Thursday, July 31, 2025
ब्रिटेन का दबाव ‘ट्रम्प’ पर काम नहीं आया
न्यूयार्क। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को धमाका कर दिया। कभी जय-वीरू की दोस्ती कहने वाले अब मुंह छिपाये घूम रहे हैं क्योंकि भारत गणराज्य की सरकार ट्रम्प प्रशासन के साथ डील नहीं कर पायी और अब दो अगस्त से भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाया जायेगा।
मोदी प्रशासन ने अमेरिका से ज्यादा ब्रिटेन को तवज्जो दी थी और उसके साथ खुला व्यापार समझौता कर लिया। इसके तहत दोनों देशों के उत्पाद खरीद और बेचे जा सकेंगे। उन पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। अमेरिका के साथ यह समझौता भारत गणराज्य की सरकार नहीं कर पायी।
विदेश नीति एक बार फि से हार गयी। मोदी सरकार चाहती थी कि ब्रिटेन अमेरिका और उनके बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाये। इस कारण करीबन सात साल बाद मोदी फिर से ब्रिटेन पहुंच गये। प्रधानमंत्री केरी स्टारर्मर के साथ बैठक की। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहुंच गये और दोनों नेताओं के बीच समझौते पर काम नहीं हो पाया।
कीर स्टारर्मर के सामने ही डोनाल्ड ट्रम्प ने लंदन के मेयर को बेवकूफ कह दिया। ट्रम्प ने दिखा दिया कि वे यहां पर ट्रेड डील करने आये हैं न कि मोदी की वकालत का पाठ सुनने। कीर स्टारर्मर इससे बात को आगे बढ़ा ही नहीं पाये क्योंकि मीडिया के सामने डेलाइट में उन्होंने यह बात सार्वजनिक की।
ट्रम्प का साफ कहना है कि उनका देश कपड़े नहीं बल्कि टैंक बनाना चाहता है। हवाई जहाज बनाना चाहता है।
स्कॉटलैण्ड से व्हाइट हाउस पहुंचते ही उन्होंने पाकिस्तान के साथ डील की और पाक में विशाल पेट्रोलियम प्लांट का एलान कर दिया। पाकिस्तान को अब तक जो बड़े बजट की जरूरत थी, वह अब अमेरिका की मदद से उसको अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मिल सकती है।
अगर अमेरिकी कंपनियां वहां पर काम करना आरंभ कर देती हैं तो इससे भारत की छवि बुरी तरह से प्रभावित होगा।
भारत के सामान का सबसे बड़ा आयतक संयुक्त राज्य अमेरिका ही है। कपड़े, दवाइयां और सोने के जेवरात प्रमुख रूप से वाशिंगटन को भेजे जाते हैं और यह बाजार 190 अरब डालर का है। कपड़े, सोने के जेवरात गुजरात में ही तैयार होते हैं, इस तरह से गुजरात राज्य को बड़ा झटका लगेगा।
ऑटो इंडस्ट्रीज भी प्रभावित होगी। इस तरह से भारत गणराज्य की सरकार को बड़ा घाटा लगना तय है और मोदी-शाह के गृहनगर के व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ जिस तरह से अमेरिका मित्रता स्थापित कर रहा है, उससे भी भारत सरकार पर दबाव बनेगा कि वह सिंधू जल समझौते को प्रभावित न करे। अमेरिका को खुश करने के लिए मोदी सरकार को नया मध्यस्थ चुनना होगा। वहीं रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त चार्ज का भी एलान कर दिया गया है।
हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि वह दवाइयां की कीमत 1 हजार प्रतिशत से भी ज्यादा कम करने के लिए काम कर रहे हैं।
इससे भी भारतीय दवा उद्योग बुरी तरह से प्रभावित होगा। वाशिंगटन की नीतियां इस समय किसी को समझ नहीं आ रही हैं लेकिन यह तय है कि यह चार साल पाकिस्तान के लिए वाहवाही वाले होने है।
सितंबर में प्रधानमंत्री का न्यूयार्क जाने का कार्यक्रम है। उस समय वे राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं।
Saturday, July 26, 2025
दक्षेस को लोन देकर अपनी जय-जयकार करवाने वाले मोदी के देश में सरकारी स्कूल की छत गिरी
श्रीगंगानगर। मालदीव देश में अपनी जय-जयकार करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करीबन 5 हजार करोड़ रुपये का लोन दे रहे थे, उससे कुछ समय पहले राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक सरकारी विद्यालय की छत गिर गयी और सात लोगों की मौत की खबर सरकार की ओर से दी गयी।
