Saturday, July 26, 2025

 

दक्षेस को लोन देकर अपनी जय-जयकार करवाने वाले मोदी के देश में सरकारी स्कूल की छत गिरी


श्रीगंगानगर। मालदीव देश में अपनी जय-जयकार करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करीबन 5 हजार करोड़ रुपये का लोन दे रहे थे, उससे कुछ समय पहले राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक सरकारी विद्यालय की छत गिर गयी और सात लोगों की मौत की खबर सरकार की ओर से दी गयी। 

भारत गणराज्य में लाखों लोग सडक़ों की फुटपाथ पर रात गुजारते हैं। जिस देश में 30 करोड़ परिवारों के पास अपना घर नहीं है, उस देश का प्रधानमंत्री अपनी जय-जयकार करवाने के लिए अनेक देशों को लोन दे रहा है। इसकी भरपाई टैक्स आतंकवाद के रूप में की जा रही है। जीएसटी, वैट, आयकर, टोल टैक्स जैसे न जाने कितने रूप इस आतंकवाद को दिये गये हैं। 

राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से स्कूली बच्चों सहित 7 जनों की मौत हो गयी। यह सवाल दुनिया को हिला देने वाला है। भारत सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने का दावा करते हुए नये हाइवेज की चर्चा करती है किंतु यह कभी नहीं जाना जाता कि पुराने निर्माण कार्यों की अवधि/सीमा पूरी हो चुकी है और उनके सुधार किये जाने की आवश्यकता है। 

राजस्थान में जर्जर भवन की यह एकमात्र घटना नहीं है। श्रीगंगानगर में एक अदालत परिसर की छत का एक भाग गिर गया था, सौभाग्यवश कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं जल संसाधन विभाग और जिला कलक्टर कार्यालय भी नये निर्माण की मांग कर रहा है, क्योंकि उसका भी निर्माण कार्य का कार्यकाल पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री इंग्लैण्ड से मालदीव पहुंचे थे और इस दौरान बड़ा हादसा घटित हो गया। 



अब ब्रिटेन की गोद में कैसे बैठ गये मोदी

भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका-रूस के साथ बिगड़े रिश्तों के बाद इंग्लैण्ड के साथ संबंध मजबूत करने के लिए उसके उत्पादों को बिना शुल्क के भारत में प्रवेश की अनुमति देने वाले एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिये। 

सवाल यह है कि अचानक ही ब्रिटेन के साथ संबंधों को मजबूत करने की मजबूरी क्यों सामने आ गयी। 

वर्ष 2021 में गणतंत्र दिवस पर मोदी ने ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री एवं पत्रकार बोरिस जॉनसन को मुख्यातिथि के रूप में आमंत्रित किया था किंतु उन्होंने आने से इन्कार कर दिया था। बोरिस भारत के साथ अभीव्यक्ति की आजादी के संबंध में चर्चा करना चाहते थे, लेकिन उस समय अमेरिका में सत्ता डेमोक्रेट्स के हाथ आ गये थे और मोदी की मित्रता अमेरिका के साथ परवान पर चढ़ गयी थी। यूएसए के साथ संबंध किस प्रकार थे, इस बारे में लिखने की आवश्यकता नहीं है। 

2025 में हालात बदल गये। ब्रिटेन जी-7, नाटो और संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थायी सदस्य है। भारत को जी-7 में आमंत्रित किया जाता था लेकिन सदस्य नहीं बनाया गया। 

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और किंग चाल्र्स नयी रणनीति लेकर आये हैं और इस कारण भारत गणराज्य की सरकार पर अमेरिकी दबाव ज्यादा दिखाई नहीं दे, वे मोदी सरकार का खुलकर समर्थन कर रहे हैं और इसके बदले में इंग्लिश उत्पाद भारत के बाजार में बिना किसी टैक्स के पहुंच जायेंगे। एक्साइज से जो राजस्व प्राप्त होता था, वह समाप्त कर दिया गया। 

एक तरफ अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों को इतने महंगे दामों पर बेच रही है तो दूसरी ओर विदेशियों को अपने उत्पाद भारत में लाने के लिए शुल्क मुक्त की सुविधा दे रही है। 

भारत का रेडीमेड गारमेंट्स, कार बाजार पूरी तरह से प्रभावित होगा। मेड इन इंडिया को भी एक बड़ा झटका लगेगा। 

ब्रिटेन के किंग चाल्र्स का असर आरएसएस और कांग्रेस पर भी है। इस कारण संसद में सरकार का पहले की तरह होने वाला विरोध शायद कम हो। 


‘मित्रों’ की विद्युत कंपनियों को लाभ

विद्युत को भले ही सरकार ने संवैधानिक अधिकार नहीं दिया हो लेकिन यह मूलभूत आवश्यकता तो है ही। सरकार अब नया बिल ला रही है, इसके तहत बिजली के मीटरों को प्री-पैड किया जा रहा है। सरकार जो विदेशियों को रियायत दे रही है, वह बिजली के माध्यम से उपभोक्ताओं से वसूलने की तैयारी कर रही है। जिस तरह से बिल लाया जा रहा है उसकी सुप्रीम कोर्ट में अभी तक कोई जनहित याचिका को स्वीकार नहीं किया गया है। प्रतिपक्ष भी उस तरह का माहौल नहीं बना पाया है जिससे सरकार बैकफीट पर आ जाये। प्राइवेट कंपनियों को सीधे उपभोक्ताओं को बिजली बेचने की जिम्मेदारी दे दी जायेगी।  






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