Wednesday, September 24, 2025
मैक्रां के साथ थ्रिलर ड्रामा था?
वाशिंगटन। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां के साथ जो घटनाक्रम मंगलवार को न्यूयार्क में यूएन की सभा में जाते समय हुआ, वह एक थ्रिलर मूवी से कम नहीं था। हालांकि वे पैदल ही यूएन की सभा में पहुंच गये किंतु एक राष्ट्रपति को पैदल चलते देखकर वीवीआईपी मूवमेंट से होने वाली परेशानियों की जानकारी भी सामने आती है।
मैक्रां और डोनाल्ड ट्रम्प के रिश्ते इस समय सहज नहीं है। यूरोपियन यूनियन भी दो तरफ चल रही है और नाटो में भी एकता नहीं दिखाई दे रही। यहां बता दें कि फ्रेंच राष्ट्राध्यक्ष का काफिला यूएन की ओर मूव कर रहा था कि उनको पुलिस कार्मिकों ने रोक दिया, क्योंकि उस समय ही राष्ट्रपति ट्रम्प का काफिला निकल रहा था। मैक्रां ने पुलिस कार्मिक को बताया कि वे फ्रेंच प्रेजीडेंट हैं, पुलिसकर्मी ने उनको बताया कि वे उनको पहचानते हैं, लेकिन वे उनको वाहनों के साथ नहीं जाने दे सकते। इस पर मैक्रां ने ट्रम्प को फोन मिलाया और अपने साथ घटना की जानकारी दी तो ट्रम्प ने कह दिया कि अमेरिका में किसी की सिफारिश नहीं चलती।
गाजा को मान्यता देने को लेकर नाटो, जी-7, यूरोपियन यूनियन में मतभेद सामने आ गये। ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस ने फिलीस्तीन को मान्यता दे दी, किंतु जर्मनी, ईटली आदि ने खुद को इन चारों देशों से अलग कर लिया।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां फिलीस्तीन के लिए मुहिम चलाये हुए थे जो अमेरिका की नीति के खिलाफ था। उन्होंने यूएन में कई राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात भी की। इस तरह से पश्चिमी देशों के तीन समूहों में दो विचार सामने आ गये। एक ट्रम्प का था और दूसरा ब्रिटेन-फ्रांस का।
इस तरह से नाटो, जी-7 और यूरोपीयन यूनियन अलग-अलग दिशा की ओर चल पड़े। इस बीच ही मैक्रां को एक आम आदमी की तरह चलकर यूएन की सभा में पहुंचना पड़ा तो दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रम्प व प्रथम महिला मिलेनिया ट्रम्प को स्वचलित सीढिय़ों ने बीच रास्ते पर खड़ा कर दिया।
राष्ट्रपति को भी एक आदमी की तरह ही दूसरी सीढिय़ों से जाना पड़ा। वे जब भाषण देने के लिए पहुंचे तो टेलीप्रॉम्पटर खराब मिला। स्वचलित सीढियां और टेलीप्रॉम्पटर के खराब होने पर उन्होंने यूएन सभा में हंसी का माहौल खड़ा कर दिया।
ट्रम्प ने कहा, उन्हें टेलीप्रॉम्पटर खराब मिलने से उन्हें कोई परेशानी नहीं है क्योंकि वे भाषण को अपने दिल से देते हैं। उन्होंने एक एशियाई राष्ट्राध्यक्ष का नाम लिये बिना एक तंज कस दिया। इस तरह से यूएन की सभा में हंसी-खुशी का माहौल था।
इस माहौल को उन्होंने अपने तेज-तर्रार भाषण के जरिये बदला भी और कहा, रूस-युक्रेन युद्ध को समाप्त किया जा सकता है, लेकिन कुछ देश ऐसा नहीं होने दे रहे।
यूरोपीय देशों को सलाह दी कि अब वक्त आ गया है कि वे अपने देश की सीमाओं को सुरक्षित कर लें।
रूस, भारत के विदेश मंत्रियों के साथ रूबियो की मुलाकात
विदेश मंत्री तथा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रूबियो ने दो दिनों के भीतर रूस व भारत के विदेश मंत्रियों के साथ लम्बी बैठकें की।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ बंद कमरे में बैठक की और इसकी जानकारी औपचारिक रूप से देर रात तक नहीं दी गयी।
