Saturday, August 2, 2025

 

अमेरिका : शिक्षा विभाग की तरह ‘फेड’ को भी किया जा सकता है बंद



न्यूयार्क। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कार्यभार संभालते ही शिक्षा विभाग को समाप्त कर दिया था। अब वे अमेरिका के रिजर्व बैंक अर्थात फेड को समाप्त करने के लिए आगे बढ़ चुके हैं। फेड के अध्यक्ष ने इस्तीफा भी दे दिया है। 

राष्ट्रपति ट्रम्प ने सांख्यकी विभाग के उच्चाधिकारी को भी बर्खास्त कर दिया है जो रोजगार पर निगरानी करने का कार्य करती थीं। इस अधिकारी को बाइडेन प्रशासन ने नियुक्त किया हुआ था। 

अनेक देशों में अभी रिपब्लिकन विचारधारा वाले राजदूत भी नियुक्त नहीं किये गये हैं, इनमें भारत भी शामिल है। भारत में ट्रम्प ने राजदूत नियुक्त नहीं कर मोदी सरकार पर दबाव बनाया हुआ है। 

आर्थिक व विदेश नीतियों में भारी परिवर्तन करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने कदम उठाये हुए हैं। फेड काफी समय से राष्ट्रपति के आग्रह के बावजूद ब्याज दरों को उच्चस्तर पर बनाया हुआ था। इस कारण बाजार में रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे थे। अब फेड को उन्होंने डेमोक्रेट्स से आजादी दिलवा दी है और बाजार में ज्यादा खुलापन लाने के लिए वे काम कर रहे हैं। 


भारत की विदेश नीति फेल

ब्रिटेन को खुश करने के लिए भारत सरकार ने यूके से आने वाली शराब और अन्य लग्जरी आइटमों को करमुक्त कर दिया था। इससे वे इंग्लैण्ड को अपने पक्ष में रखना चाहते थे ताकि अमेरिकी दबाव को कम किया जा सके। ब्रिटेन ने पीएम के दिल्ली वापिस पहुंचते ही भारत सरकार को दमनकारी नीतियों वाले देश में शामिल कर दिया है। इस सूची में यूएई, सउदी अरब आदि 12 देश हैं। 

अमेरिका मोदी सरकार में परिवर्तन भी चाहता है और अनेक मंत्रियों को पद मुक्त करने के लिए भी कह रहा है। उधर रूस भी भारत के साथ वह मित्रता धर्म नहीं निभा रहा है जो पहले निभाया करता था। 

हालांकि आज ही रूस पर दबाव बनाने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प ने दो पनडुब्बियां काला सागर क्षेत्र में तैनात कर दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर स्वयं यह जानकारी दी है। 


अभीव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकार को लेकर दबाव

भारत गणराज्य की सरकार पर आरोप लगाये जा रहे हैं कि वह अभीव्यक्ति की आजादी और मानवाधिकार के लिए खतरा बने हुए हैं। ब्रिटिश सरकार ने भारत को दमनकारी देशों की सूची में डाला तो शाहरुख खान को पुरुस्कार दे कर बदलती  नीतियों को प्रदर्शित करने की कोशिश की है।

वहीं मानवाधिकार को लेकर स्थिति वही है। भारत के पड़ोस भूटान में पेट्रोल 70 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है और स्थानीय सरकार इसके दाम 100 रुपये वसूल रही है। इसी से पता लगाया जा सकता है कि भारत गणराज्य की सरकार किस तरह से आम आदमी का खून-पसीने की कमाई को टैक्स के रूप में वसूल कर रही है लेकिन इसके बावजूद सरकार घाटा प्रदर्शित करती है और भारी लोन उठा रही है। 


यूपीआई पर भी अब आंच

भारत गणराज्य की सरकार ने यूपीआई को देश में ऑनलाइन पैमेंट का मार्ग बनाया था ओर अब इस सेवा पर भी टैक्स वसूलने की तैयारी की जा रही है। दूसरी ओर बाजार में मंदी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से भारत को चोथे स्थान और सबसे तेज अर्थव्यवस्था बताया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मर रही है। टैक्स का जाल बिछाने के बावजूद सरकार कहती है कि वह घाटे में है। दूसरी ओर खबर यह है कि करीबन 2 लाख करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में जुलाई में संग्रहित किये गये हैं। 






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