Thursday, February 12, 2026

 

जलवायु परिवर्तन : ट्रम्प प्रशासन ने वाहन मालिकों और निर्माताओं को दी बड़ी राहत



वाशिंगटन डीसी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने के बाद अब वाहन मालिकों और निर्माताओं को बड़ी राहत प्रदान की है। इससे वाहनों की कीमतों में कमी आयेगी। नये वाहन की बिक्री में बढ़ोतरी भी होने की संभावना है। 

जलवायु परिवर्तन को लेकर एक बड़ा फैसला पेरिस जलवायु समझौते के नाम से जाना जाता है। भारत ने पहले इस समझौते में शामिल होने से इन्कार कर दिया था किंतु तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस संबंध में सीधे तौर पर पीएम नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और यह समझौता सम्पन्न हो गया। 

अमेरिका ने इसके बदले में दुनिया भर को ट्रिलियनर्स में मदद की और अरबों-खरबों डॉलर तापमान में तथाकथित कमी लाने पर खर्च करने के लिए दिये गये। इसका नुकसान यह भी सामने आया कि भारत देश में डामर सडक़ों का स्थान सीसी रोड अर्थात सीमेंटेड रोड ने ले लिया। डामर सडक़ों के निर्माण की मंजूरी नगर निकायों को भी दे दी गयी। इस तरह से गलियों में सीमेंटेड सडक़ों का निर्माण होने से वह गर्मी के मौसम में इतनी ज्यादा गर्म हो जाती हैं कि तापमान में कमी आने की बजाय बढ़ोतरी हो जाती है। जो सडक़ राजमार्ग पर बनायी जा रही है उसमें तो सरिया का मिश्रण भी किया जाता है। इस तरह से उन सडक़ों के निर्माण के दौरान लोहा और सरिया मौसम को बुरी तरह से प्रभावित करता है। 

इस तरह से प्रचार किया गया कि वाहनों की बढ़ती संख्या जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण है। कोयला जो बिजली उत्पादन करता है, वह खतरनाक है। वाहनों पर दुनिया भर में अतिरिक्त टैक्स लगाये गये, भारत में ही कारों के ओटीटी पर 10 प्रतिशत तक सरचार्ज वसूल किया गया, जिसके सोशल सिक्योरिटी टैक्स के नाम से भी जाना जाता है। 

अमेरिका को ओबामा के कार्यकाल में भारी नुकसान

अमेरिका में 2009 में बराक हुसैन ओबामा को राष्ट्रपति बनाया गया तो उस समय देश पर 10 ट्रिलियन डॉलर्स का कर्जा था और जब 2017 में वे जनवरी माह में रिटायर होकर वापिस गये और डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने पहली बार कार्यभार संभाला तो टैक्स करीबन 20 ट्रिलियन डॉलर्स हो चुका था। 8 सालों के भीतर अमेरिका पर टैक्स 10 ट्रिलियन से ज्यादा हो गया। इसका कारण बराक ओबामा की नीतियां माना जाता है। उस मंदी का दौर भी दिखाया गया और बैंकों तथा अनेक कंपनियों को राहत पैकेज भी दिये गये। उसी तरह से जैसे कोरोना के बाद भारत ने 20 लाख करोड़ का राहत  पैकेज दिया था। 

इस तरह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा था और वह कर्ज के बोझ तले दबकर अगले 8 सालों में कर्ज को 37 ट्रिलियन डॉलर्स तक लेकर पहुंच गयी। 

2025 में बदलाव आरंभ 

वर्ष 2025 में बदलाव आरंभ हुए जब ट्रम्प प्रशासन का दूसरा कार्यकाल आरंभ हुआ। वे पेरिस जलवायु समझौते और डब्ल्यूएचओ से बाहर आ गये। दोनों को ही उन्होंने अमेरिकी हितों के खिलाफ माना। अब उन्होंने वाहनों के निर्माण, खरीद के संबंध में नये आदेश जारी कर दिये हैं तो इससे ऑटो उद्योग को एक बड़ी राहत मिलने वाली है। 






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