Tuesday, March 3, 2026
राजस्थान के धार्मिक शहरों में क्या शराबबंदी नहीं होनी चाहिये? गुजरात और हरिद्वार का फार्मूला क्यों नहीं अपनाया जाता-गुरुशरण छाबड़ा के उपरांत पूनम अंकुर छाबड़ा चला रही हैं आंदोलन
श्रीगंगानगर। राजस्थान में सालासर धाम, करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र बन गये खाटू श्याम जी,जातिगत भेदभाव समाप्त करने वाले बाबा रामदेव और नाथद्वारा आदि ऐसे धार्मिक संस्थान हैं, जहां आम दिनों में ही हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। इनकी धार्मिक और सामाजिक भावनाएं इन धार्मिक शहरों और मंदिरों के साथ जुड़ी हैं, इसके बावजूद इन शहरों में शराबबंदी के बारे में कभी विचार नहीं किया गया।
राजस्थान पिछले कुछ सालों या दशकों में देवनगरी के रूप में स्थापित हुआ है। बाबा रामदेव मंदिर जैसलमेर में है। खाटू श्याम जी का मंदिर सीकर में है तो सालासर धाम चुरू जिले में है।
इन सभी धार्मिक स्थानों पर हर रोज ही हजारों लोग पहुंचते हैं। इसके साथ ही गोगा मेड़ी मेले जो एक माह तक चलता है, उसमें भी लाखों लोग दर्शनार्थ आते हैं।
इस तरह से देवनगरी में जो सुधार देवस्थान विभाग को करने चाहिये थे, वह नहीं किये गये। देवस्थान और आबकारी विभाग के आयुक्त उदयपुर जिले में बैठते हैं।
जनसंघ से जुड़े हुआत्मा एवं पूर्व विधायक गुरशरण छाबड़ा ने राजस्थान में शराब बंदी आंदोलन करते हुए प्राण त्याग दिये। अपने बलिदान के बावजूद वे राज्य में शराबबंदी तो नहीं करवा सके लेकिन उनके प्रयासों से रात 8 बजे तक ही शराब की बिक्री सरकारी ठेकों से होती है।
अब उनके आंदोलन को उनकी पुत्रवधू पूनम अंकुर छाबड़ा आगे बढ़ा रही हैं। वे आमरण अनशन कर चुकी हैं। उनका कहना है कि दिवंगत विधायक गुरशरण छाबड़ा धर्म एवं समाजहित में राजस्थान में शराबबंदी चाहते थे। इसके लिए अनशन करते हुए वे शहीद हो गये। सरकार को उनके बलिदान को याद करना चाहिये। पूनम कहती हैं, आवश्यकता के अनुसार वे आंदोलन को विस्तृत रूप देंगी।
वहीं कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि धार्मिक शहरों में ही शराबबंदी हो जानी चाहिये, इससे कम से कम दिवंगत छाबड़ा की आत्मिक शांति के लिए किया गया एक बड़ा कार्य माना जा सकता है। उल्लेखनीय है कि शराबबंदी के लिए अब वोटिंग का प्रावधान है और सरकार को इन धार्मिक शहरों में इस प्रावधान के जरिये जनता की राय जाननी चाहिये। गुजरात में महाकाल का मंदिर होने के कारण पूरे राज्य में शराबबंदी है। हरिद्वार में मां गंगा का आगनस्थल है तो वहां भी शराब की बिक्री पर पाबंदी है।
Monday, March 2, 2026
अमेरिका-ईरान युद्ध : कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी. यूँ कोई...!
वाशिंगटन डीसी। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब यूरोप तक पहुंच गया है। यूरोपियन यूनियन के सदस्य देश साइप्रस पर भी ईरान ने ड्रोन और बेलस्टिक मिसाइल से हमले किये। एक हमले में रनवे क्षतिग्रस्त हुआ है लेकिन अन्य हमलों को निष्फल कर दिया गया। वहीं कुवैत ने स्वीकार किया है कि रविवार रात को अमेरिका के तीन विमानों को गलती से उसके एयर डिफेंस से मार गिराया गया, हालांकि सभी 6 पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है और वह अस्पताल में हैं। अब इस मामले की जांच चल रही है कि यह गलती कैसे, क्यों और कहां हुई?
