Monday, October 20, 2025
दीपोत्सव के दिन ऑस्ट्रेलियाई पीएम पहुंचे व्हाइट हाउस
वाशिंगटन। भारत में दीपोत्सव को लेकर आतिशबाजी का शौर देर रात तक जारी है। हालांकि खरीददारी का आलम यह है कि श्रीगंगानगर जिला जिसे राजस्थान का आर्थिक रूप से सिरमौर कहा जाता है, वह रात 9 बजे के करीब बंद हो गया। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि लोगों की परचेज पॉवर कितनी मजबूत है। वहीं ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मेजबानी के लिए व्हाइट हाउस में प्रवेश किया।
अंधेरे पर प्रकाश और अधर्म के खिलाफ धर्म की जीत का प्रतीक दीपावली पर्व आज सोमवार (10 अक्टूबर 2025) को परंपरा विधि के अनुसार मनाया जा रहा है। मंदिरों और घरों में लक्ष्मी पूजन हुआ और दुनिया की तरक्की और खुशहाली के लिए प्रार्थना की गयी।
दीपावली पर्व की दुनिया भर के नेताओं ने बधाई दी है। इनमें वाशिंगटन डीसी से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी प्रकाशोत्सव की बधाई दी। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अल जरदारी ने भी अल्पसंख्यक हिन्दुओं को अंधेरे पर प्रकाश की विजय दिवस पर शुभकामनाएं प्रेषित की।
अब दुनिया के अन्य समाचारों को देखें तो सामने आता है कि अमेजन के एडब्ल्यूएस क्लाउड में आई तकनीकी खराबी के कारण घंटों तक हजारों या लाखों वेबसाइट डाउन हो गयीं। स्नैपचैट जैसी कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रभावित हुए।
दुनिया भर में जहां हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं, वे दीपावली पर्व मना रहे हैं, इस बीच ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज वाशिंगटन डीसी पहुंचे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वयं व्हाइट हाउस के मुख्य द्वार पर प्रधानमंत्री की अगुवानी की।
पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन के कार्यकाल में 2023 में ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बी देने का त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, इसमें ब्रिटेन भी शामिल था और इसको एयूकेयूएस नाम दिया गया था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऑस्ट्रेलिया को विश्वास दिलाया कि निर्धारित समय पर पनडुब्बी उनको मिल जायेंगी। वहीं रक्षाक्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया ने यूएस के साथ नये समझौते भी किये।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इन पनडुब्बी से प्रशांत महासागर की सुरक्षा को मजबूत किया जायेगा। पनडुब्बी के लिए प्रशिक्षण कार्य जल्द शुरू हो जायेगा और इन पनडुब्बी को चीन के द्वार पर तैनात किया जायेगा।
अमेरिकी राजदूत ने नहीं संभाला कार्यभार
भारत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने अतिविश्वासी अधिकारी सर्बियो गौर को राजदूत के रूप में नियुक्त किया है। सीनेट में उनकी नियुक्ति को मंजूरी भी मिल चुकी है। राजदूत गौर 14 से 19 अक्टूबर तक भारत में थे किंतु उन्होंने कार्यभार नहीं संभाला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई नेताओं और समकक्षीय अधिकारियों से भी मुलाकात की।
भारत और अमेरिका के बीच तनाव का दौर चल रहा है जो शायद पिछले 20 वर्षों में दिखाई नहीं दिया था। इस कारण राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने नजदीकी को एम्बेसडर की जिम्मेदारी दी और उन्हें दक्षिण व पश्चिमी एशिया का नोडल ऑफिसर भी नियुक्त किया गया है।
अब भारत के प्रधानमंत्री तीन दिनी दौरे 26 से 28 अक्टूबर तक मलेशिया के प्रवास पर होंगे। कुआंलापुर व साउथ कोरिया में आसियान व अन्य समूह की बैठकें होने वाली हैं।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस दौरे के लिए अपनी पुष्टि कर दी है। मलेशिया का कहना है कि भारत गणराज्य के पीएम भी आ रहे हैं। इस तरह की जानकारी रॉयटर्स ने दी है।
अगर ट्रम्प और मोदी दोनों इस सम्मेलन में शामिल होते हैं तो जो व्यापारिक युद्ध व तनाव का दौर चल रहा है, उसमें सुधार हो सकता है और नवंबर में दोनों देशों की व्यापारिक वार्ता में भी ऊर्जा का संचार हो सकता है। हालांकि ट्रम्प का कहना है कि भारत मास्को से तेल की खरीद को तत्काल बंद कर दे।
रूसी राष्ट्रपति दिसंबर में भारत आ सकते हैं और जनवरी माह में भारत क्वाड और ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर सकता है। इस तरह से यह दौरे और यह चर्चाएं अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए पर्याप्त हो सकती है।
दीपावली पर श्रीगंगानगर में मंदा रहा
श्रीगंगानगर में रात 9 बजे के बाद दीपावली उत्सव होने के बावजूद बाजार बंद हो गया। किसान नेता गुरबलपाल सिंह संधू का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया फेसबुक पर लाइव इवेंट में दिखाया कि किस तरह से बाजार बंद हो गये हैं।
हालांकि धनतेरस बोनस मिलने के कारण कर्मचारियों ने खरीददारी की थी किंतु आमजन इस मंदे से बाहर नहीं निकल पाया। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 हजार रुपये तक के लॉन का ऑफर दिया था किंतु इसका भी असर बाजार में दीपावली के दिन नजर नहीं आया।
किसानों का आरोप है कि सरकार की लापरवाही के कारण नरमा-कपास का एमएसपी नहीं मिल पा रहा है। राजस्थान के कृषि मंत्री बार-बार श्रीगंगानगर आकर नकली बीज, पेस्टीसाइड और डीएपी के बारे में खुलासा कर रहे हैं। डीएपी और गंगनहर में पानी की कमी के कारण किसानों ने धरना भी लगाया हुआ है।
ध्यान देना चाहिये कि भारत में मंदिरों में गुल्लक के पैसे भी सरकार अपने कब्जे में ले लेती है और यह भारत की जीडीपी का 2 प्रतिशत या इससे भी ज्यादा का योगदान हो सकता है। हालांकि अन्य धार्मिक स्थानों पर सरकार कोई नियंत्रण नहीं रखती है।
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