Monday, October 27, 2025

 

बिहार चुनाव : एक हैं तो सेफ हैं, मुद्दा क्यों नहीं!





श्रीगंगानगर। महाराष्ट्रा विधानसभा चुनावों का जब जिक्र होता है तो उस समय पीएम नरेन्द्र मोदी का यह नारा कामयाब होता दिखा कि ‘एक हैं तो सेफ हैं।’

एक हैं तो सेफ हैं के माध्यम से महाराष्ट्रा विधानसभा चुनाव जीत गये किंतु बिहार में यह चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया। इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। 

नरेन्द्र मोदी गुजरात से नई दिल्ली आये थे, तो उनके पास मुद्दे थे। उन्होंने देश के विकास और रुपया, पेट्रोल के नियंत्रण के संबंध में बहुत कुछ कहा था। 

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का भी उनका उस समय का एक नारा था, जिसने हरियाणा विधानसभा के चुनाव का मिजाज बदल दिया। 

बेटियों की शिक्षा पर केन्द्र सरकार उसी तरह से कुछ नहीं कर पायी, जिस तरह से 100 स्मार्ट सिटी बनाये जाने थे। 

इन सबको भूल कर ताजा मुद्दों की चर्चा करें तो एक है तो सेफ हैं, यह सिर्फ नारा ही बनकर क्यों रह गया। 

जिसको वे अपने माथे का चंदन बताते हैं, उस चंदन को वे सम्मान नहीं दिला पाये। 

चंदन को दिल से अपनाने के स्थान पर एक चुनावी मुद्दा बनाये रखा। जब-जब चुनाव हुए उन्होंने हिन्दूवाद की ओट ली और विजय हासिल की। 

उन्होंने हिंदू जागरण मंच का संचालन किया,लेकिन इन हिन्दुओं के घरों में परिवार के सदस्य भी हैं। जिनको पढ़ाना, लिखाना, शादी करना आदि जो हिन्दू रिती रिवाज दिये गये हैं, उनको पूरा करने के लिए सशक्त क्यों नहीं किया गया। 

कुछ राज्यों में शासन व्यवस्था के लिए जातिगत व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है। 


Saturday, October 25, 2025

 

अदृश्य संगठित अपराध को तलाश कौन करेगा?

 


नई दिल्ली। भारत गणराज्य के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के एक कार्यक्रम में कहा, ‘संगठित अपराध अदृश्य हो गया है।’ अब सवाल यह पैदा हो रहा है कि इस अदृश्य अपराध की तलाश कौन करेगा?

देश-विदेश की जनता देख रही है कि संगठित अपराध किस तरह के कृत्यों पर उतर आया है और चिंतक की हालत यह है कि वो सो भी नहीं पा रहे हैं। माओवाद का सफाया करने वाले गृहमंत्री अमित शाह बिहार चुनाव में अतिव्यस्त हैं और उनके पास शायद देश की समस्याओं को जानने व उसको समाप्त करने के लिए समय ही नहीं है। 

देश के पीएम नरेन्द्र मोदी ने देश को गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी का बताया था। उस देश के भीतर अपराध संगठित हो रहा है। यह अपराध पुराना था, किंतु जिस तरह से अपराध ने अपना अभी का रूप दिखाया है, उसके बाद सरकार की क्षमताओं पर सवाल उठ रहे हैं। 

बिग बॉस कर रहे हैं अपराध का नेतृत्व?

हजारों-लाखों करोड़ का व्यवसाय करने वाले अनेक व्यापारिक नेता हैं, जो इस अपराध और आतंकवाद का पर्दे के पीछे से नेतृत्व कर रहे हैं। सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। भारत के मित्र देश भी चिंतित हैं। 

असल में सरकार ने इनको खिला-पिलाकर इतना बड़ा बना दिया है कि यह भस्मासुर बन गये हैं। भस्मासुर को भगवान श्री शंकर  जी ने वरदान दिया था और बाद में वह उन्हीं का दुश्मन बन गया था। 

इसी तरह की हालत मौजूदा सरकार की है। सरकार के नजदीकी मित्र, गौतम अडाणी समूह के शेयर मार्केट में एलआईसी ने 3.9 बिलियन डॉलर का निवेश किया था, उस समय जब अडाणी के खिलाफ अनियमितताओं की रिपोर्ट एक विदेशी पत्रिका ने सार्वजनिक की थी और कंपनियों के शेयर्स नीचे आ रहे थे। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए एलआईसी को निवेश करने के लिए कहा गया। 

असल में सरकार ने डिजीटलकरण के चक्कर में अनेक बड़ी कंपनियों को खुदरा बाजार में प्रवेश की अनुमति दे दी है और इससे छोटे व्यापारी जो लॉकल लेवल पर सामान का विक्रय करते थे, वे इस समय असहाय नजर आ रहे हैं। 


सोशल मीडिया पर शाह का वीडियो वायरल!

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया जा रहा है कि उनके जूतों को एक व्यक्ति साफ कर रहा है। यह वीडियो एक हवाई यात्रा का बताया गया है। जो व्यक्ति जूता साफ कर रहा है वह दिल्ली के एक मीडिया घराने से जुड़ा हुआ है, यह बताया जा रहा है। हालांकि इस वीडियो के असली होने की पुष्टि नहीं है और यह एआई जनरेटेड भी हो सकता है। अगर इस वीडियो को असली माना जाये तो यह कहा जा सकता कि मीडिया की हालत भारत देश में किस तरह की हो गयी है। 

अगर हम राजनाथ सिंह के बयान की व्याख्या करते हैं तो यह सवाल भी जन्म लेता है कि आखिर अदृश्य अपराध को दुनिया के सामने किस तरह से लाया जा सकेगा। 


आसियान का शिखर सम्मेलन

मलेशिया में आज से आसियान (दक्षिण पूर्व देशों का समूह) का शिखर सम्मेलन आरंभ हो रहा है। इसमें चीन, अमेरिका, जापान और भारत जैसे बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष अथवा उनके प्रतिनिधि भाग लेंगे। 

पिछले 50 सालों से भी अधिक समय से दलाई लामा को भारत  ने शरण दी हुई है। तिब्बती लोगों को भारत में व्यवसाय के लिए छूट भी मिली हुई है। दलाई लामा को शांति का नोबल पुरस्कार भी मिला हुआ है लेकिन आसियान देश क्या चीन के कब्जे वाले तिब्बत को लेकर कोई बयान देंगे ताकि तिब्बती लोगों की घर वापसी हो सके। 


Friday, October 24, 2025

 

राजस्थान में आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची दिल्ली से आयी थी!





श्रीगंगानगर। राजस्थान में गत दिवस ही 30 से ज्यादा आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची को जारी किया। सोशल मीडिया हो या अन्य मीडिया, सभी ने तबादला सूची पर सवाल उठाये थे और जनता को जागृत करने का भी प्रयास किया। 

अगर तबादला सूची को देखा जाये तो सामने आता है वीके सिंह, विकास कुमार, दिनेश एमएन आदि को उनके पदों से अन्य पर स्थानांतरण किया जाना। 

एडीजी वीके सिंह एसओजी में नियुक्त थे। उन्होंने ही एसआई भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की जांच की थी और इस जांच के आधार पर राजस्थान हाइकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। इसी तरह से दिनेश एमएन के बारे में ज्यादा लिखने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे राजस्थान पुलिस के दबंग अधिकारी के रूप में पहचान रखते हैं। 

वहीं विकास कुमार नशे के खिलाफ एक बड़े अभियान को आगे बढ़ा रहे थे। उनको भी हटा दिया गया। 

अब सवाल यह उठ रहा है कि जो अधिकारी बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, उनको कैसे हटाया गया? और हटाने का कारण क्या था। उनके तबादले की आवश्यकता क्यों हुई। 

तबादला सूची पर भले ही राजस्थान के राज्यपाल के हस्ताक्षर हों, लेकिन इस सूची को लोक कल्याण मार्ग पर तैयार किये जाने की जानकारी है। 

लोक कल्याण मार्ग जो प्रधानमंत्री निवास के रूप में भी याद किया जाता है। 

पीएम ने एक चि_ी भेजी और जिसमें अधिकारियों को हटाने और उनके स्थान पर नये चेहरों का नाम था। इस तरह से नई दिल्ली से आयी चि_ी को राज्य सरकार की ओर से गजट नोटिफिकेशन के रूप में स्वीकार करते हुए सीएमओ, कार्मिक और राज्यपाल भवन कार्यालय से पारित करवाया गया। 

सवाल यह है कि पीएम, जिनके पास इस समय दुनिया भर की प्रमुख समस्याएं हैं। अमेरिका के साथ ट्रेड डील हो पाने के कारण उनके गुजरात राज्य में ही मंदी का शिकार व्यापारी लोग हो रहे हैं। उसका समाधान करने और वैश्विक नेताओं के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत करने का समय नहीं है। वे राजस्थान के अंदर आईपीएस की तबादला सूची को जारी कर रहे हैं। 

एक-दो अधिकारियों, जिनको पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीक माना जाता था, उनको मुख्य धारा वाले पदों पर नियुक्त कर यह संदेशदेने की कोशिश की कि यह राजे की सहमति से तैयार की गयी राज्य सरकार की सूची है। 


 

मोदी-शाह के हाथ से बिहार निकल गया तो..? यूरोप में फिर से क्यों आया बर्ड फ्लू,



श्रीगंगानगर। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का दौर चल रहा है। तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव की फोटो को भी होर्डिंग्स से हटा दिया है ताकि उनके कार्यकाल को लेकर तेजस्वी को टारगेट नहीं किया जाये। बिहार राज्य में करीबन 50 लाख वोटर्स के नाम काटे गये हैं, जिनको घुसपैठिया कहा जा रहा है। अमेरिका ने कनाडा के साथ व्यापार वार्ता को समाप्त कर दिया है। अब मार्को कोर्नी को एशिया में नये बाजार की तलाश करनी होगी। 

प्रमुख समाचारों पर नजर डाली जाये तो भारत में इस समय बिहार चुनाव की ही चर्चा हो रही है। नेता लोग, जो टिकट कटने या अन्य कारण से नाराज हैं, वे अपने दल को अलविदा कहकर दूसरे दल की ओर जा रहे हैं। इस तरह से बड़े नेता लोग एक-दूसरे के जीवन पर कटाक्ष कर रहे हैं। 

बिहार में पिछले 20 सालों से नीतीश कुमार का शासन है। नीतिश ने दो बार पाला बदला और वह तेजस्वी यादव के पास चले गये और फिर वापिस भाजपा के पास आ गये। इस तरह से जीतनराम मांझी को छोडक़र सत्ता उनके पास ही रही। नरेन्द्र मोदी के 2014 से पहले दिल्ली में वे उनसे बात नहीं करते थे। इस तरह से दोनों नेता एक दूसरे को देखकर नजरांदाज कर दिया करते थे और अब वही नेता लोग एक-दूसरे के लिए वोट मांग रहे हैं। 

दूसरी ओर कांग्रेस को देखा जाये तो उन्होंने 20 सालों में बिहार और उत्तर प्रदेश में किसी बड़े चेहरे को तैयार ही नहीं किया। बिहार में लालू परिवार तो उत्तर प्रदेश में मुलायम परिवार। इस तरह से यादव फैमिलिज के सहारे ही कांग्रेस काम चला रही है। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस ने कोई बड़ा चेहरा तैयार क्यों नहीं किया, इस संबंध में कभी सवाल ही नहीं हुआ होगा, फिर काहे को उन्होंने दोनों राज्यों में कांग्रेस को मजबूत करने का कोशिश किया होगा। 

उधर तमिलनाडू में भी इसी तरह की स्थिति है। कामराज के बाद वहां कोई बड़ा नेता नहीं बनाया गया और भारतीय जनता पार्टी भी इस प्रदेश में नेता लोग की फौज तैयार ही नहीं कर पाये। सच कहा जाये तो साउथ में भाजपा को पैर जमाने में ही जोर आ रहा है। कर्नाटक के अतिरिक्त केरल, आंधप्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडू में अभी सत्ता की कुंजी दूर है। 

अगर बिहार चुनाव का ही चर्चा कीजिये तो सामने आयेगा कि वहां पर 20 साल शासन करने वाले नीतिश कुमार के साथ इस बार कितना लोग हैं, यह चुनाव परिणाम बतायेगा। 

बिहार का चुनाव अगर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के हाथ से निकल गया तो लोकसभा चुनाव में भी उनको मुश्किल होगी। राज्यसभा में भी बहुमत हाथ से निकल सकता है। इसलिए पूरा जोर लगाया है दोनों नेता लोग, लेकिन जीत-हार को मतदाता तय करता है और इसका चिंतन तो किया जा सकता है कि अगर बिहार में सत्ता हाथ से गया तो इन दोनों नेता लोग का भाजपा पर पकड़ और कमजोर होगा?