ईरान पर जहां अमेरिका और इजरायल ने अपने हमले जारी रखे और कई सरकारी संस्थानों और सैन्य क्षेत्रों को खत्म करने का दावा किया है। यूएसए के रक्षामंत्री (युद्धमंत्री) पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान के मिसाइल बनाने के संयंत्र पर हमला किया गया है और उसको नष्ट कर दिया गया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि युद्ध चार से पांच सप्ताह तक चलने की संभावना है और अमेरिका के पास इससे कहीं ज्यादा समय तक युद्ध चलाने के संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, हमने पहले ही दिन पहले ही घंटे में अयातुल्ला खामेनेयी को मार गिराया। इसके अतिरिक्त और कई अधिकारियों व नेताओं को ढेर कर दिया गया।
ईरान ने इजरायल, यूएई, सउदी अरब तथा साइप्रस सहित कई देशों में टारगेट हमले किये। इजरायल के प्रधानमंत्री का कहना है कि तेहरान ने सिविल क्षेत्र को निशाना बनाया जबकि येरूशलम आवासीय क्षेत्रों पर हमला नहीं कर रहा है।
वहीं दुबई का इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद कर दिया गया है। 500 फ्लाइट के कैंसिल होने की जानकारी दी गयी है। ईरान लगातार यूएई को टारगेट कर रहा है। एयरपोर्ट पर ड्रोन से हमला किये जाने की आशंका के चलते यह कदम उठाया गया है।
दूसरी ओर सउदी अरब में अरामको की रिफाइनरी को निशाना बनाते हुए हमला किया गया, जिससे वहां पर भारी नुकसान हुआ क्योंकि आग लग गयी।
ट्रम्प अपने हजारों सैनिकों को हजारों किमी दूर क्यों भेजा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हजारों सैनिकों को हजारों किमी दूरी ईरान के चारों तरफ घेरा डालने और बाद हमला करने के लिए भेजा। यह हमले क्यों जरूरी हो गये थे। कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी, यूँ कोई...इस तरह का कदम नहीं उठाता। 23 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा था, ईरान अमेरिका के लिए खतरा है। वक्त गुजरता चला गया, लेकिन अमेरिका का खतरा कम नहीं हुआ। अमेरिका का आरोप है कि हिजुबल्लाह जैसे प्रोक्सी संगठन को तैयार किया गया, जो विश्व समुदाय के लिए खतरा बन गये।
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी. यूँ कोई...की इन पंक्तियों को इस तरह से पढ़ा जा सकता है कि ट्रम्प के पास भी अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा आदि की चुनौतियां रही होंगी तभी तो इतना बड़ा कदम उठाया गया। हजारों सैनिकों, सैकड़ों विमान, दर्जनों शिप और युद्धपोत आदि भेजे गये। एक सैन्य अभियान आरंभ हो गया जो एक माह से भी अधिक समय से चलने की संभावना अमेरिका स्वयं जता रहा है।
अयातुल्ला कैसे नाजी बन गये?
जर्मन के एडोल्फ हिटलर ने विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ पर ही हमला कर दिया था जो उनकी मदद कर रहा था। उसी तरह से ईरान ने भी गल्फ कंट्रीज पर ही हमला कर इस युद्ध की आग को भडक़ा दिया है। यह आग अब धीरे-धीरे फारस की खाड़ी को अपनी चपेट में ले रही है। अरब सागर के देश ईरान के खिलाफ जवाबी कार्यवाही के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं क्योंकि उनकी देशों को भी लगातार निशाना बनाकर हमले किये जा रहे हैं। अयातुल्ला खां के लिए भी इसी तरह से कुछ शब्द एक शायर कहकर गया था,
अगर समझा होता जि़ंदगी की रीत को,
तो यूं अल्विदा न होता,
सुकून की जगह बस
