Thursday, August 28, 2025

 

मोदी-ट्रम्प की निजी नाराजगी भी भारत का राष्ट्रीय मुद्दा बन गयी?



श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। इसका असर लाखों नहीं करोड़ों लोगों के रोजगार पर दिखाई देने लगा है। अप्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष रूप से 190 बिलियन डॉलर के निर्यात से करोड़ों लोगों को रोजगार हासिल हो रहा था। 

ट्रम्प के 2016-20 के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दो बोइंग विमान दिये गये, जो संयुक्त राज्य के राष्ट्राध्यक्ष के समान ही सुविधाएं रखते हैं। इन दो बोइंग स्पैशल विमान से प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ने दुनिया भर की सैर की है। उस समय ‘एक बार फिर ट्रम्प सरकार’ का नारा भी लगाया गया था। 

वर्ष 2024 में राष्ट्रपति ट्रम्प को बधाई देने वालों में मोदी सबसे पहले फोन करने वाले राष्ट्राध्यक्ष थे। इसका भी खूब प्रचर किया गया। 

भारत गणराज्य की सरकार कह रही है कि हम रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं। वो खरीदते रहेेंगे। यह सामने आ चुका है कि मास्को से खरीदा गया तेल यूरोपियन यूनियन देशों को बेचा गया। 600 बिलियन से ज्यादा की राशि का मुनाफा अकेले मुकेश अम्बानी को हुआ। 

मुकेश अम्बानी अगस्त 2025 से पूर्व मोदी के खास लोगों में शामिल थे। 

अम्बानी, ट्रम्प और मोदी की मित्रता समाप्त हो गयी तो सीधे तौर पर सीबीआई, ईडी की छापेमारी भी आरंभ हो गयी। अनिल अम्बानी भी लपेटे में आ गये। 


विदेश मंत्री का बेटा अम्बानी का कर्मचारी

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की विदेश नीति की वाहवाही हो रही थी, इसके पीछे कई कारण थे। प्रमुख कारण था अमेरिका में विदेश मंत्री का पुत्र रिलायंस के एक संगठन का कार्यकारी प्रमुख था। इस संगठन का कार्य विश्व भर में आर्थिक, राजनीतिक रिसर्च करने का काम था और उसको ओआरएफ के नाम से जाना जाता है। 

अमेरिका में लॉबिंग को कानूनी रूप का दर्जा दिया हुआ है अर्थात वहां पर सांसदों, मंत्रियों को पैसे देकर अपने साथ जोड़ा जा सकता है। प्राप्त राशि की जानकारी सरकार तक पहुंचायी जाती है और उसका टैक्स भी वसूल किया जाता है। 

भारत में भी होता है लेकिन अंडर टेबल या पर्दे के पीछे।

अब अमेरिका से ही सीधी चुनौति मोदी को मिल रही थी तो पूरा सिस्टम ही हिल गया। 

मोदी ने यहां भी राजनीति का कार्ड खेला और इसको कृषि, मछुआरों से जोड़ दिया। 

निजी मतभेद भी राष्ट्रवाद से जुड़ गये। 

अभी तक बेदाग छवि का प्रचार करने वाले नरेन्द्र मोदी के मंत्रियों पर निशाना साधने का मौका विपक्ष को मिल गया। 


चीन क्या अमेरिका का विकल्प बन सकता है

हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच संक्षिप्त युद्ध में चीन ने पाकिस्तान को जे सीरिज के अपने फाइटर दिये। कई अन्य उपकरण भी उपलब्ध करवाये। यह प्रचार स्वयं साउथ ब्लॉक के निजी प्रसारणकर्ताओं ने किया। 

अब चीन शंघाई सहयोग संगठन के बहाने अपनी ताकत प्रदर्शित करना चाहता है क्योंकि अमेरिका ने चीन पर भी 30 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है। यह कार्यक्रम 1 सितंबर से आरंभ हो रहा है और भारत गणराज्य के पीएम वहां पर जा रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोन उन भी शामिल होंगे। 

शंघाई सहयोग सम्मेलन में भारत के साथ पाकिस्तान और कई अन्य सोवियत विघटन वाले देश भी शामिल हैं। 

चीन के शी जिंग पिन यहां पर अपनी मुद्रा येन को यूएस डॉलर की तरह विश्व अर्थव्यवस्था में स्थापित करने की योजना पर मोदी, पुतिन, ईरान आदि के साथ चर्चा करेंगे। 

स्वीफ्ट जो दुनिया भर में धन का ऑटोमैटिक प्रवाह करता है। उसी तरह की व्यवस्था बनाये जाने पर बात चल रही है। 

वाशिंगटन इस व्यवस्था को कामयाब होने दे सकता है, शायद कभी नहीं। 


अब श्रीकृष्ण के विचारों की बुनियाद की चर्चा

लाल किले से 15 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, जिनसे लिया है, उनको वापिस किया जायेगा। एक साल बाद उन्होंने आजादी के दिन कहा, अब भगवान श्रीकृष्ण के विचारों  पर चला जायेगा। इसके बाद उन्होंने नगाड़ा बजाते हुए अपना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया। 

भारत गणराज्य की सरकार ने देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अम्बानी, उनके भाई अनिल अम्बानी के खिलाफ ईडी, सीबीआई आदि की कार्यवाही आरंभ हो गयी। 

