Saturday, August 9, 2025
रशिया-चीन के सहारे दिल्ली मजबूत हो सकती है?
न्यूयार्क। अमेरिका ने भारत पर व्यापारिक टैक्स को 50 प्रतिशत तक करने का निर्णय लिया है और इससे शेयर बाजार ही नहीं गिरे बल्कि आयात-निर्यात से जुड़े लोग भी बेरोजगार हो सकते हैं। रूस और चाइना के सहारे भारतीय गणराज्य की सरकार के थिंक टैंक यह मान रहे हैं कि हम बाजार में टिके रह सकते हैं, जबकि सच्चाई यह है करीबन 200 बिलियन डॉलर का बाजार खोज पाना भारतीय निर्यातकों और नेताओं के लिए आसान नहीं होगा।
चीन ऐसा देश है, जिस पर जब-जब भारतीयों ने विश्वास किया, तब-तब धोखा खाया है। 60 का दशक हो या गत 2020 का दशक वही नजारे देखने को मिले हैं। 60 सालों में चीन नहीं बदल पाया है। 1960 के दशक में हिन्दी-चीनी भाई का नारा दिया और फिर आक्रमण कर दिया। 2014 के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भारत ने आमंत्रित किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें अपने गृहनगर ले गये। वहां पर उनको खूब सादर-सत्कार किया और जब शी वापिस बिजिंग पहुंचें तो चीनी सेना ने भारतीय सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर लिया। एक बार झड़प भी हुई। भारतीय सैनिकों की फिर से शहादत हुई।
चीन फिर से नहीं माना और डोकलाम विवाद भी सामने आ गया। कई माह तक दोनों पक्षों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी रहीं। रूस-अमेरिका दोनों देशों ने हस्ताक्षेप किया जिसके बाद चीनी सेना वापिस गयी। अब फिर से उसी चीन के गुणगान करने लगे हैं, जिसके साथ दशकों से सीमा विवाद बना हुआ है। एलएसी विवाद का समाप्त होना आसान नहीं है।
अब अगर रूस की तरफ देखें तो देश इस समय यूक्रेन के साथ युद्ध ही फेस नहीं कर रहा बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करते हुए स्वीफ्ट लेन-देन की प्रक्रिया से भी बाहर है। रूस की सीमा चीन के साथ भी लगती है और संयुक्त राज्य के साथ भी।
रूस के भीतर कानून-व्यवस्था को भी बेहतर नहीं कहा जा सकता है।
रशिया की बेटियों को अपना जिस्म बेचकर कमाना पड़ रहा है। वे अनचाहे व्यापार में शामिल हो रही हैं और एक रिपोर्ट के अनुसार 6 हजार से ज्यादा सैक्स वर्कर सिर्फ मास्को में हैं।
देह व्यापार को कानूनी दर्जा नहीं है लेकिन इसके बावजूद वहां पर हजारों युवतियां भारत, अमेरिका ही नहीं अन्य देशों में जाकर जिस्मफरोशी के धंधे में शामिल हैं। अरब के कुछ देशों में भी यही हाल है।
रूस के पास एटमी हथियार ही नहीं बल्कि स्पेस के क्षेत्र में भी पकड़ है। इसके बावजूद वहां की जीडीपी मात्र 2 ट्रिलियन के आसपास है जो भारत से भी आधी है। अमेरिका से 20 गुणा कम है।
मुद्रा का हाल देखा जाये तो वह भी भारत से कमजोर है। इस कारण रूस की बहन-बेटियों को न चाहते हुए देह व्यापार में शामिल होना पड़ रहा है। रूस में नौकरियों की भारी कमी है।
इसका लाभ मानव तस्करी से जुड़े लोग उठा रहे हैं। कानून व्यवस्था कमजोर होने का लाभ इन लोगों को मिलता है और इस तरह से जिस्मफरोशी के बाजार में हर रोज नयी लड़कियां धकेल दी जाती हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट बताती है कि सोवियत संघ के विघटन के बाद जो देश आजाद हुए वहां से भी युवतियों को मानव तस्कर मास्को और फिर वहां से कई अन्य देशों में बेच देते हैं। सोने की खदानों को भी लूटा जा रहा है और यह धन वहां की सरकार के खाते में नहीं पहुंच पा रहा है।
भारत में वेश्यावृत्ति अवैध है लेकिन भारत में भी हजारों रशियन युवतियां देह व्यापार में फंसी हैं। मानव तस्करी के व्यापार में भी भारत भी अव्वल है, विशेष यूनिट है लेकिन इसके बावजूद कानून इन लोगों का नेटवर्क समाप्त नहीं कर पाया है।
ब्राजिल, रूस, चाइना और भारत की चौकड़ी यूरोप-उत्तरी अमेरिकी देशों की विकसित प्रणाली को समाप्त कर पायेगी या चुनौति दे पायेगी। इन देशों में भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और कानून व्यवस्था पर हर रोज सवाल उठते हों, उस क्षेत्र से चमत्कार की कितनी उम्मीद की जा सकती है।
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