतीयों की यह चचा्र नहीं हुई कि हम 2030 तक देश को कुपोषण मुक्त बना देंगे। भारतीयों की औसत ऊंचाई पांच फीट के आसपास सिमट जाती है और वजन पर भी चर्चा होनी चाहिये तो महिलाओं का औसत वजन मात्र 50 किलो के आसपास है। 

यह भी दक्षिण भारत, पंजाब आदि को मिलाकर प्रदर्शित होता है जहां पर लम्बाई और वजन दोनों ही अपेक्षाकृत ठीक है लेकिन पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा सहित कई राज्य ऐसे हैं जहां कुपोषण बहुत ज्यादा है। 

उत्तरप्रदेश में हालात में सुधार हुआ है लेकिन बहुत कुछ किया जाना शेष है। 

इसकी चर्चा तक नहीं होती और औसत आय को भी सरकारी आकड़ों के बजाय जमीन पर उतारने की आवश्यकता होती है। 


Tuesday, February 17, 2026

 

नार्थ-ईस्ट हजारों साल की भारतीय संस्कृति की धरोहर रही और वहां से थाई के लिए रास्ता बनाया जाने की मंजूरी क्यों दी गयी?



श्रीगंगानगर। वर्ष 2019 का साल था और भारत में शिंजो आबे के आने के जश्र की तैयारी चल रही थी। उनको गुवाहटी में आमंत्रित किया जा रहा था और इसी तरह का माहौल बनाया गया था। गुवाहटी में मां कामख्या का विराट मंदिर है। 51 शक्तिपीठ में से एक माना जाता है। वहां जापानी पीएम को आना था, किंतु उन्होंने अपने आने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। कुछ समय बाद ही उन्होंने 2020 में इस्तीफा दे दिया। इसके उपरांत जापान को अनेक पीएम मिले। आबे अब इस दुनिया में नहीं है। 

इन पंक्तियों का उल्लेख करने का कारण यह था कि पूर्वोत्तर पूर्वोत्तर भारत के लिए कितना अहम है, इसका प्रमाण मिलता है।  चाइना भी कई बार सिक्कम और अरुचाचल को अपना क्षेत्र बताकर नक्शा दुनिया के सामने पेश कर देता है। 

इनमें मणिपुर तो और भी संवेदनशील इलाका है। इसका प्रमाण यह है कि वहां पर हिंसा के कारण भारतीय जनता पार्टी को अपनी ही सरकार को बर्खास्त करना पड़ा। नरेन्द्र मोदी के 12 साल के प्रधानमंत्री काल में यह एकमात्र प्रमाण है कि उन्होंने अपनी ही सरकार को बर्खास्त किया। हालांकि कश्मीर में भी राष्ट्रपति शासन लगाया गया किंतु वह सरकार महबूबा मुफ्ती की सरकार कहलाती थी। भाजपा उसमें सहयोगी थी। 

उसी मणिपुर से रास्ता बनाया जा रहा है थाईलैण्ड के लिए। कारण यह है कि सैक्स का बाजार सडक़ मार्ग से खुल जाये किंतु भारत सरकार की यह मुराद म्यांमार ने पूरी नहीं होने दी। म्यांमार सरकार ने सडक़ मार्ग को बीच में ही लटकाया हुआ है और आईएमटी का यह प्रोजेक्ट कई सालों से अटका हुआ है। 

थाई का सैक्स बाजार भारत में काफी लोकप्रिय है और छोटे शहरों से लेकर मैट्रो सीटिज तक लोग वहां की यात्रा कर रहे हैं। रंगीन मिजाजी को वहीं पर छुपाकर वे वापिस लौट आते हैं। मसाज सैंटर की ओट में यह धंधा वहां पर खूब चल रहा है। 

पूर्वोत्तर का हृदय मणिपुर को माना जाता है और इस हार्ट स्टेट को थाई के साथ जोड़ा जा रहा था। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि मोदी सरकार कितना ‘बड़ा’ प्रोजेक्ट ला रही थी। 

हालांकि आबे के न आने के बाद से अभी तक भारत सरकार को बुलेट ट्रेन नहीं मिली है। उसके रैक का इंतजार किया जा रहा है। अब वहां पर नयी सरकार का गठन हो चुका है, लेकिन लिब्रल पार्टी की ही सरकार होने के बाद भी बुलेट ट्रेन मिलेगी या नहीं, यह भविष्य पर निर्भर करेगा। 

सानाए ताकाईची ने वहां पर नये जनादेश के साथ सरकार संभाली है और लग रहा है कि वे अपनी नयी नीतियां लेकर आना चाहती हैं। ताकाईची के चुनाव को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना समर्थन दिया था और अब उसी तरह का समर्थन हंगरी की सरकार को भी दिया जा रहा है। हंगरी में अगले तीन महीने में चुनाव होने हैं। 


मैक्रां से पहले अनेक नेताओं का गले लगाकर स्वागत किया गया है

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैकां की यात्रा को टीवी कवरेज पर काफी स्लाट दिया गया है, हालांकि डिजीटल मीडिया पर उस तरह की कवरेज नहीं है। जिस तरह का स्वागत किया गया और माहौल बनाने की कोशिश की गयी वैसी ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, सउदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, साउथ कोरिया के राष्ट्रपति आदि की भी हुई है। इनमें अनेक नेताओं को पीएम एयरपोर्ट पर लेने के लिए भी गये हैं। साउथ कोरिया नेता को गंगा की आरती के लिए वाराणसी भी ले जाया गया। भारत में और भी बड़े नेता आये, जिनको अपना करीबी बताया गया। राष्ट्रपति ट्रम्प का स्वागत नरेन्द्र मोदी स्टेडियम अहमदाबाद में किया गया और एक लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटायी गयी। 

इनमें अब कितने नेता नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े हैं, यह देखने वाला है और भारत सरकार की नीतियों का समर्थन कर रहे हैं। मैक्रां को अपने उत्तराधिकारी के लिए अगले साल चुनाव करवाना है, उनके दो साल का टर्म पूरा हो रहा है। फ्रांस में बहुत कुछ हुआ है जिससे वहां पर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रकाशित होने वाली सूची में पेरिस के  प्रति विश्वास लोगों में कम हुआ है। 

आबे की पहली यात्रा भी एतिहासिक थी और जापान के पीएम को गुवाहटी में भी शानदार स्वागत के लिए बुलाया जा रहा था किंतु उन्होंने अपनी यात्रा को रद्द कर दिया और कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया। 


बराक की यात्रा को क्यों भूल जाते हैं लोग

बराक हुसैन ओबामा भी भारत की यात्रा पर आये थे और उनको रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम के लिए भी आमंत्रित किया गया। गणतंत्र दिवस का मुख्यातिथि बनाया गया और जब वे जा रहे थे तो उन्होंने भारत सरकार के खिलाफ बयान दिया था कि अब सहिष्णुता कम हो जायेगी। 


Thursday, February 12, 2026

 

जलवायु परिवर्तन : ट्रम्प प्रशासन ने वाहन मालिकों और निर्माताओं को दी बड़ी राहत



वाशिंगटन डीसी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने के बाद अब वाहन मालिकों और निर्माताओं को बड़ी राहत प्रदान की है। इससे वाहनों की कीमतों में कमी आयेगी। नये वाहन की बिक्री में बढ़ोतरी भी होने की संभावना है। 

जलवायु परिवर्तन को लेकर एक बड़ा फैसला पेरिस जलवायु समझौते के नाम से जाना जाता है। भारत ने पहले इस समझौते में शामिल होने से इन्कार कर दिया था किंतु तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस संबंध में सीधे तौर पर पीएम नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और यह समझौता सम्पन्न हो गया। 