मुकेश अम्बानी के पास 10 लाख करोड़ की सम्पदा है और इसमें करीबन 4 लाख करोड़ रुपये का ऋण है। वहीं गौतम अडाणी के पास भी कई लाख करोड़ की सम्पत्ति है। अडाणी पर तीन लाख करोड़ का कर्जा है। 

भारत सरकार के नजदीकी होने के कारण विश्व भर से अडाणी समूह को लोन मिल रहे थे लेकिन ट्रम्प के व्हाइट हाउस में आने के बाद ऐसा संभव नहीं हो रहा है। कुछ समय के भीतर अडाणी समूह ने बड़े ऋण लिये हैं। 

ऐसा नहीं है कि अम्बानी पर कार्यवाही के बाद अन्य कार्पोरेटर्स अपने ऋण अदा करने के लिए बैंक जा रहे हैं। 

एक रिपोर्ट बताती है कि देश में 1 प्रतिशत लोगों के पास 99 प्रतिशत धन हो गया है और 99 प्रतिशत के पास 1 प्रतिशत सम्पदा है। इस तरह से अमीर-गरीब के बीच खाई काफी बढ़ गयी है। 

सोने के दाम 30 हजार से 1 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंचाकर मोदी सरकार ने आकड़ों में देश की जीडीपी 4 ट्रिलियन बताकर चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था का दावा कर दिया। यह नहीं भूलना चाहिये कि सोने के दामों में इतनी तेजी के बाद सोना मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर हो गया है। 

ट्रम्प-अम्बानी-शी जिंग पिन-मोदी की प्रभुत्व की लड़ाई राष्ट्रवाद से कैसे जुड़ सकती है। पीएमओ के जो नजदीकी है, उनके परिवार के सदस्य बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए लॉबिंग का काम कर रहे हैं और भारतीय लोग इसे देश की सम्प्रभुता पर हमला मान रहे हैं। 


Tuesday, August 19, 2025

 

रूस दुनिया को क्या संदेश दे रहा है?



मास्को। रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रम्प की वार्ता अलास्का में हुई और संयुक्त बयान में कोई विशेष जानकारी औपचारिक रूप से नहीं दी गयी किंतु पुतिन ने अपने एक संदेश से दुनिया को बता दिया कि ट्रम्प और उनकी ट्यूनिंग अच्छी है। इसके उपरांत यूक्रेनी नेता व्लादीमिर जेलेंस्की, यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक में भी संयुक्त राज्य की ओर से पुतिन को हॉटलाइन से सम्पर्क साधा गया। इस तरह से अगले एक पखवाड़ा में पुतिन, जेलेंस्की की मुलाकात संभव है। 

अमेरिकी-रशिया की जल सीमा पर बसे अलास्का में डोनाल्ड ट्रम्प ने पुतिन की मेजबानी की और उनके लिए रेड कारपेट बिछाया गया। लम्बी वार्ता हुई और आखिर में ट्रम्प ने यह बयान दिया कि दोनों देश युद्धविराम या अन्य डील नहीं कर पाये हैं। 

अब यहां से कूटनीतिक संदेश पुतिन की ओर से दिया गया और उन्होंने कहा, अगली बैठक होगी जो मास्को आयोजित करेगा। यह एक लाइन उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कही। रशिया में अंग्रेजी भाषा नहीं बोली जाती और शिखर सम्मेलन के दौरान भी रूसी नेता रशिया में ही बात करते हैं किंतु यहां उन्होंने अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल किया। 

इस तरह से उन्होंने बताया कि उनको अमेरिका के साथ वार्ता करने से कोई परहेज नहीं है। ट्रम्प ने उस समय तो यही कहा था कि यह आमंत्रण आकर्षक है। यह कैसे संभव होगा, इस पर काम किया जायेगा। फिर ट्रम्प ने यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक के बीच में पुतिन से सीधी बात की। यह घटनाक्रम ऐसा है जो बहुत कुछ बताता है। 

पुतिन मास्को आ गये और उन्होंने अपने गु्रप के अध्यक्षों के साथ फोन पर वार्ता भी की। भारतीय प्रधानमंत्री के साथ भी गुफ्तगू हुई और विदेश मंत्री एस जयशंकर रशिया के लिए रवाना हो गये। 

अमेरिका पहले ही कह चुका था कि अगर वार्ता विफल हो जाती है तो भारत गणराज्य पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जायेगा। वह 50 प्रतिशत से अलग और ज्यादा होगा। 

जयशंकर को रूसी नेता बतायेंगे कि किस तरह से उनको जमीन तैयार करनी है ताकि संयुक्त राज्य के भारत से प्रतिबंध को हटाया जा सके। अमेरिका से भारत आने वाला व्यापार सहयोग मंडल की यात्रा को भी कैंसिल कर दिया गया है और राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि भारत पहले रूस-युक्रेन युद्ध को समाप्त करवाये। 

यहां से भावनाओं नहीं बल्कि राजनीति को समझने की आवश्यकता है। आखिर क्यों चाहता है कि रूस-युक्रेन के युद्ध को समाप्त करवाया जाये। इन दोनों देशों के साथ भारत सरकार के कोई विवाद नहीं है। 

शांति मार्च के बीच में भारत जीएसटी को कम कर रहा है। कोई राष्ट्रव्यापी मांग नहीं थी बल्कि टैक्स आतंकवाद जो मध्यमवर्ग को धीरे-धीरे नोच रहा था, उसको हटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव मोदी सरकार पर था। 

