Thursday, October 23, 2025

 

दक्षिणपंथी नेताओं की राजनीति में मजबूती, मोदी मलेशिया क्यों नहीं गये, इजरायल हमास को हथियार डालने के लिए मजबूर कर सकेगा?



श्रीगंगानगर। साने ताकाईची। यह नया नाम है। इस नाम को इसलिए यहां लिया जा रहा है क्योंकि उन्होंने जापान जैसे उदारवादी राज्य में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है और वे दक्षिणपंथी मानी जाती हैं। इस तरह से दक्षिण पूर्व में भी एक नया चेहरा शामिल हो गया है। इससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प, नरेन्द्र मोदी, बेंजामिन नेतनयाहू ब्लादीमिर पुतिन और इटली की जॉर्जिया मेलोनी आदि को इस श्रेणी में रखा जाता था। वहीं भारतीय पीएम ने मलेशिया की यात्रा को अचानक स्थगित कर दिया। इससे पहले वे न्यूयार्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक सभा में भी शामिल नहीं हुए थे। इसको किस नजर से देखा जा सकता है?

जापान को नयी प्रधानमंत्री मिली है और साने ताकाइची ने नेशन फस्र्ट की नीति को अपनाते हुए अपनी कैबिनेट को सीमित रखने का निर्णय लिया है। 

दुनिया बता रही है कि इस समय दक्षिणपंथी नेताओं का दौर चल रहा है। भारतीय पीएम हिन्दूवाद के सहारे तीसरी बार चुनाव जीत चुके हैं। वे ऐसा करने वाले आजाद हिन्दुस्तान के तीसरे चेहरे हैं। 

अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ही चर्चा को आगे बढ़ाया जाये तो उन्होंने सितंबर माह में अचानक न्यूयार्क जाने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया था। वहां पर अपने विदेश मंत्री को भेजा था। जब वे जापान, चीन की यात्रा कर वापिस लौटे तो उन्होंने कहा, वे रात को ही दो देशों की यात्रा करके वापिस आये हैं। श्रोताओं ने तालियां बजायी तो पीएम को कहना पड़ा कि वे वापिस आ गये हैं, इसलिए तालियां बजायी जा रही हैं?

अगर गूगल के सर्च इंजन का इस्तेमाल किया जाये तो सामने आ रहा है कि ताशकंद-2.0 सफल नहीं हो पाया। 

मलेशिया जाने का विचार मोदी ने ताशकंद-2.0 के कारण स्थगित किया है। इस पर बहस होनी चाहिये। हालांकि यह बात छीपी रही थी और अब सोशल मीडिया धीरे-धीरे इस सच्चाई को सामने ला रहा है। 

अमेरिका और भारत के बीच इस समय संबंध अगर पिछले 2 दशक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं तो इसका कारण एक ही है। ट्रम्प अमेरिका फस्र्ट की नीति को अपने देश में लागू कर रहे हैं ताकि फिजूल खर्चों को समाप्त कर टैक्स पेयर को रियायत दी जाये जिससे उनके पास सेविंग हो और वे ज्यादा खरीददारी कर सकें। 

मोदी की दक्षिणपंथी विचारधारा इस समय इस कारण कमजोर हो रही है क्योंकि पिछले 8 सालों में इतने ज्यादा टैक्स लगा दिये गये कि कॉमन मैन के पास सेविंग कम हो गयी। वहीं खुदरा बाजार में बड़े खिलाडिय़ों को अनुमति दे दी गयी, जिस कारण खुदरा बाजार इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।

एमएसएमई को भी मोदी सरकार ने पुन:परिभाषित किया जिससे छोटे और मझौले उद्योगों को जो सहायता मिल सकती थी, वे भी बड़ी कंपनियां ले गयीं, जो सरकार के ज्यादा नजदीक थीं। 


9 अरब डॉलर का रक्षा खर्च बढ़ेगा

भारत सरकार इस समय विश्व के हालात को देखकर अपनी नीतियां बना रही है और उसने गुरुवार को ही 9 अरब डॉलर के हथियार खरीद को अनुमति प्रदान कर दी। अगर इसकी भारतीय मुद्रा में गणना की जाये तो करीबन 80 हजार करोड़ रुपये के रूप में संबोधित किया जा सकता है। 

सरकार की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि हर 40 दिन बाद नया युद्धपोत या पनडुब्बी को सेना के सुपुर्द किया जा रहा है। 

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लोंगेवाल से गुरुवार को देश के नाम संदेश दिया और बताया कि लोंगेवाल का भारतीय सामरिक इतिहास क्या है। वे इसके बाद राजस्थान के प्रवास पर पहुंच गये। 

