Thursday, February 5, 2026
डाइजेस्ट : मोदी दूसरे पीएम बन गये जो अभिभाषण पर भाषण नहीं दे पाये, अनोखा रिकॉर्ड; ट्रेड डील पर समझोता क्यों नहीं हो पाया, ईरान के साथ महाजंग के लिए मैदान तैयार-पाकिस्तान मध्यस्थ
श्रीगंगानगर। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और शुक्रवार को दोनों पक्ष ओमान में वार्ता कर रहे हैं, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में होगा। अगर वार्ता सिरे नहीं चढ़ी तो क्या होगा? इसका उत्तर यह कहा जा सकता है कि तेहरान और वाशिंगटन जंगी जगह पर नजर आ सकते हैं। वहीं गुरुवार को भी पीएम का अभिभाषण पर संसद में भाषण नहीं हो पाया और लोकसभा ने धन्यवाद प्रस्ताव पारित भी कर दिया। राज्यसभा में पीएम ने अपनी बात रखी। नरेन्द्र मोदी दूसरे प्रधानमंत्री बन गये हैं जो अभिभाषण पर स्पीच नहीं दे पाये। इससे पहले 2004 में भाजपा ने डॉ. मनमोहनसिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण नहीं करने दिया था। इस तरह से इतिहास को दोहराया गया।
शुक्रवार को जिसको अरब देशों में जुम्मा कहा जाता है, को ओमान पर सबकी नजर रहेंगी। अमेरिका ने इसमें पाक के आग्रह पर उसको मध्यस्थ की भूमिका के रूप में स्वीकार कर लिया है और इस तरह से यह वार्ता त्रिस्तरीय हो गयी है।
ईरान ने ओमान में ही वार्ता की शर्त रखी थी, जिसको अमेरिका ने गुरुवार को स्वीकार कर लिया। पाक के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
राज्यसभा में पीएम मोदी का धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का निर्धारित कार्यक्रम बुधवार का था और जिसमें उन्होंने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में संबोधन देना था, लेकिन हंगामे के कारण पीएम लोकसभा में नहीं गये और संसद को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। सुबह सदन में धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। प्रधानमंत्री का भाषण नहीं हो पाया। यह नयी संसद में पहला और इतिहास में दूसरा मौका है जब धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री अपनी बात नहीं रख पाये। वहीं राज्यसभा में उन्होंने अपनी बात रखी।
ट्रेड डील पर हस्ताक्षर नहीं हो पाये
अमेरिका ने भारत सरकार की मांग पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से कम कर 18 प्रतिशत कर दिया। जो दक्षिण एशिया में संभवत: सबसे कम है। शेयर बाजार ने भी इस छूट का वेलकम किया था किंतु चार दिन गुजरने के बावजूद दोनों पक्ष हस्ताक्षर नहीं कर पाये हैं। मामला कृषि और डेयरी सैक्टर को लेकर अटक गया है।
वाशिंगटन ने दावा किया था कि नई दिल्ली रूस से तेल नहीं खरीदेगा और कृषि व डेयरी क्षेत्र भी खोलेगा। लेकिन भारत ने इससे गुरुवार को भी फिर से इन्कार कर दिया। इसके बाद शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली। ट्रेड डील के प्रति अब आशावाद कमजोर होती जा रही है।
‘समय व्यवधान का नहीं समाधान का’
हाल ही पीएम ने कहा था कि मौजूदा समय व्यवधान का नहीं समाधान का है लेकिन इसके बावजूद व्यवधान बना हुआ है तो इसके पीछे क्या कारण है और कौन जिम्मेदार है।
पीयूष गोयल, जो वाणिज्य मंत्री हैं और वार्ता के लिए अधिकृत हैं, का मानना है कि मार्च के मध्य तक समझोते पर साइन हो पायेंगे। इससे पहले वे नवंबर, दिसंबर की तारीख दे चुके थे और जनवरी भी समाप्त हो गया।
हालांकि संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका के आह्वान पर भारत ईरान के स्थान पर वेनेजुएला से तेल खरीद करेगा। उनके लिए सस्ते में तेल उपलब्ध करवाया जायेगा।
ध्यान रहे कि तेल के सबसे बड़े भंडार रखने वाले वेनेजुएला पर फिलहाल अमेरिका का नियंत्रण है। वेनेजुएला से संबंधित निर्णय ट्रम्प अपने स्तर पर ले रहे हैं।
2028 में वेंस और रूबियो उत्तराधिकारी : ट्रम्प
वर्ष 2028 के नवंबर माह में होने वाले राष्ट्रपति पद के लिए जेडी वेंस और मार्क रूबियो उत्तराधिकारी होंगे। मीडिया रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रम्प के हवाले से यह बताया गया है। हालांकि माना जा रहा था कि अपनी लोकप्रियता के आधार पर ट्रम्प चौथी बार दौड़ लगा सकते हैं। 22वें संशोधन के जरिये यह संभव हो सकता है। हालांकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्क रूबियो की भी लोकप्रियता सर्वाधिक बनी हुई है। दोनों नेता एकजुट दिखायी दे रहे हैं। वेंस इस समय इटली के मनीला शहर में है जहां कल वे शीतकालीन ओलम्पिक कार्यक्रम के शुभारंभ मौके पर भाग लेंगे।
दृर्लभ खनिज समझौते की जानकारी नहीं आ पायी सामने
अमेरिका में भारत के विदेश मंत्री पिछले तीन दिनों से थे। वे 2 से 4 फरवरी तक संयुक्त राज्य के प्रवास पर थे और उनकी मार्क रूबियो के साथ दुर्लभ खनिज से संबंधित वार्ता करने वाले थे। यह वार्ता किस स्तर पर पहुंची, इसकी जानकारी नहीं दी गयी है। बताया गया था कि 18 अरब डॉलर के माध्यम से राष्ट्रपति चीन को टक्कर देने के लिए नया मंच तैयार कर रहे थे। इसमें जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि के भी शामिल होने की संभावना है।
इस मंच पर भारत-अमेरिका के बीच रिश्ते किस प्रकार रहे, इसकी खबर किसी अमेरिकी मीडिया हाउस ने नहीं दी है। न ही किसी अंतरराष्ट्रीय संवाद सेवा ने प्रकाश डाला है।
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