पुतिन की भारत यात्रा को लेकर काफी हंगामा किया जा रहा है और उनके इस वर्ष आने की संभावना व्यक्त की गयी है, जबकि पुतिन पहले ही कह चुके हैं कि 2014 से पूर्व की परिस्थिति को स्थापित किया जाये। इसका अर्थ यह है कि जो हवाई, बंदरगाह आदि प्राइवेट सैक्टर को दिये गये हैं, वह वापिस लिये जायें। कानून का राज स्थापित किया जाये। 

मोदी की नीति भी देखिये

लाल किले की प्राचीर से पीएम नरेन्द्र मोदी ने इस बार अलग राप का आगाज किया। श्रीराम के स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण के रास्ते पर चलने का ‘संकल्प’ लिया। साथ ही उन्होंने सरकारी स्तर पर घोषणा कर दी कि वे 1 लाख करोड़ रुपये जारी करेंगे जो युवाओं को प्राइवेट सैक्टर में इंटर्नशिप प्राप्त करने पर 15 हजार रुपये का भुगतान दिया जायेगा। 

अर्थात युवाओं को 15 हजार मिलेंगे। कितने लोगों को दिये जायेंगे, यह संख्या नहीं बतायी गयी। वहीं उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों को ‘प्रोत्साहित’ किया जायेगा कि वे बेरोजगारों को इंटर्नशिप के लिए व्यवस्था करें। 

अब यहां से खेल आरंभ होता है। एक लाख करोड़ रुपये प्राइवेट सैक्टर को प्रोत्साहित करने के नाम पर दिये जायेंगे। क्या एक माह के प्रशिक्षण से युवा कौशल प्राप्त कर सकेंगे। हर साल लाखों नहीं करोड़ों युवा कालेज या विश्वविद्याल से बेरोजगार के रूप में बाहर निकलते हैं। उन सभी को 15 हजार रुपये भी दिये जा सकेंगे?

वहीं हर चार साल बाद हजारों युवा सेना से अग्रिवीर के रूप में सामने आयेंगे, उनको रोजगार दिया जा सकेगा?

सीए, बीटेक, एमबीए प्राप्त कर युवा अपने भविष्य के लिए चिंतित हैं और इसके बाद हजारों युवा अग्निवीर भी बाहर आयेंगे। इस तरह से सरकार के समक्ष एक बड़ी चुनौति बनती जा रही है। 

मेड इन इंडिया, स्र्टाटअप, स्टैंडअप, मुद्रा योजना कभी की दम तोड़ चुकी हैं और इन योजनाओं के बीच इंटर्नशिप पर कितना भरोसा किया जा सकेगा  


Tuesday, August 12, 2025

 

प्रोपर्टी बाजार अब टूटा, एक माह में ईडी की दो कॉलोनाइजर्स के खिलाफ कार्यवाही


श्रीगंगानगर। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल (सेनाध्यक्ष) आसिफ मुनीर और भारतीय सेना के महानिदेशक जनरल जनरल उपेन्द्र द्विवेदी के बयानों को देखा और सुना जाये तो सामने आ रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। पाक आर्मी चीफ सहायता के लिए व्हाइट हाउस भी जाकर आये हैं और चीन के साथ भी सम्पर्क बनाये हुए हैं। 

इस तरह से युद्ध की आशंका बनी हुई है। दोनों देशों के बीच कभी भी जमीनी संघर्ष भी हो सकता है। फिलहाल युद्ध की आशंकाओं के कारण प्रोपर्टी बाजार भी प्रभावित हो रहा है। 

अगर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय की चर्चा की जाये तो एक माह के भीतर दो ईडी की कार्यवाही हो चुकी है। इस दौरान तोता के हरी मिर्च खाने की भी चर्चा चल रही है। 

करीबन एक माह पहले सीजीआर मॉल और कई कॉलोनियों के संचालक अमन चौधरी के खिलाफ कार्यवाही हुई थी। अब रिद्धि-सिद्धि सीरिज के संचालक मुकेश-सुरेश शाह ब्रदर्स जांच के दायरे में आये थे। असल में करीबन 6 साल पहले रिद्धि-सिद्धि सीरिज की तीन या चार कॉलोनियां ही थीं और इस वकवे के बीच में 19 कॉलोनियों पर काम चल रहा है। 

रिद्धि-सिद्धि सीरिज में 3, 4, 5 तक सब ठीक था। 6,7, 8, 9 को लेकर शाह ब्रदर्स चर्चा में आ गये थे। 6-7 की जगह लायलपुर फार्म हाउस था। 8 नंबर कॉलोनी जेसीटी मिल की जगह थी। इस कारण  तीनों कॉलोनियों के विस्तार से पहले ही हंगामा हुआ था। 

ईडी की कार्यवाही सोमवार सुबह आरंभ हुई थी और शाम को समाप्त हो गयी। देर रात को ही सभी जगह यह चर्चा आम हो गयी थी कि तोता हरी मिर्च खा गया है। लोग तोता की तलाश कर रहे थे लेकिन वह उड़ गया था।

जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार शाम तक कोई औपचारिक वक्तव्य जारी नहीं किया है। अहमदाबाद में भी कोई अन्य शाह बंधुओं के खिलाफ जांच की गयी थी, उसकी जानकारी दी गयी है। 


Monday, August 11, 2025

 