संसदीय दल में सभी अपने लोग होने के बावजूद यह नेता लोग अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश नहीं कर पाये हैं। दूसरी ओर आरएसएस का कहना है कि उनका कोई हस्ताक्षेप नहीं होगा, भाजपा को खुद अपने अध्यक्ष का चुनाव करना है। इसलिए बिहार चुनाव मोदी-शाह का अग्रिपरीक्षा होगा। 


ट्रम्प का कनाडा को करारा जवाब

विश्व का प्रमुख समाचार में यह बताया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा के साथ व्यापार वार्ता को समाप्त कर दिया है। ट्रम्प प्रशासन का आरोप है कि पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का गलत संदेश कनाडा ने अपने विज्ञापन में पेश किया है। 

दोनों देश ट्रेड डील को लेकर व्यापार वार्ता कर रहे थे और ट्रम्प ने शुक्रवार को आदेश दिया कि वे कनाडा के साथ व्यापार वार्ता को समाप्त कर रहे हैं। 


अगला सप्ताह दुनिया के लिए महत्वपूर्ण

विश्व के लिए अगला सप्ताह जो सोमवार से आरंभ होगा, वह दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। कारण यह है कि ट्रम्प जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया की यात्रा करने वाले हैं। वे दक्षिण पूर्व की यात्रा में इन देशों के नेताओं से मिलेंगे और शी जिनपिंग के साथ भी अलग से वार्ता का कार्यक्रम तय किया गया है।  चाइना के साथ ट्रेड वॉर चल रहा है और राष्ट्रपति ने 100 प्रतिशत नया टैक्स लगाने की चेतावनी दी है जो 1 नवंबर से आरंभ हो सकता है। वहीं जापान की पीएम सने ताकाइची ने हाल ही में सत्ता संभाली है और इससे पहले उनको बड़े शिखर नेताओं के साथ वार्ता का अनुभव नहीं है। अब अभ्यास के लिए भी समय कम बचा है। इस तरह से उनको अपने समय की हरपल को महत्वपूर्ण मानना होगा ताकि ट्रेड डील के संबंध में पूर्ण वार्ता तैयार की जा सके। पूर्व पीएम ने यूएसए की यात्रा की थी किंतु इशिबा को इस्तीफा देना पड़ा था, क्योंकि वे अपनी पार्टी को उप चुनाव में नहीं जीता सके थे। 


हजारों मुर्गियों को मारना पड़ रहा है

रॉयटर्स समाचार का कहना है कि यूरोप में इस समय मुर्गियों में बर्ड फ्लू पाया जा रहा है और इस तरह की मुर्गियों को मारने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं है। यह वायरस इंसान में तो नहीं जा सकता किंतु दुधारू गायों को प्रभावित कर सकता है। दूध देने वाले अन्य पशुओं की सुरक्षा के लिए भी यह आवश्यक हो गया है। टीकाकरण पर भी निर्णय किया जा रहा है।


Thursday, October 23, 2025

 

दक्षिणपंथी नेताओं की राजनीति में मजबूती, मोदी मलेशिया क्यों नहीं गये, इजरायल हमास को हथियार डालने के लिए मजबूर कर सकेगा?



श्रीगंगानगर। साने ताकाईची। यह नया नाम है। इस नाम को इसलिए यहां लिया जा रहा है क्योंकि उन्होंने जापान जैसे उदारवादी राज्य में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है और वे दक्षिणपंथी मानी जाती हैं। इस तरह से दक्षिण पूर्व में भी एक नया चेहरा शामिल हो गया है। इससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प, नरेन्द्र मोदी, बेंजामिन नेतनयाहू ब्लादीमिर पुतिन और इटली की जॉर्जिया मेलोनी आदि को इस श्रेणी में रखा जाता था। वहीं भारतीय पीएम ने मलेशिया की यात्रा को अचानक स्थगित कर दिया। इससे पहले वे न्यूयार्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक सभा में भी शामिल नहीं हुए थे। इसको किस नजर से देखा जा सकता है?

जापान को नयी प्रधानमंत्री मिली है और साने ताकाइची ने नेशन फस्र्ट की नीति को अपनाते हुए अपनी कैबिनेट को सीमित रखने का निर्णय लिया है। 

दुनिया बता रही है कि इस समय दक्षिणपंथी नेताओं का दौर चल रहा है। भारतीय पीएम हिन्दूवाद के सहारे तीसरी बार चुनाव जीत चुके हैं। वे ऐसा करने वाले आजाद हिन्दुस्तान के तीसरे चेहरे हैं। 

अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ही चर्चा को आगे बढ़ाया जाये तो उन्होंने सितंबर माह में अचानक न्यूयार्क जाने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया था। वहां पर अपने विदेश मंत्री को भेजा था। जब वे जापान, चीन की यात्रा कर वापिस लौटे तो उन्होंने कहा, वे रात को ही दो देशों की यात्रा करके वापिस आये हैं। श्रोताओं ने तालियां बजायी तो पीएम को कहना पड़ा कि वे वापिस आ गये हैं, इसलिए तालियां बजायी जा रही हैं?

अगर गूगल के सर्च इंजन का इस्तेमाल किया जाये तो सामने आ रहा है कि ताशकंद-2.0 सफल नहीं हो पाया। 

मलेशिया जाने का विचार मोदी ने ताशकंद-2.0 के कारण स्थगित किया है। इस पर बहस होनी चाहिये। हालांकि यह बात छीपी रही थी और अब सोशल मीडिया धीरे-धीरे इस सच्चाई को सामने ला रहा है। 

अमेरिका और भारत के बीच इस समय संबंध अगर पिछले 2 दशक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं तो इसका कारण एक ही है। ट्रम्प अमेरिका फस्र्ट की नीति को अपने देश में लागू कर रहे हैं ताकि फिजूल खर्चों को समाप्त कर टैक्स पेयर को रियायत दी जाये जिससे उनके पास सेविंग हो और वे ज्यादा खरीददारी कर सकें। 

मोदी की दक्षिणपंथी विचारधारा इस समय इस कारण कमजोर हो रही है क्योंकि पिछले 8 सालों में इतने ज्यादा टैक्स लगा दिये गये कि कॉमन मैन के पास सेविंग कम हो गयी। वहीं खुदरा बाजार में बड़े खिलाडिय़ों को अनुमति दे दी गयी, जिस कारण खुदरा बाजार इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।

एमएसएमई को भी मोदी सरकार ने पुन:परिभाषित किया जिससे छोटे और मझौले उद्योगों को जो सहायता मिल सकती थी, वे भी बड़ी कंपनियां ले गयीं, जो सरकार के ज्यादा नजदीक थीं। 


9 अरब डॉलर का रक्षा खर्च बढ़ेगा

भारत सरकार इस समय विश्व के हालात को देखकर अपनी नीतियां बना रही है और उसने गुरुवार को ही 9 अरब डॉलर के हथियार खरीद को अनुमति प्रदान कर दी। अगर इसकी भारतीय मुद्रा में गणना की जाये तो करीबन 80 हजार करोड़ रुपये के रूप में संबोधित किया जा सकता है। 

सरकार की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि हर 40 दिन बाद नया युद्धपोत या पनडुब्बी को सेना के सुपुर्द किया जा रहा है। 

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लोंगेवाल से गुरुवार को देश के नाम संदेश दिया और बताया कि लोंगेवाल का भारतीय सामरिक इतिहास क्या है। वे इसके बाद राजस्थान के प्रवास पर पहुंच गये। 

भारत सरकार अचानक ही अपने रक्षा खर्च को कई गुणा बढ़ा दिया है और यह भी संदेश दिया जा रहा है कि अग्रिवीर योजना जिसमें चार साल की ही सेवा थी, उसमें से 75 प्रतिशत को स्थायी किया जायेगा, इस तरह से पैदल सेना की मानवीय शक्ति को भी बढ़ाया जा रहा है। 


हमास को हथियार डालने होंगे : अमेरिका

अमेरिका इस समय हमास पर दबाव बना रहा है कि वह समझौते के अनुरूप निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया को पूरी करे। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इजरायल गये और इसके बाद मार्को रूबियो भी येरूशलम पहुंच गये हैं। 

बेंजामिन नेतनयाहू को दक्षिणपंथी विचारधारा वाला नेता माना जाता है और उन्होंने हमास के साथ दो साल से भी लम्बा युद्ध कर इसको साबित भी किया। हालांकि उनके देश में ही युद्धविराम की मांग से संबंधित खबरें आ रही थीं। 

अगर हम दक्षिणपंथी विचारों वाले नेताओं की सूची बनाएं तो विश्व के तीन प्रमुख देश अमेरिका, चीन और रूस भी इसमें शामिल हो जाते हैं। चीन कम्यूनिस्ट विचाराधारा वाले देश है लेकिन वह भी उदारवाद के बीच दक्षिणपंथी विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है। 

यूरोप के फ्रांस में इमैनुअल मैक्रां को मध्यमार्गी माना जाता है और वे देश में राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं। 

ईटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने अपने देश में धर्म से संबंधित कई नयी व्यवस्थाओं को आरंभ किया है। 

यूरोप और अन्य देशों में इस समय बाहरी लोगों को स्वदेश भेजने की भी मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। 


ट्रम्प ने देश के प्रति प्रेम दर्शाया!

अमेरिका के कुछ लोगों का मानना है कि ट्रम्प बड़ी बात अनेक बार कह देते हैं, लेकिन उनका मानना है कि अमेरिका से ही सहायता लेकर अनेक देश अमेरिका के खिलाफ ही साजिश रचते हैं। इस कारण विरोधी भी अब ट्रम्प का गुणगान करते हैं। 

सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष की यात्रा पर सरकारी अनुमति से गये थे किंतु बाइडेन प्रशासन उनको वापिस लाना ही भूल गया और वे वहां वापसी का इंतजार करते रह गये। 21 जनवरी को डोनाल्ड ट्रम्प ने कार्यभार संभाला तो इसके साथ ही एलन मस्क की निजी कंपनी स्पेस एक्स के साथ मिलकर सुनीता और उनके साथियों को वापिस लाया गया। इस पर कई मिलियन डॉलर खर्च हुए और इसका पूरा खर्च डोनाल्ड ट्रम्प ने निजी तौर उठाया। 

इससे उन्होंने प्रमाणित किया कि वे अमेरिकंस से कितना लगाव रखते हैं और अपने देश के साथ उनका प्यार रियल है। राजनीति से प्रेरित नहीं। 

नासा को अपना यान भेजने के लिए कई प्रकार की मंजूरियां लेनी पड़ती और इस तरह से काफी टाइम बर्बाद होता, लेकिन ट्रम्प ने अपने निजी खर्च पर स्पेस एक्स के यान को भेजा जो उनको लेकर सुरक्षित वापिस लाया। सुनीता विलियम्स भारतीय-अमेरिकी हैं। 

अब वे डेमोक्रेटिक राज्यों के साथ संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि डेमोक्रेट शासित राज्यों में हजारों लोग डंकी रूट से आकर बसे हुए हैं। उनके पास रोजगार और पैसे की कमी है और इस कारण वे मूल अमेरिकंस के साथ अपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। इस तरह से कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उन्होंने नैशनल गार्ड को अनेक राज्यों में भेज दिया है। वाशिंगटन डीसी की सुरक्षा भी नैशनल गार्ड के पास है। 

