Thursday, August 28, 2025
मोदी-ट्रम्प की निजी नाराजगी भी भारत का राष्ट्रीय मुद्दा बन गयी?
श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। इसका असर लाखों नहीं करोड़ों लोगों के रोजगार पर दिखाई देने लगा है। अप्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष रूप से 190 बिलियन डॉलर के निर्यात से करोड़ों लोगों को रोजगार हासिल हो रहा था।
ट्रम्प के 2016-20 के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दो बोइंग विमान दिये गये, जो संयुक्त राज्य के राष्ट्राध्यक्ष के समान ही सुविधाएं रखते हैं। इन दो बोइंग स्पैशल विमान से प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ने दुनिया भर की सैर की है। उस समय ‘एक बार फिर ट्रम्प सरकार’ का नारा भी लगाया गया था।
वर्ष 2024 में राष्ट्रपति ट्रम्प को बधाई देने वालों में मोदी सबसे पहले फोन करने वाले राष्ट्राध्यक्ष थे। इसका भी खूब प्रचर किया गया।
भारत गणराज्य की सरकार कह रही है कि हम रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं। वो खरीदते रहेेंगे। यह सामने आ चुका है कि मास्को से खरीदा गया तेल यूरोपियन यूनियन देशों को बेचा गया। 600 बिलियन से ज्यादा की राशि का मुनाफा अकेले मुकेश अम्बानी को हुआ।
मुकेश अम्बानी अगस्त 2025 से पूर्व मोदी के खास लोगों में शामिल थे।
अम्बानी, ट्रम्प और मोदी की मित्रता समाप्त हो गयी तो सीधे तौर पर सीबीआई, ईडी की छापेमारी भी आरंभ हो गयी। अनिल अम्बानी भी लपेटे में आ गये।
विदेश मंत्री का बेटा अम्बानी का कर्मचारी
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की विदेश नीति की वाहवाही हो रही थी, इसके पीछे कई कारण थे। प्रमुख कारण था अमेरिका में विदेश मंत्री का पुत्र रिलायंस के एक संगठन का कार्यकारी प्रमुख था। इस संगठन का कार्य विश्व भर में आर्थिक, राजनीतिक रिसर्च करने का काम था और उसको ओआरएफ के नाम से जाना जाता है।
अमेरिका में लॉबिंग को कानूनी रूप का दर्जा दिया हुआ है अर्थात वहां पर सांसदों, मंत्रियों को पैसे देकर अपने साथ जोड़ा जा सकता है। प्राप्त राशि की जानकारी सरकार तक पहुंचायी जाती है और उसका टैक्स भी वसूल किया जाता है।
भारत में भी होता है लेकिन अंडर टेबल या पर्दे के पीछे।
अब अमेरिका से ही सीधी चुनौति मोदी को मिल रही थी तो पूरा सिस्टम ही हिल गया।
मोदी ने यहां भी राजनीति का कार्ड खेला और इसको कृषि, मछुआरों से जोड़ दिया।
निजी मतभेद भी राष्ट्रवाद से जुड़ गये।
अभी तक बेदाग छवि का प्रचार करने वाले नरेन्द्र मोदी के मंत्रियों पर निशाना साधने का मौका विपक्ष को मिल गया।
चीन क्या अमेरिका का विकल्प बन सकता है
हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच संक्षिप्त युद्ध में चीन ने पाकिस्तान को जे सीरिज के अपने फाइटर दिये। कई अन्य उपकरण भी उपलब्ध करवाये। यह प्रचार स्वयं साउथ ब्लॉक के निजी प्रसारणकर्ताओं ने किया।
अब चीन शंघाई सहयोग संगठन के बहाने अपनी ताकत प्रदर्शित करना चाहता है क्योंकि अमेरिका ने चीन पर भी 30 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है। यह कार्यक्रम 1 सितंबर से आरंभ हो रहा है और भारत गणराज्य के पीएम वहां पर जा रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोन उन भी शामिल होंगे।
शंघाई सहयोग सम्मेलन में भारत के साथ पाकिस्तान और कई अन्य सोवियत विघटन वाले देश भी शामिल हैं।
चीन के शी जिंग पिन यहां पर अपनी मुद्रा येन को यूएस डॉलर की तरह विश्व अर्थव्यवस्था में स्थापित करने की योजना पर मोदी, पुतिन, ईरान आदि के साथ चर्चा करेंगे।
स्वीफ्ट जो दुनिया भर में धन का ऑटोमैटिक प्रवाह करता है। उसी तरह की व्यवस्था बनाये जाने पर बात चल रही है।
वाशिंगटन इस व्यवस्था को कामयाब होने दे सकता है, शायद कभी नहीं।
अब श्रीकृष्ण के विचारों की बुनियाद की चर्चा
लाल किले से 15 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, जिनसे लिया है, उनको वापिस किया जायेगा। एक साल बाद उन्होंने आजादी के दिन कहा, अब भगवान श्रीकृष्ण के विचारों पर चला जायेगा। इसके बाद उन्होंने नगाड़ा बजाते हुए अपना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया।
भारत गणराज्य की सरकार ने देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अम्बानी, उनके भाई अनिल अम्बानी के खिलाफ ईडी, सीबीआई आदि की कार्यवाही आरंभ हो गयी।
मुकेश अम्बानी के पास 10 लाख करोड़ की सम्पदा है और इसमें करीबन 4 लाख करोड़ रुपये का ऋण है। वहीं गौतम अडाणी के पास भी कई लाख करोड़ की सम्पत्ति है। अडाणी पर तीन लाख करोड़ का कर्जा है।
भारत सरकार के नजदीकी होने के कारण विश्व भर से अडाणी समूह को लोन मिल रहे थे लेकिन ट्रम्प के व्हाइट हाउस में आने के बाद ऐसा संभव नहीं हो रहा है। कुछ समय के भीतर अडाणी समूह ने बड़े ऋण लिये हैं।
ऐसा नहीं है कि अम्बानी पर कार्यवाही के बाद अन्य कार्पोरेटर्स अपने ऋण अदा करने के लिए बैंक जा रहे हैं।
एक रिपोर्ट बताती है कि देश में 1 प्रतिशत लोगों के पास 99 प्रतिशत धन हो गया है और 99 प्रतिशत के पास 1 प्रतिशत सम्पदा है। इस तरह से अमीर-गरीब के बीच खाई काफी बढ़ गयी है।
सोने के दाम 30 हजार से 1 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंचाकर मोदी सरकार ने आकड़ों में देश की जीडीपी 4 ट्रिलियन बताकर चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था का दावा कर दिया। यह नहीं भूलना चाहिये कि सोने के दामों में इतनी तेजी के बाद सोना मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर हो गया है।
ट्रम्प-अम्बानी-शी जिंग पिन-मोदी की प्रभुत्व की लड़ाई राष्ट्रवाद से कैसे जुड़ सकती है। पीएमओ के जो नजदीकी है, उनके परिवार के सदस्य बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए लॉबिंग का काम कर रहे हैं और भारतीय लोग इसे देश की सम्प्रभुता पर हमला मान रहे हैं।
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