‘स्वर्ण नगरी के राजा’ शाह के घर पहुंची ईडी


श्रीगंगानगर। अवैध धन शोधन के खिलाफ कार्यवाही करने वाली एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर रिद्धि-सिद्धि के डवल्पर मुकेश शाह संस्थानों पर रेड की है। मुकेश ने हाल ही में नया मकान बनाया था, जिसका नामकरण ‘स्वर्ण नगरी’ रखा गया। 

स्वर्ण नगरी की पहले बातचीत की जाये तो रावण की लंका नगरी ‘स्वर्ण नगरी’ कहलाती थी। इसके उपरांत वर्तमान में जैसलमेर को गोल्डन सिटी कहा जाता है और इसी जिले में बाबा रामदेव का पूजनीय समाधिस्थल है। मुकेश शाह ने कुछ दिन पूर्व ही अपने नये घर का निर्माण करते हुए उसे स्वर्ण नगरी नाम दिया था। 

कोलकाता से आयी है ईडी की टीम

श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर स्वर्ण नगरी के राजा और अनेक कॉलोनियों के डवल्पर मुकेश शाह ने रिद्धि-सिद्धि सीरिज के तहत अनेक कॉलोनियों का निर्माण किया था। अनेक विवादित स्थल खरीदे गये थे और वहां पर कॉलोनियां डवल्प की गयीं। 

कहा जा रहा है कि कोलकाता में ईडी को शिकायत हुई थी, इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय की टीम श्रीगंगानगर पहुंची। मुख्य कार्यालय और घर पर अधिकारियों की टीम दस्तावेज आदि की जांच कर रही है। 

एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोलकाता की एक कंपनी के नाम पर व्यापार किया जा रहा था। इस कंपनी के जांच करते हुए ईडी श्रीगंगानगर तक पहुंची है। इसमें सुनील गोयल भी डायरेक्टर है, जो मुकेश शाह का प्रबंधक है। 

फिल्मी कलाकार सोहम उर्फ सुरेश शाह के भाई हैं मुकेश

मुकेश शाह और सुरेश शाह उर्फ सोहम भाई हैं और श्रीगंगानगर में रिद्धि-सिद्धि सीरिज का विस्तार करते हुए अनेक कॉलोनियों का निर्माण किया है। हालांकि तय समय के अनुसार कॉलोनी के पूरी विकसित नहीं होने के कारण रेरा ने नोटिस भी जारी किये हैं। 

ईडी की भनक के साथ ही प्रोपर्टी डीलर गायब

रिद्धि-सिद्धि 1 से लेकर 9 और और अन्य सहायक कॉलोनियों में मकान को बेचकर करोड़ों रुपये हर साल कमाने वाले प्रोपर्टी डीलर ईडी की कार्यवाही के बाद गायब हो गये हैं। इनकम टैक्स तो केवल आयकर चोरी के मामले में जांच करता है और उसकी विजीलैंस टीम इसको अंजाम देती है। कुछ समय पूर्व विजीलैंस की टीम ने भी कार्यवाही की थी। अब अवैध धन शोधन के मामले में कोलकाता से जांच करते हुए टीम श्रीगंगानगर तक पहुंची है। रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी का शुभारंभ करते हुए ही रियल इस्टेट के बड़े निवेशक ही पूरी कॉलोनी का सौदा कर लेते थे और फिर सट्टा बाजार की तरह प्लाट का रेट दो गुणा, चार गुणा करते हुए उसको बेचते थे। धानमंडी का एक बड़ा ब्रोकर भी चपेट में आ सकता है। 


Saturday, August 9, 2025

 

रशिया-चीन के सहारे दिल्ली मजबूत हो सकती है?



न्यूयार्क। अमेरिका ने भारत पर व्यापारिक टैक्स को 50 प्रतिशत तक करने का निर्णय लिया है और इससे शेयर बाजार ही नहीं गिरे बल्कि आयात-निर्यात से जुड़े लोग भी बेरोजगार हो सकते हैं। रूस और चाइना के सहारे भारतीय गणराज्य की सरकार के थिंक टैंक यह मान रहे हैं कि हम बाजार में टिके रह सकते हैं, जबकि सच्चाई यह है करीबन 200 बिलियन डॉलर का बाजार खोज पाना भारतीय निर्यातकों और नेताओं के लिए आसान नहीं होगा। 

चीन ऐसा देश है, जिस पर जब-जब भारतीयों ने विश्वास किया, तब-तब धोखा खाया है। 60 का दशक हो या गत 2020 का दशक वही नजारे देखने को मिले हैं। 60 सालों में चीन नहीं बदल पाया है। 1960 के दशक में हिन्दी-चीनी भाई का नारा दिया और फिर आक्रमण कर दिया। 2014 के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भारत ने आमंत्रित किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें अपने गृहनगर ले गये। वहां पर उनको खूब सादर-सत्कार किया और जब शी वापिस बिजिंग पहुंचें तो चीनी सेना ने भारतीय सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर लिया। एक बार झड़प भी हुई। भारतीय सैनिकों की फिर से शहादत हुई। 

चीन फिर से नहीं माना और डोकलाम विवाद भी सामने आ गया। कई माह तक दोनों पक्षों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी रहीं। रूस-अमेरिका दोनों देशों ने हस्ताक्षेप किया जिसके बाद चीनी सेना वापिस गयी। अब फिर से उसी चीन के गुणगान करने लगे हैं, जिसके साथ दशकों से सीमा विवाद बना हुआ है। एलएसी विवाद का समाप्त होना आसान नहीं है। 