माना जा रहा है कि करीबन दो करोड़ अवैध अप्रवासी अमेरिका में है। पांच लाख के करीब अवैध प्रवासी वापिस अपने देश जा रहे हैं क्योंकि एनएसजी अवैध अप्रवासी को जेल भेज देते हैं। ट्रम्प ने कहा है कि जो भी अप्रवासी कानूनी तौर पर अपने देश जाना चाहता है वह 2500 डॉलर की सहायता प्राप्त कर सकता है।  


Tuesday, October 21, 2025

 

मोदी-ट्रम्प के बीच वार्ता, ट्रेड को लेकर चर्चा



वाशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दीपावली पर्व पर भारतीय गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ फोन पर वार्ता की। दोनों देशों ने आपसी व्यापार को लेकर भी चर्चा की।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से इस बात की तस्दीक की है कि उन्होंने मोदी के साथ फोन पर चर्चा की। इस बैठक में दोनों देशों की चल रही व्यापारिक वार्ता पर विचारों का आदान-प्रदान किया। 

ट्रम्प का कहना था कि उन्होंने मंगलवार (अमेरिकी समयानुसार) को मोदी के साथ चर्चा के दौरान ऊर्जा व अन्य क्षेत्र पर व्यापक विचार-विमर्श किया। राष्ट्रपति का कहना था कि भारत गणराज्य की सरकार इस बात पर सहमत हो गयी है कि वह मास्को से तेल खरीद को सीमित करेगा। 

वाशिंगटन का पहले मानना था कि नई दिल्ली रूस से तेल खरीद को तत्काल प्रभाव से बंद करे। उनका कहना है कि दोनों देश बड़ी ट्रेड डील को पूर्ण करने में जुटे हैं। 

हालांकि समाचारों में भारतीय समयानुसार  मंगलवार को यह खबर दी गयी थी कि वित्त मंत्री की यूएसए यात्रा स्थगित हो गयी है।


ध्यान रहे कि दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर होने के बावजूद शीर्ष स्तर पर दोनों देशों में वार्ताओं का दौर जारी रहा। 

यह भी संभव है कि प्रधानमंत्री मोदी की आसियान देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान विशेष आमंत्रित डोनाल्ड ट्रम्प की वार्ता हो। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि वे अगले दो हफ्तों में आसियान की यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मिलेंगे और अगले वर्ष उनका चाइना की यात्रा का कार्यक्रम है। 


व्हाइट हाउस में दीपावली का जश्र मनाया गया

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में व्हाइट हाउस में दीपावली का त्योहार मनाया गया। इस मौके पर खुफिया एजेंसियों की निदेशक तुलसी गिबार्ड और एफबीआई के निदेशक काश पटेल सहित अन्य कई भारतीय मूल के लोग थे। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में दीपक प्रज्जवलित किया। तुलसी ने दीपावली पर्व के प्रकाश पर महत्व दिया। 


नई दिल्ली और लाहोर सबसे प्रदूषित शहर बने

दीपावली पर्व के दौरान आतिशबाजी के कारण नई दिल्ली में एक बार फिर से वायु की गुणवत्ता प्रभावित हो गयी है। यह जानकारी मीडिया आउलेट ने दी है। 

समाचारों में बताया गया है कि नई दिल्ली में वायु गुणवत्ता को मापने वाले एक्यूआई 400 को पार कर गया है। इस तरह से राजधानी सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर बन गया। वहीं लाहोर में एक्यूआई का लेवल 200 से ज्यादा है और वह दुनिया का दूसरा शहर है। पाकिस्तान की राजनीति, सैन्य योजना पाक शासित पश्चिमी पंजाब में होती है।  


 

मोदी सरकार ‘गेहूं’ को वायदा कारोबार में शामिल क्यों नहीं करती?



श्रीगंगानगर। अगर हम भारत देश का प्राचीन इतिहास देखें तो सामने आता है, ऋषि गौतम ने हजारों साल पहले या उससे भी कहीं ज्यादा, अपनी पत्नी को श्राप दिया था और उसका निवारण करने के लिए त्रेता युग को पहले ले आये और द्वापर युग को बाद में लेकर आये। इस तरह से भगवान श्रीराम चंद्र जी का जन्म पहले हुआ। 

इसका अर्थ है कि ऋषि गौतम ने युग को ही बदल दिया था। इस तरह से इतिहास के पन्नों पर उनका जिक्र होता है। अगर हम कलयुग की चर्चा करें तो सामने आयेगा, 90 का दशक, जब समाजवाद से आर्थिक दौर में सनातन धर्म प्रवेश कर गया। 

नरसिंह राव के प्रधानमंत्री रहते हुए डॉ. मनमोहनसिंह ने वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला और ट्रेड पेपर्स ने इसको उदारवाद का नाम दिया। इस तरह से हम उदारवाद में शामिल हो गये। 

हमें पता ही नहीं चला कि कब हमारे परिवार में मौसी, मामा, चाचा-ताया आदि का रिश्ता खत्म होने लगा। 

डॉ. सिंह ने जिंस और मैटल्स पर सट्टाबाजी का सरकारीकरण कर दिया। इस तरह से भारतीय जिंसों को वायदा कारोबार में शामिल कर लिया गया और सोना-चांदी आदि धातु भी सट्टेबाजी के अंग बन गये। 

गेहूं आदि जिंसों खाद्यान्न जिंसों को शामिल नहीं किया गया, अन्यथा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की थाली से रोटी-सब्जी भी गायब हो जाती। 

अब हम सवाल करें कि गेहूं और चावल को इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया, क्योंकि इससे सट्टेबाज इसके दामों को ऊंचे आसमान तक ले जा सकते थे। 

अब चर्चा सोना-चांदी की जाये तो क्या सामने आता है? सामने आता है, सोना का तोला भाव अर्थात 10 ग्राम के दाम 1 लाख 30 हजार रुपये से भी ज्यादा हो गये हैं। 

सटोरिये क्रूड ऑयल, सोना-चांदी के दामों को प्रभावित कर रहे हैं। 2014 को विश्व गुरु बनने का उपदेश देने वाले नरेन्द्र मोदी की सरकार के समय सोने का भाव 30 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम था। बड़े सटोरिये सरकार के नजदीक पहुंच गये और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सिंडीकेट बना, जिसने सोने के भाव को 10 सालों के भीतर एक लाख रुपये तक बढ़ा दिया। पिछले साल की चर्चा की जाये तो यह 70 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ गया है। 

विश्वस्तर पर बड़े खिलाड़ी जो विभिन्न गणराज्यों में सरकार के नजदीकी थे, सभी इस पर सहमत थे और सोने का भाव बढ़ता चला गया और आज हालात यह है कि सोना मध्यवर्गीय परिवारों की पहुंच से दूर हो गया है। 

भारतीय संस्कृति में सोना को महिलाओं के शृंगार के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इस तरह से महिलाओं का शृंगार ही छीन लिया गया। ब्याह-शादी में भी सोने के उपहार बहू और दामाद को दिये जाते हैं, अब इस परंपरा को खत्म कर दिया गया और वह भी तब जब सनातन धर्म का झंडा लेकर चलने वाले सत्ता पर काबिज हैं। 

सोने की खानों में अभी सोना खत्म नहीं हुआ है। अनेक हवाई अड्डे और बंदरगाह प्राइवेट हो गये हैं, इस तरह से सोने की तस्करी भी होती है और सरकार के नजदीकी लोग इसको अंजाम दे रहे हैं। 

अब यह समझ आ जाना चाहिये कि सिंडीकेट ने किस तरह से सोने के भावों को प्रभावित किया। टैक्स फ्री के रूप में देखे जाने वाले कुछ देश सिंडीकेट के पनाहगाह बने हुए हैं और वहां की जनता चाहे आर्थिक रूप से कमजोर हो। 

अब अगर रूस को देखें तो उसके पास खनिजों का सबसे विशाल भंडार है और वहां क्या हो रहा है। रूबल भारतीय रुपया से भी कमजोर है। तकनीक के क्षेत्र में यह देश दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। रूस के पास भारी-भरकम सोने के भंडार हैं। वहां से सोने को दुनिया के अन्य देशों में भेजा जाता है। 


मंदी क्यों रही दीपावली?

आर्थिक रूप से देखा जाये तो इस बार दीपावली बाजार में वह रौनक नहीं ला सकी, जो पिछले कई सालों से देखने को मिलती थी। असल में भारत गणराज्य की सरकार ने खेल ही ऐसा खेला कि किसी को समझ ही नहीं आया, करना क्या है। लोग तो लाइन में ही लगे रहे। 

दीपावली उत्सव सर्दियों की शुरुआत में आता है। उसी समय प्राचीन काल से किसान अपनी फसल भी लेकर आते हैं और इस तरह से किसानों के पास खरीददारी के लिए पर्याप्त पैसा आ जाता है। वहीं केन्द्र और राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों को बोनस भी देती हैं और बड़ी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को दीपावली उत्सव के लिए अतिरिक्त धन देती हैं। इस तरह से खरीददारी का माहौल बन जाता है और रुपया एक से दूसरे हाथ पहुंचता है और इस तरह से जीडीपी बढ़ती है। 

अब भारत सरकार के नुमाइंदों ने पहले नोटबंदी लेकर आये और फिर जीएसटी का आगमन हुआ। नोट बंदी के कारण घर में सेविंग पैसा बाजार में आ गया और बैंकों के माध्यम से सरकार तक पहुंच गया। जीएसटी के माध्यम से बड़े टैक्स भी वसूले गये। 

अब सरकार ने खुद माना है कि जीएसटी-2 के जरिये वे टैक्स को कम कर रही हैं और पिछले अनेक सालों तक वह टैक्स के जरिये खुली कमाई का भंडारण अपने पास कर रही थी। 

लोगों से ज्यादा टैक्स वसूला गया और ज्यादा पैसा सरकार तक पहुंचा। जिससे मित्रों तक आसानी से लाखों-करोड़ रुपये पहुंच गये। बाजार में पैसा गायब होने लगा और मीडिल क्लास बैंकों के सहारे हो  गयी। सम्पत्तियां गिरवी रखी जाने लगी। दूसरी ओर मित्रों को तीन-चार ट्रिलियन रुपये दिये गये। यह खिलाड़ी एक-दो नहीं बल्कि दर्जन भर थे। इस तरह से जनता के पैसे की खुली लूट हुई। मुकेश अम्बानी के छोटे भाई अनिल के बारे में सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर यह खुलासा किया कि उन्होंने हजारों करोड़ रुपये बैंकर्स के साथ मिलकर लिये और उसका व्यवसाय चलाने के बजाय अन्य खातों में ट्रांसफर कर धोखाधड़ी की गयी। 

टोल टैक्स के जरिये भी हर माह कई हजार करोड़ रुपये वसूल किये जाते और सरकार के नजदीकी लोगों को यह ठेका दिया जाता और वसूली के लिए कर्मचारी रख दिये गये। इस तरह से 10 सालों में अनेक बैंक और वित्तीय एजेंसियों को लाइसेंस दिये गये। यह सब धन कुछ लोगों का था और जनता के पैसों को जनता को ही उधार दिया गया और मोटी रकम वसूल की गयी। 

अब बिहार चुनाव से पहले सरकार को लगा कि बाजार में पैसे नहीं है और लिक्विड मनी की कमजोरी से दीपावली फिकी रहेगी तो सरकार ने महिलाओं को 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर करने का कार्य किया। 

वोट की खातिर सरकार क्या कर सकती थी और उसने यह दिखाया भी। 


Monday, October 20, 2025

 

दीपोत्सव के दिन ऑस्ट्रेलियाई पीएम पहुंचे व्हाइट हाउस



वाशिंगटन। भारत में दीपोत्सव को लेकर आतिशबाजी का शौर देर रात तक जारी है। हालांकि खरीददारी का आलम यह है कि श्रीगंगानगर जिला जिसे राजस्थान का आर्थिक रूप से सिरमौर कहा जाता है, वह रात 9 बजे के करीब बंद हो गया। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि लोगों की परचेज पॉवर कितनी मजबूत है।  वहीं ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मेजबानी के लिए व्हाइट हाउस में प्रवेश किया। 