जख़्मों की बारिश पाले रहा।
अयातुल्ला खामेनेयी तो चला गया किंतु ईरान की कमान जिस व्यक्ति के हाथों में भी है, वह एक ऐसी आग को जन्म दे रहा है जो विकराल रूप धारण करती जा रही है। यूरोपीय यूनियन के देश साइप्रस को भी निशाना बनाया गया और वहां पर ब्रिटिश सेना के ऐयरबेस कैम्प पर हमला किया गया। हालांकि ब्रिटेन इस युद्ध का हिस्सा नहीं था।
अरब के देशों के साथ यूरोपीयन यूनियन भी धीरे-धीरे युद्ध के मैदान में आ सकती है क्योंकि मजबूरी हो सकती है। नाटो के सभी सदस्य देश मेम्बर हैं और नाटो का अर्थ है कि एक देश पर हमला, सभी देशों पर हमला। अगर नाटो ऐसा नहीं करता है तो उसकी भी प्रांसगिकता पर सवाल उठने लाजमी हो जायेंगे।
तिलक वर्मा में भारत का माइकल बेवन बनने के सभी गुण विद्यमान
वर्मा के साथ सैमसन को भी वनडे में मिले जगह, आईसीसी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में भारत-इंग्लैण्ड चार बार भिड़े, मुकाबला टाई रहा
श्रीगंगानगर। 20-20 ओवर के सुपर आठ के आखरी मैच में भारत ने वेस्टइंडीज को परास्त कर सेमीफाइनल में जगह बना ली। संजू सैमसन मैच के हीरो रहे लेकिन तिलक वर्मा और हार्दिक पांडया का किरदार लीग व सुपर-8 में शानदार रहा है और वर्मा में वह सभी गुण दिखे जो कभी माइकल बेवन में होते थे। अकेले दम पर मैच को जीता देना।
ऑस्ट्रेलिया के माइकल बेवन को शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा और जब वे रिटायर हुए तो इसके बाद टीम उनकी बराबरी का खिलाड़ी तलाश नहीं पायी। हालात यह हो गये कि 20-20 के 2026 के वल्र्ड कप के सुपर 8 भी खेल नहीं पायी। वह पहले ही बाहर हो गयी।
भारत की किस्मत को शानदार कहा जा सकता है कि बेवन की बराबरी का खिलाड़ी तिलक वर्मा के रूप में मौजूद है। जो तेल खेल सकते हैं। स्ट्राइक बार-बार बदल सकते हैं और परिस्थिति के अनुसार गियर बदलकर मैच का रूख भी अपने पक्ष में कर सकते हैं। अभी तक उनको 20-20 में अवसर मिले हैं और वनडे में भी उनको यह मौका मिलता है तो निसंदेह वर्मा एक शानदार खिलाड़ी होंगे और अगले विराट कोहली के रूप में पहचान बना लेंगे।
इसी तरह से संजू सैमसन ने दिखाया कि उनके पास धैर्य भी है। टाइमिंग भी है और मैच को अपने अनुसार चलाने की क्षमता भी है। सैमसन भी वनडे टीम के लिए बराबर का मौका रखते हैं और उनको यह मौका मिलना भी चाहिये। बैटिंग क्रम में गहराई इस समय वनडे टीम में नहीं है। रोहित, विराट के आउट होते ही टीम का मनोबल कमजोर हो जाता है और इस मनोबल को बनाये रखने की जिम्मेदारी तिलक वर्मा, संजू सैमसन और हार्दिक पांडया पांच, छ: और सात नंबर पर आकर ले सकते हैं।
1987 में भारत को भारत में हरा दिया था इंग्लैण्ड ने
भारत और इंग्लैण्ड के बीच 20-20 फार्मेट में दो सेमीफाइनल मुकाबले हुए हैं। 2022 के सेमीफाइनल में इंग्लैण्ड ने एडिलेड में भारतीय टीम को 10 विकेट से करारी शिकस्त दी थी। लेकिन 2024 का सेमीफाइनल मुकाबला एक बार पुन: दोनों टीमों के बीच हुआ और इस बार बाजी भारत के पक्ष में रही और रोहित के नेतृत्व वाली टीम ने यह वल्र्ड कप भी अपने नाम कर लिया था। कल तीसरा मुकाबला होगा। संयोग देखिये कि लगभग तीसरी बार दोनों सेमीफाइनल खेल रहे होंगे, आमने-सामने।