अब अगर रूस की तरफ देखें तो देश इस समय यूक्रेन के साथ युद्ध ही फेस नहीं कर रहा बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करते हुए स्वीफ्ट लेन-देन की प्रक्रिया से भी बाहर है। रूस की सीमा चीन के साथ भी लगती है और संयुक्त राज्य के साथ भी। 

रूस के भीतर कानून-व्यवस्था को भी बेहतर नहीं कहा जा सकता है। 

रशिया की बेटियों को अपना जिस्म बेचकर कमाना पड़ रहा है। वे अनचाहे व्यापार में शामिल हो रही हैं और एक रिपोर्ट के अनुसार 6 हजार से ज्यादा सैक्स वर्कर सिर्फ मास्को में हैं। 

देह व्यापार को कानूनी दर्जा नहीं है लेकिन इसके बावजूद वहां पर हजारों युवतियां भारत, अमेरिका ही नहीं अन्य देशों में जाकर जिस्मफरोशी के धंधे में शामिल हैं। अरब के कुछ देशों में भी यही हाल है। 

रूस के पास एटमी हथियार ही नहीं बल्कि स्पेस के क्षेत्र में भी पकड़ है। इसके बावजूद वहां की जीडीपी मात्र 2 ट्रिलियन के आसपास है जो भारत से भी आधी है। अमेरिका से 20 गुणा कम है। 

मुद्रा का हाल देखा जाये तो वह भी भारत से कमजोर है। इस कारण रूस की बहन-बेटियों को न चाहते हुए देह व्यापार में शामिल होना पड़ रहा है। रूस में नौकरियों की भारी कमी है। 

इसका लाभ मानव तस्करी से जुड़े लोग उठा रहे हैं। कानून व्यवस्था कमजोर होने का लाभ इन लोगों को मिलता है और इस तरह से जिस्मफरोशी के बाजार में हर रोज नयी लड़कियां धकेल दी जाती हैं। 

एक मीडिया रिपोर्ट बताती है कि सोवियत संघ के विघटन के बाद जो देश आजाद हुए वहां से भी युवतियों को मानव तस्कर मास्को और फिर वहां से कई अन्य देशों में बेच देते हैं। सोने की खदानों को भी लूटा जा रहा है और यह धन वहां की सरकार के खाते में नहीं पहुंच पा रहा है। 

भारत में वेश्यावृत्ति अवैध है लेकिन भारत में भी हजारों रशियन युवतियां देह व्यापार में फंसी हैं। मानव तस्करी के व्यापार में भी भारत भी अव्वल है, विशेष यूनिट है लेकिन इसके बावजूद कानून इन लोगों का नेटवर्क समाप्त नहीं कर पाया है। 

ब्राजिल, रूस, चाइना और भारत की चौकड़ी यूरोप-उत्तरी अमेरिकी देशों की विकसित प्रणाली को समाप्त कर पायेगी या चुनौति दे पायेगी। इन देशों में भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और कानून व्यवस्था पर हर रोज सवाल उठते हों, उस क्षेत्र से चमत्कार की कितनी उम्मीद की जा सकती है। 


Thursday, August 7, 2025

 

बैकफुट पर खेल रहे मोदी अब ला सकते हैं इमोशनल ड्रामा!

 


श्रीगंगानगर। स्वदेशी सामान का नारा देकर ‘मेक इन इंडिया’ के सहारे दो बार लोकसभा चुनाव जीत चुके नरेन्द्र मोदी अब इमोशनल ड्रामा खेलकर अपनी सीट बचाने की कोशिश में लगे हैं। आरएसएस का दबाव है। अमेरिका अपना प्रभाव दिखा रहा है। नाटो चेतावनी दे रहा है और कैबिनेट सदस्य मुखर हो रहे हैं। 

चीन के साथ कुछ ही माह हुए हैं जब भारतीय सैनिकों को शहादत देनी पड़ी थी और भारत के भीतर आरएसएस-मोदी सरकार ने चीनी सामानों का बहिष्कार का एलान कर दिया था। कई मोबाइल एप्लीकेशन को प्रतिबंधित कर दिया गया। मेक इन इंडिया का नारा दिया गया। स्वदेशी जागरण मंच ने चीन के विक्रय स्थानों पर दुकानों को बंद करवाने की चेष्टा की। 

अब वही चीन नरेन्द्र मोदी को प्यारा लग रहा है और वे 31 अगस्त को ड्रैगन के साथ शिखर बैठक करने वाले हैं। चीन निर्मित वस्तुओं ने भारत के व्यापारिक साम्राज्य को प्रभावित किया और वहीं वे जा रहे हैं। एक तरफ उनका भाषण होता है कि भारत के मेहनत और पसीने से बने उत्पाद ही खरीदे और बेचे जायेंगे। 

वे हाल ही में ब्रिटेन को खुश करके आये हैं। उनके लग्जरी उत्पाद और शराब आदि को शुल्क मुक्त कर दिया गया, लेकिन ब्रिटेन ने इसके बाद भी भारत को दमनकारी देशों की सूची में डाल दिया। इससे पश्चिम बाजार में पकड़ बनाने की उनकी कोशिश विफल हो गयी। 

