Friday, February 27, 2026
तालिबान भस्मासुर कैसे बन गया? युद्ध के समय कोई मित्र क्यों नहीं आया?
श्रीगंगानगर। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में स्थानीय लड़ाकों को तैयार किया जिसका नाम तालिबान रखा गया। इनका काम सोवियत संघ के साथ गौरिल्ला युद्ध करना था। सोवियत सेना की वापसी और उसके विघटन के बाद रूस महाशक्ति के रूप में सामने आया।
तालिबान, उस समय भी था जब अमेरिका में वल्र्ड ट्रेड टॉवर को निशाना बनाया गया और उस समय भी था जब भारत के एक वायुयान का अपहरण कर उसको कंधार लाया गया था। इस विमान अपहरण के समय यह देखने वाला होगा कि पहले अमृतसर, फिर लाहौर और अंत में कंधार ले जाया गया। अमृतसर बाबा नानक का शहर है। लाहोर भगवान श्रीराम के पुत्र लव द्वारा बसाया गया शहर है और कंधार जो पहले गंधार कहलाता था, महाभारत के समय युद्ध का एक बड़ा कारण बना था।
खबर अब यह है कि पाकिस्तान ने जिस तालिबान को संवारा, प्रशिक्षित किया, अब वही उसके खिलाफ हथियार उठा रहा है। अमेरिका या नाटो की सेना के बाद तालिबान ने एक सप्ताह से भी कम समय में अफगानिस्तान की सत्ता पर दुबारा कब्जा कर लिया था।
भारत के साथ तालिबान के राजनयिक संबंध हैं। भारत गणराज्य की सरकार दवा, गेहूं और अन्य खाद्य पदार्थ का सहयोग करती है, इस कारण इस्लामाबाद यह मानता है कि तालिबान के पीछे अब भारत है।
युद्ध को दो दिन हो गये हैं लेकिन भारत सरकार ने उस तक कोई सहायता नहीं पहुंचायी है, इस तरह से सैन्य सहायता नहीं मिलने के कारण अफगान पाक के सामने कमजोर हो गया है तो दूसरी ओर रावलपिंडी का यह बयान भी फिका हो गया कि भारत मदद कर रहा है।
अफगान तालिबान के पास वायुसेना नहीं है। अमेरिकी जहाज हैं एफ 16 आदि, उसका संचालन करना उनको नहीं आता। इस तरह से पाकिस्तान के सामने वह कमजोर हो जाता है और इस्लामाबाद की तरह सीमा पार जाकर उसके घर में घुसकर हमला नहीं कर पा रहा है। सेना भी कम है और हथियार भी पाक के बराबर नहीं है।
भारत अगर मदद कर रहा होता तो आधुनिक हथियार और वायुसेना का कम से कम एक कमांड तैयार कर चुका होता और फाइटर जेट भी दिये होते।
कुल मिलाकर पाक के साथ युद्ध के मामले में अफगानिस्तान ने पहले ही दिन वार्ता की मांग कर डाली। हालांकि शाम होते-होते एक बार फिर से यह समाचार आ रहे हैं कि तालिबान पुन: तैयार हो गया है। युद्ध कर रहा है।
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