Wednesday, February 18, 2026
जीडीपी के ट्रिलियनस के स्थान पर भारतीयों की औसत आय पर क्यों नहीं होती चर्चा, भारत में महिलाओं का औसत वजन 50 के आसपास
श्रीगंगानगर। वर्ष 2022 तक भारत को पांच ट्रिलियन की बनाये जाने का एलान 2017 के बाद आरंभ हो गया था और 2026 आरंभ हुए दो माह हो चुके हैं इसके बाद भी जीडीपी पांच ट्रिलियन की नहीं हुई। अब 2047 के विकसित भारत का सपना दिखाया जा रहा है और भारतीयों की औसत आय पर चर्चा नहीं हो रही।
भारत सरकार जो इस समय एक साथ 114 लड़ाकू विमान खरीद करने के लिए समझौता कर रही है। यह उसी भारत के विकसित भारत की तस्वीर दिखाने की कोशिश है।
भारतीयों को कल की तस्वीर दिखाई जा रही है। वह तस्वीर जो आज से 21 साल बाद कम से कम 10 प्रतिशत भारतीय उस समय पर शायद उपस्थित भी नहीं हो सकेंगे। उनको आज दवा, सम्मानजनक पेंशन, उचित देखभाल की आवश्यकता है और इस सोशल सिक्योरिटी के लिए सरकार ने शायद बजट को कम कर दिया है।
शब्दों का हेरफेर
भारतीयों का कई विकसित राष्ट्रों में ट्रिलियनस रुपये या डॉलर में ब्लैकमनी है। यह भारत के कुल बजट का कई गुणा है। शायद जीडीपी के बराबर या उससे भी कहीं ज्यादा। क्योंकि जीडीपी अभी पांच ट्रिलियन की नहीं हुई है।
शब्दों का हेरफेर कर वह दिखाया जाता है जो पहले कभी चर्चा का विषय नहीं बना और फिर इसको जनमानस तक पहुंचा दिया जाता है। पूरा जोर लगाया जाता है और प्रचारक अपने पेट पर हाथ रख लेते हैं।
कभी भारतीयों की यह चचा्र नहीं हुई कि हम 2030 तक देश को कुपोषण मुक्त बना देंगे। भारतीयों की औसत ऊंचाई पांच फीट के आसपास सिमट जाती है और वजन पर भी चर्चा होनी चाहिये तो महिलाओं का औसत वजन मात्र 50 किलो के आसपास है।
यह भी दक्षिण भारत, पंजाब आदि को मिलाकर प्रदर्शित होता है जहां पर लम्बाई और वजन दोनों ही अपेक्षाकृत ठीक है लेकिन पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा सहित कई राज्य ऐसे हैं जहां कुपोषण बहुत ज्यादा है।
उत्तरप्रदेश में हालात में सुधार हुआ है लेकिन बहुत कुछ किया जाना शेष है।
इसकी चर्चा तक नहीं होती और औसत आय को भी सरकारी आकड़ों के बजाय जमीन पर उतारने की आवश्यकता होती है।
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