अंधेरे पर प्रकाश और अधर्म के खिलाफ धर्म की जीत का प्रतीक दीपावली पर्व आज सोमवार (10 अक्टूबर 2025) को परंपरा विधि के अनुसार मनाया जा रहा है। मंदिरों और घरों में लक्ष्मी पूजन हुआ और दुनिया की तरक्की और खुशहाली के लिए प्रार्थना की गयी। 

दीपावली पर्व की दुनिया भर के नेताओं ने बधाई दी है। इनमें वाशिंगटन डीसी से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी प्रकाशोत्सव की बधाई दी। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अल जरदारी ने भी अल्पसंख्यक हिन्दुओं को अंधेरे पर प्रकाश की विजय दिवस पर शुभकामनाएं प्रेषित की। 

अब दुनिया के अन्य समाचारों को देखें तो सामने आता है कि अमेजन के एडब्ल्यूएस क्लाउड में आई तकनीकी खराबी के कारण घंटों तक हजारों या लाखों वेबसाइट डाउन हो गयीं। स्नैपचैट जैसी कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रभावित हुए। 

दुनिया भर में जहां हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं, वे दीपावली पर्व मना रहे हैं, इस बीच ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज वाशिंगटन डीसी पहुंचे। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वयं व्हाइट हाउस के मुख्य द्वार पर प्रधानमंत्री की अगुवानी की। 

पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन के कार्यकाल में 2023 में ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बी देने का त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, इसमें ब्रिटेन भी शामिल था और इसको एयूकेयूएस नाम दिया गया था। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऑस्ट्रेलिया को विश्वास दिलाया कि निर्धारित समय पर पनडुब्बी उनको मिल जायेंगी। वहीं रक्षाक्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया ने यूएस के साथ नये समझौते भी किये। 

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इन पनडुब्बी से प्रशांत महासागर की सुरक्षा को मजबूत किया जायेगा। पनडुब्बी के लिए प्रशिक्षण कार्य जल्द शुरू हो जायेगा और इन पनडुब्बी को चीन के द्वार पर तैनात किया जायेगा। 


अमेरिकी राजदूत ने नहीं संभाला कार्यभार

भारत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने अतिविश्वासी अधिकारी सर्बियो गौर को राजदूत के रूप में नियुक्त किया है। सीनेट में उनकी नियुक्ति को मंजूरी भी मिल चुकी है। राजदूत गौर 14 से 19 अक्टूबर तक भारत में थे किंतु उन्होंने कार्यभार नहीं संभाला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई नेताओं और समकक्षीय अधिकारियों से भी मुलाकात की। 

भारत और अमेरिका के बीच तनाव का दौर चल रहा है जो शायद पिछले 20 वर्षों में दिखाई नहीं दिया था। इस कारण राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने नजदीकी को एम्बेसडर की जिम्मेदारी दी और उन्हें दक्षिण व पश्चिमी एशिया का नोडल ऑफिसर भी नियुक्त किया गया है। 

अब भारत के प्रधानमंत्री तीन दिनी दौरे 26 से 28 अक्टूबर तक मलेशिया के प्रवास पर होंगे। कुआंलापुर व साउथ कोरिया में आसियान व अन्य समूह की बैठकें होने वाली हैं। 

राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस दौरे के लिए अपनी पुष्टि कर दी है। मलेशिया का कहना है कि भारत गणराज्य के पीएम भी आ रहे हैं। इस तरह की जानकारी रॉयटर्स ने दी है। 

अगर ट्रम्प और मोदी दोनों इस सम्मेलन में शामिल होते हैं तो जो व्यापारिक युद्ध व तनाव का दौर चल रहा है, उसमें सुधार हो सकता है और नवंबर में दोनों देशों की व्यापारिक वार्ता में भी ऊर्जा का संचार हो सकता है। हालांकि ट्रम्प का कहना है कि भारत मास्को से तेल की खरीद को तत्काल बंद कर दे। 

रूसी राष्ट्रपति दिसंबर में भारत आ सकते हैं और जनवरी माह में भारत क्वाड और ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर सकता है। इस तरह से यह दौरे और यह चर्चाएं अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए पर्याप्त हो सकती है। 


दीपावली पर श्रीगंगानगर में मंदा रहा

श्रीगंगानगर में रात 9 बजे के बाद दीपावली उत्सव होने के बावजूद बाजार बंद हो गया। किसान नेता गुरबलपाल सिंह संधू का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया फेसबुक पर लाइव इवेंट में दिखाया कि किस तरह से बाजार बंद हो गये हैं। 

हालांकि धनतेरस बोनस मिलने के कारण कर्मचारियों ने खरीददारी की थी किंतु आमजन इस मंदे से बाहर नहीं निकल पाया। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 हजार रुपये तक के लॉन का ऑफर दिया था किंतु इसका भी असर बाजार में दीपावली के दिन नजर नहीं आया। 

किसानों का आरोप है कि सरकार की लापरवाही के कारण नरमा-कपास का एमएसपी नहीं मिल पा रहा है। राजस्थान के कृषि मंत्री बार-बार श्रीगंगानगर आकर नकली बीज, पेस्टीसाइड और डीएपी के बारे में खुलासा कर रहे हैं। डीएपी और गंगनहर में पानी की कमी के कारण किसानों ने धरना भी लगाया हुआ है। 

ध्यान देना चाहिये कि भारत में मंदिरों में गुल्लक के पैसे भी सरकार अपने कब्जे में ले लेती है और यह भारत की जीडीपी का 2 प्रतिशत या इससे भी ज्यादा का योगदान हो सकता है। हालांकि अन्य धार्मिक स्थानों पर सरकार कोई नियंत्रण नहीं रखती है। 


Thursday, October 16, 2025

 

भारत की राजनीति किस दशा में जा रही है?





श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य के पंजाब-हरियाणा प्रांतों में जो चल रहा है, उससे व्यवस्थाओं या कहें कि सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद भी कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। 

गुरुवार (16 अक्टूबर 2025) को यह समाचार सामने आया कि रोपड़ के उप महानिरीक्षक हरचरणसिंह को रिश्वत लेने के आरोप में एक साथी के साथ गिरफ्तार किया गया है। यह कार्यवाही पंजाब की विजीलैंस टीम ने नहीं बल्कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो के दल ने की। समाचारों में बताया जा रहा है कि उनके निवास व अन्य प्रोपर्टीज की जांच की गयी तो पता चला कि वे कई करोड़ के मालिक हैं। भारी-भरकम कैश के अतिरिक्त 1.5 किलो सोना भी मिला। 

अब भुल्लर की गिरफ्तारी के साथ यह भी जानकारी हासिल करनी आवश्यक है कि सीबीआई को अचानक पंजाब में भारतीय पुलिस सेवा स्तर के अधिकारियों के भ्रष्टाचार की याद कैसे आ गयी। 

राजस्थान के जयपुर का एक व्यापारी नवनीत चतुर्वेदी पंजाब जाते हैं। वहां वे राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते हैं। निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन पत्र की जांच के बाद यह निर्णय लिया कि चतुर्वेदी ने आम आदमी पार्टी के विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर कर नामांकन पत्र दाखिल किया। 

उनके नामांकन पत्र खारिज होते ही पंजाब के रोपड़ जिले की पुलिस सक्रिय हो गयी। हालांकि पंजाब-हरियाणा की राजधानी चण्डीगढ़ है। रोपड़ पुलिस तुरंत ही सक्रिय हो गयी और चतुर्वेदी को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। चण्डीगढ़ पुलिस ने उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हुए उसको अपनी निगरानी में पुलिस थाना लेकर पहुंच गयी। 

रोपड़ पुलिस ने चण्डीगढ़ पुलिस से पत्र व्यवहार करते हुए चतुर्वेदी की कस्टडी की मांग की। लेकिन चण्डीगढ़ पुलिस ने उसको सुरक्षा दी। रोपड़ पुलिस ने चण्डीगढ़ पुलिस के एक थाने के बाहर अपना पहरा लगा दिया। इस तरह से रोपड़ और चण्डीगढ़ पुलिस के बीच तलखी बढ़ गयी और आखिर में गिरफ्तारी वारंट के आधार पर पंजाब पुलिस चतुर्वेदी को गिरफ्तार कर ले गयी। 

यह मामला सुर्खियां बना हुआ था और इनकी स्याही फीकी होने से पहले ही नयी खबर आ गयी कि सीबीआई की विजीलैंस विंग को यह शिकायत मिली है कि रोपड़ पुलिस के डीआईजी ने रिश्वत की मांग की है। इस शिकायत के आधार पर डीआईजी रोपड़ रेंज को रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार करने का दावा किया गया और उनके निवास आदि की भी तलाशी आरंभ हो गयी। 

अब यहां उल्लेख करना आवश्यक है कि चण्डीगढ़ केन्द्र शासित प्रदेश है और वहां पर चण्डीगढ़ पुलिस का प्रशासन है। इस तरह से चण्डीगढ़ पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन कार्यरत है। अब सीबीआई की एंट्री हुई तो वह भी भारत सरकार की एक जांच एजेंसी है। 

इस तरह से टिप्पणीकारों का मानना है कि यह उच्चस्तर की लड़ाई है। एक तरफ आम आदमी पार्टी की सरकार है तो दूसरी ओर भाजपा। दिल्ली में भी इसी तरह से घमासान चला था। 

अब हरियाणा में भी इसी तरह की स्थित रही। चण्डीगढ़ में हरियाणा पुलिस के एक आईपीएस वाई पूर्णकुमार ने 7 अक्टूबर को आत्महत्या की और इसके कुछ दिनों बाद एक एएसआई ने सुसाइड कर ली। 

दिवंगत आईपीएस अधिकारी की पत्नी (आईएएस अधिकारी) की रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज हुआ। दूसरी ओर एएसआई के सुसाइड मामले में दिवंगत आईपीएस की पत्नी पर आत्महत्या दुष्प्रेरणा के आरोप में मुकदमा हुआ। 

आईपीएस अधिकारी ने अपने सुसाइड नोट में हरियाणा के डीजीपी आदि को पक्षकार बनाया था तो एएसआई ने अपने सुसाइड नोट में आईपीएस की पत्नी को नामजद करवाया। 

सिस्टम पर अगर सवाल उठाया जाये तो सामने आता है कि आईपीएस की पत्नी को ही विश्वास नहीं हो रहा था कि उनको न्याय मिल पायेगा। उन्होंने 8 दिनों बाद पोस्टमार्टम की कार्यवाही के लिए अपनी सहमति दी। इसी तरह से रोहतक में एएसआई की मृत्यु के बाद उनका परिवार भी न्याय की मांग करने लगा। 

इस तरह से सिस्टम पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और यह मांग की जा रही है आजादी से पूर्व के चल रहे सिस्टम में 70 सालों बाद भी सुधार नहीं हो पाया है। इसके लिए एक कमेटी बनाकर सिस्टम को किस तरह से बेहतर बनाया जा सकता है, उसकी समीक्षा की जानी चाहिये। 

पंजाब में केन्द्र और राज्य सरकार के बीच चल रही खींचतान सामने आयी तो हरियाणा में कैडर को लेकर उत्पीडऩ के आरोप जनता के समक्ष पेश आये। 


सडक़ सुरक्षा पर भी उठ रहे हैं सवाल

राजस्थान में दो सडक़ घटनाओं ने सडक़ सुरक्षा पर सवाल उठाये हैं। जैसलमेर-जोधपुर के बीच स्लीपर कोच बस में आग लगने की घटना सामने आयी और यात्री उस बर्निंग बस में फंस गये। बाहर नहीं निकल पाये। दो दर्जन की मौत की खबर दी जा रही है और इतने या इससे भी ज्यादा घायल हैं। 

वहीं इससे पहले दो ट्रकों की भिड़ंत में आग लगने से एक ट्रक में भरे गैस सिलेंडर फट गये थे। धमाके होते रहे। 

यह दोनों घटनाएं काफी कुछ कह रही हैं और सरकार से आग्रह कर रही हैं कि इस तरह की घटनाओं की रोकथाम और सडक़ सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाये जाने चाहिये, उठाये जायें।  


 

मोदी ने कालाधन वापसी पर क्यों बदले शब्द, आरएसएस की धारणा क्या रंग लायेगी, अडाणी का नया कारोबार मोदी को जितायेगा-2029?