प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी बैकफुट पर हैं और उनको एक भी ऐसी गेंद नहीं मिल रही जिस पर वे फ्रंटफुट पर आकर खेल सकें। 

अब उनके पास इमोशनल ड्रामा है और चीन-जापान यात्रा है। बिहार विधानसभा चुनावों के लिए वे प्रचार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनको व्यक्तिगत नुकसान होगा लेकिन वे अमेरिका के कृषि और डेयरी उत्पाद भारत में नहीं आने देंगे। 

जापान के माध्यम से वे एक बार पुन: अमेरिका को मनाने की कोशिश कर सकते हैं। उनकी यात्रा से पूर्व ही अमेरिका ने टैरिफ को 50 प्रतिशत ले जाने की जानकारी सार्वजनिक कर दी है। 

इससे गुजरात में टैक्सटाइल, सोने की ज्वैलरी का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित होगा। क्योंकि इन उत्पादों पर ही 25 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है। अमेरिका दुनिया में भारत के सामानों का सबसे बड़ा आयातक ही नहीं बल्कि लाखों या इससे ज्यादा करोड़ों लोगों को रोजगार भी दिया हुआ है। 

अमेरिका का आईटी सैक्टर आउट सोर्सिंग या अन्य माध्यम से भारत के प्रोफशनल आईटी इंजीनियर से कार्य करवा रहा है। लाखों आईटी सैक्टर के इंजीनियर एच 1 बी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और उनको ग्रीन कार्ड मिला हुआ है। 

डोनाल्ड ट्रम्प इस समय नरेन्द्र मोदी के साथ व्यक्तिगत रूप से रूष्ट हैं। उन्होंने मौखिक चेतावनी दी है कि आईटी कंपनियां भारतीयों से कार्य नहीं करवायें। कंपनियां दबाव में हैं। एप्पल को लीजिये डोनाल्ड ट्रम्प के साथ पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश करने का समझौता किया है। इससे इंडिया से अमेरिका मोबाइल बेचने की जो योजना बनायी गयी थी, उसका अंत हो गया है। एप्पल अब खुद अमेरिका में ही प्लांट स्थापित कर वहां अतिरिक्त निर्माण का रास्ता खोलेगा। 

अगर ट्रम्प इंडियन प्रोफेशनल का एच 1 बी वीजा समाप्त कर दें तो लाखों बेरोजगार पेशेवरों को इंडिया संभाल सकेगा। इतने लोगों को अन्य विकसित देश वीजा देने की स्थिति में नहीं होगा। 


इमोशनल ड्रामा क्यों कर रहे हैं?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने कार्यकाल के सबसे बुरे दिनों से गुजरना पड़ रहा है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा लिया तो इसके बाद राष्ट्रपति के इस्तीफे की चर्चा भी दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में हो रही है। 

भारत के सरकारी बंदरगाहों को संभालने वाले नरेन्द्र मोदी के सबसे नजदीकी गौतम अडाणी को भी अडाणी पोर्ट कंपनी से इस्तीफा देना पड़ा है। अगले कुछ दिनों के भीतर उनसे एयरपोर्ट संभालने का ठेका वापिस ले लिया गया तो क्या होगा? उस समय उनके पास अडाणी गु्रप को छोडऩे के अलावा कोई रास्ता नहीं होगा। 

एयरपोर्ट और बंदरगाह तो अब अडाणी को मुक्त करने ही होंगे। 


अमेरिका पर सवाल क्यों उठाया जा रहा है?

भारत की अर्थव्यवस्था और अराजकता देश के 140 करोड़ लोग देख रहे हैं। कैबिनेट सदस्य नीतिन गडक़री ने साफ कहा है कि लोगों को जागरुक होना होगा और सरकार से सवाल करने के लिए अदालतों में जाना चाहिये। 

क्या अमेरिका की अर्थव्यवस्था कृषि क्षेत्र पर आधारित है? दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां संयुक्त राज्य में है और अनेक कंपनियों के सीइओ ट्रिलियन डॉलर वाली इकाइयों को संभाल रहे हैं। एप्पल भी उसमें शामिल है। 

डोनाल्ड ट्रम्प सिर्फ कृषि व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नहीं बल्कि वे बार-बार झूठा वादा या झांसा देने के कारण रूष्ट हैं। ट्रम्प के 1.0 कार्यकाल में मोदी और गुजराती एसोसिएट ने अमेरिका से भारी-भरकम पेट्रोलियम पदार्थ सस्ते दामों पर खरीदा था और अनेक देशों को महंगे दामों पर बेचा था, जिस तरह से रूस से लेकर यूरोप को बेचा गया। इतनी मदद करने के बाद भी अमेरिका से मित्रतापूर्ण व्यवहार नहीं किया गया। 

अमेरिकी कारों पर भारी भरकम टैक्स लगाया जाता है, इससे किसानों का कोई वास्ता नहीं है। 

ट्रम्प के एक वार से गुजरात में हलचल मची हुई है और जो राज्य पिछले 24 सालों या इससे भी अधिक समय से मोदी की पकड़ में था, वह अब हाथ से निकलता हुआ नजर आ रहा है। 

चुनावों के समय अनेक बार मोदी रोये हैं। दुनिया को आंसू दिखाये हैं और अब दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि वे किसानों के हितों की रक्षा करना चाहते हुए शहीद (कुर्सी का त्याग करने वाले हैं) का दर्जा हासिल करने को भी तैयार हैं। 

भारत में भी भारतीय जनता पार्टी में अनेक नेता हैं जो धीरे-धीरे विरोध में सामने आ रहे हैं। 10 साल तक इस तरह की स्थिति नहीं आयी थी। 


Tuesday, August 5, 2025

 

बधाई हो आज 5 अगस्त है!