अमेरिका ने इसके बदले में दुनिया भर को ट्रिलियनर्स में मदद की और अरबों-खरबों डॉलर तापमान में तथाकथित कमी लाने पर खर्च करने के लिए दिये गये। इसका नुकसान यह भी सामने आया कि भारत देश में डामर सडक़ों का स्थान सीसी रोड अर्थात सीमेंटेड रोड ने ले लिया। डामर सडक़ों के निर्माण की मंजूरी नगर निकायों को भी दे दी गयी। इस तरह से गलियों में सीमेंटेड सडक़ों का निर्माण होने से वह गर्मी के मौसम में इतनी ज्यादा गर्म हो जाती हैं कि तापमान में कमी आने की बजाय बढ़ोतरी हो जाती है। जो सडक़ राजमार्ग पर बनायी जा रही है उसमें तो सरिया का मिश्रण भी किया जाता है। इस तरह से उन सडक़ों के निर्माण के दौरान लोहा और सरिया मौसम को बुरी तरह से प्रभावित करता है। 

इस तरह से प्रचार किया गया कि वाहनों की बढ़ती संख्या जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण है। कोयला जो बिजली उत्पादन करता है, वह खतरनाक है। वाहनों पर दुनिया भर में अतिरिक्त टैक्स लगाये गये, भारत में ही कारों के ओटीटी पर 10 प्रतिशत तक सरचार्ज वसूल किया गया, जिसके सोशल सिक्योरिटी टैक्स के नाम से भी जाना जाता है। 

अमेरिका को ओबामा के कार्यकाल में भारी नुकसान

अमेरिका में 2009 में बराक हुसैन ओबामा को राष्ट्रपति बनाया गया तो उस समय देश पर 10 ट्रिलियन डॉलर्स का कर्जा था और जब 2017 में वे जनवरी माह में रिटायर होकर वापिस गये और डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने पहली बार कार्यभार संभाला तो टैक्स करीबन 20 ट्रिलियन डॉलर्स हो चुका था। 8 सालों के भीतर अमेरिका पर टैक्स 10 ट्रिलियन से ज्यादा हो गया। इसका कारण बराक ओबामा की नीतियां माना जाता है। उस मंदी का दौर भी दिखाया गया और बैंकों तथा अनेक कंपनियों को राहत पैकेज भी दिये गये। उसी तरह से जैसे कोरोना के बाद भारत ने 20 लाख करोड़ का राहत  पैकेज दिया था। 

इस तरह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा था और वह कर्ज के बोझ तले दबकर अगले 8 सालों में कर्ज को 37 ट्रिलियन डॉलर्स तक लेकर पहुंच गयी। 

2025 में बदलाव आरंभ 

वर्ष 2025 में बदलाव आरंभ हुए जब ट्रम्प प्रशासन का दूसरा कार्यकाल आरंभ हुआ। वे पेरिस जलवायु समझौते और डब्ल्यूएचओ से बाहर आ गये। दोनों को ही उन्होंने अमेरिकी हितों के खिलाफ माना। अब उन्होंने वाहनों के निर्माण, खरीद के संबंध में नये आदेश जारी कर दिये हैं तो इससे ऑटो उद्योग को एक बड़ी राहत मिलने वाली है। 


 

सानाए ताकाईची : भारी जनादेश का जैपनि’ज को क्या लाभ मिलेगा? गाजा पर पीस बोर्ड की बैठक 19 को


श्रीगंगानगर। ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ के नारे के साथ नरेन्द्र मोदी ने भारत की राष्ट्रीय राजनीति में आगाज किया था। वह अच्छे दिन की तलाश जारी है और इस बीच जापान में 2014 वाला इतिहास दोहराया गया है और नया जनादेश हासिल करने के लिए जापानी पीएम सानाए ताकाईची ने 8 फरवरी को अचानक चुनाव कॉल कर लिये थे। उनको भारी बहुमत हासिल हुआ। गठबंधन के साथ वे दो तिहाई बहुमत हासिल करने में भी कामयाब रहीं। 

प्रधानमंत्री शिंजो आबे की तरह सानाए ताकाईची भी काफी लोकप्रिय रहीं खासकर युवाओं में। इसी मनोबल के साथ उन्होंने समयपूर्व ही चुनाव को कॉल कर लिया। वे विजय भी रहीं। अब उनको अपने वायदे पूरे करने हैं। 

शिंजो आबे ने जैपनिज के अधिकारों को महत्व दिया, इस कारण वे काफी लोकप्रिय रहे और लम्बे समय तक पीएम रहे। हालांकि जापान में 66 प्रधानमंत्री बने हैं और इनमें 20 को एक साल का कार्यकाल का भी वक्त पूरा करने का मौका नहीं मिल पाया। हालांकि आबे हमारे बीच नहीं हैं। 

चीन के साथ जापान के तनावपूर्ण संबंध रहे हैं और इसी कारण प्रशांत महासागर की सुरक्षा के लिए वह अमेरिका का क्वाड में प्रमुख सहयोगी रहा है। इसमें भारत और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं। 

अब डिप्लोमैटिक देश चीन के साथ जापान के साथ किस तरह के रिश्ते रहते हैं, यह देखने वाला होगा। वहां पर मानवाधिकारों की वे सुध लेने में कामयाब हो पायेंगी?


आठ अरब देशों के साथ इजरायल भी शामिल

विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मेहनत की बदौलत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक मंच पर अरब और इजरायल को लाने में कामयाब होते दिख रहे हैं। हालांकि 19 फरवरी को पीस बोर्ड की पहली बैठक होने वाली है और इसमें अनेक राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं। 20 से ज्यादा सदस्य देश हैं। इनमें कितने शिखर सम्मेलन में शामिल होते हैं यह देखने वाला होगा। 

वाशिंगटन की यात्रा से नेतनयाहू प्रसन्न नहीं?

एक बड़ा सवाल यह है कि एक वर्ष के भीतर इजरायल के प्रधानमंत्री 6 बार अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं अर्थात हर दो माह बाद वे वाशिंगटन आ रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी यहूदी देश के  प्रवास पर रहे। यहूदी नेता का वाशिंगटन डीसी में स्वागत तो जबरदस्त हुआ, लेकिन उनको वार्ता का लाभ नहीं मिल पाया। वे विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मिले। कोई संयुक्त घोषणा पत्र नहीं आया। पत्रकार वार्ता भी नहीं हो पायी। इस तरह से ईरान में वहां के लोगों के चल रहे आंदोलन को कितना समर्थन दोनों देश देते हैं, यह भी देखने वाला होगा। हालांकि नौसेना के कई जहाज वहां पर जमा हैं और हिंद महासागर तथा अरब की खाड़ी में अमेरिका ने सैनिक तैनात किये हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं है। वहीं ईरान ने कहा है कि 24 घंटे में वह आवश्यकतानुसार हथियार तैयार कर सकता है। अमेरिका को चेतावनी भी दी गयी है कि वह युद्ध और वार्ता दोनों के लिए तैयार है। 


Wednesday, February 11, 2026

 

इजरायल और अमेरिका की शिखर वार्ता में ईरान के साथ वार्ता को प्राथमिकता



श्रीगंगानगर। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू एक साल के भीतर छठी बार जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिलने के लिए वाशिंगटन पहुंचे तो उनको वहां अभूतपूर्व सुरक्षा मिली और उनका स्वागत सबसे पसंदीदा नेता के रूप में हुआ। 