श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की सरकार अब विदेश से कालाधन लाने की अपनी नीति को पुर्नभाषित कर रही है। पीएम का सोशल मीडिया पर बयान तो यही कह रहा है। वहीं धार्मिक ग्रंथों में बदलाव के बयान को लेकर आरएसएस मुश्किल स्थिति में है। फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता जारी है। पूर्व अमेरिकन राष्ट्रपतिज भी अब ट्रम्प की तारीफ क्यों कर रहे हैं?
वर्ष 2014 के बयानों के आधार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभाली थी। उस समय उनका कहना था कि ‘अच्छे दिन आने वाले हैं,’ विदेश के कालाधन से सभी को 15-15 लाख रुपये की राशि मिलेगी। 2022 तक सभी के पास अपना घर होगा। हालांकि पार्टी ने बाद में इसको एक चुनावी झुमला बताया। 
अब पीएम का एक सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल हुआ जिसमें उन्होंने विदेशी काला धन को पुर्नभाषित कर दिया। उन्होंने कहा, कालाधन विदेश से नहीं वीदेश से लाया जायेगा, ऐसा उनका कहना था। 
विदेश को वीदेश के रुपांतरण से पूरा मामला ही सफेद पन्ने की तरह हो गया। अब आगे शब्दों को चुना जाये तो सामने आता है, आरएसएस का बड़ा बयान। 
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सोशल मीडिया पर स्वीकार किया कि 1950-60 के बीच कुछ लोगों ने धार्मिक ग्रंथों में कुछ बदलाव कर दिया था। यही अब तक पढ़ाया जा रहा था। 
धार्मिक ग्रंथों में हुए बदलाव की जानकारी होने के बावजूद अभी तक उनको पुराने स्वरूप में नहीं लाया गया है। अकेले हिन्दू धर्म के ग्रंथों में बदलाव हुआ या अन्य धर्मों में भी। यह स्पष्ट नहीं हो पाया। 

अडाणी के साथ चुनाव-2029 की तैयारियां शुरू?
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तैयारियां आरंभ हो गयी हैं। गूगल ने भारत में करीबन 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने का एलान किया है। इससे डेटा सेंटर भारत में ही बन जायेगा। इसका एक फायदा यह हो सकता है कि विदेशों से डेटा संग्रह के लिए सीधा धन विदेश जाता था जो अब भारत में ही खरीद-बेचा जा सकेगा। 
डेटा सेंटर में पार्टनर होने की जिम्मेदारी गौतम अडाणी को दी गयी है। मुकेश अम्बानी तो कुंभ मेला में परिवार के साथ संगम में गंगा-यमुना-सरस्वती नदी में स्नान कर खुद को अलग करने का संकेत दे दिया था। 
अडाणी समूह ने पिछले 10 सालों में अभूतपूर्व विकास किया है। जयपुर, अहमदाबाद आदि के बाद मुम्बई के नये एयरपोर्ट को भी लीज पर केन्द्र सरकार ने दे दिया है। इस तरह से आधा भारत का वायु नियंत्रण अडाणी समूह के पास आ गया है। 
इसी अडाणी समूह को गूगल को भागीदार बनाया गया है। समूह ने हथियार बनाने का लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया है। इस तरह से रक्षा क्षेत्र में भी उसका आगमन हो चुका है। डाटा और डेटा दोनों ही क्षेत्रों में यह कंपनी प्रवेश करने का मानस बना चुकी है और इसको इम्पलीमेंट भी किया जा रहा है। 
अडाणी समूह का अर्थ ही नरेन्द्र मोदी सरकार की निकटता को परिभाषित करता है। इस तरह से डेटा सेंटर से भारतीयों के बारे में अधिक जानकारी हासिल की जा सकेगी। 

गाजा में शांति लौटने से विश्व में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे?
इजरायल और गाजा प्रशासनिक तंत्र के बीच युद्ध विराम होने से जहां हमास को फिर से चर्चा में ला दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शांतिदूत की भूमिका निभाने का दावा करते हुए इजरायल और फिलिस्तीन के बीच समझौता करवा दिया। 
इस तरह से विश्व में एक नये अध्याय का शुभारंभ हो गया है। हालांकि कुछ पश्चिमी देशों ने यह माना था कि गाजा को मान्यता देने से यह मामला शांत हो जायेगा लेकिन ट्रम्प ने नया शांति प्रस्ताव पेश किया और इससे अरब के देश भी सहमत हो गये। 
मिस्र में अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन हुआ। इसमें फ्रांस, इटली सहित अनेक देशों के शिखर नेता शामिल हुए। भारत ने इसमें अपना राष्ट्रप्रमुख नहीं भेजा, बल्कि विदेश राज्यमंत्री को पीएम के प्रतिनिधि के तौर पर भेजा गया। अगर भारत के शीर्ष नेता वहां जाते तो संभवत: अमेरिका-भारत के बीच चल रहा ट्रेडर वॉर भी चर्चा हो सकती थी और इसके जल्दी ही अस्तित्व में आने से टैरिफ जो 50 प्रतिशत तक लागू कर दिया गया है, उसको कम किया जा सकता था। 
टैरिफ के लागू होने के बाद जो निर्यात प्रभावित हो रहा था, उसको नियंत्रित किया जा सकता था। खैर सरकार ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत नहीं करने का निर्णय लिया है और इसका राजनीतिक महत्व क्या होगा, यह आने वाले दिनों में सामने आ पायेगा। गाजा में 2 वर्षों के बाद अमन लौटने से अमेरिका की राजनीति की सोच में भी बदलाव देखा जा रहा है। पूर्व राष्ट्रपतियों जॉर्ज बुश, बराक ओबामा, बिल क्लिंटन आदि ने ट्रम्प प्रशासन की तारीफ की है। 

अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना का जुलूस निकला
अफगानिस्तान में सत्तारुढ़ तालिबान ने पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के बाद पाक सेना की वर्दी को चौराहों पर टांग दिया है। इससे पाकिस्तान के साथ हुए 48 घंटे के शांति प्रस्ताव को भी झटका लगा है। 
विदेश मीडिया में बताया जा रहा है कि तालिबान ने पाकिस्तान सैनिकों की पतलूनों को चौराहों पर टांग दिया है। 
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह संघर्ष क्या रूप लेगा, यह भी देखने वाला होगा। हाल ही में भारत ने काबुल में अपना दूतावास पुन: आरंभ कर दिया था। 

Friday, October 10, 2025

 

अगर ट्रम्प ‘नोबल’ की रट नहीं लगाते...



श्रीगंगानगर। नोबल पुरस्कार (2025) की घोषणा कर दी गयी है और यह ईनाम वेनेजुएला में विपक्षी नेता की पत्नी को दिया गया है। शांति पुरस्कार मारिया मैचुदो को दिया गया है। इस कदम से हम यह मान सकते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अनदेखी की गयी है? दूसरी ओर अन्य प्रमुख समाचारों में फ्रांस के राष्ट्रपति इैमुनल मैक्रां ने नये प्रधानमंत्री-कैबिनेट के लिए चेहरों की तलाश आरंभ कर दी है।  वहीं डीएपी खाद के लिए हनुमानगढ़ में पुलिस बल का किसानों को सामना करना पड़ा। 

नोबल शांति पुरस्कार हर वर्ष अन्य क्षेत्रों की तरह दिया जाता है। वैज्ञानिक, सामाजिक क्षेत्र और शांति जैसे मार्गों पर चलने वाले पथप्रदर्शकों को दिया जाता है। वर्ष 2024 या वर्ष 2023 का शांति नोबल पुरस्कार किसको दिया गया था, क्या किसी को याद है। शायद 10 प्रतिशत लोगों को भी याद नहीं होगा। इसकी दुनिया में 2025 की तरह चर्चा भी नहीं हो रही थी। 

राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्वयं कई मौकों पर शांति पुरस्कार के लिए हकदार होने की चर्चा की तो दुनिया भर में इस बात पर निगाह गढ़ गयी कि इस साल यह पुरस्कार किसे दिया जाता है? ट्रम्प ने 7 युद्ध रुकवाने का दावा किया व गाजा में स्थायी शांति के लिए जो मसौदा पेश किया, वह दुनिया भर में पसंद किया गया और उस पर अमल भी आरंभ हो गया। इस तरह से उन्होंने नोबल पुरस्कार-2025 की चर्चा आरंभ कर दी और यह चर्चा दुनिया भर में गांवों-गलियों तक पहुंच गयी। 

सबकी नजर शुक्रवार पर थी, जब नोबल पुरस्कार की घोषणा की जानी थी। असल में नोबल पुरस्कार के लिए ट्रम्प फैमिली, संयुक्त राज्य अमेरिका, व्हाइट हाउस व रिपब्लिकन पार्टी ने आवेदन ही नहीं किया। अब आवेदन ही नहीं किया तो ईनाम कैसे मिलता?

पाकिस्तान, इजरायल और अन्य देशों की तरफ से यह चर्चा आरंभ की गयी थी कि विश्व शांति के लिए भागदौड़ करने वाले ट्रम्प को शांति पुरस्कार मिलना चाहिये। यह पर्दे के सामने वाला दृश्य है। अब पर्दे के पीछे जो राजनीति चल रही थी, उसको समझने की आवश्यकता है। 

नोबल पुरस्कार दिया गया वेनेजुएला के विपक्षी दल के नेता की पत्नी को, जिनका नाम मैरी मैनुदो है। असल में वेनेजुएला में सत्ता पर काबिज निकोल्स मैदुरो को अमेरिका व उनके सहयोगी देश मान्यता नहीं देते हैं। वेनेजुएला सरकार पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध लगाये हुए हैं। हाल ही में वेनेजुएला सरकार पर आरोप लगाया गया था कि उसके देश में ड्रग्स तस्करी की जाती है। अमेरिका के रक्षा बलों ने मिसाइल से हमला कर वेनेजुएला से आने वाले बोट पर हमले किये थे। अनेक तस्करों को मार दिये जाने का दावा किया गया था। 

अब उसी वेनेजुएला में विपक्षी दल के नेता की पत्नी को शांति प पुरस्कार मिल गया है और विश्व भर के लोगों का ध्यान उस तरफ चला गया। अमेरिका के राजनीति के जानकार मानते हैं कि वे वर्षों से ट्रम्प को जानते हैं और उनकी नीतियां इस प्रकार की नहीं होती कि वे दूसरे देशों से पुरस्कार प्राप्त कर अपने मन को बच्चों की तरह राजी कर लें। 

सच यह है कि अगर ट्रम्प बार-बार नोबल शांति पुरस्कार का जिक्र नहीं करते तो दुनिया का ध्यान वेनेजुएला की तरफ नहीं जाता। वेनेजुएला ने दुनिया को सात मिस वल्र्ड-मिस यूनिवर्स दी हैं और इस छोटे से देश को कभी सुंदरता के लिए दुनिया भर में जाना जाता था। अब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण युवाओं से विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका छिन गया है। जो वेनेजुएला के रास्ते अमेरिका में प्रवेश किये थे, उन सभी लोगों को जेल में डाला जा रहा है। 

ट्रम्प ने डेमोक्रेटिक शासित राज्यों में राष्ट्रीय सुरक्षा बलों को नियुक्त कर दिया है। कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं हो, इस कारण नियुक्तियां की गयी है। पुलिस राज्य सरकार के अधीन कार्य करती है, इस कारण नैशनल गार्ड को नियुक्त किया जा रहा है। 


फ्रांस में राजनीतिक संकट बरकरार

यूरोपीय देश फ्रांस में राजनीतिक संकट बरकरार है। दो सालों के भीतर छठे प्रधानमंत्री को तलाश किया जाना है जो वामपंथी और दक्षिण पंथियों को साथ लेकर बजट पारित करवा सकें। राष्ट्रपति ईमुनल मैक्रां ने शुक्रवार को अपने राजनीतिक दल के नेताओं के साथ बैठक की। हालांकि चर्चा के बाद रात तक नाम को फाइनल नहीं किया जा सका।  सबसे बड़ी समस्या यह है कि सदन में बहुमत नहीं मिल पाने के कारण इस साल बजट पारित नहीं हो पा रहा है। 

जापान में भी राजनीतिक घटनाक्रम इसी तरह का बना हुआ है। 


ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की यात्रा का उद्देश्य?