वल्र्ड कप -50-50 की बात करें तो उसमें भी मुकाबला टाई का रहा है और 1987 में भारतीय टीम लीग मैचों में शानदार प्रदर्शन कर सेमीफाइनल में पहुंची थी और इंग्लैण्ड की टीम ने भारत को हरा दिया था। रिलायंस वल्र्ड कप भारत में खेला गया था। नवजोत सिंह सिद्धू और अजरूरद्दीन का पहला वल्र्ड कप मैच था और सिद्धू ने लीग मैचों में शानदार फुटवर्क का इस्तेमाल करते हुए स्पिनर के खिलाफ सिक्स लगाने का अपना हुनर दिखाया था और यह पहला मौका था कि किसी वल्र्ड कप में भारतीय खिलाड़ी ने इतने सिक्स लगाये हों।
भारत सेमीफाइनल हारकर बाहर हो गया। इंग्लैण्ड इससे पहले 1983 में भी भारत के साथ इसी तरह का मुकाबला खेल चुका था, जिसे भारत ने जीता था। वेस्टइंडीज के साथ फिर फाइनल मुकाबला खेलकर चैम्पियन बनकर क्रिकेट को नयी बुलंदियों तक पहुंचाया था।
Saturday, February 28, 2026
आई एम नॉट ओबामा : ट्रम्प, बुश के संसद को दिये गये भाषण के अंश सामने आये
श्रीगंगानगर। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दो दिन पहले सोशल मीडिया पर बयान दिया था, आई एम नॉट ओबामा! इसका अर्थ समझने के लिए काफी मेहनत की आवश्यकता महसूस हुई क्योंकि आज प्रात: भारतीय समयानुसार 9 बजे अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से हमला कर दिया।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने ऐसा क्यों बयान दिया कि ईरान, आई एम नॉट ओबामा। इसका अर्थ समझने के लिए अमेरिकी संसद के इतिहास के पन्नों को देखा गया। 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति ने संसद के संयुक्त सत्र को रात के समय संबोधित किया था। जून में आयोजित कार्यक्रम में बुश ने कहा था, ईरान से अमेरिका को सबसे बड़ा खतरा है। इस तरह से उन्होंने मध्य पूर्व एशिया में घटित होने वाले घटनाक्रम पर प्रकाश डाला था।
राष्ट्रपति बुश के इस बयान के बाद भी हालांकि न तो बुश और न ही उनके बाद 8 साल तक राष्ट्रपति रहने वाले ईरान पर कार्यवाही की गयी। उस घटना के 23 साल बाद अमेरिका ने ईरान पर 28 फरवरी 2026 को हमला किया।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने फिर से ईरान से उत्पन्न होने वाले खतरों बारे अवगत करवाया और बताया कि तेहरान ने अमेरिकंस के लिए सदैव खतरा उत्पन्न किया है। अमेरिका के लोगों और सैनिकों की हत्या की घटनाओं का भी उन्होंने सिलसिलेवार वर्णन किया। राष्ट्रपति ट्रम्प और बुश दोनों के ही बयान ऑनलाइन उपलब्ध हैं और उनको पढ़ा, देखा व सुना जा सकता है।
Friday, February 27, 2026
तालिबान भस्मासुर कैसे बन गया? युद्ध के समय कोई मित्र क्यों नहीं आया?
श्रीगंगानगर। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में स्थानीय लड़ाकों को तैयार किया जिसका नाम तालिबान रखा गया। इनका काम सोवियत संघ के साथ गौरिल्ला युद्ध करना था। सोवियत सेना की वापसी और उसके विघटन के बाद रूस महाशक्ति के रूप में सामने आया।
तालिबान, उस समय भी था जब अमेरिका में वल्र्ड ट्रेड टॉवर को निशाना बनाया गया और उस समय भी था जब भारत के एक वायुयान का अपहरण कर उसको कंधार लाया गया था। इस विमान अपहरण के समय यह देखने वाला होगा कि पहले अमृतसर, फिर लाहौर और अंत में कंधार ले जाया गया। अमृतसर बाबा नानक का शहर है। लाहोर भगवान श्रीराम के पुत्र लव द्वारा बसाया गया शहर है और कंधार जो पहले गंधार कहलाता था, महाभारत के समय युद्ध का एक बड़ा कारण बना था।