नेतनयाहू का सरकारी विमान जब वाशिंगटन डीसी की जमीन पर लैंड हुआ तो उनके स्वागत की तैयारियां साफ देखने को मिल रही थी। उनको वो काफिला दिया गया जो संभवत: अमेरिका के भीतर सिर्फ राष्ट्रपति को हासिल होता है। गाडिय़ों की संख्या अनगिनत थी और सभी तरफ का ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया था। 

प्रधानमंत्री बेंजामिन सबसे पहले विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रूबियो से मिले। इसके बाद व्हाइट हाउस में अनौपचारिक मुलाकात करने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प से मिले। 

भारतीय समयानुसार देर रात को दोनों शिखर नेता औपचारिक वार्ता के लिए ओवल कार्यालय पहुंचे। तीन घंटे तक की लम्बी बातचीत के बाद दोनों नेता ने एक संयुक्त बयान जारी किया, लेकिन यह संक्षिप्त था। इसमें बताया गया कि अमेरिका ईरान के साथ वार्ता जारी रखेगा। इजरायल के प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा से संबंधित पक्ष रखने की बात कही। 

तीन घंटे की बातचीत के बाद कोई औपचारिक पत्रकार वार्ता का आयोजन होना इस बात का संकेत दे रहा है कि दोनों शिखर नेता वार्ता का ब्यौरा अभी दुनिया को नहीं देना चाहते और वे ईरान के साथ चल रही बातचीत के बाद ही कोई निर्णय लेना पसंद कर सकते हैं। 


Tuesday, February 10, 2026

 

इवांका से तलाक के लिए जैरेड मांग रहा एक पुत्र की कस्टडी, फ्रांस के राष्ट्रपति अमेरिका के खिलाफ क्यों उगल रहे हैं जहर



श्रीगंगानगर। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पुत्री इवांका ट्रम्प और दामाद जैरेड कुशनर के बीच तलाक की खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच यह भी जानकारी सामने आ रही है कि बच्चों की कस्टडी को लेकर दोनों पक्ष सहमत नहीं है। जैरेड एक पुत्र को साथ रखने का प्रयास कर रहे हैं। 

इवांका के पास तीन संतान हैं, इनके नाम अरबेला रोज, जोसेफ फेडरिक और थियोडोर जोसफ। यह तीनों ही नाम पेटेंट हैं। 

कुशनर और इवांका ने प्रेम विवाह किया था और इवांका ने यहूदी धर्म को अपना लिया था। अब दोनों पक्ष तलाक लेने पर सहमत हो गये हैं, इस तरह के समाचार आ रहे हैं। तीनों ही संतान सूर्यवंशी है। 

अब कुशनर चाहते हैं कि जोसेफ फेडरिक की कस्टडी उनके पास रहे। वहीं इवांका भी उन पर अपना पूर्ण हक जता रही है। हालांकि यही माना जाता है कि संतान सदैव के माता के पास रहनी चाहिये, ताकि वह उचित संभाल कर सके। 

इस तरह से मामला पारिवारिक माहौल से व्हाइट हाउस से बाहर आ गया है। 


बांग्लादेश को अमेरिका ने दी बड़ी राहत

वहीं अमेरिका ने बांग्लादेश को बड़ी राहत देकर भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार को एक बार पुन: राजनीतिक झटका दिया है। 

जो जानकारी सामने आयी है, उसके अनुसार बांग्लादेश और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ है। समझौते के अनुसार वाशिंगटन ढाका को कपड़ों पर विशेष छूट प्रदान कर रहा है। वहीं अमेरिका से कच्चा माल खरीदकर उसको तैयार करने के बाद पुन: वाशिंगटन निर्यात किया जाता है तो उस पर 0 प्रतिशत टैरिफ लगाया जायेगा। 

यह भारत के कपड़ा उद्योग के लिए बड़ा हमला बताया गया है। क्योंकि भारत से निर्यात होने वाले कपड़े पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाता है। अभी ढाका नई दिल्ली से कपास की खरीद करता है और वाशिंगटन ने उसके लिए अपने द्वार भी खोल दिये हैं। 

अब अमेरिका में मेड इन इंडिया और मेड इन बांग्लादेश के बीच मुकाबला होगा। दरों के हिसाब और ब्रांड के आधार पर अमेरिकंस किस तरह की खरीदारी करते हैं, यह आने वाले समय में पता लगेगा। 


मैक्रां ईयू को अमेरिका से दूर क्यों करना चाहते हैं?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां अगले साल अपने दूसरे साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। उनके मौजूदा कार्यकाल को एक साल का वक्त रह गया है। फ्रांस के संविधान के अनुसार निरंतर एक व्यक्ति दो बार राष्ट्रपति रह सकता है। उनका दूसरा टर्म पूरा हो रहा है और अब उनको पार्टी से अपने उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी। 

वहीं इस समय उनका फोक्स अमेरिका पर है और उन्होंने मंगलवार को एक बार पुन: बयान दिया है। उनका कहना है कि ग्रीनलैण्ड कांड के बाद यूरोप को नयी सोच उत्पन्न करनी चाहिये। मैक्रां को इस तरह से अमेरिकी विरोधी बयानबाजी के लिए लगातार जाना जा रहा है। यह विवाद उसके बाद सामने आया जब पिछले वर्ष सितंबर माह में अमेरिका यात्रा के दौरान संयुक्त राष्ट्र कार्यालय जाते समय उनके काफिले को बीच में रोक दिया गया था और मैक्रों को पैदल जाना पड़ा था। 


Monday, February 9, 2026

 

ट्रम्प क्या दुनिया का सबसे बड़ा फैसला लेने के लिए तैयार हैं? अमेरिकंस से 17 मई को जनसैलाब का आह्वान किया





श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 17 मई को अमेरिकंस से कहा है कि वे सार्वजनिक स्थान पर जनसैलाब के रूप में एकत्रित हों। वे दुनिया को एक बड़ा सरप्राइज देने वाले हैं और वह घोषणा करने वाले हैं, जिससे पूरी दुनिया आश्चर्यचकित रह सकती है। 

राष्ट्रपति ट्रम्प इस समय बड़े फैसले ले रहे हैं और पूरी दुनिया को चकित कर रहे हैं। ताजा मामले में उन्होंने वाशिंगटन में ब्यूरोक्रेसी पर नियंत्रण और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का एलान किया है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में राष्ट्रपति का कहना है कि वे बड़ा स्वच्छ अभियान चलाने वाले हैं और ब्यूरोक्रेसी पर नियंत्रण स्थापित किया जायेगा। सुरक्षा एजेंसियों पर इंस्पेक्टर राज को समाप्त किया जायेगा। 

उन्होंने कहा, इंस्पेक्टर जनरल आजाद होकर स्वविवेक से निर्णय कर सकें, इस तरह की व्यवस्था को स्थापित किया जायेगा। 

उन्होंने नौकरशाही सहित भ्रष्टाचार के बारे में कई बड़ी और अहम घोषणाओं के संबंध में कहा है कि यह वर्ग अमेरिकंस से झूठ बोलता रहा। अब ऐसा नहीं होगा। 

अमेरिकंस को बुलावा भेजा

अमेरिका में 17 मई को एक बड़ा आयोजन होने वाला है, हालांकि यह आयोजन वाशिंगटन में होगा या कहीं ओर, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं मिल पायी है। राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि वे अमेरिका में एक बड़ा संबोधन देने वाले हैं और यह दुनिया का सबसे बड़ा फैसला होगा। वे अमेरिका को ईश्वर को समर्पित करने वाले हैं। इस तरह से उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा है। इस कारण माना जा रहा है कि क्या वे दुनिया का सबसे बड़ा और अहम फैसला लेने के लिए बिलकुल तैयार हैं? उन्होंने दुनिया को एक तारीख भी दे दी है। 

