Tuesday, March 3, 2026

 

राजस्थान के धार्मिक शहरों में क्या शराबबंदी नहीं होनी चाहिये? गुजरात और हरिद्वार का फार्मूला क्यों नहीं अपनाया जाता-गुरुशरण छाबड़ा के उपरांत पूनम अंकुर छाबड़ा चला रही हैं आंदोलन



श्रीगंगानगर। राजस्थान में सालासर धाम, करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र बन गये खाटू श्याम जी,जातिगत भेदभाव समाप्त करने वाले बाबा रामदेव और नाथद्वारा आदि ऐसे धार्मिक संस्थान हैं, जहां आम दिनों में ही हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। इनकी धार्मिक और सामाजिक भावनाएं इन धार्मिक शहरों और मंदिरों के साथ जुड़ी हैं, इसके बावजूद इन शहरों में शराबबंदी के बारे में कभी विचार नहीं किया गया। 

राजस्थान पिछले कुछ सालों या दशकों में देवनगरी के रूप में स्थापित हुआ है। बाबा रामदेव मंदिर जैसलमेर में है। खाटू श्याम जी का मंदिर सीकर में है तो सालासर धाम चुरू जिले में है। 

इन सभी धार्मिक स्थानों पर हर रोज ही हजारों लोग पहुंचते हैं। इसके साथ ही गोगा मेड़ी मेले जो एक माह तक चलता है, उसमें भी लाखों लोग दर्शनार्थ आते हैं। 

इस तरह से देवनगरी में जो सुधार देवस्थान विभाग को करने चाहिये थे, वह नहीं किये गये। देवस्थान और आबकारी विभाग के आयुक्त उदयपुर जिले में बैठते हैं। 

जनसंघ से जुड़े हुआत्मा एवं पूर्व विधायक गुरशरण छाबड़ा ने राजस्थान में शराब बंदी आंदोलन करते हुए प्राण त्याग दिये। अपने बलिदान के बावजूद वे राज्य में शराबबंदी तो नहीं करवा सके लेकिन उनके प्रयासों से रात 8 बजे तक ही शराब की बिक्री सरकारी ठेकों से होती है। 

अब उनके आंदोलन को उनकी पुत्रवधू पूनम अंकुर छाबड़ा आगे बढ़ा रही हैं। वे आमरण अनशन कर चुकी हैं। उनका कहना है कि दिवंगत विधायक गुरशरण छाबड़ा धर्म एवं समाजहित में राजस्थान में शराबबंदी चाहते थे। इसके लिए अनशन करते हुए वे शहीद हो गये। सरकार को उनके बलिदान को याद करना चाहिये। पूनम कहती हैं, आवश्यकता के अनुसार वे आंदोलन को विस्तृत रूप देंगी। 

वहीं कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि धार्मिक शहरों में ही शराबबंदी हो जानी चाहिये, इससे कम से कम दिवंगत छाबड़ा की आत्मिक शांति के लिए किया गया एक बड़ा कार्य माना जा सकता है। उल्लेखनीय है कि शराबबंदी के लिए अब वोटिंग का प्रावधान है और सरकार को इन धार्मिक शहरों में इस प्रावधान के जरिये जनता की राय जाननी चाहिये। गुजरात में महाकाल का मंदिर होने के कारण पूरे राज्य में शराबबंदी है। हरिद्वार में मां गंगा का आगनस्थल है तो वहां भी शराब की बिक्री पर पाबंदी है। 


Monday, March 2, 2026

 

अमेरिका-ईरान युद्ध : कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी. यूँ कोई...!



वाशिंगटन डीसी। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब यूरोप तक पहुंच गया है। यूरोपियन यूनियन के सदस्य देश साइप्रस पर भी ईरान ने ड्रोन और बेलस्टिक मिसाइल से हमले किये। एक हमले में रनवे क्षतिग्रस्त हुआ है लेकिन अन्य हमलों को निष्फल कर दिया गया। वहीं कुवैत ने स्वीकार किया है कि रविवार रात को अमेरिका के तीन विमानों को गलती से उसके एयर डिफेंस से मार गिराया गया, हालांकि सभी 6 पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है और वह अस्पताल में हैं। अब इस मामले की जांच चल रही है कि यह गलती कैसे, क्यों और कहां हुई?