भारत गणराज्य में लाखों लोग सडक़ों की फुटपाथ पर रात गुजारते हैं। जिस देश में 30 करोड़ परिवारों के पास अपना घर नहीं है, उस देश का प्रधानमंत्री अपनी जय-जयकार करवाने के लिए अनेक देशों को लोन दे रहा है। इसकी भरपाई टैक्स आतंकवाद के रूप में की जा रही है। जीएसटी, वैट, आयकर, टोल टैक्स जैसे न जाने कितने रूप इस आतंकवाद को दिये गये हैं।
राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से स्कूली बच्चों सहित 7 जनों की मौत हो गयी। यह सवाल दुनिया को हिला देने वाला है। भारत सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का दावा करते हुए नये हाइवेज की चर्चा करती है किंतु यह कभी नहीं जाना जाता कि पुराने निर्माण कार्यों की अवधि/सीमा पूरी हो चुकी है और उनके सुधार किये जाने की आवश्यकता है।
राजस्थान में जर्जर भवन की यह एकमात्र घटना नहीं है। श्रीगंगानगर में एक अदालत परिसर की छत का एक भाग गिर गया था, सौभाग्यवश कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं जल संसाधन विभाग और जिला कलक्टर कार्यालय भी नये निर्माण की मांग कर रहा है, क्योंकि उसका भी निर्माण कार्य का कार्यकाल पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री इंग्लैण्ड से मालदीव पहुंचे थे और इस दौरान बड़ा हादसा घटित हो गया।
अब ब्रिटेन की गोद में कैसे बैठ गये मोदी
भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका-रूस के साथ बिगड़े रिश्तों के बाद इंग्लैण्ड के साथ संबंध मजबूत करने के लिए उसके उत्पादों को बिना शुल्क के भारत में प्रवेश की अनुमति देने वाले एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिये।
सवाल यह है कि अचानक ही ब्रिटेन के साथ संबंधों को मजबूत करने की मजबूरी क्यों सामने आ गयी।
वर्ष 2021 में गणतंत्र दिवस पर मोदी ने ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री एवं पत्रकार बोरिस जॉनसन को मुख्यातिथि के रूप में आमंत्रित किया था किंतु उन्होंने आने से इन्कार कर दिया था। बोरिस भारत के साथ अभीव्यक्ति की आजादी के संबंध में चर्चा करना चाहते थे, लेकिन उस समय अमेरिका में सत्ता डेमोक्रेट्स के हाथ आ गये थे और मोदी की मित्रता अमेरिका के साथ परवान पर चढ़ गयी थी। यूएसए के साथ संबंध किस प्रकार थे, इस बारे में लिखने की आवश्यकता नहीं है।
2025 में हालात बदल गये। ब्रिटेन जी-7, नाटो और संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थायी सदस्य है। भारत को जी-7 में आमंत्रित किया जाता था लेकिन सदस्य नहीं बनाया गया।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और किंग चाल्र्स नयी रणनीति लेकर आये हैं और इस कारण भारत गणराज्य की सरकार पर अमेरिकी दबाव ज्यादा दिखाई नहीं दे, वे मोदी सरकार का खुलकर समर्थन कर रहे हैं और इसके बदले में इंग्लिश उत्पाद भारत के बाजार में बिना किसी टैक्स के पहुंच जायेंगे। एक्साइज से जो राजस्व प्राप्त होता था, वह समाप्त कर दिया गया।
एक तरफ अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों को इतने महंगे दामों पर बेच रही है तो दूसरी ओर विदेशियों को अपने उत्पाद भारत में लाने के लिए शुल्क मुक्त की सुविधा दे रही है।
भारत का रेडीमेड गारमेंट्स, कार बाजार पूरी तरह से प्रभावित होगा। मेड इन इंडिया को भी एक बड़ा झटका लगेगा।
ब्रिटेन के किंग चाल्र्स का असर आरएसएस और कांग्रेस पर भी है। इस कारण संसद में सरकार का पहले की तरह होने वाला विरोध शायद कम हो।
‘मित्रों’ की विद्युत कंपनियों को लाभ
विद्युत को भले ही सरकार ने संवैधानिक अधिकार नहीं दिया हो लेकिन यह मूलभूत आवश्यकता तो है ही। सरकार अब नया बिल ला रही है, इसके तहत बिजली के मीटरों को प्री-पैड किया जा रहा है। सरकार जो विदेशियों को रियायत दे रही है, वह बिजली के माध्यम से उपभोक्ताओं से वसूलने की तैयारी कर रही है। जिस तरह से बिल लाया जा रहा है उसकी सुप्रीम कोर्ट में अभी तक कोई जनहित याचिका को स्वीकार नहीं किया गया है। प्रतिपक्ष भी उस तरह का माहौल नहीं बना पाया है जिससे सरकार बैकफीट पर आ जाये। प्राइवेट कंपनियों को सीधे उपभोक्ताओं को बिजली बेचने की जिम्मेदारी दे दी जायेगी।
Thursday, July 24, 2025
क्या जगदीप धनखड़ के जीवन को खतरा?