मोदी पर ट्रम्प का बयान वायरल

वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सम्मान करते हैं। वे भी ट्रम्प से प्यार करते हैं। उन्होंने साफ कहा कि वे मोदी का राजनीतिक कैरियर समाप्त कर सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे। राष्ट्रपति ट्रम्प के इस बयान के बाद भारत की राजनीति गर्मा गयी है और वे इस संबंध में पूरी जानकारी लेने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों में भी इस बात को लेकर गंभीर चर्चा हो रही है कि वाशिंगटन के पास ऐसी कौनसी सीक्रेट फाइल्स हैं, जिनके आधार पर सीधा एक राष्ट्राध्यक्ष दूसरे राष्ट्राध्यक्ष के लिए तीखा बयान जारी कर रहे हैं। 

अगले सप्ताह बुला सकते हैं पीस बोर्ड की बैठक

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एक नये मंच का गठन किया है जिसको पीस बोर्ड के नाम से पुकारा जा रहा है। इस बोर्ड की पहली बैठक अगले सप्ताह होने की संभावना है। पाकिस्तान इस बोर्ड का सदस्य है और डॉन समाचार ने एक सरकारी अधिकारी के नाम का हवाला देते हुए इस संबंध में जानकारी दी है। 

हालांकि यह गाजा को लेकर बोर्ड गठित किया गया है जो वहां पर शासकीय नियमावली को अन्तिम रूप देगा और सचिवालय के संबंध में अन्तिम निर्णय लेगा। वहीं यह भी माना जा सकता है कि इस बोर्ड का विस्तार किया जायेगा और विश्व में अन्य स्थानों पर शांति को स्थापित किया जायेगा। हालांकि इस बोर्ड में नाटो के कुछ देश नहीं है लेकिन बोर्ड बैठक में जापान, रूस आदि को भी आमंत्रित किया गया है। 


Sunday, February 8, 2026

 

हिंदुओं को आपस में लड़ाकर अभी भी राष्ट्रवादी नेता की पहचान बनाये हैं मोदी? मुस्लिम नेता को बताया ऑयडल-भारत में बदलती राजनीति, जापान में ताकाइची को स्पष्ट बहुमत



श्रीगंगानगर। यूजीसी के मामले में हिन्दू-हिन्दू आपस में लड़ रहे हैं और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अभी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वहीं मुस्लिम बाहुल्य देश जाकर अनवर इब्राहिम को अपना आदर्श नेता बताकर क्या पीएम नरेन्द्र मोदी ने राजनीति की बिसात में नया खेल खेलने का प्रयास किया है? वहीं जापान में सनाए ताकाइची को स्पष्ट बहुमत हासिल हो गया है। उन्होंने अचानक ही 8 फरवरी को चुनाव करवाने का एलान किया था। रात को परिणाम आये तो वे गठबंधन नेताओं के साथ दो तिहाई बहुमत हासिल करती नजर आ रही हैं। यूएसए प्रेजीडेंट ने ताकाइची को खुला समर्थन दिया था। 

चीन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने और परमाणु बम के लिए बयान जारी करने वाली सानाए ताकाइची की पार्टी को संसद के निचले सदन के लिए हुए चुनावों में स्पष्ट बहुमत हासिल हो गया है। लिबरल पार्टी को समर्थकों के साथ दो तिहाई बहुमत हासिल होता नजर आया है। 

प्रधानमंत्री बनने के उपरांत ताकाईची ने जापान के परमाणु बम के बारे में बयान जारी किया था, इससे एक बार तो पूरी दुनिया में हडक़म्प मच गया था और चीन की तरफ से प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। प्रशांत महासागर के देश और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति जापान ने कभी भी इससे पहले परमाणु बम के बारे में सार्वजनिक चर्चा नहीं की थी। जापान की सुरक्षा के लिए टोक्यो ने अमेरिकी सेना को आमंत्रित किया हुआ है और चीन तथा उत्तर कोरिया की मित्रता के कारण यह नये समीकरण सामने आये थे कि क्या जापान को अपना परमाणु बम बनाना चाहिये। 

उत्तर कोरिया ने प्रतिबंधों के बावजूद अनेक ब्लैस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है और यह लम्बी दूरी की मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। माना जाता है कि चीन उत्तर कोरिया को सैन्य तकनीक उपलब्ध करवाता है। 

वहीं ताकाईची ने प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद अनेक आर्थिक सुधार के लिए एलान किया था और फिर अचानक उन्होंने चुनाव को कॉल किया। लिबरल नेता युवाओं में काफी लोकप्रिय नजर आ रही हैं और उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में भी सोशल तथा मुख्यधारा के मीडिया से खुलकर बात की है। यहां तक कि सिर पर डाई लगाकर बाल को काले करने के बारे में भी उन्होंने अपने विचार रखे। 


मोदी ने हिंदुओं के बीच दरार क्यों पैदा कर दी?

अभी तक भारत में अनारक्षित वर्ग जिसको स्वर्ण जाति कहा जाता है जिसमें क्षेत्रीय, ब्राह्मण, वैश्य, जाट सहित कई जातियां शामिल हैं, को भाजपा का वोटबैंक माना जाता रहा है। वहीं दलित वोट बैंक कई पार्टियों में बंटा हुआ है लेकिन यह पूरी तरह खुलकर कभी भाजपा के पक्ष में नहीं आया। मुस्लिम और दलित वोट बैंक को सपा, बसपा, कांग्रेस सहित कई पार्टियां अपना हक मानती रही हैं। 

आने वाले 2029 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में भारी कमी आने की संभावना बनी हुई है और वे 75 साल की आयु को भी पूरी कर चुके हैं। इस कारण उनकी रिटायरमेंट की आवाज भी भाजपा में उठ रही है। 

इस बीच नरेन्द्र मोदी ने नये वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए यूजीसी का शिगूफा छेड़ दिया। उसमें कई परिवर्तन कर दिये। इससे हिन्दू समुदाय आपस में संघर्ष कर रहा है लेकिन सरकार की तरफ से इसकी औपचारिक प्रक्रिया सामने नहीं आयी है। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही रोक लगा दी हो लेकिन भाजपा सरकार ने इन नियमों को वापिस नहीं लिया है। 

वहीं दूसरी ओर पीएम शनिवार और रविवार को आसियान के मुस्लिम बाहुल्य स्टेट मलेशिया की यात्रा पर थे और उन्होंने वहां पर प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को प्रसन्न करने के लिए बयान दिया कि  पीएम बनने से पहले ही वे उनके लिए मार्गदर्शक की तरह रहे हैं। 

अब सीधे तौर पर उन्होंने मुस्लिम वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बयान जारी कर दिया है। 

इससे भाजपा में विरोध देखा जा रहा है और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का भी बयान सामने आया है कि कुछ हिन्दू भूल गये हैं कि वे हिंदू हैं। 

भागवत ने अपनी 75 वर्ष की उम्र का भी जिक्र करते हुए अप्रत्यक्ष तौर पर मोदी पर कटाक्ष किया कि वे रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं और उन्होंने संगठन को सूचित भी कर दिया है। इस तरह से मोदी की नीतियों को लेकर हिन्दू वोट बैंक को लेकर राजनीति करने वाले आरएसएस में भी व्यापक चिंता को देखा जा सकता है। 

