Tuesday, August 5, 2025

 

बधाई हो आज 5 अगस्त है!



श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 जुलाई को ही इंग्लैण्ड का दौरा कर वहां की लग्जरी आइटमों और शराब पर कोई टैक्स नहीं लगाने का समझौता करके आये हैं। वे शायद यूनाइटेड किंगडम यात्रा को भूल गये और भारत में एक राजनीतिक सभा को संबाधित करते हुए कहा, जिस उत्पाद में भारतीयों का पसीना बहा होगा, उसी मेहनत के उत्पाद को खरीदा जायेगा। 

अब सवाल उठाने वाले सवाल उठाते हैं कि ब्रिटिश शराब के निर्माण में कौनसा भारतीय पसीना बहा है?

शुल्क मुक्त समझौता के लिए ब्रिटेन और भारत के बीच कई सालों से बातचीत चल रही थी। व्हाइट हाउस में ट्रम्प की वापसी हुई, ‘जिन्होंने बदले-बदले हैं साहब!’ का संकेत दिया तो तुरंत पीएम ब्रिटिश सरकार की गोदी में जाकर बैठ गये। इससे पहले ब्रिटेन सरकार के जी-7 समिट में निमंत्रण मिलने पर भी यात्रा नहीं की थी। 

अमेरिका और भारत के बीच पिछले कम से कम 6 साल से टू प्लस टू (दोनों देशों के विदेश और रक्षामंत्री) बैठकों का दौर चल रहा था। इस दौरान किसी भी कदम पर सहमति नहीं बन पायी। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मास्को के व्लादीमिर पुतिन से दो बार फोन कर यूक्रेन के साथ युद्ध समझौता त्यागकर टेबल टॉक का आह्वान किया। पुतिन ने ट्रम्प के आग्रह को अस्वीकार कर दिया। 

रूस-युक्रेन युद्ध आज भी जारी है। इसका लाभ भारत सरकार के नजदीक की कुछ कंपनियां फायदा उठा रही हैं और प्रतिबंधित रूसी तेल को खरीदकर अन्य राष्ट्रों को बेच रही हैं। इसमें कौनसा भारतीय का पसीना बहा है। किस भारतीय की मेहनत लगी है। 

वाशिंगटन ने पाकिस्तान के टीआरएफ, लश्करे तैयबा और अन्य पाकिस्तानी आतंकवादियों को प्रतिबंधित किया तो भारत सरकार ने अमेरिका की प्रशंसा की। अब संयुक्त राज्य का कहना है कि अमेरिका सरकार क्रेमलिन पर प्रतिबंध लगा रहा है, रूस से भारतीय प्राइवेट और सरकारी ऑयल कंपनियां खरीद जारी रखे हुए हैं। पश्चिम के कुछ देश रूस पर प्रतिबंध लगाते हैं और फिर मित्रों की कंपनियों से ऑयल भी खरीद रहे हैं। 

मित्रों और भारतीय गणराजय सरकार के बीच जो गठजोड़ चल रहा है, उस कारण भारत में अराजक स्थिति पैदा हो रही है।

अब यह सोचा जाये कि अमेरिका ने दुनिया की ठेकेदारी ले रखी है तो यह सच है। संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन आदि को सबसे ज्यादा सहायता यूएसए ही देता है और इस कारण गरीब देशों में अनेक महामारियों पर नियंत्रण प्राप्त हो पाता है। अफ्रीकी देशों का गलघोंटू जैसी महामारी के लिए दवा, चिकित्सा सहायता और आर्थिक मदद भी पहुंचाता है। 

पूरी दुनिया में विश्व बैंक लोन देता है जो अमेरिकी सरकार की सहायता से चल रहा है। अनेक ऐसे बाजार को शुल्क मुक्त किया हुआ है जिससे गरीब देश वहां पर निर्यात कर अपने देश को आर्थिक रूप से यूएसडी प्राप्त कर सकें और अपने देश में विकास कार्य करवा सकें। 

अमेरिका वही देश है जो हर साल लाखों लोगों को अपने देश में पनाह देता है और उनको अधिक आय अर्जित करने का मौका देता है। 

आईटी कंपनियां भारतीय बाजार से आउट सोर्सिंग करवाती हैं, जिससे भारतीयों को लाखों रुपये के पैकेज मिल पाते हैं। 

स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हर साल कई ट्रिलियन डॉलर खर्च करता है। भारत सरकार की बात की जाये तो वह अपने एक साल का बजट ही एक ट्रिलियन डॉलर तक नहीं पहुंचा पायी है। 

भारत गणराज्य की सरकार भले ही कागजों में भारतीयों की वार्षिक आय को 3 लाख रुपये से ऊपर मानती हो, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। सरकार अपनी मुद्रा का ही बचाव नहीं कर पा रही है और रुपया 87 रुपये को पार कर चुका है। 

जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा प्रदर्शित की जा रही है जबकि भारतीय रुपया पड़ोसी देश मालदीव की करंसी के सामने भी  नहीं टिक पा रहा है। मालदीव को एक रुपया भेजा जाये तो वहां पर 18 पैसे मिलेंगे। इस देश को गरीब बताया जा रहा है और उसको भारत सरकार ने आर्थिक सहायता उपलब्ध करवायी है। 

दुनिया में माफिया की बात होती है तो अलग-अलग क्षेत्र के कई खिलाड़ी हैं, लेकिन एक माफिया स्पर्म का भी है, जिसकी रोकथाम के लिए सरकार कोई कानून नहीं बना पायी है। स्पर्म माफिया हजारों या लाखों डॉलर की कमाई हर साल करता है। 

भारतीय सरकार की मनमर्जियों पर नियंत्रण पाना आसान कार्य नहीं है। सरकार के खिलाफ बोलने वाले लोगों की संख्या हर दिन कम होती जा रही है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक भी आज नहीं रहे। पांच अगस्त है और इसी दिन संसद में जम्मू-कश्मीर को केन्द्र शासित का दर्जा दिया था। आज ही का दिन है जब अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास किया गया था। 

जो आज हमारे बीच नहीं है, उनमें राफेल खरीदने के दौरान, उनमें तत्कालीन विदेश, रक्षा, विदेश, राष्ट्रपति, सेनाध्यक्ष शामिल हैं। 







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