Friday, October 24, 2025

 

मोदी-शाह के हाथ से बिहार निकल गया तो..? यूरोप में फिर से क्यों आया बर्ड फ्लू,



श्रीगंगानगर। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का दौर चल रहा है। तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव की फोटो को भी होर्डिंग्स से हटा दिया है ताकि उनके कार्यकाल को लेकर तेजस्वी को टारगेट नहीं किया जाये। बिहार राज्य में करीबन 50 लाख वोटर्स के नाम काटे गये हैं, जिनको घुसपैठिया कहा जा रहा है। अमेरिका ने कनाडा के साथ व्यापार वार्ता को समाप्त कर दिया है। अब मार्को कोर्नी को एशिया में नये बाजार की तलाश करनी होगी। 

प्रमुख समाचारों पर नजर डाली जाये तो भारत में इस समय बिहार चुनाव की ही चर्चा हो रही है। नेता लोग, जो टिकट कटने या अन्य कारण से नाराज हैं, वे अपने दल को अलविदा कहकर दूसरे दल की ओर जा रहे हैं। इस तरह से बड़े नेता लोग एक-दूसरे के जीवन पर कटाक्ष कर रहे हैं। 

बिहार में पिछले 20 सालों से नीतीश कुमार का शासन है। नीतिश ने दो बार पाला बदला और वह तेजस्वी यादव के पास चले गये और फिर वापिस भाजपा के पास आ गये। इस तरह से जीतनराम मांझी को छोडक़र सत्ता उनके पास ही रही। नरेन्द्र मोदी के 2014 से पहले दिल्ली में वे उनसे बात नहीं करते थे। इस तरह से दोनों नेता एक दूसरे को देखकर नजरांदाज कर दिया करते थे और अब वही नेता लोग एक-दूसरे के लिए वोट मांग रहे हैं। 

दूसरी ओर कांग्रेस को देखा जाये तो उन्होंने 20 सालों में बिहार और उत्तर प्रदेश में किसी बड़े चेहरे को तैयार ही नहीं किया। बिहार में लालू परिवार तो उत्तर प्रदेश में मुलायम परिवार। इस तरह से यादव फैमिलिज के सहारे ही कांग्रेस काम चला रही है। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस ने कोई बड़ा चेहरा तैयार क्यों नहीं किया, इस संबंध में कभी सवाल ही नहीं हुआ होगा, फिर काहे को उन्होंने दोनों राज्यों में कांग्रेस को मजबूत करने का कोशिश किया होगा। 

उधर तमिलनाडू में भी इसी तरह की स्थिति है। कामराज के बाद वहां कोई बड़ा नेता नहीं बनाया गया और भारतीय जनता पार्टी भी इस प्रदेश में नेता लोग की फौज तैयार ही नहीं कर पाये। सच कहा जाये तो साउथ में भाजपा को पैर जमाने में ही जोर आ रहा है। कर्नाटक के अतिरिक्त केरल, आंधप्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडू में अभी सत्ता की कुंजी दूर है। 

अगर बिहार चुनाव का ही चर्चा कीजिये तो सामने आयेगा कि वहां पर 20 साल शासन करने वाले नीतिश कुमार के साथ इस बार कितना लोग हैं, यह चुनाव परिणाम बतायेगा। 

बिहार का चुनाव अगर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के हाथ से निकल गया तो लोकसभा चुनाव में भी उनको मुश्किल होगी। राज्यसभा में भी बहुमत हाथ से निकल सकता है। इसलिए पूरा जोर लगाया है दोनों नेता लोग, लेकिन जीत-हार को मतदाता तय करता है और इसका चिंतन तो किया जा सकता है कि अगर बिहार में सत्ता हाथ से गया तो इन दोनों नेता लोग का भाजपा पर पकड़ और कमजोर होगा?

संसदीय दल में सभी अपने लोग होने के बावजूद यह नेता लोग अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश नहीं कर पाये हैं। दूसरी ओर आरएसएस का कहना है कि उनका कोई हस्ताक्षेप नहीं होगा, भाजपा को खुद अपने अध्यक्ष का चुनाव करना है। इसलिए बिहार चुनाव मोदी-शाह का अग्रिपरीक्षा होगा। 


ट्रम्प का कनाडा को करारा जवाब

विश्व का प्रमुख समाचार में यह बताया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा के साथ व्यापार वार्ता को समाप्त कर दिया है। ट्रम्प प्रशासन का आरोप है कि पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का गलत संदेश कनाडा ने अपने विज्ञापन में पेश किया है। 

दोनों देश ट्रेड डील को लेकर व्यापार वार्ता कर रहे थे और ट्रम्प ने शुक्रवार को आदेश दिया कि वे कनाडा के साथ व्यापार वार्ता को समाप्त कर रहे हैं। 


अगला सप्ताह दुनिया के लिए महत्वपूर्ण

विश्व के लिए अगला सप्ताह जो सोमवार से आरंभ होगा, वह दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। कारण यह है कि ट्रम्प जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया की यात्रा करने वाले हैं। वे दक्षिण पूर्व की यात्रा में इन देशों के नेताओं से मिलेंगे और शी जिनपिंग के साथ भी अलग से वार्ता का कार्यक्रम तय किया गया है।  चाइना के साथ ट्रेड वॉर चल रहा है और राष्ट्रपति ने 100 प्रतिशत नया टैक्स लगाने की चेतावनी दी है जो 1 नवंबर से आरंभ हो सकता है। वहीं जापान की पीएम सने ताकाइची ने हाल ही में सत्ता संभाली है और इससे पहले उनको बड़े शिखर नेताओं के साथ वार्ता का अनुभव नहीं है। अब अभ्यास के लिए भी समय कम बचा है। इस तरह से उनको अपने समय की हरपल को महत्वपूर्ण मानना होगा ताकि ट्रेड डील के संबंध में पूर्ण वार्ता तैयार की जा सके। पूर्व पीएम ने यूएसए की यात्रा की थी किंतु इशिबा को इस्तीफा देना पड़ा था, क्योंकि वे अपनी पार्टी को उप चुनाव में नहीं जीता सके थे। 


हजारों मुर्गियों को मारना पड़ रहा है

रॉयटर्स समाचार का कहना है कि यूरोप में इस समय मुर्गियों में बर्ड फ्लू पाया जा रहा है और इस तरह की मुर्गियों को मारने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं है। यह वायरस इंसान में तो नहीं जा सकता किंतु दुधारू गायों को प्रभावित कर सकता है। दूध देने वाले अन्य पशुओं की सुरक्षा के लिए भी यह आवश्यक हो गया है। टीकाकरण पर भी निर्णय किया जा रहा है।






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