हालांकि सीधे तौर पर आरएसएस विरोध में खुलकर सामने नहीं आ रही है जिस कारण भारत सरकार में एकछत्र राज करने वाले नरेन्द्र मोदी के विचारों और नीतियों पर नियंत्रण नहीं लगाया जा सका है। 


Friday, February 6, 2026

 

पंजाब की राजनीति में बाबा गुरविन्द्रसिंह ढिल्लो की एंट्री, भाजपा बनायेगी सीएम फेस? दिल्ली में 800 लोग गायब, 235 को तलाशने का दावा



श्रीगंगानगर। पंजाब की राजनीति में नया धमाका होने वाला है। एक डेरा से जुड़े बाबा को भाजपा राजनीति में लाना चाहती है और सभी तैयारियां पूरी हो गयी हैं। उनकी राजनीतिक शक्ति को किस कदर बढ़ा दिया गया है, यह पिछले दिनों पंजाब की जनता ने देखा भी है। सीएम भगवंत मान को भी बाबा के राजनीति में आने की फिक्र हो रही है, इस कारण उन्होंने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिखे उन्होंने कटाक्ष भी किया है। 

गुरविन्द्रसिंह और दिल्ली में रिश्ते पिछले कुछ समय में गहरे हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरविन्द्रसिंह को पीएम आवास पर आमंत्रित किया है और स्वयं भी उनके मुख्य कार्यालय में भ्रमण किया है। इस तरह से दोनों की मित्रता है। ढिल्लो विवादों में भी रहे हैं और उन पर उनके भांजों ने ही 5 हजार करोड़ रुपये को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हल्फनामा भी दायर किया था। 

यह मामला दब गया क्योंकि इसके बाद बाबा के साथ पीएम की कई फोटोज सामने आ गये थे। 

गुरविन्द्रसिंह ढिल्लो को कुछ दिन पहले सारी दुनिया की नजरों में शक्तिशाली बाबा के रूप में पेश किया गया। जेल में बंद अकाली नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया से वे मुलाकात करने के लिए पहुंचे। उनकी मुलाकात के कुछ समय बाद ही अदालत ने उनकी जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया। 

इस तरह से नई दिल्ली ने बाबा को एक पॉवरफुल पर्सन के रूप में पेश किया तो पंजाब से प्रतिक्रिया आनी थी और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर ढिल्लो का नाम लिये बिना कटाक्ष किया। 

गुरविन्द्रसिंह ढिल्लो के पास डेरा की हजारों करोड़ की सम्पत्ति का मालिकाना हक भी है। वे अमेरिका, कनाडा, यूके में सत्संग के लिए जाते रहे हैं। इस तरह से उनको अब पॉवरफुल सीएम के रूप में पेश किया जा रहा है। 

इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में मेरे राम आयेंगे... का प्रचार किया गया और उत्तर प्रदेश से रामायण के राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को सांसद बनाया गया था। अब पंजाब की राजनीति को प्रधानमंत्री नया मोड़ देना चाह रहे हैं। 

अभी तक भाजपा अकाली दल का समर्थन करती रही है। अगर भाजपा को ज्यादा सीट आती है तो अकाली दल का समर्थन भी हासिल हो सकता है क्योंकि बिक्रम सिंह मजीठिया और सुखबीर सिंह बादल रिश्तेदार हैं। ढिल्लो मजीठिया को अपना रिश्तेदार बताते हैं। 

दिल्ली पुलिस पर उठे सवाल

दूसरी ओर 15 दिनों के भीतर 800 लोगों के लापता होने के बाद दिल्ली पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि 800 में से करीबन अढ़ाई सौ लोगों को तलाश लिया गया है लेकिन सच यह भी है कि करीबन 200 बच्चे अभी भी लापता हैं। अचानक 50 की एवरेज से बच्चों के गायब होने के बाद गृह मंत्रालय भी सवालों के घेरे में है। 


Thursday, February 5, 2026

 

डाइजेस्ट : मोदी दूसरे पीएम बन गये जो अभिभाषण पर भाषण नहीं दे पाये, अनोखा रिकॉर्ड; ट्रेड डील पर समझोता क्यों नहीं हो पाया, ईरान के साथ महाजंग के लिए मैदान तैयार-पाकिस्तान मध्यस्थ



श्रीगंगानगर। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और शुक्रवार को दोनों पक्ष ओमान में वार्ता कर रहे हैं, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में होगा। अगर वार्ता सिरे नहीं चढ़ी तो क्या होगा? इसका उत्तर यह कहा जा सकता है कि तेहरान और वाशिंगटन जंगी जगह पर नजर आ सकते हैं। वहीं गुरुवार को भी पीएम का अभिभाषण पर संसद में भाषण नहीं हो पाया और लोकसभा ने धन्यवाद प्रस्ताव पारित भी कर दिया। राज्यसभा में पीएम ने अपनी बात रखी। नरेन्द्र मोदी दूसरे प्रधानमंत्री बन गये हैं जो अभिभाषण पर स्पीच नहीं दे पाये। इससे पहले 2004 में भाजपा ने डॉ. मनमोहनसिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण नहीं करने दिया था। इस तरह से इतिहास को दोहराया गया। 

शुक्रवार को जिसको अरब देशों में जुम्मा कहा जाता है, को ओमान पर सबकी नजर रहेंगी। अमेरिका ने इसमें पाक के आग्रह पर उसको मध्यस्थ की भूमिका के रूप में स्वीकार कर लिया है और इस तरह से यह वार्ता त्रिस्तरीय हो गयी है। 

ईरान ने ओमान में ही वार्ता की शर्त रखी थी, जिसको अमेरिका ने गुरुवार को स्वीकार कर लिया। पाक के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी इसमें शामिल हो सकते हैं। 


राज्यसभा में पीएम मोदी का धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का निर्धारित कार्यक्रम बुधवार का था और जिसमें उन्होंने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में संबोधन देना था, लेकिन हंगामे के कारण पीएम लोकसभा में नहीं गये और संसद को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। सुबह सदन में धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। प्रधानमंत्री का भाषण नहीं हो पाया। यह नयी संसद में पहला और इतिहास में दूसरा मौका है जब धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री अपनी बात नहीं रख पाये। वहीं राज्यसभा में उन्होंने अपनी बात रखी। 


ट्रेड डील पर हस्ताक्षर नहीं हो पाये

अमेरिका ने भारत सरकार की मांग पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से कम कर 18 प्रतिशत कर दिया। जो दक्षिण एशिया में संभवत: सबसे कम है। शेयर बाजार ने भी इस छूट का वेलकम किया था किंतु चार दिन गुजरने के बावजूद दोनों पक्ष हस्ताक्षर नहीं कर पाये हैं। मामला कृषि और डेयरी सैक्टर को लेकर अटक गया है। 

वाशिंगटन ने दावा किया था कि नई दिल्ली रूस से तेल नहीं खरीदेगा और कृषि व डेयरी क्षेत्र भी खोलेगा। लेकिन भारत ने इससे गुरुवार को भी फिर से इन्कार कर दिया। इसके बाद शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली। ट्रेड डील के प्रति अब आशावाद कमजोर होती जा रही है। 


‘समय व्यवधान का नहीं समाधान का’

हाल ही पीएम ने कहा था कि मौजूदा समय व्यवधान का नहीं समाधान का है लेकिन इसके बावजूद व्यवधान बना हुआ है तो इसके पीछे क्या कारण है और कौन जिम्मेदार है। 