खबर अब यह है कि पाकिस्तान ने जिस तालिबान को संवारा, प्रशिक्षित किया, अब वही उसके खिलाफ हथियार उठा रहा है। अमेरिका या नाटो की सेना के बाद तालिबान ने एक सप्ताह से भी कम समय में अफगानिस्तान की सत्ता पर दुबारा कब्जा कर लिया था।
भारत के साथ तालिबान के राजनयिक संबंध हैं। भारत गणराज्य की सरकार दवा, गेहूं और अन्य खाद्य पदार्थ का सहयोग करती है, इस कारण इस्लामाबाद यह मानता है कि तालिबान के पीछे अब भारत है।
युद्ध को दो दिन हो गये हैं लेकिन भारत सरकार ने उस तक कोई सहायता नहीं पहुंचायी है, इस तरह से सैन्य सहायता नहीं मिलने के कारण अफगान पाक के सामने कमजोर हो गया है तो दूसरी ओर रावलपिंडी का यह बयान भी फिका हो गया कि भारत मदद कर रहा है।
अफगान तालिबान के पास वायुसेना नहीं है। अमेरिकी जहाज हैं एफ 16 आदि, उसका संचालन करना उनको नहीं आता। इस तरह से पाकिस्तान के सामने वह कमजोर हो जाता है और इस्लामाबाद की तरह सीमा पार जाकर उसके घर में घुसकर हमला नहीं कर पा रहा है। सेना भी कम है और हथियार भी पाक के बराबर नहीं है।
भारत अगर मदद कर रहा होता तो आधुनिक हथियार और वायुसेना का कम से कम एक कमांड तैयार कर चुका होता और फाइटर जेट भी दिये होते।
कुल मिलाकर पाक के साथ युद्ध के मामले में अफगानिस्तान ने पहले ही दिन वार्ता की मांग कर डाली। हालांकि शाम होते-होते एक बार फिर से यह समाचार आ रहे हैं कि तालिबान पुन: तैयार हो गया है। युद्ध कर रहा है।
Wednesday, February 25, 2026
भारत और अमेरिका के बीच एक फिर ठन गयी है, सौलर पैनल पर 128 प्रतिशत टैक्स,
श्रीगंगानगर। भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच खटास बढ़ती जा रही है और संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत पर सौर ऊर्जा से संबंधित उपकरणों के आयात पर 126 प्रतिशत टैक्स लागू किया है। इसके साथ ही यूएसए ने ‘स्टॉप इनसाइडर टे्रड एक्ट’ का भी प्रावधान किया है। यह बिल कानून बनने वाला है।
चीनी सामान की भारत में एक बार फिर भरमार हो रही है। पानीपत का हैण्डक्राफ्ट उद्योग इस का जीवित प्रमाण है जहां पर निर्माण से संबंधित उद्योग धंधे प्रभावित हो रहे हैं और एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 80 प्रतिशत तक कारखाने बंद हो गये हैं और चीन से सामान आयात किया जा रहा है।
इसी तरह से सौर ऊर्जा को लेकर भी यही चर्चा है कि भारत में उत्पादन की बजाय चीन से सामान को आयात किया जाता है और उसको अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर के कारण ऐसा होता है।
इस तरह के समाचारों के बीच अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सौर ऊर्जा से संबंधित उपकरणों पर 126 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है।
इससे पहले भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर सहमत हो गये थे किंतु सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रम्प के फैसलों को पलट दिया था तो राष्ट्रपति ने 15 प्रतिशत ग्लोबल टैक्स का प्रावधान कर दिया। ट्रम्प ने कहा, भारत पहले 100 अरब के व्यापार में आयात कर नहीं देता था किंतु अमेरिका पर लगाया जाता था अब उल्टा हो गया है।
इस तरह से दोनों देशों के बीच एक बार फिर से ठन गयी है क्योंकि भारत गणराज्य की सरकार ने वाशिंगटन के साथ होने वाली टे्रड डील संबंधित वार्ता को भी स्थगित कर दिया था।
महानगरों में दूध की भारी कमी फिर भी डील नहीं, क्यों?