श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 जुलाई को ही इंग्लैण्ड का दौरा कर वहां की लग्जरी आइटमों और शराब पर कोई टैक्स नहीं लगाने का समझौता करके आये हैं। वे शायद यूनाइटेड किंगडम यात्रा को भूल गये और भारत में एक राजनीतिक सभा को संबाधित करते हुए कहा, जिस उत्पाद में भारतीयों का पसीना बहा होगा, उसी मेहनत के उत्पाद को खरीदा जायेगा। 

अब सवाल उठाने वाले सवाल उठाते हैं कि ब्रिटिश शराब के निर्माण में कौनसा भारतीय पसीना बहा है?

शुल्क मुक्त समझौता के लिए ब्रिटेन और भारत के बीच कई सालों से बातचीत चल रही थी। व्हाइट हाउस में ट्रम्प की वापसी हुई, ‘जिन्होंने बदले-बदले हैं साहब!’ का संकेत दिया तो तुरंत पीएम ब्रिटिश सरकार की गोदी में जाकर बैठ गये। इससे पहले ब्रिटेन सरकार के जी-7 समिट में निमंत्रण मिलने पर भी यात्रा नहीं की थी। 

अमेरिका और भारत के बीच पिछले कम से कम 6 साल से टू प्लस टू (दोनों देशों के विदेश और रक्षामंत्री) बैठकों का दौर चल रहा था। इस दौरान किसी भी कदम पर सहमति नहीं बन पायी। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मास्को के व्लादीमिर पुतिन से दो बार फोन कर यूक्रेन के साथ युद्ध समझौता त्यागकर टेबल टॉक का आह्वान किया। पुतिन ने ट्रम्प के आग्रह को अस्वीकार कर दिया। 

रूस-युक्रेन युद्ध आज भी जारी है। इसका लाभ भारत सरकार के नजदीक की कुछ कंपनियां फायदा उठा रही हैं और प्रतिबंधित रूसी तेल को खरीदकर अन्य राष्ट्रों को बेच रही हैं। इसमें कौनसा भारतीय का पसीना बहा है। किस भारतीय की मेहनत लगी है। 

वाशिंगटन ने पाकिस्तान के टीआरएफ, लश्करे तैयबा और अन्य पाकिस्तानी आतंकवादियों को प्रतिबंधित किया तो भारत सरकार ने अमेरिका की प्रशंसा की। अब संयुक्त राज्य का कहना है कि अमेरिका सरकार क्रेमलिन पर प्रतिबंध लगा रहा है, रूस से भारतीय प्राइवेट और सरकारी ऑयल कंपनियां खरीद जारी रखे हुए हैं। पश्चिम के कुछ देश रूस पर प्रतिबंध लगाते हैं और फिर मित्रों की कंपनियों से ऑयल भी खरीद रहे हैं। 

मित्रों और भारतीय गणराजय सरकार के बीच जो गठजोड़ चल रहा है, उस कारण भारत में अराजक स्थिति पैदा हो रही है।

अब यह सोचा जाये कि अमेरिका ने दुनिया की ठेकेदारी ले रखी है तो यह सच है। संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन आदि को सबसे ज्यादा सहायता यूएसए ही देता है और इस कारण गरीब देशों में अनेक महामारियों पर नियंत्रण प्राप्त हो पाता है। अफ्रीकी देशों का गलघोंटू जैसी महामारी के लिए दवा, चिकित्सा सहायता और आर्थिक मदद भी पहुंचाता है। 

पूरी दुनिया में विश्व बैंक लोन देता है जो अमेरिकी सरकार की सहायता से चल रहा है। अनेक ऐसे बाजार को शुल्क मुक्त किया हुआ है जिससे गरीब देश वहां पर निर्यात कर अपने देश को आर्थिक रूप से यूएसडी प्राप्त कर सकें और अपने देश में विकास कार्य करवा सकें। 

अमेरिका वही देश है जो हर साल लाखों लोगों को अपने देश में पनाह देता है और उनको अधिक आय अर्जित करने का मौका देता है। 

आईटी कंपनियां भारतीय बाजार से आउट सोर्सिंग करवाती हैं, जिससे भारतीयों को लाखों रुपये के पैकेज मिल पाते हैं। 

स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हर साल कई ट्रिलियन डॉलर खर्च करता है। भारत सरकार की बात की जाये तो वह अपने एक साल का बजट ही एक ट्रिलियन डॉलर तक नहीं पहुंचा पायी है। 

भारत गणराज्य की सरकार भले ही कागजों में भारतीयों की वार्षिक आय को 3 लाख रुपये से ऊपर मानती हो, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। सरकार अपनी मुद्रा का ही बचाव नहीं कर पा रही है और रुपया 87 रुपये को पार कर चुका है। 

जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा प्रदर्शित की जा रही है जबकि भारतीय रुपया पड़ोसी देश मालदीव की करंसी के सामने भी  नहीं टिक पा रहा है। मालदीव को एक रुपया भेजा जाये तो वहां पर 18 पैसे मिलेंगे। इस देश को गरीब बताया जा रहा है और उसको भारत सरकार ने आर्थिक सहायता उपलब्ध करवायी है। 

