Sunday, February 8, 2026
हिंदुओं को आपस में लड़ाकर अभी भी राष्ट्रवादी नेता की पहचान बनाये हैं मोदी? मुस्लिम नेता को बताया ऑयडल-भारत में बदलती राजनीति, जापान में ताकाइची को स्पष्ट बहुमत
श्रीगंगानगर। यूजीसी के मामले में हिन्दू-हिन्दू आपस में लड़ रहे हैं और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अभी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वहीं मुस्लिम बाहुल्य देश जाकर अनवर इब्राहिम को अपना आदर्श नेता बताकर क्या पीएम नरेन्द्र मोदी ने राजनीति की बिसात में नया खेल खेलने का प्रयास किया है? वहीं जापान में सनाए ताकाइची को स्पष्ट बहुमत हासिल हो गया है। उन्होंने अचानक ही 8 फरवरी को चुनाव करवाने का एलान किया था। रात को परिणाम आये तो वे गठबंधन नेताओं के साथ दो तिहाई बहुमत हासिल करती नजर आ रही हैं। यूएसए प्रेजीडेंट ने ताकाइची को खुला समर्थन दिया था।
चीन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने और परमाणु बम के लिए बयान जारी करने वाली सानाए ताकाइची की पार्टी को संसद के निचले सदन के लिए हुए चुनावों में स्पष्ट बहुमत हासिल हो गया है। लिबरल पार्टी को समर्थकों के साथ दो तिहाई बहुमत हासिल होता नजर आया है।
प्रधानमंत्री बनने के उपरांत ताकाईची ने जापान के परमाणु बम के बारे में बयान जारी किया था, इससे एक बार तो पूरी दुनिया में हडक़म्प मच गया था और चीन की तरफ से प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। प्रशांत महासागर के देश और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति जापान ने कभी भी इससे पहले परमाणु बम के बारे में सार्वजनिक चर्चा नहीं की थी। जापान की सुरक्षा के लिए टोक्यो ने अमेरिकी सेना को आमंत्रित किया हुआ है और चीन तथा उत्तर कोरिया की मित्रता के कारण यह नये समीकरण सामने आये थे कि क्या जापान को अपना परमाणु बम बनाना चाहिये।
उत्तर कोरिया ने प्रतिबंधों के बावजूद अनेक ब्लैस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है और यह लम्बी दूरी की मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। माना जाता है कि चीन उत्तर कोरिया को सैन्य तकनीक उपलब्ध करवाता है।
वहीं ताकाईची ने प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद अनेक आर्थिक सुधार के लिए एलान किया था और फिर अचानक उन्होंने चुनाव को कॉल किया। लिबरल नेता युवाओं में काफी लोकप्रिय नजर आ रही हैं और उन्होंने अपनी जिंदगी के बारे में भी सोशल तथा मुख्यधारा के मीडिया से खुलकर बात की है। यहां तक कि सिर पर डाई लगाकर बाल को काले करने के बारे में भी उन्होंने अपने विचार रखे।
मोदी ने हिंदुओं के बीच दरार क्यों पैदा कर दी?
अभी तक भारत में अनारक्षित वर्ग जिसको स्वर्ण जाति कहा जाता है जिसमें क्षेत्रीय, ब्राह्मण, वैश्य, जाट सहित कई जातियां शामिल हैं, को भाजपा का वोटबैंक माना जाता रहा है। वहीं दलित वोट बैंक कई पार्टियों में बंटा हुआ है लेकिन यह पूरी तरह खुलकर कभी भाजपा के पक्ष में नहीं आया। मुस्लिम और दलित वोट बैंक को सपा, बसपा, कांग्रेस सहित कई पार्टियां अपना हक मानती रही हैं।
आने वाले 2029 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में भारी कमी आने की संभावना बनी हुई है और वे 75 साल की आयु को भी पूरी कर चुके हैं। इस कारण उनकी रिटायरमेंट की आवाज भी भाजपा में उठ रही है।
इस बीच नरेन्द्र मोदी ने नये वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए यूजीसी का शिगूफा छेड़ दिया। उसमें कई परिवर्तन कर दिये। इससे हिन्दू समुदाय आपस में संघर्ष कर रहा है लेकिन सरकार की तरफ से इसकी औपचारिक प्रक्रिया सामने नहीं आयी है। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही रोक लगा दी हो लेकिन भाजपा सरकार ने इन नियमों को वापिस नहीं लिया है।
वहीं दूसरी ओर पीएम शनिवार और रविवार को आसियान के मुस्लिम बाहुल्य स्टेट मलेशिया की यात्रा पर थे और उन्होंने वहां पर प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को प्रसन्न करने के लिए बयान दिया कि पीएम बनने से पहले ही वे उनके लिए मार्गदर्शक की तरह रहे हैं।
अब सीधे तौर पर उन्होंने मुस्लिम वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बयान जारी कर दिया है।
इससे भाजपा में विरोध देखा जा रहा है और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का भी बयान सामने आया है कि कुछ हिन्दू भूल गये हैं कि वे हिंदू हैं।
भागवत ने अपनी 75 वर्ष की उम्र का भी जिक्र करते हुए अप्रत्यक्ष तौर पर मोदी पर कटाक्ष किया कि वे रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं और उन्होंने संगठन को सूचित भी कर दिया है। इस तरह से मोदी की नीतियों को लेकर हिन्दू वोट बैंक को लेकर राजनीति करने वाले आरएसएस में भी व्यापक चिंता को देखा जा सकता है।
हालांकि सीधे तौर पर आरएसएस विरोध में खुलकर सामने नहीं आ रही है जिस कारण भारत सरकार में एकछत्र राज करने वाले नरेन्द्र मोदी के विचारों और नीतियों पर नियंत्रण नहीं लगाया जा सका है।
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