अभी कुछ दिन पहले ही राजस्थान के तीन शहरों में 14 हजार लीटर नकली दूध बरामद किया गया। तीन शहरों से यह बरामदगी हुई और अगर इसको आधा दर्जन या एक दर्जन जिलों में छापामारी की जाती तो यह मात्रा कई गुणा तक बढ़ सकती थी।
जयपुर, दिल्ली, मुम्बई सहित बड़े शहरों की जनसंख्या हर दिन बढ़ती जा रही है और उस समय दूध आसपास के शहरों से मंगवाया जाता है जो हजारों या इससे कहीं ज्यादा मात्रा में होता है।
मांग के मुकाबले भारत में दूध का उत्पादन कम हो गया है, यह सरकारी आकड़े हैं, इसके बावजूद दूध उत्पादन बढ़ावा देने के लिए सरकार के पास कोई परिणाम नहीं है।
इस तरह की स्थिति होने के बावजूद डेयरी उद्योग को संरक्षण देने के लिए अभी विदेशी संस्थानों को दूध एक्सपोर्ट की अनुमति नहीं दी गयी है। यह भय दिखाया जा रहा है कि इससे स्थानीय पशुपालकों को नुकसान होगा। यह नहीं दिखाया जा रहा कि दूध की कमी के कारण नकली दूध बाजार में आ रहा है जो सिंथेटिक होने के कारण अनेक लोगों को बीमारियां दे रहा है।
मिलावट अकेले दूध में नहीं है बल्कि दूध निर्मित खोया, पनीर और घी आदि में भी है। नकली दूध, नकली उत्पाद, यह कहानी हकीकत बन गयी है।
स्टॉप इंटरनल ट्रेड एक्ट की चर्चा
राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह को अमेरिका की संसद में भाषण दिया तो उन्होंने डेमोक्रेटिक नेता नेैनसी पेलोसी की भी आलोचना की, जो कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं, उनकी आलोचना को मौजूदा डेमोक्रेट्स ने भी खड़े होकर अभिवादन किया।
वहीं स्टॉप इंटरनल ट्रेड एक्ट की भी चर्चा हुई। इस दौरान ही यह समाचार आ गया कि अमेरिका ने भारत पर सौर ऊर्जा पर 126 प्रतिशत टैक्स लगा दिया है।
वोटर आईडी-सेव अमेरिका एक्ट अभी भी डेमोक्रेट्स के पास
वोटर आईडी को चुनावों में अनिवार्य किये जाने वाले एक्ट, सेव अमेरिका बिल को निचले सदन हाउस ने तो मंजूरी दे दी है किंतु अभी तक यह सीनेट से पास नहीं हो पाया है। इसका कारण है कि सीनेट से किसी भी बिल को पास करवाने का अर्थ होता है 60 सदस्यों का समर्थन। रिपब्लिकन के पास 52 सदस्य हैं। 8 कम हैं। यह डेमोक्रेट ही पास करवा सकते हैं और वे फिलहाल रुचि नहीं ले रहे हैं जिससे यह बिल लटका हुआ है।
Monday, February 23, 2026
इजरायल की यात्रा पीएम मोदी के लिए सबसे अहम!
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य की कैबिनेट सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं को हिन्दू प्रचारक होने का दावा करने के लिए विदेशी नेताओं को श्री मद्भागवत गीता महाग्रंथ की कॉपी भेंट करते हैं। गीता प्रेस को वे सम्मानित करते हैं। इस तरह से वे प्रचार करते हुए एक हिन्दूवादी नेता की छवि को बनाये रखने का दावा करते हुए 12 साल से शासन कर रहे हैं किंतु सत्य यह है कि इजरायल यात्रा यह भी बतायेगी कि उन्होंने श्री मद्भागवत गीता को अपने जीवन में अपनाया हुआ है, क्योंकि 2047 तो छोडिय़े 2027 भी पीएम के लिए मुश्किल होने वाला है और भारत सरकार की नीतियों के कारण देश के लोग भी अकारण युद्ध का सामना कर सकते हैं।
नरेन्द्र मोदी 10 सालों से अनेक बार कह चुके हैं कि इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतनयाहू उनके सबसे प्रिय मित्र हैं। अब वे उसी मित्र से मिलने के लिए 25 फरवरी को नई दिल्ली से रवाना होंगे और 26 फरवरी को देश लौटेंगे। इससे पहले वे येरूशलम में संसद को भी संबोधित कर सकते हैं।
दो दिन की यात्रा के दौरान वे वहां से लौटेंगे तो उत्तरी अमेरिकी देश के प्रधानमंत्री मार्क कोर्नी उनकी यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे होंगे।
मध्य एशिया में तनाव के बीच करेंगे यात्रा
पीएम मोदी उस समय मध्य एशिया की यात्रा पर जा रहे हैं जब वहां पर तनाव बना हुआ है। इससे पहले उन्होंने 22 अप्रेल 2025 को सउदी अरब की यात्रा की थी। वे सउदी की सीमा में प्रवेश करनेवाले थे कि टीवी पर समाचार आरंभ हो गये कि मोदी को एस्कौर्ट करने के लिए अरब के फाइटर जेट पहुंच गये हैं और हवा में अनेक जेट भी दिखाये गये। स्वागत सत्कार के बाद अभी उन्होंने दोपहर का भोजन भी नहीं किया था कि पहलगाम में आतंकवादी हमले की सुर्खियां दुनिया के सामने पहुंच गयीं।
पीएम वहां से बिना भोजन और मेजबान नेताओं से मिले बगैर वहां से रवाना हो गये और नई दिल्ली पहुंचकर एयरपोर्ट पर ही उन्होंने जो अल्पाहार लेना था, वह लिया और इसके बाद तनावपूर्ण स्थिति की समाचार आ गयी। सउदीअरब ने पाकिस्तान के सिर पर हाथ रख दिया। अब दोनों देश नाटो की तरह मित्र हो गये हैं। एक पर हमला तो दूसरे पर हमला समझा जायेगा।
इजरायल यात्रा क्या कहती है?