ईरान पर जहां अमेरिका और इजरायल ने अपने हमले जारी रखे और कई सरकारी संस्थानों और सैन्य क्षेत्रों को खत्म करने का दावा किया है।  यूएसए के रक्षामंत्री (युद्धमंत्री) पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान के मिसाइल बनाने के संयंत्र पर हमला किया गया है और उसको नष्ट कर दिया गया। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि युद्ध चार से पांच सप्ताह तक चलने की संभावना है और अमेरिका के पास इससे कहीं ज्यादा समय तक युद्ध चलाने के संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, हमने पहले ही दिन पहले ही घंटे में अयातुल्ला खामेनेयी को मार गिराया। इसके अतिरिक्त और कई अधिकारियों व नेताओं को ढेर कर दिया गया। 

ईरान ने इजरायल, यूएई, सउदी अरब तथा साइप्रस सहित कई देशों में टारगेट हमले किये। इजरायल के प्रधानमंत्री का कहना है कि तेहरान ने सिविल क्षेत्र को निशाना बनाया जबकि येरूशलम आवासीय क्षेत्रों पर हमला नहीं कर रहा है। 

वहीं दुबई का इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद कर दिया गया है। 500 फ्लाइट के कैंसिल होने की जानकारी दी गयी है। ईरान लगातार यूएई को टारगेट कर रहा है। एयरपोर्ट पर ड्रोन से हमला किये जाने की आशंका के चलते यह कदम उठाया गया है। 

दूसरी ओर सउदी अरब में अरामको की रिफाइनरी को निशाना बनाते हुए हमला किया गया, जिससे वहां पर भारी नुकसान हुआ क्योंकि आग लग गयी। 


ट्रम्प अपने हजारों सैनिकों को हजारों किमी दूर क्यों भेजा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हजारों सैनिकों को हजारों किमी दूरी ईरान के चारों तरफ घेरा डालने और बाद हमला करने के लिए भेजा। यह हमले क्यों जरूरी हो गये थे। कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,  यूँ कोई...इस तरह का कदम नहीं उठाता। 23 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा था, ईरान अमेरिका के लिए खतरा है। वक्त गुजरता चला गया, लेकिन अमेरिका का खतरा कम नहीं हुआ। अमेरिका का आरोप है कि हिजुबल्लाह जैसे प्रोक्सी संगठन को तैयार किया गया, जो विश्व समुदाय के लिए खतरा बन गये। 

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी. यूँ कोई...की इन पंक्तियों को इस तरह से पढ़ा जा सकता है कि ट्रम्प के पास भी अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा आदि की चुनौतियां रही होंगी तभी तो इतना बड़ा कदम उठाया गया। हजारों सैनिकों, सैकड़ों विमान, दर्जनों शिप और युद्धपोत आदि भेजे गये। एक सैन्य अभियान आरंभ हो गया जो एक माह से भी अधिक समय से चलने की संभावना अमेरिका स्वयं जता रहा है। 

अयातुल्ला कैसे नाजी बन गये?

जर्मन के एडोल्फ हिटलर ने विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ पर ही हमला कर दिया था जो उनकी मदद कर रहा था। उसी तरह से ईरान ने भी गल्फ कंट्रीज पर ही हमला कर इस युद्ध की आग को भडक़ा दिया है। यह आग अब धीरे-धीरे फारस की खाड़ी को अपनी चपेट में ले रही है। अरब सागर के देश ईरान के खिलाफ जवाबी कार्यवाही के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं क्योंकि उनकी देशों को भी लगातार निशाना बनाकर हमले किये जा रहे हैं। अयातुल्ला खां के लिए भी इसी तरह से कुछ शब्द एक शायर कहकर गया था, 

अगर समझा होता जि़ंदगी की रीत को,

तो यूं अल्विदा न होता, 

सुकून की जगह बस 

जख़्मों की बारिश पाले रहा।  

अयातुल्ला खामेनेयी तो चला गया किंतु ईरान की कमान जिस व्यक्ति के हाथों में भी है, वह एक ऐसी आग को जन्म दे रहा है जो  विकराल रूप धारण करती जा रही है। यूरोपीय यूनियन के देश साइप्रस को भी निशाना बनाया गया और वहां पर ब्रिटिश सेना के ऐयरबेस कैम्प पर हमला किया गया। हालांकि ब्रिटेन इस युद्ध का हिस्सा नहीं था। 

अरब के देशों के साथ यूरोपीयन यूनियन भी धीरे-धीरे युद्ध के मैदान में आ सकती है क्योंकि मजबूरी हो सकती है। नाटो के सभी सदस्य देश मेम्बर हैं और नाटो का अर्थ है कि एक देश पर हमला, सभी देशों पर हमला। अगर नाटो ऐसा नहीं करता है तो उसकी भी प्रांसगिकता पर सवाल उठने लाजमी हो जायेंगे।


 