पीयूष गोयल, जो वाणिज्य मंत्री हैं और वार्ता के लिए अधिकृत हैं, का मानना है कि मार्च के मध्य तक समझोते पर साइन हो पायेंगे। इससे पहले वे नवंबर, दिसंबर की तारीख दे चुके थे और जनवरी भी समाप्त हो गया। 

हालांकि संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका के आह्वान पर भारत ईरान के स्थान पर वेनेजुएला से तेल खरीद करेगा। उनके लिए सस्ते में तेल उपलब्ध करवाया जायेगा। 

ध्यान रहे कि तेल के सबसे बड़े भंडार रखने वाले वेनेजुएला पर फिलहाल अमेरिका का नियंत्रण है। वेनेजुएला से संबंधित निर्णय ट्रम्प अपने स्तर पर ले रहे हैं। 


2028 में वेंस और रूबियो उत्तराधिकारी : ट्रम्प

वर्ष 2028 के नवंबर माह में होने वाले राष्ट्रपति पद के लिए जेडी वेंस और मार्क रूबियो उत्तराधिकारी होंगे। मीडिया रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रम्प के हवाले से यह बताया गया है। हालांकि माना जा रहा था कि अपनी लोकप्रियता के आधार पर ट्रम्प चौथी बार दौड़ लगा सकते हैं। 22वें संशोधन के जरिये यह संभव हो सकता है। हालांकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्क रूबियो की भी लोकप्रियता सर्वाधिक बनी हुई है। दोनों नेता एकजुट दिखायी दे रहे हैं। वेंस इस समय इटली के मनीला शहर में है जहां कल वे शीतकालीन ओलम्पिक कार्यक्रम के शुभारंभ मौके पर भाग लेंगे। 


दृर्लभ खनिज समझौते की जानकारी नहीं आ पायी सामने

अमेरिका में भारत के विदेश मंत्री पिछले तीन दिनों से थे। वे 2 से 4 फरवरी तक संयुक्त राज्य के प्रवास पर थे और उनकी मार्क रूबियो के साथ दुर्लभ खनिज से संबंधित वार्ता करने वाले थे। यह वार्ता किस स्तर पर पहुंची, इसकी जानकारी नहीं दी गयी है। बताया गया था कि 18 अरब डॉलर के माध्यम से राष्ट्रपति चीन को टक्कर देने के लिए नया मंच तैयार कर रहे थे। इसमें जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि के भी शामिल होने की संभावना है। 

इस मंच पर भारत-अमेरिका के बीच रिश्ते किस प्रकार रहे, इसकी खबर किसी अमेरिकी मीडिया हाउस ने  नहीं दी है। न ही किसी अंतरराष्ट्रीय संवाद सेवा ने प्रकाश डाला है। 


Wednesday, February 4, 2026

 

मोदी क्यों बदलते चले गये राष्ट्रीय राजमार्गों के नाम? अमेरिका ने भारतीय अर्थव्यवस्था को दी ऑक्सीजन-रुपया और शेयर बाजार दोनों में चमक, लियो की नीतियां मसीह की आवाज को मजबूत करती हैं?



श्रीगंगानगर। पोप लियो इन दिनों चर्चा में हैं। वे पहले अमेरिकन पोप हैं जो वेटिकन के बॉस बनाये गये हैं। 250 करोड़ से ज्यादा इसाई समाज के वे सबसे बड़े धर्मगुरु हैं, लेकिन हमें पहले ईश्वर की संतान, ईसा मसीह के शब्दों को याद करना होगा, उन्होंने अपने हमलावरों को भी यह कहकर माफ कर दिया कि हे प्रभु, यह नहीं जानते, ये क्या कर रहे हैं। इनको क्षमा कर देना। वहीं पोप लियो शायद इन शब्दों का मर्म नहीं समझ पा रहे हैं। वहीं अमेरिकन इवांका ट्रम्प ने बिना धार्मिक और सामाजिक भेदभाव किये पांच करोड़ महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का संकल्प लिया और आज की तारीख में वे महिलाएं स्वयं परिवार का पालन पौषण कर पा रही हैं। 


शेयर बाजार और रुपये में सुधार नहीं तेजी

दूसरी ओर देखा जाये तो सामने आ रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस तरह से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत देते हुए टैरिफ को 50 प्रतिशत से कम कर अचानक 18 प्रतिशत कर दिया, इससे इकॉनोमी को नयी ऊर्जा मिल गयी है और शेयर बाजार जो बजट के कारण 1 फरवरी 2026 को गिर गया था, वह फिर से ऊंचाइयों को छू रहा है। रुपया दो रुपये तक बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा है। 92 रुपये प्रति डॉलर को पार करने के बाद पुन: रुपया 90 रुपये की रेंज में आ गया है। हालांकि पिछले पांच सालों में रुपया 18 रुपये तक गिर गया है। 2020-21 में यह 72 रुपये तक ट्रेंड कर रहा था और अब वह 90 रुपये पर है। 


एनएच का नाम बदलने के क्या कारण रहे

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय राजमार्गों के नाम बदलने का क्रम आरंभ किया था और यह अब भी जारी है। 

श्रीगंगानगर होकर पठानकोट-कांदला बंदरगाह तक का सफर तय करने वाला एनएच 15 को पीएम मोदी ने नया नाम दिया था 62 नंबर। अगर 62 नंबर को देखा जाये तो इसका अर्थ एफबी भी हो जाता है। एफबी अर्थात फेसबुक। उसी समय पीएम ने अमेरिका जाकर मार्क जुकरबुर्ग के साथ बैठक भी की और उनके साथ एक साक्षात्कार में भाग लिया। पहली बार एफबी पर वीडियो स्ट्रीमिंग भी देखने को मिली। इस तरह से 62 नंबर को उन्होंने एक नयी पहचान दे दी। नयी ऊंचाइयां पहुंचा दी। पीएम मोदी ने 61 नंबर नहीं दिया बल्कि 62 नंबर दिया। 

अब 61-62 का अंतर क्या होता है यह जानने के लिए नेटफिल्कस पर स्ट्रीमिंग हो रही 83 क्लास मूवी देखनी होगी, जो बॉलीवुड एक्टर बॉबी देयोल अभिनीत है। इसमें युवाओं को कोचिंग के दौरान किस तरह के माहौल से गुजरना होता दिखाया गया है। 

अब सवाल यह है कि एनएच 15 कहां गया? एनएच 15 गया, सीधे आसाम। पश्चिम बंगाल और आसाम को मिलाने वाले हाइवे का नाम दिया गया नैशनल हाइवे नंबर 15। अब आसाम-पश्चिम बंगाल को यह नंबर क्यों मिला। पश्चिम बंगाल में माता काली का महामंदिर है और बताया जाता है कि स्वामी विवेकानंद को वहीं माता के साक्षात्कार का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। वहीं आसाम में माता कामख्या का मंदिर है। नार्थ इस्ट को 15 नंबर दिया गया। 

श्रीगंगानगर का एसटीडी कोड है 0154, पीएम मोदी ने माता चामुण्डा देवी और पठानकोट को मिलाने वाले हाइवे का नाम 154 नंबर एनएच कर दिया। अब चामुण्डा माता के बारे में ज्यादा जानकारी देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि दो राक्षस भाई हुए थे, जिनका नाम चण्ड और मुण्ड था। दोनों राक्षसों ने देवताओं के अधिकारों का हनन कर लिया था और उनके साम्राज्य पर कब्जा कर लिया था। 