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भारत की यात्रा पर दो दिनों के लिए आये थे और भारत के साथ मिसाइल का सौदा करके स्वदेश के लिए रवाना हो गये। हालांकि संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उसी तरह की चर्चा की गयी कि दोनों देश शांति, भाईचारा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर मिलकर काम करेंगे। 

पीएम स्टार्मर और नरेन्द्र मोदी के बीच मिसाइल खरीद को लेकर समझौता हुआ। ब्रिटेन भारत को स्वदेशी मिसाइल देगा। हालांकि पीएम मोदी स्वदेशी और मेड इन इंडिया का नारा देते हैं। 

अब राजनीति को समझने वालों को भी यह भी ध्यान देना होगा कि गुरुवार शाम को स्टार्मर लंदन भी नहीं पहुंचे थे कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ फोन पर बातचीत की और उन्हेंं गाजा शांति समझौता के लिए बधाई भी दे दी। 

स्टार्मर के भारत आने से पहले, राष्ट्रपति ट्रम्प ने लंदन की यात्रा की थी और इसके बाद ब्रिटिश पीएम ने भारत की यात्रा का कार्यक्रम बनाया। इस तरह से पर्दे के बाहर और पर्दे के पीछे हुई वार्ताओं को समझा जा सकता है। 


तालिबानी नेता आने से पहले पाक की सर्जिकल स्ट्राइक

अफगानिस्तान में फिर से सत्तारुढ़ हुए तालिबान के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री को आमंत्रित किया। विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी नई दिल्ली पहुंचे तो दूसरी ओर पाकिस्तान ने दावा कर दिया कि उसने काबुल में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है और पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने वाले पाक तालिबान के कुछ लड़ाकों को मार गिराया है। 

मुत्ताकी अगले कुछ दिनों में मास्को की भी यात्रा करने वाले हैं। रूस ने ही अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार को मान्यता दी हुई है। मुत्ताकी यूएन में प्रतिबंधित हैं, इसलिए उनकी नई दिल्ली यात्रा से पहले संयुक्त राष्ट्र के साथ पत्र व्यवहार किया गया था। 

नई दिल्ली ने काबुल को यह विश्वास दिलाया है कि वह अपने तकनीकी कार्यालय को राजनीयिक कार्यालय में बदलेगा और तालिबान के साथ संबंधों को मजबूत करेगा। 

उल्लेखनीय है कि तालिबान-भारत के बीच संबंधों को इसलिए मजबूत किया जा रहा है क्योंकि पाक इन दिनों बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को मजबूत कर रहा है। 

इस तरह से समझा जा सकता है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है और भारत सरकार ने इस कहावत को सच कर दिया। इसी तरह से अमेरिका के प्रशासन ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता को नोबल दिलाकर हकीकत बना दिया। 


डीएपी के लिए किसानों पर लाठियां

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में पुलिस की ओर से लाठियां बरसाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें भादरा तहसील में डीएपी खाद लेने के लिए गये किसानों पर लाठीचार्ज किया गया। इसको लेकर विपक्षी कांग्रेस ही नहीं बल्कि किसानों ने भी आवाज उठायी है। 

ध्यान देना होगा कि कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर जिले में स्वयं छापा मारकर अमानक बीज, खाद आदि के मामलों का खुलासा किया था। वे कम से कम तीन बार दोनों जिलों में रेड कर चुके हैं। 


Wednesday, October 8, 2025

 

सर्बियो गोर भारत में ट्रम्प के शीर्ष प्रतिनिधि, स्टार्मर भारत पहुंचे





श्रीगंगानगर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नई दिल्ली (दक्षिण-मध्य पूर्व एशिया) के लिए सर्बियो गोर को राजदूत नियुक्त किया है। गोर की सीधी पहुंच राष्ट्रपति ट्रम्प तक है। वहीं अन्य प्रमुख समाचारों में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर मुम्बई पहुंच गये हैं और गुरुवार को उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मुलाकात होगी। इसके अतिरिक्त फ्रांस में राजनीतिक संकट अभी भी बरकरार है और राष्ट्रपति मैक्रां ने नये पीएम की नियुक्ति नहीं करते हुए सेबेस्टियन लेकार्नू को ही कार्यभार संभाले रखने और बजट पारित करवाने के लिए विपक्षी दलों से वार्ता के लिए अधिकृत किया है। 

संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति ट्रम्प के नामित किये गये सर्बियो गोर के नामांकन को सीनेट की मंजूरी मिल गयी है। इस तरह से वे अधिकारिक रूप से नई दिल्ली में ट्रम्प के प्रतिनिधि होंगे, जिनको राजदूत या एम्बेसडर के रूप में भी संबोधित किया जाता है। गोर के नाम की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि वे व्हाइट हाउस में कार्मिक विभाग के निदेशक थे और राष्ट्रपति ट्रम्प के सबसे नजदीकी लोगों में से एक हैं। 

गोर के अगले कुछ दिनों के भीतर कार्यभार संभालने की आशा है। ट्रम्प ने गोर को दक्षिण एवं मध्य-पूर्व एशिया के प्रभारी अधिकारी की भी जिम्मेदारी दी है। इस तरह से वे गाजा, कतर, इजरायल के अधिकारियों के भी सम्पर्क में रहेंगे। वे पाक, श्रीलंका, बांग्लादेश के  साथ साउथ एशिया के अन्य सभी देशों भी प्रभारी होंगे। 

इस तरह से अमेरिका का एशिया के लिए एक अलग से विदेश मंत्रालय स्थापित हो गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प इसी सप्ताह आसियान देशों के दौरे पर भी आ रहे हैं, इसमें जापान, दक्षिण कोरिया और एक बहुराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन भी होगा। 


फ्रांस में राजनीतिक संकट बरकरार

यूरोपीय देश फ्रांस में राजनीतिक संकट बरकरार है और इमैनुअल मैक्रां ने राष्ट्रपति के रूप में सेबेस्टियन लेकार्नू को बजट पारित करवाने की जिम्मेदारी दी है। मैक्रां का 2027 में दूसरा कार्यकाल पूर्ण होना है, इससे पहले कम से कम पांच प्रधानमंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। 

लेकार्नू ने अपनी कैबिनेट के साथ इस्तीफा दे दिया था, जिसको स्वीकार किये जाने की भी जानकारी दी गयी किंतु मैक्रां ने लेकार्नू से कहा है कि वे विपक्षी दलों से वार्ता कर बजट पारित करवायें। पश्चिमी देशों में बजट पारित करवाना काफी चुनौतिपूर्ण कार्य हो गया है। कनाडा के पीएम मार्क कोर्नी ने अभी तक अपना पहला बजट पेश नहीं किया है। उन्होंने अपनी नियुक्ति के पांच माह के भीतर ही राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दूसरी बार मुलाकात की। कनाडा पर लगाये गये टैरिफ को कम करने और आपसी व्यापारिक सौदों में लचीला रुख अपनाने का आह्वान किया। 

मार्क के साथ बातचीत के बाद संवाददाताओं से वार्ता करते हुए ट्रम्प ने कहा, उनके देश को अभी तक सभी लोग ठगते रहे हैं और व्यापार घाटा बढ़ता चला गया। कुछ संवाद को उन्होंने इस तरह से कहा कि मार्क कोर्नी और वहां पर मौजूद पत्रकारों की भी हंसी छूट गयी। 


कीर स्टार्मर की भारत यात्रा आरंभ

जून में इंग्लैण्ड की यात्रा के दौरान भारत गणराज्य के पीएम नरेन्द्र मोदी ने इंग्लैण्ड के साथ व्यापार समझौता किया था। इसके तीन माह बाद ही ब्रिटिश स्टार्मर को भारत आना पड़ा। वे बुधवार को मुम्बई पहुंचे और भारतीयों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए उन्होंने अभिनेत्री रानी मुखर्जी के साथ हिन्दी फिल्म को भी देखा। 

वे नई दिल्ली में गुरुवार को पीएम मोदी से मिलेंगी। स्टार्मर ने कहा, वे वीजा के लिए भारत नहीं आये हैं। उन्होंने आवर्जन नीति में बदलाव की संभावना से इन्कार किया। 

हालांकि स्टार्मर को भी अपने देश में इस समय अलोकप्रिय घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। लाखों लोगों जिनकी संख्या का सही अनुमान नहीं लगाया जा सका था, ने प्रदर्शन किया था। 

हालांकि माहौल इस समय विश्व में तनावपूर्ण बना हुआ है। यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि स्टार्मर की यात्रा से पहले ही भारत में अमेरिका ने अपना राजदूत नियुक्त किया है। गोर की नियुक्ति ठीक उसी समय की गयी, जब स्टार्मर भारत पहुंचने वाले थे। इस तरह से इस यात्रा को अन्य नजरिये से भी देखा जाना आवश्यक है और इसको सीक्रेट यात्रा से अलग बना दिया है। 


भारत में निर्मित होने वाली दवाओं की जांच अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना

भारत में निर्मित होने वाली दवाओं की जांच इस समय प्रमुख मुद्दा बन गयी है। इसका कारण है कि केन्द्रशासित भाजपा की दो राज्य सरकारों मध्यप्रदेश और राजस्थान में खांसी की दवा से 10 बचचों की मौत हो गयी। कफ सीरप की जांच में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं और बताया जा रहा है कि संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्टड किया गया था किंतु भाजपा शासित राज्यों में इसकी सरकारी सप्लाई होती रही। 

भारतीय दवाओं के पूर्व में भी अंतरराष्ट्रीय मामले सामने आये थे जब एक अफ्रीकी देश में कफ से बच्चों की मौत होने के आरोप लगाये गये थे। 




Monday, October 6, 2025

 

फ्रांस की सरकार फिर से गिर गयी, कैबिनेट का संचालन एक दिन भी नहीं हो पाया



पेरिस। यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले फ्रांस में एक बार फिर से सरकार का पतन हो गया। बजट को लेकर पूर्व में एक साल के भीतर तीन सरकारें गिर चुकी हैं और दो सालों के भीतर छठे प्रधानमंत्री का चयन अब किया जायेगा। दक्षिण पंथी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां को देश के भीतर अब विरोध का सामना करना पड़ रहा है। 

सेबेस्टियन लेकार्नू जिन्हें एक माह पूर्व ही राष्ट्रपति ने नामित किया था। लेकार्नू ने रविवार को ही कैबिनेट का गठन किया था और सोमवार को हालात यह हो गये कि उनको इस्तीफा देना पड़ा। उनके मंत्रीपरिषद के सभी सदस्यों ने भी राष्ट्रपति को अपने त्याग पत्र सौंप दिये। 

फ्रांस को इमैनुअल मैक्रां संबोधित करने वाले हैं और माना यह जा रहा है कि एक साल के भीतर उनको दूसरी बार वोटिंग के लिए जाना पड़ा। संसद को भंग कर चुनाव करवाये जा सकते हैं। दक्षिण पंथी पार्टी के पास बहुमत का अभाव है और वामपंथी दल अन्य दलों के साथ मजबूत स्थिति में है लेकिन राष्ट्रपति वामपंथियों को सरकार सौंपने को शायद ही तैयार हों। 

अगर फ्रेंच मीडिया की रिपोर्ट को आधार बनाया जाये तो मैक्रां  की लोकप्रियता कमजोर हुई है। 2022 में वे दूसरी बार राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। 

पश्चिमी देश ऋण के कारण भारी मुश्किल में

असल में पश्चिमी देशों ने सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले अत्यधिक लोन उठाये हुए हैं और इस कारण घरेलू खर्चों पर दबाव बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार जीडीपी का 115 प्रतिशत लोन फ्रेंच पर है जो 3 हजार करोड़ डॉलर से कहीं अधिक है। 

