Sunday, September 7, 2025

 

क्या ट्रम्प युद्ध की तैयारी कर रहे हैं?



वाशिंगटन। याद कीजिये वर्ष 2014-2019 का दौर जब भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काले धन वापिस लाने के नाम पर देश की जनता को ‘काम’ पर लगा दिया था। पहले शैल कंपनियों  पर स्ट्राइक, फिर नोटबंदी और इसके बाद जीएसटी के लिए लोग अपने सुख-दुख भूलकर लाइनों में लगे हुए थे। 

21 जनवरी 2025 को अमेरिका में व्हाइट हाउस का प्रशासन बदल गया। नये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वापसी करते हुए ऐसे कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किये कि भारत, यूरोप, चाइना सहित सभी देशों के राष्ट्राध्यक्ष अब काम पर लगे हुए हैं। पहले जनता को बिजी किया जाता था और अब व्हाइट हाउस ने दुनिया भर के नेताओं को ‘काम’ पर लगाया हुआ है। 

रूस, अमेरिका और यूरोप आदि के सभी नेता बयान दे रहे हैं कि गाजा और यूक्रेन-रूस युद्ध की शांति का मार्ग दिल्ली से होकर गुजरता है और प्रधानमंत्री मोदी को अपना कार्य करना चाहिये। 

उधर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प ने वोटिंग के समय वादा किया था, ‘अमेरिका फस्र्ट’। इस नारे को पूरा करने के लिए वे 6 माह के भीतर 200 कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। 

उन्होंने शिक्षा विभाग को समाप्त किया। कभी स्टेट्स सिम्बल माने जाने वाली हावर्ड यूनिवर्सिटी को दिये जाने वाले सरकारी अनुदान को समाप्त किया और एक जांच कमेटी भी बैठायी जो विदेश अनुदान के संबंध में जांच कर रही है। इस तरह से उन्होंने दिखाया कि यह विश्वविद्यालय डेमोक्रेट्स पार्टी की विचारधारा वाले लोगों को दुनिया के सामने आर्थिक, सामाजिक ज्ञाता के रूप में प्रस्तुत करती है। 

अमेरिका में इन दिनों जो चर्चा हो रही है, वह राजधानी वाशिंगटन डीसी में क्राइम कंट्रोल के लिए सेना को नियुक्त करना। इससे अनेक अपराधी पकड़ में आये और आधुनिक हथियार भी बरामद हो गये। पिछले 10 दिनों में एक भी व्यक्ति की हत्या नहीं हुई।

ट्रम्प ने अपने विचारों को आगे बढ़ाते हुए रक्षा मंत्रालय का नाम बदल दिया। अब इसका नाम ‘युद्ध मंत्रालय’ कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वे रक्षा नहीं आक्रमण की स्थिति में पहुंच रहे हैं और इसलिए नाम बदला गया है। पेंटागन का नाम भी बदलने का निर्णय वे कर चुके हैं। 

उनके इस कदम से यह देखा जा सकता है कि वे डिफेंस नहीं बल्कि फ्रंटफुट पर खेलना चाहते हैं। 

वहीं वेनेजुएला को उन्होंने चारों तरफ से घेर रखा है। इस तरह से यह आशंका पैदा हो गयी है कि वे वेनेजुएला पर आक्रमण करने वाले हैं?

वेनेजुएला में रशिया की भी सेना है। पहले यह देश सुंदर महिलाओं की ताजपोशी के लिए जाना जाता था अब इस पर ड्रग व्यापार आदि के आरोप लग रहे हैं और अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। 

जापान के प्रधानमंत्री का भी इस्तीफा 

ट्रम्प के व्हाइट हाउस में आने के बाद अनेक देशों की अर्थव्यवस्स्था प्रभावित हो रही है। भारतीय रुपये के यूएस डॅालर के मुकाबले भाव कम हो रहे हैं और 88 रुपये को भी पार कर गया। 

फ्रांस में हाल ही में चुनाव हुए थे किंतु सरकार फिर से अल्पमत में आ गयी है और नये सिरे से चुनाव की मांग उठ रही है। 

जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने भी इस्तीफा दे दिया। वे अपनी पार्टी का विश्वास खो चुके थे। इससे पहले कनाडा के पीएम  जस्ट्नि ट्रूडो इस्तीफा दे चुके थे। जर्मन में भी नये सिरे से चुनाव हुए। जापान के साथ ट्रम्प ने दोस्ती का परिचय देने की कोशिश की थी और टैरिफ को 25 से कम कर 15 प्रतिशत कर दिया था। 

उन्होंने रक्षा मंत्रालय का नाम बदला है तो इसके बाद भी दुनिया भर में राजनीति तेज हो गयी है। 






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