Sunday, September 28, 2025

 

केजरीवाल का पंजाब प्रशासन में हस्ताक्षेप पार्टी को कमजोर कर रहा है!



श्रीगंगानगर। पंजाब इस समय भीषण तबाही के मंजर को देखने के उपरांत बहाली की ओर देख रहा है। राज्य सरकार 5 एकड़ वाले किसानों को मुफ्त में बीज देगी, लेकिन बड़े जमींदार का नुकसान नहीं हुआ?

मार्च 2022 में पंजाब ने परिवर्तन का मानस बना रखा था और इस कारण दशकों पुरानी पार्टी कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा को परास्त करते हुए 117 सीट में से 92 पर जीत हासिल कर आम आदमी पार्टी की सरकार का गठन किया। लोगों को उम्मीदें थी कि पलायन, बेरोजगारी और अन्य किसानों की समस्याओं का अंत होगा। नशा का नाश होगा। 

मुख्यमंत्री के पद पर मशहूर कैमेडियन भगवंत मान को सीएम नियुक्त किया गया। प्रदेश पार्टी की कमान भी उनके पास थी जो हाल ही में नये प्रदेश अध्यक्ष को स्थानांतरित की है। 

पंजाब में सरकार के गठन के साथ ही दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों में सत्ता हाथ से निकल गयी। तीन बार सीएम बने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल बेरोजगार हो गये। 

दिल्ली में शराब घोटाले के चलते अरविंद केजरीवाल को जेल जाना पड़ा। इसके बाद दिल्ली से सीएम की कुर्सी भी गयी। पार्टी की प्रदेश से सत्ता भी समाप्त हो गयी। अब एक राज्य पंजाब ही है जिसके सहारे आगे विधानसभा चुनावों में शिरकत की जा सकती है। 

अब केजरीवाल बार-बार पंजाब के चक्कर काट रहे हैं। किसान पार्टी से साफ तौर पर नाराज दिखाई दे रहे हैं और बाढ़ के समय उन्होंने अपने वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किये। 

बिहार, बंगाल और तमिलनाडू विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी का कोई वजूद नहीं है इसलिए इन चुनावों के लिए इस पार्टी की चर्चा भी नहीं हो रही। इस पार्टी की नजर गुजरात पर है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनावों में वोट प्रतिशत के आधार पर वह राष्ट्रीय राजनीतिक दल बन गया था। 

बाढ़ के दौरान ही सीएम क्यों हुए बीमार?

मुख्यमंत्री भगवंत मान बाढ़ के दौरान बीमार हो गये और अस्पताल में जाकर भर्ती हो गये। इससे पहले के तीन सालों में वे कभी बीमार नहीं हुए थे। केजरीवाल के साथ प्रदेश के बाढ़ का दौरा करने के लिए भी नहीं गये। 

केजरीवाल की बार-बार पंजाब यात्रा बताती है कि वे पंजाब से काफी कुछ ‘चाहते’ हैं। पहले यह चर्चा थी कि वे पंजाब का पुत्र बनकर सीएम की कुर्सी संभालेंगे, लेकिन मीडिया की चर्चाओं और पार्टी के भीतर ही सवाल उठने के बाद यह चर्चा सिर्फ चर्चा बनकर रह गयी। 

मुख्यमंत्री भगवंत मान के पहले कई जोक्स सोशल मीडिया पर वायरल होते थे जब वे जनसभा करने के लिए जाते थे। प्रशासन पर उनकी कमजोर पकड़ है, यह प्रमाण उस समय मिल गया जब पंजाब-हिमाचल में अनुमान से अधिक बरसात हो गयी और इसके साथ ही सिस्टम पंगु हो गया। 

इससे पहले वे संगरूर से सांसद रहते हुए संसद के सुरक्षा नियमों को नजरांदाज कर वीडियो बनाते हुए सामने आये थे, जिसके बाद उनको संसद से निलम्बित भी कर दिया गया था। 

इसके उपरांत भी सांसद और सीएम के पद की मर्यादा को उच्च स्तर पर नहीं ले जाया जा सका। 

बाढ़ के हालात के बाद भी सभी जमींदारों को  फौरी राहत नहीं मिल पायी है। 2 लाख एकड़ से ज्यादा फसल बर्बाद होने की जानकारी मीडिया रिपोर्ट से सामने आयी है। 

चुनावों से पूर्व खजाना भरा होने और पैसे की किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने देने का वायदा किया गया था और अब जब पंजाब के किसानों को मदद की जरूरत महसूस हुई तो पांच-पांच एकड़  को ही बीज व अन्य सुविधाएं दिये जाने की जानकारी सामने आयी है। 

1600 करोड़ पंजाब को केन्द्र की सरकार देगी। इसके बाद सहायता लेने और पूरे नुकसान की रिपोर्ट के साथ सीएम को दिल्ली जाना चाहिये था ताकि अतिरिक्त मदद लेकर वे सभी किसानों को राजी करते। उनके जीवन को वापिस पटरी पर लाते। 

आम आदमी पार्टी के पास एक ही राज्य बचा है और वह भी तीन साल से ज्यादा का समय हो चुका है। सत्ता विरोधी लहर चुनावों के समय दिखाई ही देती है। 2027 के फरवरी-मार्च माह में चुनाव होने है और ज्यादा वक्त भी पार्टी को एक सूत्र में बांधने का भी नहीं रहा है। अगर पंजाब से सत्ता हाथ से निकल जाती है तो गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए चंदा ही जुटाना मुश्किल होगा। 

कनाडा में भी पीएम बदल चुके हैं। तीन वर्षों के दौरान लाखों पंजाबी कनाडा गये थे किंतु वहां पर मंदी आने के कारण छात्र वापिस लौट रहे हैं। इस तरह से जो जस्टिन ट्रूडो और केजरीवाल ने चक्रव्यूह की रचना की थी, वह तो कामयाब नहीं हो पायी। 

आम आदमी पार्टी में अब ज्यादा नेता भी नहीं रहे हैं जो केजरीवाल की बात को काट सकें। वरिष्ठ नेताओं में मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, भगवंत सिंह मान आदि ही चेहरे हैं। अब पंजाब की सत्ता में केजरीवाल का हस्ताक्षेप होने के कारण भगवंत मान को विरोधी दलों के कटाक्ष का भी सामना करना पड़ रहा है। 






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