अभी हाल ही में एक विश्वस्तरीय रिपोर्ट में सामने आया था कि फ्रेंच सरकार में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है और ईमानदारी के मुकाबले उसका रैंक नीचे गिरा है। कमजोर पारदर्शिता को यूरोपीयन लोग भी समझ रहे हैं। 

यूरोप में प्रमुख अर्थव्यवस्था जर्मनी, इटली और फ्रांस आदि हैं। जर्मन और फ्रांस में कलकारखाने तो हैं लेकिन कॉमनवेल्थ के अनेक देश ऐसे हैं जो शिक्षा, पर्यटन आदि के सहारे ही अपनी अर्थव्यवस्था का निर्वह करते हैं। 

हालांकि भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री के साथ उनके निकट संबंध माने जाते हैं और इसी कारण वे अनेक बार भारत की यात्रा कर चुके हैं। 

भारत में पारदर्शिता की भारी कमी

अगर भारत की अर्थव्यवस्था जो देश की रीढ़ की हड्डी होता है, में पारदर्शिता काफी कमजोर है। आरबीआई के गर्वनर को भी यह जानकारी नहीं होती कि उनके हस्ताक्षरित कितने नोट भारत सरकार की कंपनियां छाप रही हैं। यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हुई थी कि बंगलोर और अन्य स्थान पर प्रकाशित होने वाली भारतीय मुद्रा की पूरी रिपोर्ट आरबीआई के पास नहीं होती है। जबकि डिजीटल हस्ताक्षर आरबीआई के गर्वनर के होते हैं। 

बजट को देखा जाये तो उसमें एक वर्ष के भीतर प्रस्तावित कार्यों का मसौदा होना चाहिये, लेकिन कैबिनेट की बैठक में यह तय होता है कि किस क्षेत्र को कार्यों के लिए कितना बजट जारी किया जाना है। इस तरह से बजट पेश करने का कोई महत्व ही नहीं रह गया। अनुदान मांगों को पूरा करने के लिए एक स्पीच होती है और पक्ष-विपक्ष के हंगामे के बीच वह पारित हो जाती हैं। 

परिवहन मंत्रालय के प्रभारी कहते हैं कि उन्होंने 11 सालों में 60 लाख करोड़ रुपये का आधारभूत ढांचा तैयार किया है जिसको एनएच कहा जाता है। बजट में तो प्रत्येक साल के लिए पांच लाख करोड़ रुपये रक्षा अथवा स्वास्थ्य क्षेत्र को भी नहीं दिया जाता। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि कैबिनेट की बैठक में ही अलग से बजट जारी हो जाता है और इसके लिए विभिन्न एजेंसीज से लोन लिया जाता है। 

रेल मंत्रालय भी पूर्व में अपनी रेलगाडिय़ों के बजट आदि के लिए अलग से प्रारूप लोकसभा-राज्यसभा में पेश करता था और अब हालात यह है कि यह परंपरा समाप्त कर दी गयी और किस रेलवे स्टेशन से रेलगाडिय़ां चलायी जानी है, यह भी कैबिनेट में ही तय होता है। कैबिनेट का प्रभार पीएम के पास होता है और इस तरह से पीएम तय करते हैं कि कहां सडक़ बननी है और कहां रेलगाड़ी चलायी जानी है। 

रेलगाड़ी या सडक़ का लोर्कापण-शिलान्यास करने के लिए भी पीएम कार्य करते हैं। 


अमेरिका के कर्ज को लेकर चर्चा

संयुक्त राज्य अमेरिका पर जीडीपी के मुकाबले 200 प्रतिशत कर्जा है। लेकिन अमेरिका को इस कारण फर्क नहीं है क्योंकि कनाडा, अमेरिका के पास तेल, गैस के कुएं हैं। सोने की खान हैं। 200 प्रतिशत कर्जा होने के बावजूद वे अपने संसाधनों तेल, गैस, सोने का ज्यादा खनन नहीं करते हैं। अमेरिकी लोग अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए इसका संरक्षण करते हैं। वे कुछ ही दिनों के भीतर सोना, तेल आदि को बेचकर कर्जा उतार सकते हैं लेकिन वे अपनी चलित मुद्रा के सहारे ही निर्णय लेते हैं। 

अब भारत के खनन क्षेत्र को देखें तो सामने आता है कि अडाणी समूह ने झारखण्ड में बिजली निर्माण का प्लांट लगाया हुआ है। यहां से बांग्लादेश को बिजली सप्लाई की जाती है। झारखण्ड को इसलिए केन्द्र बनाया गया क्योंकि वह आदिवासी बहुल राज्य है। वहां पर तापघर बनाने के लिए आदिवासियों की जमीनों पर कब्जे हुए और इसी कारण आदिवासियों ने विरोध स्वरूप भाजपा को वोटिंग नहीं की। 

इन कोयले की खदानों से कितना कोयला, अडाणी, टाटा-बिरला आदि खनन कर रहे हैं किसी को  नहीं पता। अधिकारियों की भी हिम्मत नहीं है कि वे जांच कर सकें। गोवा के जंगलों का क्या हो रहा है, यह भी जानकारी मैनस्ट्रीम के माध्यम से बाहर नहीं आ पा रही है। 

देश की जनता को इन समाचारों से दूर अन्य समाचारों के माध्यम से बिजी रखा जा रहा है। 


Sunday, October 5, 2025

 

क्या युवा नया विश्व निर्माण को तैयार है?



श्रीगंगानगर। दुनिया में भारी परिवर्तन हो रहा है। राजनेताओं के आश्वासनों से बेरोजगारी, गरीबी, शिक्षा का स्तर ऊंचा नहीं उठ पाया है और जेन-जैड नाम से युवा अब नेताओं से सत्ता की चाबी छीन रहे हैं। बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका ही नहीं पूरे विश्व में अनेक देश ऐसे हैं जो युवाओं के प्रदर्शन का सामना कर रहे हैं। 

उत्तरी अफ्रीकी देश मौरक्को में इस समय युवा आंदोलन कर रहे हैं। युवाओं के इस आंदोलन के कारण सत्ता पर राजनेताओं की पकड़ ढीली हो रही है। कारण वही है जो दक्षिण एशियाई देशों के पास था। लोकतंत्र के नाम पर सत्ता की चाबी के सहारे युवाओं को बेरोजगार रखना। उन्हें मजबूत नहीं मजबूर जीवन जीने के लिए कुत्साहित करना। 

विश्व किस दिशा में जा रहा है

सबसे पहले यह देखना होगा कि विश्व किस दिशा में जा रहा है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, हर दिन युद्ध की आशंका बलवत होती जा रही है। वल्र्ड वॉर-3 के लिए देश तैयार हो रहे हैं और अपने रक्षा खर्च को बढ़ाते जा रहे हैं। 

पाकिस्तान को भारत के रक्षा और सेना अध्यक्ष ने चेतावनी दी थी और दूसरे ही दिन पाकिस्तान की तरफ से जवाब आ गया। इस तरह से दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाये हुए हैं। 

भारत साफ कह रहा है कि सिंदूर-2 समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि विश्व युद्ध-3 को रोकने के लिए व्यापारिक बैठकों का दौर आरंभ किया गया है। एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन हथियारों की खरीद पर कोई देश रोक नहीं लगाना चाहता। 

अभी हाल ही में पीएम ब्रिटेन की यात्रा करके लौटे हैं। प्रधानमंत्री के रूप में उनका दूसरा दौरा था। अब यूके के पीएम कीर स्टार्मर दिल्ली की यात्रा करने वाले हैं। छ: माह के भीतर यूएसए के राष्ट्रपति लंदन की दो बार यात्रा कर चुके हैं। एशियाई देशों में जापान, दक्षिण कोरिया और कई अन्य देश के राष्ट्राध्यक्ष वाशिंगटन डीसी जाकर आये हैं और डील को भी फाइनल किया है। अब राष्ट्रपति ट्रम्प एशिया के दौरे पर आ रहे हैं। वे भारत नहीं आ रहे। न ही भारतीय पीएम आसियान देशों के सम्मेलन में शामिल होंगे। 


गाजा पर समझौता हो सकता है!

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 21 सूत्रीय समझौता प्रारूप तैयार कर इजरायल और अरब के देशों को भेजा था ताकि दो साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करवाया जा सके। कुछ शर्तों पर प्रतिबंधित संगठन हमास सहमत हो गया है। हथियार निरस्त्रीकरण पर अभी सहमति नहीं बन पायी है। 

अगर हमास ऐसा नहीं करता है तो क्या युद्ध जारी रहेगा? यह सवाल पूरी दुनिया के सामने है। 

हमास के निरस्त्रीकरण के बिना शायद इजरायल इस समझौते पर सहमत नहीं हो कि वह सेना को वापिस बुला ले। 


अनेक देशों में घरेलू अशांति

विश्व के अनेक ऐसे देश हैं जो घरेलू अशांति का भी सामना कर रहे हैं। फ्रांस के सामने बड़ा गंभीर मामला है। दो साल के भीतर पांच प्रधानमंत्री बदले जा चुके हैं और अभी तक बजट को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। 

वहां युवा बजट में कटौती को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के समक्ष समस्या यह है कि वह ईयू की शर्तों के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत से अधिक घाटा नहीं होना चाहिये। वहीं फ्रांस पांच प्रतिशत घाटा बर्दाश्त कर रहा है। 

इस कारण सरकार के समक्ष बजट को छोटा करना मजबूरी हो गया है तो दूसरी ओर युवा चाहते हैं कि उनकी सुविधाओं में कमी नहीं होनी चाहिये। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी। एक विचार यह भी आया था कि बड़े अमीर लोगों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाये, वहीं आशंका यह भी बन गयी कि यह अमीर व्यक्ति ईयू के दूसरे देशों में अपना व्यापार लगा सकते हैं। 


जापान और कोरिया के समक्ष भी यही समस्या

दूसरी ओर जापान व दक्षिण कोरिया के भी राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं है। जापान में शिंजो आबे के बाद पांच सालों में चार प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। शिगेरू इशिबा ने हाल ही में इस्तीफा दिया है और उनके स्थान पर नये पीएम आ चुके हैं। 

इसी तरह से दक्षिण कोरिया में कुछ माह के भीतर तीन राष्ट्राध्यक्ष बदल चुके हैं। एक राष्ट्रपति पर तो केस भी चलाया जा रहा है। 


भारत के मणिपुर में शांति तो लद्दाख में आंदोलन

भारत के उत्तरी-पूर्वी राज्य मणिपुर में आंदोलन दो साल से भी अधिक समय तक चला और वहां पर शांति स्थापित हुई तो लद्दाख में एक जन आंदोलन आरंभ हो गया। सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। 

वांगचुक को भारत की मौजूदा सरकार ने ही कई ईनाम और पद दिये थे और अब उन पर रासूका को लागू कर दिया गया। वांगचुक के नेतृत्व में 15 दिनों से आंदोलन और अनशन चल रहा था। मैनस्ट्रीम में यह समाचार सुनाई नहीं दिया और एक दिन भाजपा का कार्यालय जला दिया गया तो यह देश की प्रमुख खबर बन गयी और वांगचुक  पर पाकिस्तान के साथ सांठगांठ के आरोप लगा दिये गये। जोधपुर जेल भेज दिया गया। 

उन पर आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान के समाचार पत्र डॉन के कार्यक्रम में उन्होंने शिरकत की थी। अगर पाकिस्तान का समाचार पत्र किसी आतंकवादी संगठन की तरफ से संचालित होता है तो उस पर भारत सरकार को पूर्व में ही रोक लगा देनी चाहिये था। उसका डिजीटल संस्करण भारत में भी आसानी से उपलब्ध होता है। 