वहीं अमेरिकन मीडिया का मानना है कि रूबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच मुलाकात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी-राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच बैठक पर चर्चा की।
हालांकि यूएन सभा चल रही थी और प्रधानमंत्री ने अपने विजिट को कैंसिल कर दिया था। अब नई दिल्ली चाहती है कि एक बैठक दोनों देशों के शिखर नेताओं के बीच हो।
राष्ट्रपति ट्रम्प दशहरा उत्सव के उपरांत एशियाई देशों की यात्रा करने वाले हैं। संभव है कि वे मलेशिया में होने वाले आसियान और दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत महासागर की सुरक्षा को लेकर होने वाली बैठक में शिरकत करें। ट्रम्प के कार्यक्रम को अभी अन्तिम रूप नहीं दिया गया है।
यह भी संभव है कि नई दिल्ली की मंशा हो कि एशिया विजिट में जब राष्ट्रपति ट्रम्प दक्षिण कोरिया, मलेशिया और जापान की यात्रा करें तो उस समय वे भारत को भी इसमें शामिल करते हुए दूसरे कार्यकाल ही पहली यात्रा नई दिल्ली की करें।
भारत में इस साल नवंबर में क्वाड का शिखर सम्मेलन होना है और अगर अमेरिका इसमें शामिल नहीं होता है तो इसका अस्तित्व भी प्रभावित होगा। इस समूह में जापान-ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं।
रूसी प्रेजीडेंट भी भारत की यात्रा को लेकर अभी तक उत्साह में नहीं
मास्को में इस समय इस बात पर चर्चा नहीं हो रही है कि राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा सुनिश्चित हो। भारत ने नया रक्षा समझौता करना है और वह कभी फ्रांस और कभी रूस की ओर रुख कर रहा है।
पुतिन ने कुछ संदेश भारत सरकार को दिया हुआ है। इसमें कुछ शर्तें भी शामिल हैं। अगर उनकी पालना हो जाती है तो पुतिन भारत की यात्रा कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दिनों एक बार फिर स्वदेशी का संदेश दे रहे हैं। कंघी का भी उन्होंने उदाहरण दिया और चिप से शिप तक सभी भारत में बनाये जाने का आह्वान किया। किंतु यह भी याद होना कि प्रधानमंत्री का कार्यक्राल संभालने के उपरांत मोदी ने भारत की सरकारी कंपनियों भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल कार्पोरेशन और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम का पैसा रूसी कंपनियों में निवेश करवाया था। यह राशि 6 अरब डॉलर या उससे ज्यादा हो सकती है। जो करीबन 53 हजार करोड़ रुपये हैं। वहीं 12 हजार करोड़ रुपये का लाभांश भारत सरकार को नहीं मिल पा रहा है क्योंकि अमेरिका सरकार ने रूस को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा स्थानांतरण तंत्र से बाहर कर दिया है। इस राशि का स्थानांतरण तभी हो पायेगा जब ट्रम्प प्रशासन मास्को पर प्रतिबंधों को समाप्त करेगा। अब जो सस्ता कच्चे तेल का राग बार-बार सामने आ रहा था, उसका मूल कारण यही था। सच्चाई दुनिया के सामने लाने के बजाय उसको छुपाया गया तो ट्रम्प ने भारतीय कंपनी नायरा को प्रतिबंधित कर दिया। अब इस कहानी का अंत तभी होगा जब रूस को फिर से स्वीफट प्रणाली में शामिल किया जायेगा। चीन-ब्राजिल जो ब्रिक्स सिस्टम आरंभ करने की वकालत कर रहे हैं, उसके पीछे भारत की कूटनीति है जिसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता नहीं मिल रही है। इस कारण रूस, अमेरिका के प्रेजीडेंट तभी भारत आयेंगे जब यूक्रेन में शांति स्थापित हो सकेगी।
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