Wednesday, October 1, 2025

 

लॉर्सन एण्ड टर्बो को नहीं मिल पायेगा आसाम में हरित ऊर्जा का कॉन्टेक्ट



- अडाणी से मिलती जुलती कहानी है एसएन सुब्रह्मण्यन की

श्रीगंगानगर। आसाम में स्वच्छ ऊर्जा नीति को निरस्त कर दिया है। यह एक बड़ा झटका है लॉर्सन एण्ड टर्बाे नामक कंपनी के लिए। वह इस दौड़ में सबसे आगे थी और हेमंत बिस्वा सरमा सरकार ने इस निति को ही निरस्त कर दिया। 

कुछ समय पहले तक लॉर्सन एण्ड टर्बो को आधारभूत ढांचा विकसित करने वाली कंपनी अर्थात इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के रूप में जाना जाता था। ब्रिटेन से बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स करके भारत लौटे इंजीनियर एसएन सुब्रह्मण्यन को एलएनटी में न केवल प्रवेश मिला बल्कि उनको एक डायरेक्टर भी बनाया गया। 

नरेन्द्र मोदी की सरकार के कार्यकाल में उनको 2017 में कंपनी का एमडी बनाया गया और इसके साथ ही एलएनटी की तस्वीर ही बदल गयी। पिछले पांच सालों में शेयर 2 हजार 782 रुपये की रिकॉर्ड बढ़ोतरी को दर्ज किया गया। इसका शेयर बुधवार को 1 अक्टूबर 2025 को 3 हजार 685 रुपये का बिक रहा था। 

एलएनटी श्रीगंगानगर में भी सीवरेज और पेयजल सप्लाई की ठेका फर्म के रूप में कार्यरत है। नयी पेयजल पाइप लाइन डालने का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। कंपनी को शर्तों के अनुसार 10 साल तक रख-रखाव का भी कार्य देखना है। 

हालांकि कंपनी का कार्य बेहद सुस्त चल रहा है लेकिन कंपनी अब भारत सरकार की प्रिय कंपनियों में शामिल हो चुकी है। इनके एमडी-सीइओ सुब्रह्मण्यन को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में अध्यक्ष की कुर्सी भी मिल चुकी है। वे गुणवत्ता निगरानी फाउंउेशन में भी शामिल हैं, जिसमें टाटा गु्रप के अधिकारी और किरण मजूमदार शॉ जैसी हैसियत शामिल हैं। 

इस तरह से कंपनी ने पिछले कुछ सालों में बहुत कुछ हासिल किया है हालांकि यह कंपनी आजादी से पूर्व मुम्बई कंपनी कार्यालय से पंजीकृत हुई थी। कंपनी अब फायनेंस सैक्टर में भी कार्यरत है और वह स्वच्छ ऊर्जा के लिए भी जानी जाती है। हालांकि कांग्रेस के कार्यकाल में भी इनको काफी बड़े टेंडर मिल थे। 

हैदराबाद में मेट्रो का निर्माण कार्य की जिम्मेदारी भी कंपनी के कंधों पर थी और बंगलुरू में निजी-सार्वजनिक कंपनी के रूप में विकसित किया गया एयरपोर्ट भी इस कंपनी के पास था। हालांकि गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। 

कंपनी ने स्वच्छ ऊर्जा के निर्माण में कदम रखा तो आसाम सरकार से हरी झण्डी भी मिल गयी थी। अब हेमंत बिस्वा सरमा सरकार ने अचानक ही बड़ा निर्णय लिया और अपनी नीति को वापिस ले लिया। इस तरह से कंपनी अडाणी की तरह सरकारी कार्यों में रुचि रखती रही है और शेयर बाजार में अपने पांव को जमाती रही। 

अडाणी समूह भी एयरपोर्ट, बंदरगाह के निर्माण कार्यों एवं संचालन में सरकार का पंसदीदा गु्रप है। अभी मुम्बई में एयरपोर्ट का निर्माण किया गया। वहीं धारावी जैसी स्लम बस्ती में निर्माण कार्य की जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार ने अडाणी समूह को दी है। एशिया की सबसे बड़ी बस्ती के सुधार के लिए टेंडर जारी हुआ है। 


ट्रम्प सरकार में शटडाउन, डेमोक्रेट की नीतियों का असर

वाशिंगटन डीसी। डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी सीनेट में मतभेदों के कारण फंडिंग बिल पास नहीं कर पाये। सीनेट में 60 वोट चाहिये थे जबकि रिपिब्लकन के पास 54 वोट थे और उसे इस विधेयक के लिए 55 वोट ही हासिल हो पाये। विधेयक के पारित नहीं होने के कारण अमेरिकी सरकार का प्रशासन ठप हो गया है। अब केवल कानून-व्यवस्था से संबंधित ही विभागों का संचालन होगा। 

निचले सदन में सत्तारुढ रिपब्लिकन पार्टी के पास पर्याप्त बहुमत है, लेकिन 100 सदस्यों वाली सीनेट में पार्टी के पास 60 सांसद नहीं हैं। उनके पास 54 सदस्य हैं। नियमों के अनुसार विधेयक पारित करने के लिए 60 सदस्यों का एकमत होना आवश्यक है। 

डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन पार्टी के बीच मतभेद सामने आये थे किंतु इनको समय रहते दूर नहीं किया जा सका और व्हाइट हाउस के हस्ताक्षेप के बाद भी फंडिंग बिल पास नहीं हो पाया। इससे सरकार खर्चों का संचालन नहीं कर सकेगी और इसको ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों को घरों में भेज दिया गया है। कार्यालय फंड के अभाव में बंद हो गये हैं। 7 लाख से ज्यादा कर्मचारी विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत हैं। 



जॉर्ज सेरोस भारत में अब नहीं करवा पायेगा धर्म परिवर्तन

न्यूयार्क। भारत में पैसों का लालच अथवा भय दिखाकर धर्म परिवर्तन का खेला बरसों से हो रहा है। अमेरिका में परोपकारी की पहचान रखने वाले जॉर्ज सेरोस इस खेल के मास्टर माइंड थे और अमेरिका से यह धन भेजा जा रहा था। 

भारत की गरीब व कच्ची बस्तियों, गांवों में लोगों को धन का लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था। भारत में सत्ता बदलती रही लेकिन अमेरिका से फंडिंग बंद नहीं हुई थी। 

अब सत्ता में डोनाल्ड ट्रम्प आये तो उन्होंने सबसे पहले सेरोस के खिलाफ जांच को आरंभ किया। भारत में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो दलित हिन्दू से क्रिश्चियन बने। इन सभी को लालच दिया गया और भूत-प्रेत जैसों का भय दिखाकर उनका धर्म परिवर्तन किया गया। 






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