Thursday, July 24, 2025

 

क्या जगदीप धनखड़ के जीवन को खतरा?



श्रीगंगानगर। उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के उपरांत से ही जगदीप धनखड़ की मुलाकात मीडिया और किसी भी राजनीतिक दल से नहीं हो पायी है। किसी को भी उपराष्ट्रपति कार्यालय-निवास में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह से नजरबंद करने का रहस्य क्या है?

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता होने के नाते वे करीबन पांच साल तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे। ममता बनर्जी के साथ उनका वॉकयुद्ध जारी रहता था और वे आखिर में उपराष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंच गये। तीन साल का वक्त बदल चुका था। अब दो सालों के लिए नया वाइस प्रेजीडेंट का चुनाव होना है। 

नई दिल्ली में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ही भाजपा को चला रहे थे और तीसरे व चौथे नंबर के लिए राजनाथ सिंह व जेपी नड्डा के बीच दौड़ चल रही थी। गुजरात मॉडल का असर कम हो रहा था तो एमपी से शिवराजसिंह चौहान को लाया गया और उनको नया अध्यक्ष बनाने की तैयारी की जा रही थी। 

मध्यप्रदेश का मॉडल भी देश में असर नहीं दिखा रहा था और मोदी-शाह एण्ड एसोसिएट की पकड़ धीमी हो रही थी, क्योंकि अपनी विदेश और रक्षा नीति के कारण ही मोदी खुद को शाबाशी देते हुए 56 ईंच का सीना का जुमला राजनीतिक सभाओं में चलाते थे और वह चल भी रहा था। 

अब सीना 56 ईंच से कम हो गया तो वे राजनेता अब सक्रिय हो गये हैं जो अब तक स्वयं को असहाय या कमजोर समझने लगे थे।  विदेश नीति का असर समाप्त हो चुका है। रक्षा नीति को डोनाल्ड ट्रम्प की नजर लग गयी। 

वे 25 बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत को पाक के साथ युद्ध बंद करने के लिए कहा था। इससे रक्षा नीति कमजोर हो गयी। 

विदेश नीति में अमेरिका-रूस जो भारत को हर समय स्पोर्ट कर रहेथे, उनके पांव भी पीछे हो गये हैं। इस कारण चीन और ब्रिटेन के माध्यम से वे नयी नीति बनाने के लिए प्रयासरत हैं। ब्रिटेन के समान अब बिना किसी शुल्क के भारतीय सीमा में प्रवेश कर सकेंगे। 

उधर अमेरिका भी दबाव बना रहा है कि भारतीय बाजार को डेयरी और कृषि उद्योग के लिए खोला जाये ताकि उनके उत्पाद भी भारतीयों तक आसानी से पहुंच सकें। 1 अगस्त तक दोनों देशों के बीच समझौता होना था और समझौता नहीं होने पर ट्रम्प नये टैरिफ लगा सकते हैं। इस तरह से भारतीय उत्पाद की मांग अमेरिका में कमजोर हो जायेगी, क्योंकि वे ज्यादा मूल्य से बिकेंगे। 

डोनाल्ड ट्रम्प अपने डेयरी उद्योग को पूरी दुनिया के लिए खुलवाने का प्रयास कर रहे हैं और अनेक देशों ने तो समझौता भी कर लिया है, इसमें जापान और इंडोनेशिया आदि देश शामिल हैं। 

ट्रम्प टैरिफ का दबाव बनायेंगे। अपनी नयी विदेश नीति के लिए भारत गणराज्य की सरकार को चीन और ब्रिटेन पर निर्भर रहना होगा। ब्रिटेन जी-7 और नाटो का भी सदस्य है। नाटो ने नये टैरिफ की धमकी दी है। 

अमेरिका के व्यापार और विदेश नीति के समक्ष मोदी का बीआईसी (ब्रिटेन-इंडिया-चाइना) गठजोड़ कारगर साबित होगा? यह सवाल है। 

उधर भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौति यह भी है कि अब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के जीवन पर संकट आ सकता है। 

उनको अनौपचारिक रूप से घर में कैद कर लिया गया है, क्योंकि मीडिया, राजनीतिक दलों या अन्य बाहरी व्यक्ति से मुलाकात नहीं करने दी जा रही है। उनके कार्यालय को सीज कर दिया गया है। उनकी सरकारी टीमों को हटाया जा रहा है। पूर्व उपराष्ट्रपतियों को जो सुरक्षा मिलती थी, क्या अब यह मिल पायेगी?

मोदी सरकार को अभी बहुत कुछ देखना है क्योंकि 1 अगस्त से पहले अमेरिका से समझौता होना संभव नहीं है। इस कारण कमजोर विदेश नीति के कारण अन्य भाजपा नेता मोदी-शाह एण्ड एसोसिएटको चारों तरफ से चुनौतियां मिलेंगी। आरएसएस काफी दबाव बनायेगा। मोदी 75 साल के भी हो रहे हैं। इस तरह से रिटायरमेंट की आयु भी उनको संदेश दे रही है। 

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