माता दुर्गा ने अपने योगशास्त्र से कई देवियों को प्रकट किया और श्री मद्देवी भागवत पुराण के अनुसार मां दुर्गा के एक स्वरूप ने चण्ड-मुण्ड का संहार कर दिया था और इसी कारण मां ने उन देवी को चामुण्डा नाम की उपाधि दी। 

अब चामुण्डा मंदिर में शिव मंदिर भी स्थापित किया गया है और इस तरह से चामुण्डा मंदिर के मार्ग का मिलान सीधा पठानकोट हाइवे से कर दिया गया। पठानकोट का वह हाइवे सीधे श्रीगंगानगर होते हुए गुजरात तक जाता है। 

इस तरह से नरेन्द्र मोदी सरकार ने हाइवे का नाम बदलकर चामुण्डा माता, महाकाली माता, अमृतसर साहिब का सीधा कनेक्शन गुजरात से कर दिया। गुजरात से स्वयं नरेन्द्र मोदी आते हैं। 

यह खेल ऐसा चलाया गया है कि कई कार्ड देखकर भविष्य बताने वाले भी हैरान हो जायें। वहीं तांत्रिकों के लिए यह बड़ा आश्चर्यजनक नहीं कहा जा सकता है। 


बिश्रोई समाज का धरना जारी, खेजड़ी को बचाने की मांग

राजस्थान का बिश्रोई समाज खेजड़ी को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। करीबन 500 लोग अनशन कर रहे हैं और राजस्थान के इतिहास में संभवत: अनशनकारियों की यह संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इसमें संत, महिलाएं और पुरुष समेत सभी वर्ग शामिल हैं। 


खेमचंद को मणिपुर का सीएम बनाया गया

नरेन्द्र मोदी ने भले ही नवीन नीतिन को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया हो लेकिन यह साफ नजर आ रहा है कि वे रिमोट से चलने वाले अध्यक्ष हैं। अब मणिपुर में वाईएएम आरएजे खेमचंद को अध्यक्ष बनाया गया है। इन शब्दों को हिन्दी से अंग्रेजी में रुपांतरण किया जाये तो समाचार का मर्म समझ में आ सकता है। हालांकि उनको वाई खेमचंद के नाम से पुकारा जा रहा है। उन्होंने शपथ ले ली है और इस तरह से नार्थ ईस्ट जहां पर राष्ट्रपति शासन था और अजीत भल्ला वहां पर राज्यपाल के रूप में स्टेट को संभाल रहे थे, अब वहां लोकतांत्रिक पार्टी कार्यभार संभालेगी। भल्ला गृह विभाग के सचिव रहे हैं और उनको दो बार एक्सटेंशन दिया गया। इसके बाद उनकी नियुक्ति राज्यपाल के रूप में कर दी गयी। 


Monday, February 2, 2026

 

राफेल डील से एक पंथ और दो निशाने साध रहे हैं मोदी, मैकां के साथ अपनी राजनीति को भी बचाने का प्रयास



श्रीगंगानगर। क्रिकेट के जानकार जानते हैं कि अगर दो बॉल पर रोहित शर्मा और विराट आउट हो जायें तो भारत के मैच जीतने की क्षमता कितनी प्रभावित हो जाती है, उसी तरह से भारत के दो दशक या इससे भी अधिक समय से रक्षा सहयोगी रहे अमेरिका, रूस दोनों ही अब भारत की मुख्य रक्षा जरूरतों से दूर हो रहे हैं। नया पार्टनर तलाशा गया है पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां इस समय अपने देश में सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं क्योंकि एक वर्ष के भीतर उन्होंने पांच प्रधानमंत्रियों को बदला है। अगले वर्ष राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हैं और ऐसे समय उन्हें राजनीतिक खुराक की आवश्यकता थी जो भारत गणराज्य की नरेन्द्र मोदी सरकार दे रही है। 

यह समाचार आम सामान्य समाचार नहीं है बल्कि भारत की विदेश, आर्थिक और रक्षा नीति को उजागर करने वाला समाचार है। 

भारत सरकार फ्रांस के साथ रक्षा समझौता कर रही है। उस समय जब अमेरिका, रूस अपनी विदेश नीति को परिवर्तित कर रहे हैं। दिखाने के लिए कुछ भी किया जा सकता है किंतु हकीकत वही होती है जब सहयोग मिलता हो। 

नरेन्द्र मोदी सरकार इस समय दुनिया में सबसे बड़े दबाव का सामना कर रही है। पिछले यूरोप के दो बड़े नेता दिल्ली की यात्रा पर थे, इनमें जर्मनी के चांसलर और पौलेण्ड के विदेश मंत्री। दोनों ने ही भारत के समक्ष कुछ मुद्दों पर असहमति जतायी है। 

रूस के राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि वे व्यापार से ज्यादा व्यक्तिगत रिश्तों को महत्व देते हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि                  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पत्नी मेलानिया ट्रम्प ने रूस के ब्लादीमिर पुतिन को भाई बनाया हुआ है और भारत की यात्रा से पहले राष्ट्रपति पुतिन ने अलास्का की यात्रा की थी। वहां ट्रम्प के साथ मुलाकात हुई थी और ट्रम्प ने पुतिन को मेलानिया का एक पत्र दिया था, जो गोपनीय था। यह जानकारी स्वयं मेलानिया ट्रम्प ने एक इंटरव्यू के दौरान दी है। 

राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा के दौरान रक्षा खरीद के लिए बड़ा समझौता नहीं हो पाया, जिसका प्रचार किया जा रहा था। 

इससे साफ हो जाता है कि पुतिन और ट्रम्प दोनों का दबाव मोदी पर था और मोदी को एक ऐसा सहयोगी चाहिये था, जो स्वयं दबाव में हो और दोनों मिलकर एक दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकें। 

भारत गणराज्य की सरकार ने एक साथ 121 राफेल विमान खरीद का समझौता करने की तैयारी कर ली है और इसके साथ अन्य हथियार की भी खरीद होगी। ध्यान रहे कि पेरिस स्वयं बड़े हथियार अमेरिका से खरीदता रहा है। 

अब फ्रांस से करीबन सवा तीन लाख ट्रिलियन रुपये की खरीद को अन्तिम रूप दिया जा रहा है और बजट में इसका प्रावधान भी कर दिया गया है। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि राफेल जनरेशन सिक्स के नहीं है जो अमेरिका और रूस व चीन के पास है। 

पेरिस की राजनीति को नजदीकी से देखा जाये तो राष्ट्रपति मैक्रां मध्यमार्गी हैं। व दक्षिणपंथी या वामपंथी नहीं है। हालांकि मौजूदा सरकार में उनको कुछ वामपंथी सहयोग कर रहे हैं। 2027 में तीसरी बार वे राष्ट्रपति पद के लिए दावेदार हो सकते हैं। उन्होंने पिछले साल संसदीय चुनाव करवाये थे, जिनमें उनको बहुमत नहीं मिल पाया था। 


पेरिस को खुराक से यूरोपीय समर्थन

नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री रहते हुए इस तरह की दबाव की राजनीति को नहीं देखा था और न ही कभी बहुमत को खोया था। इस बार उनकी पार्टी लोकसभा में पूर्ण बहुमत नहीं रखती है। बिहार की जनता दल (नीतिश कुमार), आंध्रप्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी ने उनको समर्थन दिया हुआ है। वे गुजरात के सीएम थे तो तीनों बार उन्होंने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। 

राजनीति के जानकार एक बौन्ने का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र संघ में फ्रांस के पास वीटो पावर है। यूरोप और ब्रिटेन की राजनीति में पेरिस के पास दबदबा है। इस तरह से वे उनकी मदद कर खुद की मदद भी चाहते हैं। 

इस बार बजट 50 लाख करोड़ से ज्यादा का था और करीबन 8 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट है। उनके इस बजट के बाद दूसरा नंबर परिवहन मंत्रालय को दिया गया। 


युद्ध की तैयारी तो आधारभूत ढांचा के लिए इतना बजट क्यों?