दुनिया में माफिया की बात होती है तो अलग-अलग क्षेत्र के कई खिलाड़ी हैं, लेकिन एक माफिया स्पर्म का भी है, जिसकी रोकथाम के लिए सरकार कोई कानून नहीं बना पायी है। स्पर्म माफिया हजारों या लाखों डॉलर की कमाई हर साल करता है। 

भारतीय सरकार की मनमर्जियों पर नियंत्रण पाना आसान कार्य नहीं है। सरकार के खिलाफ बोलने वाले लोगों की संख्या हर दिन कम होती जा रही है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक भी आज नहीं रहे। पांच अगस्त है और इसी दिन संसद में जम्मू-कश्मीर को केन्द्र शासित का दर्जा दिया था। आज ही का दिन है जब अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास किया गया था। 

जो आज हमारे बीच नहीं है, उनमें राफेल खरीदने के दौरान, उनमें तत्कालीन विदेश, रक्षा, विदेश, राष्ट्रपति, सेनाध्यक्ष शामिल हैं। 



Saturday, August 2, 2025

 

अमेरिका : शिक्षा विभाग की तरह ‘फेड’ को भी किया जा सकता है बंद



न्यूयार्क। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कार्यभार संभालते ही शिक्षा विभाग को समाप्त कर दिया था। अब वे अमेरिका के रिजर्व बैंक अर्थात फेड को समाप्त करने के लिए आगे बढ़ चुके हैं। फेड के अध्यक्ष ने इस्तीफा भी दे दिया है। 

राष्ट्रपति ट्रम्प ने सांख्यकी विभाग के उच्चाधिकारी को भी बर्खास्त कर दिया है जो रोजगार पर निगरानी करने का कार्य करती थीं। इस अधिकारी को बाइडेन प्रशासन ने नियुक्त किया हुआ था। 

अनेक देशों में अभी रिपब्लिकन विचारधारा वाले राजदूत भी नियुक्त नहीं किये गये हैं, इनमें भारत भी शामिल है। भारत में ट्रम्प ने राजदूत नियुक्त नहीं कर मोदी सरकार पर दबाव बनाया हुआ है। 

आर्थिक व विदेश नीतियों में भारी परिवर्तन करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने कदम उठाये हुए हैं। फेड काफी समय से राष्ट्रपति के आग्रह के बावजूद ब्याज दरों को उच्चस्तर पर बनाया हुआ था। इस कारण बाजार में रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे थे। अब फेड को उन्होंने डेमोक्रेट्स से आजादी दिलवा दी है और बाजार में ज्यादा खुलापन लाने के लिए वे काम कर रहे हैं। 


भारत की विदेश नीति फेल

ब्रिटेन को खुश करने के लिए भारत सरकार ने यूके से आने वाली शराब और अन्य लग्जरी आइटमों को करमुक्त कर दिया था। इससे वे इंग्लैण्ड को अपने पक्ष में रखना चाहते थे ताकि अमेरिकी दबाव को कम किया जा सके। ब्रिटेन ने पीएम के दिल्ली वापिस पहुंचते ही भारत सरकार को दमनकारी नीतियों वाले देश में शामिल कर दिया है। इस सूची में यूएई, सउदी अरब आदि 12 देश हैं। 

अमेरिका मोदी सरकार में परिवर्तन भी चाहता है और अनेक मंत्रियों को पद मुक्त करने के लिए भी कह रहा है। उधर रूस भी भारत के साथ वह मित्रता धर्म नहीं निभा रहा है जो पहले निभाया करता था। 

हालांकि आज ही रूस पर दबाव बनाने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प ने दो पनडुब्बियां काला सागर क्षेत्र में तैनात कर दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर स्वयं यह जानकारी दी है। 


अभीव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकार को लेकर दबाव

भारत गणराज्य की सरकार पर आरोप लगाये जा रहे हैं कि वह अभीव्यक्ति की आजादी और मानवाधिकार के लिए खतरा बने हुए हैं। ब्रिटिश सरकार ने भारत को दमनकारी देशों की सूची में डाला तो शाहरुख खान को पुरुस्कार दे कर बदलती  नीतियों को प्रदर्शित करने की कोशिश की है।

वहीं मानवाधिकार को लेकर स्थिति वही है। भारत के पड़ोस भूटान में पेट्रोल 70 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है और स्थानीय सरकार इसके दाम 100 रुपये वसूल रही है। इसी से पता लगाया जा सकता है कि भारत गणराज्य की सरकार किस तरह से आम आदमी का खून-पसीने की कमाई को टैक्स के रूप में वसूल कर रही है लेकिन इसके बावजूद सरकार घाटा प्रदर्शित करती है और भारी लोन उठा रही है। 


यूपीआई पर भी अब आंच

भारत गणराज्य की सरकार ने यूपीआई को देश में ऑनलाइन पैमेंट का मार्ग बनाया था ओर अब इस सेवा पर भी टैक्स वसूलने की तैयारी की जा रही है। दूसरी ओर बाजार में मंदी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से भारत को चोथे स्थान और सबसे तेज अर्थव्यवस्था बताया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मर रही है। टैक्स का जाल बिछाने के बावजूद सरकार कहती है कि वह घाटे में है। दूसरी ओर खबर यह है कि करीबन 2 लाख करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में जुलाई में संग्रहित किये गये हैं। 


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