श्रीगंगानगर। उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के उपरांत से ही जगदीप धनखड़ की मुलाकात मीडिया और किसी भी राजनीतिक दल से नहीं हो पायी है। किसी को भी उपराष्ट्रपति कार्यालय-निवास में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह से नजरबंद करने का रहस्य क्या है?
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता होने के नाते वे करीबन पांच साल तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। ममता बनर्जी के साथ उनका वॉकयुद्ध जारी रहता था और वे आखिर में उपराष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंच गये। तीन साल का वक्त बदल चुका था। अब दो सालों के लिए नया वाइस प्रेजीडेंट का चुनाव होना है।
नई दिल्ली में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ही भाजपा को चला रहे थे और तीसरे व चौथे नंबर के लिए राजनाथ सिंह व जेपी नड्डा के बीच दौड़ चल रही थी। गुजरात मॉडल का असर कम हो रहा था तो एमपी से शिवराजसिंह चौहान को लाया गया और उनको नया अध्यक्ष बनाने की तैयारी की जा रही थी।
मध्यप्रदेश का मॉडल भी देश में असर नहीं दिखा रहा था और मोदी-शाह एण्ड एसोसिएट की पकड़ धीमी हो रही थी, क्योंकि अपनी विदेश और रक्षा नीति के कारण ही मोदी खुद को शाबाशी देते हुए 56 ईंच का सीना का जुमला राजनीतिक सभाओं में चलाते थे और वह चल भी रहा था।
अब सीना 56 ईंच से कम हो गया तो वे राजनेता अब सक्रिय हो गये हैं जो अब तक स्वयं को असहाय या कमजोर समझने लगे थे। विदेश नीति का असर समाप्त हो चुका है। रक्षा नीति को डोनाल्ड ट्रम्प की नजर लग गयी।
वे 25 बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत को पाक के साथ युद्ध बंद करने के लिए कहा था। इससे रक्षा नीति कमजोर हो गयी।
विदेश नीति में अमेरिका-रूस जो भारत को हर समय स्पोर्ट कर रहेथे, उनके पांव भी पीछे हो गये हैं। इस कारण चीन और ब्रिटेन के माध्यम से वे नयी नीति बनाने के लिए प्रयासरत हैं। ब्रिटेन के समान अब बिना किसी शुल्क के भारतीय सीमा में प्रवेश कर सकेंगे।
उधर अमेरिका भी दबाव बना रहा है कि भारतीय बाजार को डेयरी और कृषि उद्योग के लिए खोला जाये ताकि उनके उत्पाद भी भारतीयों तक आसानी से पहुंच सकें। 1 अगस्त तक दोनों देशों के बीच समझौता होना था और समझौता नहीं होने पर ट्रम्प नये टैरिफ लगा सकते हैं। इस तरह से भारतीय उत्पाद की मांग अमेरिका में कमजोर हो जायेगी, क्योंकि वे ज्यादा मूल्य से बिकेंगे।
डोनाल्ड ट्रम्प अपने डेयरी उद्योग को पूरी दुनिया के लिए खुलवाने का प्रयास कर रहे हैं और अनेक देशों ने तो समझौता भी कर लिया है, इसमें जापान और इंडोनेशिया आदि देश शामिल हैं।
ट्रम्प टैरिफ का दबाव बनायेंगे। अपनी नयी विदेश नीति के लिए भारत गणराज्य की सरकार को चीन और ब्रिटेन पर निर्भर रहना होगा। ब्रिटेन जी-7 और नाटो का भी सदस्य है। नाटो ने नये टैरिफ की धमकी दी है।
अमेरिका के व्यापार और विदेश नीति के समक्ष मोदी का बीआईसी (ब्रिटेन-इंडिया-चाइना) गठजोड़ कारगर साबित होगा? यह सवाल है।
उधर भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौति यह भी है कि अब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के जीवन पर संकट आ सकता है।
उनको अनौपचारिक रूप से घर में कैद कर लिया गया है, क्योंकि मीडिया, राजनीतिक दलों या अन्य बाहरी व्यक्ति से मुलाकात नहीं करने दी जा रही है। उनके कार्यालय को सीज कर दिया गया है। उनकी सरकारी टीमों को हटाया जा रहा है। पूर्व उपराष्ट्रपतियों को जो सुरक्षा मिलती थी, क्या अब यह मिल पायेगी?
