Thursday, October 16, 2025

 

भारत की राजनीति किस दशा में जा रही है?





श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य के पंजाब-हरियाणा प्रांतों में जो चल रहा है, उससे व्यवस्थाओं या कहें कि सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद भी कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। 

गुरुवार (16 अक्टूबर 2025) को यह समाचार सामने आया कि रोपड़ के उप महानिरीक्षक हरचरणसिंह को रिश्वत लेने के आरोप में एक साथी के साथ गिरफ्तार किया गया है। यह कार्यवाही पंजाब की विजीलैंस टीम ने नहीं बल्कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो के दल ने की। समाचारों में बताया जा रहा है कि उनके निवास व अन्य प्रोपर्टीज की जांच की गयी तो पता चला कि वे कई करोड़ के मालिक हैं। भारी-भरकम कैश के अतिरिक्त 1.5 किलो सोना भी मिला। 

अब भुल्लर की गिरफ्तारी के साथ यह भी जानकारी हासिल करनी आवश्यक है कि सीबीआई को अचानक पंजाब में भारतीय पुलिस सेवा स्तर के अधिकारियों के भ्रष्टाचार की याद कैसे आ गयी। 

राजस्थान के जयपुर का एक व्यापारी नवनीत चतुर्वेदी पंजाब जाते हैं। वहां वे राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते हैं। निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन पत्र की जांच के बाद यह निर्णय लिया कि चतुर्वेदी ने आम आदमी पार्टी के विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर कर नामांकन पत्र दाखिल किया। 

उनके नामांकन पत्र खारिज होते ही पंजाब के रोपड़ जिले की पुलिस सक्रिय हो गयी। हालांकि पंजाब-हरियाणा की राजधानी चण्डीगढ़ है। रोपड़ पुलिस तुरंत ही सक्रिय हो गयी और चतुर्वेदी को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। चण्डीगढ़ पुलिस ने उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हुए उसको अपनी निगरानी में पुलिस थाना लेकर पहुंच गयी। 

रोपड़ पुलिस ने चण्डीगढ़ पुलिस से पत्र व्यवहार करते हुए चतुर्वेदी की कस्टडी की मांग की। लेकिन चण्डीगढ़ पुलिस ने उसको सुरक्षा दी। रोपड़ पुलिस ने चण्डीगढ़ पुलिस के एक थाने के बाहर अपना पहरा लगा दिया। इस तरह से रोपड़ और चण्डीगढ़ पुलिस के बीच तलखी बढ़ गयी और आखिर में गिरफ्तारी वारंट के आधार पर पंजाब पुलिस चतुर्वेदी को गिरफ्तार कर ले गयी। 

यह मामला सुर्खियां बना हुआ था और इनकी स्याही फीकी होने से पहले ही नयी खबर आ गयी कि सीबीआई की विजीलैंस विंग को यह शिकायत मिली है कि रोपड़ पुलिस के डीआईजी ने रिश्वत की मांग की है। इस शिकायत के आधार पर डीआईजी रोपड़ रेंज को रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार करने का दावा किया गया और उनके निवास आदि की भी तलाशी आरंभ हो गयी। 

अब यहां उल्लेख करना आवश्यक है कि चण्डीगढ़ केन्द्र शासित प्रदेश है और वहां पर चण्डीगढ़ पुलिस का प्रशासन है। इस तरह से चण्डीगढ़ पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन कार्यरत है। अब सीबीआई की एंट्री हुई तो वह भी भारत सरकार की एक जांच एजेंसी है। 

इस तरह से टिप्पणीकारों का मानना है कि यह उच्चस्तर की लड़ाई है। एक तरफ आम आदमी पार्टी की सरकार है तो दूसरी ओर भाजपा। दिल्ली में भी इसी तरह से घमासान चला था। 

अब हरियाणा में भी इसी तरह की स्थित रही। चण्डीगढ़ में हरियाणा पुलिस के एक आईपीएस वाई पूर्णकुमार ने 7 अक्टूबर को आत्महत्या की और इसके कुछ दिनों बाद एक एएसआई ने सुसाइड कर ली। 

दिवंगत आईपीएस अधिकारी की पत्नी (आईएएस अधिकारी) की रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज हुआ। दूसरी ओर एएसआई के सुसाइड मामले में दिवंगत आईपीएस की पत्नी पर आत्महत्या दुष्प्रेरणा के आरोप में मुकदमा हुआ। 

आईपीएस अधिकारी ने अपने सुसाइड नोट में हरियाणा के डीजीपी आदि को पक्षकार बनाया था तो एएसआई ने अपने सुसाइड नोट में आईपीएस की पत्नी को नामजद करवाया। 

सिस्टम पर अगर सवाल उठाया जाये तो सामने आता है कि आईपीएस की पत्नी को ही विश्वास नहीं हो रहा था कि उनको न्याय मिल पायेगा। उन्होंने 8 दिनों बाद पोस्टमार्टम की कार्यवाही के लिए अपनी सहमति दी। इसी तरह से रोहतक में एएसआई की मृत्यु के बाद उनका परिवार भी न्याय की मांग करने लगा। 

इस तरह से सिस्टम पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और यह मांग की जा रही है आजादी से पूर्व के चल रहे सिस्टम में 70 सालों बाद भी सुधार नहीं हो पाया है। इसके लिए एक कमेटी बनाकर सिस्टम को किस तरह से बेहतर बनाया जा सकता है, उसकी समीक्षा की जानी चाहिये। 

पंजाब में केन्द्र और राज्य सरकार के बीच चल रही खींचतान सामने आयी तो हरियाणा में कैडर को लेकर उत्पीडऩ के आरोप जनता के समक्ष पेश आये। 


सडक़ सुरक्षा पर भी उठ रहे हैं सवाल

राजस्थान में दो सडक़ घटनाओं ने सडक़ सुरक्षा पर सवाल उठाये हैं। जैसलमेर-जोधपुर के बीच स्लीपर कोच बस में आग लगने की घटना सामने आयी और यात्री उस बर्निंग बस में फंस गये। बाहर नहीं निकल पाये। दो दर्जन की मौत की खबर दी जा रही है और इतने या इससे भी ज्यादा घायल हैं। 

वहीं इससे पहले दो ट्रकों की भिड़ंत में आग लगने से एक ट्रक में भरे गैस सिलेंडर फट गये थे। धमाके होते रहे। 

यह दोनों घटनाएं काफी कुछ कह रही हैं और सरकार से आग्रह कर रही हैं कि इस तरह की घटनाओं की रोकथाम और सडक़ सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाये जाने चाहिये, उठाये जायें।  






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