इस समय यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर नरेन्द्र मोदी सिंदूर 2.0 की तैयारी करते हुए रक्षा बजट को 15 प्रतिशत तक बढ़ाया है तो फिर आधार भूत ढांचा के लिए इस वर्ष इतना बड़ा बजट क्यों रखा गया जो तीन लाख करोड़ से ज्यादा का है। दोनों एक दूसरे के परस्पर विरोध का बजट हो गये। कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा मंत्रालय के तीनों बजट को जोड़ दिया जाये तो उससे भी कहीं ज्यादा बजट एक ही मंत्रालय को दिया गया है। 

अगर सरकारी स्कूलों की हालत को देखा जाये तो आज भी उनकी स्थिति को विश्वस्तरीय नहीं कहा जा सकता। 


अर्थव्यवस्था या व्यक्तिगत आय बढ़ी

भारत सरकार दावा करती है कि वह तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। जब हम प्रति व्यक्ति आय देखते हैं तो पता चलता है कि नई दिल्ली से ही सहायता प्राप्त करने वाले मालद्वीव और भूटान, भारत से आगे है अर्थात भारत से ज्यादा सहायता प्राप्त करते हैं। जब हमें 2026 पर ध्यान केन्द्रित करते हुए भारतीयों की आय को एक सम्मानजनक स्थान की ओर ले जाना चाहिये था, उस समय राफेल विमान खरीदकर तमिलनाडू, पश्चिम बंगाल, गुजरात के चुनाव जीतने के लिए तैयारी कर रहे हैं। सेना के नाम पर एक बार फिर से चुनाव जीतने की तैयारी हो रही है। 

दूसरी ओर संसद में सोमवार को ही यह सामने आया कि भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने पूर्व सेनाध्यक्ष श्री नरवणे की एक पुस्तक को प्रकाशित होने से रोक दिया है। 


Sunday, February 1, 2026

 

मोदी सरकार ‘जंग’ की तैयारी कर रही है, पाक ने भारत के साथ क्रिकेट मैच खेलने से किया इंकार



श्रीगंगानगर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अवकाश के दिन 1 फरवरी 2026 को वित्त वर्ष का बजट भाषण पढ़ा तो साफ हो गया कि भारत गणराज्य की मौजूदा सरकार युद्ध के लिए तैयारी कर रही है। यह युद्ध बांग्लादेश अथवा पाकिस्तान से हो सकता है, क्योंकि चीन का रक्षा बजट भारत से कहीं ज्यादा है। नरेन्द्र मोदी की सरकार ने 15 प्रतिशत रक्षा बजट बढ़ाया है जो अप्रत्याशित है। यह बजट करीबन 8 लाख करोड़ रुपये है। इस बजट के माध्यम से ही फ्रांस के साथ रक्षा खरीद का समझौता होना है। पेरिस के इमैनुअल मैक्रां इसी माह नई दिल्ली की यात्रा करने वाले हैं। भारत के रक्षा बजट को देखकर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया आयी कि वह भारत के साथ 15 फरवरी को होने वाले टी-20 विश्वकप के लीग मैच से स्वयं को अलग कर रहा है। 

दक्षिण एशिया में उस समय हडक़म्प मच गया जब भारत सरकार की वित्त मंत्री ने रक्षा बजट का नाम लिया। 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपये का बजट का प्रस्ताव किया गया है जो पिछले रक्षा बजट से 15 प्रतिशत अधिक है और असमान्य है।

उल्लेखनीय है कि इस माह भारत गणराज्य की सरकार और फ्रांस के बीच राफेल के नये विमानों की खरीद के लिए समझौता होना है और राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां इसी माह भारत यात्रा करने वाले हैं। 

नया वित्त वर्ष 1 अप्रेल से लागू होगा और यात्रा फरवरी माह में समझौते पर मुहर के लिए आरंभ होगी और इसके बाद राशि का हस्तांतरण होना है। हालांकि भारत सरकार ने यह नहीं बताया है कि यह सौदा भारतीय रुपये में होगा या यूरो के माध्यम से। 

हाल ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी नाटो सदस्यों से अपने रक्षा बजट को बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने का लक्ष्य दिया था और भारत के 40 लाख करोड़ के बजट में से करीबन 8 लाख करोड़ अर्थात पांचवां हिस्सा सीधे रक्षा बजट को दिया जायेगा। 

इसके लिए अन्य मद में कटौती हुई है। शिक्षा, स्वास्थ्य सहित आधा दर्जन विभागों को मिला दिया जाये तो भी 8 लाख करोड़ रुपये की राशि के बराबर बजट नहीं होता। रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सडक़ परिवहन विभाग 3 लाख 09 हजार करोड़ रुपये, रेल मंत्रालय को 2 लाख 81 हजार करोड़ का बजट का प्रस्ताव किया गया है। 

इस बजट पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा होगी और प्रधानमंत्री के अभिभाषण संबोधन के बाद संभवत: बजट पारित किया जायेगा। मोदी सरकार के पास दोनों सदनों में बहुमत है। 


‘जंग’ की तैयारी में है भारत?

करीबन 8 लाख करोड़ रुपये का रक्षा विभाग का बजट जो प्रस्तावित किया गया है, वह अपने सर्वकालीन इतिहास में सबसे ज्यादा है। अब सवाल यह है कि इतना बड़ा बजट जारी करने का महत्व क्या है। अगले एक से डेढ़ साल के भीतर अनेक राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, केरल, गुजरात आदि के चुनाव होने हैं जो संसदीय चुनाव के लिहाज से स्विंग स्टेट हैं, इस तरह से सेना की तैयारियों को ध्यान में रखकर विधानसभा चुनाव भी लड़े जा सकते हैं। 

वहीं सरकार का यह भी कहना है कि सिंदूर 2.0 के लिए तैयारी की जा रही है। बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्तों को लगभग समाप्त कर दिया है। वह भारत में क्रिकेट वल्र्ड कप का बहिष्कार कर रहा है और टीम को नहीं भेजा गया है। 

वहीं पाकिस्तान की तरफ से भी प्रतिक्रिया आयी है। पाक की क्रिकेट टीम 15 फरवरी को कोलम्बो में होने वाले भारत के साथ मैच का बहिष्कार करेगी। इस तरह से पाकिस्तान ने रक्षा बजट के बाद स्वयं को अलग कर लिया है। अभी तक भारतीय टीम ही पाकिस्तान के साथ मैचों का बहिष्कार करती आयी थी और यह पहला मौका है जब पाकिस्तान ने भारत के साथ खेलने से इन्कार कर दिया है। वह भी तब जब आईसीसी में चेयरमैन जयंत शाह हैं। 

बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों की कई सौ किमी की सीमाएं भारत के साथ लगती हैं। इस तरह से भारत को पूर्व और पश्चिम दोनों सीमाओं पर खतरा नजर आ रहा है। बांग्लादेश इससे पहले आरोप लगा चुका है कि शेख हसीना के समय बांग्लादेश के साथ जो अडाणी समूह ने बिजली समझौता किया था, वह अंतरराष्ट्रीय दरों के मुकाबले कहीं अधिक महंगा था। 


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