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतनयाहू हाल ही में वाशिंगटन की यात्रा से लौटे हैं। वे वहां विदेश मार्को रूबियो, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अलग-अलग मुलाकात कर उनके विचारों के साथ लौटे हैं।
इसमें कहने में कोई संकोच नहीं है कि अमेरिका और भारत गणराज्य की सरकार के बीच इस समय ऐसा तनाव है, जो पहले कभी नहीं रहा। कोल्ड वॉर जारी है। यह कभी भी युद्ध का रूप ले सकता है।
पिछले कुछ दिनों के भीतर ही तनावपूर्ण क्षण भी आये और उस समय लगा था कि दोनों तरफ के फाइटर हवा में नजर आ सकते हैं।
अब इजरायल के पीएम नेतनयाहू से पीएम मोदी से मिलेंगे तो पर्दे के पीछे जो बात होगी वह डोनाल्ड ट्रम्प के दिये गये संदेश और बदले में प्राप्त प्रतिक्रिया ही होगी। पर्दे के सामने भले ही पीएम मोदी को जो भी सम्मान मिले, लेकिन पर्दे के पीछे का असली खेला होगा और यह क्या होगा, अभी इसकी कल्पना की जा सकती है।
कल्पना यही है कि अमेरिका टैरिफ के अलावा भी भारत से कुछ हासिल करना चाहता है। भारत सरकार के पास पेट्रोल के कुएं तो है नहीं, इस कारण वह हमला कर रहा हो। न ही उसको भारत की भौतिकी सम्पत्ति से कोई लगाव है। जिसके लिए यह तनाव बना हुआ है। अमेरिका भारत सरकार की नीतियों से बिलकुल प्रसन्न नहीं है और वाशिंगटन-क्रेमलिन के बनाये गये दबाव का ही परिणाम है कि 18 प्रतिशत तक जीएसटी को सीमित कर दिया गया। सरकार पर दबाव है कि वह टोल नीति में भी परिवत्रन करे क्योंकि श्रीगंगानगर से मुम्बई तक ट्रक के एक राउंड के 20 से 25 हजार तक का टोल लग रहा है।
यह महंगाई जनता को खायी जा रही है। आय कमजोर होती जा रही है और सडक़ ठेकेदार, सीमेंट कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचाया जा रहा है। इस तरह से अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है जिससे लूट की दुकानों को बंद किया जा सके। लगभग हर मंत्री ने अपने लिये एक दुकान को खोल कर रखा हुआ है।
रूस ने हथियार देने से मना कर दिया
अगर रूस की मीडिया रिपोर्ट और थिंक टैकं के विचारों को सामने लाकर समझा जाये तो सामने आता है कि ब्लादीमिर का ‘जोरदार स्वागत’ के बाद भी मास्को ने हथियारों से संबंधित समझौता नहीं किया। इसी तरह से अमेरिका भी फाइटर जेट को बेचने से बच रहा था।
क्या कहता है गीता का ज्ञान
श्री मद्भागवत गीता का ज्ञान यही कहता है कि एक सच्चा मित्र वही है जो उचित परामर्श दे जो उसकी और उसके मुल्क की तरक्की करे। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के साथ अपना रिश्ता बनाये रखने के लिए या उसको मजबूत करने के लिए अपनी बहन सुभद्रा का विवाह परिवार की सहमति के बिना कर दिया था। युद्ध के मैदान में पूरा ज्ञान दिया। उसी तरह से नेतनयाहू की जो उचित सलाह हो उसको मोदी को स्वीकार करना चाहिये। जो उचित नहीं लगे उसको छोड़ देना चाहिये।
पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति से सीधा मिलने से परहेज कर रहे हैं। इस तरह से इजरायल एक मध्यस्थ की भूमिका में है।
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