मोदी सरकार को अभी बहुत कुछ देखना है क्योंकि 1 अगस्त से पहले अमेरिका से समझौता होना संभव नहीं है। इस कारण कमजोर विदेश नीति के कारण अन्य भाजपा नेता मोदी-शाह एण्ड एसोसिएटको चारों तरफ से चुनौतियां मिलेंगी। आरएसएस काफी दबाव बनायेगा। मोदी 75 साल के भी हो रहे हैं। इस तरह से रिटायरमेंट की आयु भी उनको संदेश दे रही है।
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Tuesday, July 22, 2025
नैतिकता शब्द को जिंदा कर गये उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़
श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ ने अपने पद से इस्तीफा देकर नैतिकता को एक बार पुन: जीवित कर दिया। राजनीति में नैतिकता कई सालों से गुम हो गयी थी। उनके इस्तीफा के उपरांत अनेक सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने बड़े पद से धनकड़ का मोह कैसे भंग हो गया।
कुछ माह पूर्व एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान धनकड़ ने शिवराज सिंह चौहान को संबोधित करते हुए सवाल किया था कि किसान आंदोलन पिछले साल भी चल रहा था, इस साल भी चल रहा है। इसका क्या कारण हैं? इस अशांत माहौल को शांत किया जाये।
उपराष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह ही एक बार फिर सनसनी फैला दी थी कि देश में माहौल लोकतंत्र के लायक नहीं रहा है। यह चंद शब्द ने पूरी दुनिया का ध्यान उनकी ओर खींचा था। उन्होंने इस तरह का बयान देकर नरेन्द्र मोदी की सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था। इस बीच ही गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की विमान हादसे में मौत हो गयी।
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने 6 महीने के कार्यकाल पूरा होने पर जश्र मना रहे थे और इसके कुछ घंटों उपरांत ही समाचार आ गया कि उपराष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर आसीन जगदीप धनकड़ ने इस्तीफा दे दिया है।
अपने इस्तीफा में उन्होंने मोदी सरकार की तारीफ भी कर दी, जिसमें कहा गया कि भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है। एक इस्तीफा में आर्थिक मजबूती का जिक्र करना अपने आप में ही सवाल पैदा करता है।
ध्यान देना होगा कि विजय रूपाणी और अन्य यात्री बोइंग एयर बस से इंग्लैण्ड जा रहे थे और दो इंजन वाला जहाज अचानक ही क्रैश हो गया। सरकारी जांच में लीपापोती कर पायलटों की लापरवाही पर सवाल उठाने की कोशिश की गयी किंतु जब पायलट यूनियन एक जुट होकर जांच पर ही सवाल उठाये तो अब अन्य कारण खोजे जा रहे हैं लेकिन हकीकत में यह सच नहीं आयेगा।
धनकड़ की तरह विजय रूपाणी भी नई दिल्ली से नाराज चल रहे थे। उनके पास महत्वपूर्ण दस्तावेज थे।
उपराष्ट्रपति के रूप में जगदीप धनकड़ ने स्वास्थ्य सेवाओं का हवाला दिया हो लेकिन इस देश ने डॉ. शंकर दयाल को राष्ट्रपति के रूप में देखा है जब उनको चलने में ही काफी दिक्कत आती थी और वे एक बुजुर्ग राष्ट्रपति थे।
धनकड़ को कहीं जाने-आने के लिए सहारे की आवश्यकता नहीं थी।
भारत गणतंत्र की मौजूदा सरकार में क्या चल रहा है, यह कहने की आवश्यकता नहीं है। यह कुछ लोगों को चश्मे पहने होने के कारण दिखाई नहीं दे रहा हो लेकिन बदला बहुत कुछ है। सरकार जनता की कम होती आमदनी को नहीं दिखा रही बल्कि टैक्स को अपनी सफलता के रूप में प्रदर्शित कर रही है।