तिलक वर्मा में भारत का माइकल बेवन बनने के सभी गुण विद्यमान


वर्मा के साथ सैमसन को भी वनडे में मिले जगह, आईसीसी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में भारत-इंग्लैण्ड चार बार भिड़े, मुकाबला टाई रहा

श्रीगंगानगर। 20-20 ओवर के सुपर आठ के आखरी मैच में भारत ने वेस्टइंडीज को परास्त कर सेमीफाइनल में जगह बना ली। संजू सैमसन मैच के हीरो रहे लेकिन तिलक वर्मा और हार्दिक पांडया का किरदार लीग व सुपर-8 में शानदार रहा है और वर्मा में वह सभी गुण दिखे जो कभी माइकल बेवन में होते थे। अकेले दम पर मैच को जीता देना। 

ऑस्ट्रेलिया के माइकल बेवन को शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा और जब वे रिटायर हुए तो इसके बाद टीम उनकी बराबरी का खिलाड़ी तलाश नहीं पायी। हालात यह हो गये कि 20-20 के 2026 के वल्र्ड कप के सुपर 8 भी खेल  नहीं पायी। वह पहले ही बाहर हो गयी। 

भारत की किस्मत को शानदार कहा जा सकता है कि बेवन की बराबरी का खिलाड़ी तिलक वर्मा के रूप में मौजूद है। जो तेल खेल सकते हैं। स्ट्राइक बार-बार बदल सकते हैं और परिस्थिति के अनुसार गियर बदलकर मैच का रूख भी अपने पक्ष में कर सकते हैं। अभी तक उनको 20-20 में अवसर मिले हैं और वनडे में भी उनको यह मौका मिलता है तो निसंदेह वर्मा एक शानदार खिलाड़ी होंगे और अगले विराट कोहली के रूप में पहचान बना लेंगे। 

इसी तरह से संजू सैमसन ने दिखाया कि उनके पास धैर्य भी है। टाइमिंग भी है और मैच को अपने अनुसार चलाने की क्षमता भी है। सैमसन भी वनडे टीम के लिए बराबर का मौका रखते हैं और उनको यह मौका मिलना भी चाहिये। बैटिंग क्रम में गहराई इस समय वनडे टीम में नहीं है। रोहित, विराट के आउट होते ही टीम का मनोबल कमजोर हो जाता है और इस मनोबल को बनाये रखने की जिम्मेदारी तिलक वर्मा, संजू सैमसन और हार्दिक पांडया पांच, छ: और सात नंबर पर आकर ले सकते हैं। 


1987 में भारत को भारत में हरा दिया था इंग्लैण्ड ने

भारत और इंग्लैण्ड के बीच 20-20 फार्मेट में दो सेमीफाइनल मुकाबले हुए हैं। 2022 के सेमीफाइनल में इंग्लैण्ड ने एडिलेड में भारतीय टीम को 10 विकेट से करारी शिकस्त दी थी। लेकिन 2024 का सेमीफाइनल मुकाबला एक बार पुन: दोनों टीमों के बीच हुआ और इस बार बाजी भारत के पक्ष में रही और रोहित के नेतृत्व वाली टीम ने यह वल्र्ड कप भी अपने नाम कर लिया था। कल तीसरा मुकाबला होगा। संयोग देखिये कि लगभग तीसरी बार दोनों सेमीफाइनल खेल रहे होंगे, आमने-सामने। 

वल्र्ड कप -50-50 की बात करें तो उसमें भी मुकाबला टाई का रहा है और 1987 में भारतीय टीम लीग मैचों में शानदार प्रदर्शन कर सेमीफाइनल में पहुंची थी और इंग्लैण्ड की टीम ने भारत को हरा दिया था। रिलायंस वल्र्ड कप भारत में खेला गया था। नवजोत सिंह सिद्धू और अजरूरद्दीन का पहला वल्र्ड कप मैच था और सिद्धू ने लीग मैचों में शानदार फुटवर्क का इस्तेमाल करते हुए स्पिनर के खिलाफ सिक्स लगाने का अपना हुनर दिखाया था और यह पहला मौका था कि किसी वल्र्ड कप में भारतीय खिलाड़ी ने इतने सिक्स लगाये हों। 

भारत सेमीफाइनल हारकर बाहर हो गया। इंग्लैण्ड इससे पहले 1983 में भी भारत के साथ इसी तरह का मुकाबला खेल चुका था, जिसे भारत ने जीता था। वेस्टइंडीज के साथ फिर फाइनल मुकाबला खेलकर चैम्पियन बनकर क्रिकेट को नयी बुलंदियों तक पहुंचाया था। 


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