Saturday, November 8, 2025

 

भारत की विदेश नीति कहां जा रही है? ट्रम्प जी-20 में नहीं होंगे शामिल

 




वाशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर साफ किया है कि वे या अन्य अधिकारी दक्षिण अफ्रीका में होने वाली समिट जी-20 में शामिल नहीं होंगे। वहीं भारत की विदेश नीति को लेकर भी दुनिया में चर्चा हो रही है। 

राष्ट्रपति के रूप में दूसरी बार व्हाइट हाउस पहुंचने के बाद से डोनाल्ड ट्रम्प किसी भी विश्वस्तरीय मंच के उद्घोषणा पत्र के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं, इसके बजाय वे अपनी नयी विदेश नीति के सहारे सामरिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ जाति तौर पर रिश्ते बना रहे हैं। 

फ्रांस में एआई शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया तो इसमें वीपी जेडी वेंस पहुंचे। उन्होंने समिट में अमेरिकी विचार रखे और इसके बाद वहां से रवाना हो गये। वे एआई शिखर सम्मेलन के संयुक्त उद्घोषणा पत्र के समारोह में शामिल नहीं हुए। हालांकि उसी समय उन्होंने भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी सहित कई शिखर नेताओं के साथ निजी मुलाकात की। 

इसी तरह से कनाडा में जी-7 समिट हुआ तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने संबोधन के तुरंत बाद ही व्हाइट हाउस के लिए एयरफोर्स वन को ज्वाइन कर लिया। अगर इसी सिलसिले को आगे बढ़ाया जाये तो आसियान देशों के शिखर सम्मेलन में वे शामिल हुए, लेकिन सिर्फ अमेरिका की बात की और वहां भी उन्होंने समिट के डिक्लरेशन फोरम में शिरकत नहीं की। वे वापिस अपने देश आ गये। 

इस बीच उन्होंने दक्षिण कोरिया, जापान, चीन आदि देशों के शिखर नेताओं के साथ जातितौर पर शिरकत की और विचारों का आदान प्रदान हुआ। 

वे वहां से लौटने के तुरंत बाद ही सी5 प्लस वन के शिखर सम्मेलन में शामिल हुए जो अमेरिका में ही आयोजित किया गया। सी-5 में पूर्व सोवियत इतिहास का हिस्सा थे, देश शामिल हुए थे, जिनमें तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाखीस्तान, उज्जेबेकिस्तान आदि देश शामिल थे। 

तजाकिस्तान इसलिए महत्वपूर्ण देश है क्योंकि वह अफगानिस्तान की सीमा को सांझा करता है। इसी तजाकिस्तान में भारत ने अपना एक एयरबेस स्थापित किया हुआ था। सी-5 प्लस वन की बैठक से पहले भारत को यह एयरबेस खाली करना पड़ा। यह भारत का एकमात्र विदेशी एयरबेस है। 


दक्षिण अफ्रीका नहीं जायेंगे अमेरिकंस लीडर

दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है और भारत इसका स्थायी सदस्य है। अमेरिका भी इसमें शामिल है। 

डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा है कि वे वहां नहीं जा रहे हैं। वीपी वेंस भी नहीं जायेंगे। भारत और अमेरिका के बीच इस मंच पर मुलाकात होने की संभावना थी, किंतु वाशिंगटन डीसी का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में श्वेत लोगों के साथ भेदभाव हो रहा है और उनकी जमीन को कब्जाया जा रहा है। उन्होंने टें्रड पेपर्स में इस तरह के समाचारों की अनदेखी पर भी विचार रखे। 

जी-20 शिखर बैठक अमेरिका में आयोजित की जानी है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने रिजॉर्ट को इसके लिए सबसे उपयुक्त स्थान बताया है। मार ए लोगो में उच्चस्तरीय व्यवस्थाएं हैं। 

हालांकि ट्रम्प ने यह कहा था कि वे भारत की यात्रा करना पसंद करेंगे अगर उनको आमंत्रित किया जाता है। अगले साल क्वाड सम्मेलन होना है। जो भारत में होगा और यह पहली तिमाही में ही होने की संभावना है। 

दूसरी ओर देखें तो नई दिल्ली और वाशिंगटन दोनों ही आमने-सामने की बातचीत से बचने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नहीं गये थे और उन्होंने वर्चुअल संबोधन दिया था। 

केन्द्र सरकार का यह भी मानना है कि अमेरिका के टैरिफ से भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है। गुजरात के कपड़ा और हीरे के व्यापारी प्रभावित हो रहे हैं। 


लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन मनाया गया

भाजपा के वरिष्ठ नेता और संस्थापक सदस्य लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन आज मनाया गया। अनेक नेताओं ने उनके निवास पर पहुंचकर बधाई दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी वहां पहुंचे। 

उल्लेखनीय है कि 8 नवंबर 2016 को ही देश में नोटबंदी लागू की गयी थी। 7 नवंबर की रात को पीएम मोदी ने घोषणा की थी कि रात 12 बजे से 500 और 1 हजार के नोट लीगल टेंडर नहीं रहेंगे। इसको बैंकों में जमा करवाकर दूसरे नोट लिये जा सकते हैं। भारत का वह पैसा जो महिलाओं और अन्य बचकर्ताओं के घरों में था, वह बैंक पहुंच गया। हालांकि कालाधन रखने वाले लोग टेबल के नीचे से भी नोट बदलवाने में कामयाब हो गये थे। 

इस तरह से एलके आडवाणी जो मोदी के राजगुरु हैं, का जन्मदिन इतिहास के पन्नों पर लिख दिया गया। 






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