जीएसटी को पहले वैट के रूप में जाना जाता था और राज्य सरकार का हिस्सा सीधे राज्य सरकारों के खाते में जाता था। नयी टैक्स प्रणाली जीएसटी को लगाया तो वो टैक्स सीधे केन्द्र सरकार के खाते में जाता है और सरकार उस उपलब्धि का बखान करती है। अनेक राज्य तो अपने टैक्स का हिस्सा नहीं मिलने पर केन्द्र को बार-बार चि_ियां लिखते हैं।
सरकारी धन की निगरानी के लिए एक संवैधानिक संस्था बनी हुई है जिसका नाम कैग है। इस संस्था के नवंबर 2024 से पहले गिरीश चंद्र मूर्मू थे। मूर्मू गुजरात कैडर के आईएएस थे और गुजरात में सीएम नरेन्द्र मोदी के सलाहकार भी रह चुके थे और दिल्ली में गुजरात मॉडल लागू किया गया तो गिरीश को जम्मू-कश्मीर का उप राज्यपाल बनाया गया और फिर कैग का प्रमुख। वो रिटायर हुए तो शिक्षा विभाग के सचिव के संजय मूर्ति को यह जिम्मेदारी दी गयी।
देश के महत्वपूर्ण राज्य मणिपुर जो तीन सालों से अशांत माहौल में है, वहां की जिम्मेदारी भी गृह मंत्रालय से रिटायर हुए अधिकारी के हाथों में दे दी गयी। अजय भल्ला को दो बार एक्सटेंशन दिया गया।
इस तरह से अपने नजदीकी आईएएस अधिकारियों को संवैधानिक पद सौंप दिये गये हैं और उनको भी सीबीआई की तरह पिंजरे में कैद तोता बना दिया गया है।
जब जांच करने वाले लोग अपने ही हों तो फिर भय किस बात का।
गोवा के दिवंगत सीएम मनोहर पर्रिकर ने राफेल खरीद के बाद इस्तीफा देकर रक्षामंत्री से बेहतर एक छोटे राज्य का पुन: सीएम बनना स्वीकार किया था और उनके पास भी कुछ दस्तावेज थे और फिर उनका भी निधन हो गया।
जो मौजूदा नागरिक उड्डयन मंत्री हैं उनके पिता माधव राव सिंधिया का निधन भी एक विवादित विमान हादसे में हो गया था।
अब गुजरात के ही पूर्व सीएम विजय रूपाणी जो पंजाब के भाजपा प्रभारी थे, वे दस्तावेज के साथ लंदन जा रहे थे और उनका विमान अहमदाबाद की सीमा को भी पार नहीं कर पाया।
अब धनकड़ का यह बयान जीवित रहेगा कि मौजूदा हालात लोकतंत्र के हित में नहीं है।
इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने भी बयान दिया कि वे 2020 से लगातार स्वयं को बदल रहे हैं। उन्होंने रिटायरमेंट की चर्चा भी कर दी। साथ ही वेद, पुराण आदि के प्रचार की जिम्मेदारी लेने का भी वचन किया।
राज्यसभा के सभापति का इस्तीफा यूं ही नहीं आता। देश के इतिहास में उन्होंने एक अध्याय लिखा है और इसकी चर्चा दशकों तक होगी। ओम बिरला के बारे में भी विपक्ष की राय सही नहीं है। लोकसभा के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कृषि मंत्री नरेन्द्रसिंह तोमर का ही बयान डिलीट कर दिया। तोमर भी जाट थे और उन्होंने साफ कहा था कि देश में खून की खेती होती रही है। तोमर का बयान उनका सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित कर गया। लेकिन इस बयान की भी जानकारी सामने आयेगी।
कुछ लोग नैतिकता के आधार पर बोलते भी हैं लेकिन संसद में उनके बयान को ही कार्यवाही में शामिल नहीं किया जाता।
Labels: jagdeep dhankar vijay rupani
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