भारत सरकार अचानक ही अपने रक्षा खर्च को कई गुणा बढ़ा दिया है और यह भी संदेश दिया जा रहा है कि अग्रिवीर योजना जिसमें चार साल की ही सेवा थी, उसमें से 75 प्रतिशत को स्थायी किया जायेगा, इस तरह से पैदल सेना की मानवीय शक्ति को भी बढ़ाया जा रहा है। 


हमास को हथियार डालने होंगे : अमेरिका

अमेरिका इस समय हमास पर दबाव बना रहा है कि वह समझौते के अनुरूप निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया को पूरी करे। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इजरायल गये और इसके बाद मार्को रूबियो भी येरूशलम पहुंच गये हैं। 

बेंजामिन नेतनयाहू को दक्षिणपंथी विचारधारा वाला नेता माना जाता है और उन्होंने हमास के साथ दो साल से भी लम्बा युद्ध कर इसको साबित भी किया। हालांकि उनके देश में ही युद्धविराम की मांग से संबंधित खबरें आ रही थीं। 

अगर हम दक्षिणपंथी विचारों वाले नेताओं की सूची बनाएं तो विश्व के तीन प्रमुख देश अमेरिका, चीन और रूस भी इसमें शामिल हो जाते हैं। चीन कम्यूनिस्ट विचाराधारा वाले देश है लेकिन वह भी उदारवाद के बीच दक्षिणपंथी विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है। 

यूरोप के फ्रांस में इमैनुअल मैक्रां को मध्यमार्गी माना जाता है और वे देश में राजनीतिक संकट का सामना कर रहे हैं। 

ईटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने अपने देश में धर्म से संबंधित कई नयी व्यवस्थाओं को आरंभ किया है। 

यूरोप और अन्य देशों में इस समय बाहरी लोगों को स्वदेश भेजने की भी मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। 


ट्रम्प ने देश के प्रति प्रेम दर्शाया!

अमेरिका के कुछ लोगों का मानना है कि ट्रम्प बड़ी बात अनेक बार कह देते हैं, लेकिन उनका मानना है कि अमेरिका से ही सहायता लेकर अनेक देश अमेरिका के खिलाफ ही साजिश रचते हैं। इस कारण विरोधी भी अब ट्रम्प का गुणगान करते हैं। 

सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष की यात्रा पर सरकारी अनुमति से गये थे किंतु बाइडेन प्रशासन उनको वापिस लाना ही भूल गया और वे वहां वापसी का इंतजार करते रह गये। 21 जनवरी को डोनाल्ड ट्रम्प ने कार्यभार संभाला तो इसके साथ ही एलन मस्क की निजी कंपनी स्पेस एक्स के साथ मिलकर सुनीता और उनके साथियों को वापिस लाया गया। इस पर कई मिलियन डॉलर खर्च हुए और इसका पूरा खर्च डोनाल्ड ट्रम्प ने निजी तौर उठाया। 

इससे उन्होंने प्रमाणित किया कि वे अमेरिकंस से कितना लगाव रखते हैं और अपने देश के साथ उनका प्यार रियल है। राजनीति से प्रेरित नहीं। 

नासा को अपना यान भेजने के लिए कई प्रकार की मंजूरियां लेनी पड़ती और इस तरह से काफी टाइम बर्बाद होता, लेकिन ट्रम्प ने अपने निजी खर्च पर स्पेस एक्स के यान को भेजा जो उनको लेकर सुरक्षित वापिस लाया। सुनीता विलियम्स भारतीय-अमेरिकी हैं। 

अब वे डेमोक्रेटिक राज्यों के साथ संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि डेमोक्रेट शासित राज्यों में हजारों लोग डंकी रूट से आकर बसे हुए हैं। उनके पास रोजगार और पैसे की कमी है और इस कारण वे मूल अमेरिकंस के साथ अपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। इस तरह से कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उन्होंने नैशनल गार्ड को अनेक राज्यों में भेज दिया है। वाशिंगटन डीसी की सुरक्षा भी नैशनल गार्ड के पास है। 

माना जा रहा है कि करीबन दो करोड़ अवैध अप्रवासी अमेरिका में है। पांच लाख के करीब अवैध प्रवासी वापिस अपने देश जा रहे हैं क्योंकि एनएसजी अवैध अप्रवासी को जेल भेज देते हैं। ट्रम्प ने कहा है कि जो भी अप्रवासी कानूनी तौर पर अपने देश जाना चाहता है वह 2500 डॉलर की सहायता प्राप्त कर सकता है।  






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