Thursday, October 16, 2025

 

मोदी ने कालाधन वापसी पर क्यों बदले शब्द, आरएसएस की धारणा क्या रंग लायेगी, अडाणी का नया कारोबार मोदी को जितायेगा-2029?



श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की सरकार अब विदेश से कालाधन लाने की अपनी नीति को पुर्नभाषित कर रही है। पीएम का सोशल मीडिया पर बयान तो यही कह रहा है। वहीं धार्मिक ग्रंथों में बदलाव के बयान को लेकर आरएसएस मुश्किल स्थिति में है। फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता जारी है। पूर्व अमेरिकन राष्ट्रपतिज भी अब ट्रम्प की तारीफ क्यों कर रहे हैं?
वर्ष 2014 के बयानों के आधार पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभाली थी। उस समय उनका कहना था कि ‘अच्छे दिन आने वाले हैं,’ विदेश के कालाधन से सभी को 15-15 लाख रुपये की राशि मिलेगी। 2022 तक सभी के पास अपना घर होगा। हालांकि पार्टी ने बाद में इसको एक चुनावी झुमला बताया। 
अब पीएम का एक सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल हुआ जिसमें उन्होंने विदेशी काला धन को पुर्नभाषित कर दिया। उन्होंने कहा, कालाधन विदेश से नहीं वीदेश से लाया जायेगा, ऐसा उनका कहना था। 
विदेश को वीदेश के रुपांतरण से पूरा मामला ही सफेद पन्ने की तरह हो गया। अब आगे शब्दों को चुना जाये तो सामने आता है, आरएसएस का बड़ा बयान। 
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सोशल मीडिया पर स्वीकार किया कि 1950-60 के बीच कुछ लोगों ने धार्मिक ग्रंथों में कुछ बदलाव कर दिया था। यही अब तक पढ़ाया जा रहा था। 
धार्मिक ग्रंथों में हुए बदलाव की जानकारी होने के बावजूद अभी तक उनको पुराने स्वरूप में नहीं लाया गया है। अकेले हिन्दू धर्म के ग्रंथों में बदलाव हुआ या अन्य धर्मों में भी। यह स्पष्ट नहीं हो पाया। 

अडाणी के साथ चुनाव-2029 की तैयारियां शुरू?
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तैयारियां आरंभ हो गयी हैं। गूगल ने भारत में करीबन 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने का एलान किया है। इससे डेटा सेंटर भारत में ही बन जायेगा। इसका एक फायदा यह हो सकता है कि विदेशों से डेटा संग्रह के लिए सीधा धन विदेश जाता था जो अब भारत में ही खरीद-बेचा जा सकेगा। 
डेटा सेंटर में पार्टनर होने की जिम्मेदारी गौतम अडाणी को दी गयी है। मुकेश अम्बानी तो कुंभ मेला में परिवार के साथ संगम में गंगा-यमुना-सरस्वती नदी में स्नान कर खुद को अलग करने का संकेत दे दिया था। 
अडाणी समूह ने पिछले 10 सालों में अभूतपूर्व विकास किया है। जयपुर, अहमदाबाद आदि के बाद मुम्बई के नये एयरपोर्ट को भी लीज पर केन्द्र सरकार ने दे दिया है। इस तरह से आधा भारत का वायु नियंत्रण अडाणी समूह के पास आ गया है। 
इसी अडाणी समूह को गूगल को भागीदार बनाया गया है। समूह ने हथियार बनाने का लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया है। इस तरह से रक्षा क्षेत्र में भी उसका आगमन हो चुका है। डाटा और डेटा दोनों ही क्षेत्रों में यह कंपनी प्रवेश करने का मानस बना चुकी है और इसको इम्पलीमेंट भी किया जा रहा है। 
अडाणी समूह का अर्थ ही नरेन्द्र मोदी सरकार की निकटता को परिभाषित करता है। इस तरह से डेटा सेंटर से भारतीयों के बारे में अधिक जानकारी हासिल की जा सकेगी। 

गाजा में शांति लौटने से विश्व में राजनीतिक समीकरण बदलेंगे?
इजरायल और गाजा प्रशासनिक तंत्र के बीच युद्ध विराम होने से जहां हमास को फिर से चर्चा में ला दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शांतिदूत की भूमिका निभाने का दावा करते हुए इजरायल और फिलिस्तीन के बीच समझौता करवा दिया। 
इस तरह से विश्व में एक नये अध्याय का शुभारंभ हो गया है। हालांकि कुछ पश्चिमी देशों ने यह माना था कि गाजा को मान्यता देने से यह मामला शांत हो जायेगा लेकिन ट्रम्प ने नया शांति प्रस्ताव पेश किया और इससे अरब के देश भी सहमत हो गये। 
मिस्र में अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन हुआ। इसमें फ्रांस, इटली सहित अनेक देशों के शिखर नेता शामिल हुए। भारत ने इसमें अपना राष्ट्रप्रमुख नहीं भेजा, बल्कि विदेश राज्यमंत्री को पीएम के प्रतिनिधि के तौर पर भेजा गया। अगर भारत के शीर्ष नेता वहां जाते तो संभवत: अमेरिका-भारत के बीच चल रहा ट्रेडर वॉर भी चर्चा हो सकती थी और इसके जल्दी ही अस्तित्व में आने से टैरिफ जो 50 प्रतिशत तक लागू कर दिया गया है, उसको कम किया जा सकता था। 
टैरिफ के लागू होने के बाद जो निर्यात प्रभावित हो रहा था, उसको नियंत्रित किया जा सकता था। खैर सरकार ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत नहीं करने का निर्णय लिया है और इसका राजनीतिक महत्व क्या होगा, यह आने वाले दिनों में सामने आ पायेगा। गाजा में 2 वर्षों के बाद अमन लौटने से अमेरिका की राजनीति की सोच में भी बदलाव देखा जा रहा है। पूर्व राष्ट्रपतियों जॉर्ज बुश, बराक ओबामा, बिल क्लिंटन आदि ने ट्रम्प प्रशासन की तारीफ की है। 

अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना का जुलूस निकला
अफगानिस्तान में सत्तारुढ़ तालिबान ने पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के बाद पाक सेना की वर्दी को चौराहों पर टांग दिया है। इससे पाकिस्तान के साथ हुए 48 घंटे के शांति प्रस्ताव को भी झटका लगा है। 
विदेश मीडिया में बताया जा रहा है कि तालिबान ने पाकिस्तान सैनिकों की पतलूनों को चौराहों पर टांग दिया है। 
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह संघर्ष क्या रूप लेगा, यह भी देखने वाला होगा। हाल ही में भारत ने काबुल में अपना दूतावास पुन: आरंभ कर दिया था। 





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