वहीं भारत की मीडिया तो पाकिस्तान के कई दुर्दांत आतंकवादी के इंटरव्यू चला चुका है। पाकिस्तान के क्रिकेटर इमरान खान (प्रधानमंत्री बनने से पूर्व) तो कुछ चैनल्स के मुख्य कार्यक्रम में शामिल भी हुए हैं। इस तरह से पाक मीडिया के कार्यक्रम में शिरकत करना तो रासूका का कारण नहीं हो सकता और न ही भाजपा कार्यालय को आग लगाना राष्ट्रद्रोह है। 

निजी सम्पत्ति को आग लगाना किसी भी तरह से यूएपीए के कानून में अंकित नहीं है। अपराध हुआ है तो वहां पर मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिये था और वांगचूक को अपने अधिवक्ता के माध्यम से मौका दिया जाना चाहिये था कि वे अपनी बात रखते। 


यूक्रेन-रूस युद्ध का शायद अंत नहीं

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को रूस ने आमंत्रित किया था और जब वे वहां पर पहुंचे तो सुबह हो चुकी थी और उनके विश्राम के बाद उनको यह समाचार मिला कि रूस ने युक्रेन पर हमला कर दिया है। उन्होंने इस हमले को उचित ठहरा दिया। 

वे देश पहुंचे तो उस दोरान तक सेना उनके खिलाफ हो चुकी थी और आखिर में उनको जेल में डाल दिया गया। अभी भी वे गिरफ्तार हैं और विशेष अदालत नैब में उनके खिलाफ मामला चल रहा है। 

वे वर्षों बाद रूस जाने वाले पहले पाक पीएम थे और उन्होंने रूस का यह शानदार कदम बताया। 

उस बात को तीन साल या इससे भी ज्यादा का समय हो गया है किंतु युक्रेन-रूस युद्ध समाप्त नहीं हुआ है। भारत के प्रधानमंत्री पर यह जिम्मेदारी डाली गयी थी कि वे रूस और युक्रेन की यात्रा कर युद्ध को समाप्त करवायें। पीएम ने यात्रा तो कर डाली किंतु युद्ध समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने युद्ध और बुद्ध को लेकर बयान जारी कर दिया। 

रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन दिसंबर माह में नई दिल्ली की यात्रा करेंगे। इस दौरान नये रूसी विमान की खरीद को लेकर समझौता हो सकता है। 

इससे पहले यह भी समाचार आ रहा है कि चीन-पाकिस्तान के संयुक्त उद्यम में निर्माणाधीन फाइटर जेट्स के लिए रूस करीबन 100 इंजन देगा।

इस तरह से भारत सरकार की कूटनीति के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है। 


भारत की विदेश नीति विफल क्यों हो रही है?

भारत सरकार की विदेश नीति इस समय आलोचनाओं का सामना कर रही है। 

अगर भारत का इतिहास देखा जाये तो इंदिरा गांधी ने अपने समय मेें इंदिरा और इंडिया को एक समान रूप से पेश करने के लिए लोगों को अपने साथ जोड़ा था। प्राइवेट कंपनीज, बैंकों आदि का अधिग्रहण कर उसका सरकारीकरण किया गया। वे कहती थीं कि आई फॉर इंडिया और आई फॉर इंदिरा। वे एक-दूसरे का पूरक बनकर राजनीति करती थीं। उस समय इंदिरा गांधी की लोकप्रियता इतनी थी कि लोग उनके खिलाफ टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करते थे। 

उनके निधन के बाद राजीव गांधी वह स्थिति को नहीं बनाये रख सके और भाजपा मजबूत दल के रूप में उभरकर सामने आ गया। अब पीएम नरेन्द्र मोदी भी वही नीति चाहते हैं। वे जनसभाओं में स्वयं का नाम लेना पसंद करते हैं और इस तरह की ब्रांडिंग तैयार की गयी है कि उनके विकल्प के बारे में लोग सोचना भी नहीं चाहते। अगर सोचना चाहते हैं तो मोदी के खिलाफ की गयी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर इस तरह से प्रसारित किया जाता है कि टिप्पणीकर्ता ने राष्ट्रद्रोह कर दिया है। इस तरह से ट्रोल किया जाता है। 

वही नरेन्द्र मोदी इस समय दुनिया के सामने अपने कमजोर विदेश नीति के कारण आलोचनाओं का भी सामना कर रहे हैं। 

सरकार कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। हाल ही में एच 1 बी वीजा को लेकर अमेरिका प्रशासन ने बदलाव किया तो इसके लिए भी व्यक्ति विशेष को टारगेट किया जाने लगा।

ट्रम्प सरकार कई तरह के प्रतिबंध लगा चुकी है। अमेरिका का बॉयकाट  नहीं किया जा सकता क्योंकि यूएसए के साथ अब भारत की रोटी-बेटी का रिश्ता बन चुका है। 

आज जो आधुनिक तकनीक भारत के पास पहुंच रही है तो वह अमेरिका की देन है। कई सैन्य उपकरण भारत की फौज को दिये गये हैं। 

भारतीय यूथ को इस समय भारत सरकार की नीतियों के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। लाखों भारतीय युवा हर साल उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाते थे और अब वह ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। अमेरिका में करीबन 40 प्रतिशत डॉक्टर्स भारतीय हैं। 70 प्रतिशत आईटी इंजीनियर्स भारतीय हैं। 

भारत में नौकरियां नहीं। स्वरोजगार के लिए पैसे नहीं। स्र्टाटअप के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं। वृद्धावस्था के लिए कोई सोशल सिक्योरिटी नहीं। 

गरीब बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए सशक्त मील योजना नहीं। इस तरह से भारत दुनिया के टॉप देशों में होने के बावजूद कई तरह की समस्याओं से घिरा हुआ है। 


Wednesday, October 1, 2025

 

लॉर्सन एण्ड टर्बो को नहीं मिल पायेगा आसाम में हरित ऊर्जा का कॉन्टेक्ट



- अडाणी से मिलती जुलती कहानी है एसएन सुब्रह्मण्यन की

श्रीगंगानगर। आसाम में स्वच्छ ऊर्जा नीति को निरस्त कर दिया है। यह एक बड़ा झटका है लॉर्सन एण्ड टर्बाे नामक कंपनी के लिए। वह इस दौड़ में सबसे आगे थी और हेमंत बिस्वा सरमा सरकार ने इस निति को ही निरस्त कर दिया। 

कुछ समय पहले तक लॉर्सन एण्ड टर्बो को आधारभूत ढांचा विकसित करने वाली कंपनी अर्थात इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के रूप में जाना जाता था। ब्रिटेन से बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स करके भारत लौटे इंजीनियर एसएन सुब्रह्मण्यन को एलएनटी में न केवल प्रवेश मिला बल्कि उनको एक डायरेक्टर भी बनाया गया। 

नरेन्द्र मोदी की सरकार के कार्यकाल में उनको 2017 में कंपनी का एमडी बनाया गया और इसके साथ ही एलएनटी की तस्वीर ही बदल गयी। पिछले पांच सालों में शेयर 2 हजार 782 रुपये की रिकॉर्ड बढ़ोतरी को दर्ज किया गया। इसका शेयर बुधवार को 1 अक्टूबर 2025 को 3 हजार 685 रुपये का बिक रहा था। 

एलएनटी श्रीगंगानगर में भी सीवरेज और पेयजल सप्लाई की ठेका फर्म के रूप में कार्यरत है। नयी पेयजल पाइप लाइन डालने का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। कंपनी को शर्तों के अनुसार 10 साल तक रख-रखाव का भी कार्य देखना है। 

हालांकि कंपनी का कार्य बेहद सुस्त चल रहा है लेकिन कंपनी अब भारत सरकार की प्रिय कंपनियों में शामिल हो चुकी है। इनके एमडी-सीइओ सुब्रह्मण्यन को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में अध्यक्ष की कुर्सी भी मिल चुकी है। वे गुणवत्ता निगरानी फाउंउेशन में भी शामिल हैं, जिसमें टाटा गु्रप के अधिकारी और किरण मजूमदार शॉ जैसी हैसियत शामिल हैं। 

इस तरह से कंपनी ने पिछले कुछ सालों में बहुत कुछ हासिल किया है हालांकि यह कंपनी आजादी से पूर्व मुम्बई कंपनी कार्यालय से पंजीकृत हुई थी। कंपनी अब फायनेंस सैक्टर में भी कार्यरत है और वह स्वच्छ ऊर्जा के लिए भी जानी जाती है। हालांकि कांग्रेस के कार्यकाल में भी इनको काफी बड़े टेंडर मिल थे। 

हैदराबाद में मेट्रो का निर्माण कार्य की जिम्मेदारी भी कंपनी के कंधों पर थी और बंगलुरू में निजी-सार्वजनिक कंपनी के रूप में विकसित किया गया एयरपोर्ट भी इस कंपनी के पास था। हालांकि गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। 

कंपनी ने स्वच्छ ऊर्जा के निर्माण में कदम रखा तो आसाम सरकार से हरी झण्डी भी मिल गयी थी। अब हेमंत बिस्वा सरमा सरकार ने अचानक ही बड़ा निर्णय लिया और अपनी नीति को वापिस ले लिया। इस तरह से कंपनी अडाणी की तरह सरकारी कार्यों में रुचि रखती रही है और शेयर बाजार में अपने पांव को जमाती रही। 

अडाणी समूह भी एयरपोर्ट, बंदरगाह के निर्माण कार्यों एवं संचालन में सरकार का पंसदीदा गु्रप है। अभी मुम्बई में एयरपोर्ट का निर्माण किया गया। वहीं धारावी जैसी स्लम बस्ती में निर्माण कार्य की जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार ने अडाणी समूह को दी है। एशिया की सबसे बड़ी बस्ती के सुधार के लिए टेंडर जारी हुआ है। 


ट्रम्प सरकार में शटडाउन, डेमोक्रेट की नीतियों का असर

वाशिंगटन डीसी। डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी सीनेट में मतभेदों के कारण फंडिंग बिल पास नहीं कर पाये। सीनेट में 60 वोट चाहिये थे जबकि रिपिब्लकन के पास 54 वोट थे और उसे इस विधेयक के लिए 55 वोट ही हासिल हो पाये। विधेयक के पारित नहीं होने के कारण अमेरिकी सरकार का प्रशासन ठप हो गया है। अब केवल कानून-व्यवस्था से संबंधित ही विभागों का संचालन होगा। 

निचले सदन में सत्तारुढ रिपब्लिकन पार्टी के पास पर्याप्त बहुमत है, लेकिन 100 सदस्यों वाली सीनेट में पार्टी के पास 60 सांसद नहीं हैं। उनके पास 54 सदस्य हैं। नियमों के अनुसार विधेयक पारित करने के लिए 60 सदस्यों का एकमत होना आवश्यक है। 

डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन पार्टी के बीच मतभेद सामने आये थे किंतु इनको समय रहते दूर नहीं किया जा सका और व्हाइट हाउस के हस्ताक्षेप के बाद भी फंडिंग बिल पास नहीं हो पाया। इससे सरकार खर्चों का संचालन नहीं कर सकेगी और इसको ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों को घरों में भेज दिया गया है। कार्यालय फंड के अभाव में बंद हो गये हैं। 7 लाख से ज्यादा कर्मचारी विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत हैं। 



जॉर्ज सेरोस भारत में अब नहीं करवा पायेगा धर्म परिवर्तन

न्यूयार्क। भारत में पैसों का लालच अथवा भय दिखाकर धर्म परिवर्तन का खेला बरसों से हो रहा है। अमेरिका में परोपकारी की पहचान रखने वाले जॉर्ज सेरोस इस खेल के मास्टर माइंड थे और अमेरिका से यह धन भेजा जा रहा था। 

भारत की गरीब व कच्ची बस्तियों, गांवों में लोगों को धन का लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था। भारत में सत्ता बदलती रही लेकिन अमेरिका से फंडिंग बंद नहीं हुई थी। 

अब सत्ता में डोनाल्ड ट्रम्प आये तो उन्होंने सबसे पहले सेरोस के खिलाफ जांच को आरंभ किया। भारत में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो दलित हिन्दू से क्रिश्चियन बने। इन सभी को लालच दिया गया और भूत-प्रेत जैसों का भय दिखाकर उनका धर्म परिवर्तन किया गया। 


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