Monday, March 2, 2026

 

तिलक वर्मा में भारत का माइकल बेवन बनने के सभी गुण विद्यमान


वर्मा के साथ सैमसन को भी वनडे में मिले जगह, आईसीसी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में भारत-इंग्लैण्ड चार बार भिड़े, मुकाबला टाई रहा

श्रीगंगानगर। 20-20 ओवर के सुपर आठ के आखरी मैच में भारत ने वेस्टइंडीज को परास्त कर सेमीफाइनल में जगह बना ली। संजू सैमसन मैच के हीरो रहे लेकिन तिलक वर्मा और हार्दिक पांडया का किरदार लीग व सुपर-8 में शानदार रहा है और वर्मा में वह सभी गुण दिखे जो कभी माइकल बेवन में होते थे। अकेले दम पर मैच को जीता देना। 

ऑस्ट्रेलिया के माइकल बेवन को शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा और जब वे रिटायर हुए तो इसके बाद टीम उनकी बराबरी का खिलाड़ी तलाश नहीं पायी। हालात यह हो गये कि 20-20 के 2026 के वल्र्ड कप के सुपर 8 भी खेल  नहीं पायी। वह पहले ही बाहर हो गयी। 

भारत की किस्मत को शानदार कहा जा सकता है कि बेवन की बराबरी का खिलाड़ी तिलक वर्मा के रूप में मौजूद है। जो तेल खेल सकते हैं। स्ट्राइक बार-बार बदल सकते हैं और परिस्थिति के अनुसार गियर बदलकर मैच का रूख भी अपने पक्ष में कर सकते हैं। अभी तक उनको 20-20 में अवसर मिले हैं और वनडे में भी उनको यह मौका मिलता है तो निसंदेह वर्मा एक शानदार खिलाड़ी होंगे और अगले विराट कोहली के रूप में पहचान बना लेंगे। 

इसी तरह से संजू सैमसन ने दिखाया कि उनके पास धैर्य भी है। टाइमिंग भी है और मैच को अपने अनुसार चलाने की क्षमता भी है। सैमसन भी वनडे टीम के लिए बराबर का मौका रखते हैं और उनको यह मौका मिलना भी चाहिये। बैटिंग क्रम में गहराई इस समय वनडे टीम में नहीं है। रोहित, विराट के आउट होते ही टीम का मनोबल कमजोर हो जाता है और इस मनोबल को बनाये रखने की जिम्मेदारी तिलक वर्मा, संजू सैमसन और हार्दिक पांडया पांच, छ: और सात नंबर पर आकर ले सकते हैं। 


1987 में भारत को भारत में हरा दिया था इंग्लैण्ड ने

भारत और इंग्लैण्ड के बीच 20-20 फार्मेट में दो सेमीफाइनल मुकाबले हुए हैं। 2022 के सेमीफाइनल में इंग्लैण्ड ने एडिलेड में भारतीय टीम को 10 विकेट से करारी शिकस्त दी थी। लेकिन 2024 का सेमीफाइनल मुकाबला एक बार पुन: दोनों टीमों के बीच हुआ और इस बार बाजी भारत के पक्ष में रही और रोहित के नेतृत्व वाली टीम ने यह वल्र्ड कप भी अपने नाम कर लिया था। कल तीसरा मुकाबला होगा। संयोग देखिये कि लगभग तीसरी बार दोनों सेमीफाइनल खेल रहे होंगे, आमने-सामने। 

वल्र्ड कप -50-50 की बात करें तो उसमें भी मुकाबला टाई का रहा है और 1987 में भारतीय टीम लीग मैचों में शानदार प्रदर्शन कर सेमीफाइनल में पहुंची थी और इंग्लैण्ड की टीम ने भारत को हरा दिया था। रिलायंस वल्र्ड कप भारत में खेला गया था। नवजोत सिंह सिद्धू और अजरूरद्दीन का पहला वल्र्ड कप मैच था और सिद्धू ने लीग मैचों में शानदार फुटवर्क का इस्तेमाल करते हुए स्पिनर के खिलाफ सिक्स लगाने का अपना हुनर दिखाया था और यह पहला मौका था कि किसी वल्र्ड कप में भारतीय खिलाड़ी ने इतने सिक्स लगाये हों। 

भारत सेमीफाइनल हारकर बाहर हो गया। इंग्लैण्ड इससे पहले 1983 में भी भारत के साथ इसी तरह का मुकाबला खेल चुका था, जिसे भारत ने जीता था। वेस्टइंडीज के साथ फिर फाइनल मुकाबला खेलकर चैम्पियन बनकर क्रिकेट को नयी बुलंदियों तक पहुंचाया था। 






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