Friday, September 19, 2025

 

व्यापारी नेताओं को अमेरिका ने कहा-नो एंट्री, चाबहार बंदरगाह पर लगेंगे प्रतिबंध



श्रीगंगानगर। रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका-भारत के बीच तनाव बना हुआ है और यह हर दिन बढ़ता जा रहा है। भले ही भारत गणराज्य के शासक मोदी अपने जन्मदिन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बधाई को स्वीकार करते हुए दुनिया का वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हों। 

टैक्स आतंकवाद पर चारों तरफ से मिल रही आलोचनाओं के बाद जीएसटी में बदलाव किया गया और टैक्स को कम किया गया। अपने ही टैक्स में परिवर्तन को भारत गणराज्य की सरकार ने वाहवाही लूटने का प्रयास किया। पांच साल से भी ज्यादा समय तक ज्यादा टैक्स वसूलने को अपनी गलती के रूप में स्वीकार नहीं किया। 

वहीं अब जो बड़ी खबर आ रही है, उसमें बताया गया है कि अमेरिका ने भारत के व्यापारी नेताओं और कंपनियों के अधिकारियों का वीजा समाप्त कर दिया गया है और नये वीजा पर भी नो एंट्री कही जा रही है। अमेरिकन समाचार सेवा की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। 

इससे पहले भारत गणतंत्र को पाकिस्तान के समकक्ष मानते हुए ड्रग तस्करी वाली सूची में डाल दिया। इसमें 23 देश शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने सन फार्मा की गुजरात इकाई का निरीक्षण करते हुए उसे मापदण्डों के योग्य नहीं माना है। 

भारत सरकार की नियामक सेबी ने गौतम अडाणी को क्लीन चिट दी तो खुशियां मनायी जा रही थीं किंतु ईरान के चाबहार बंदरगाह का संचालन करने वाली भारत सरकार के नजदीक अडाणी समूह की कंपनी पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है और संभवत: 29 सितंबर से यह लागू हो जायेगा। 

भारत सरकार ने ईरान पर प्रतिबंधों के बीच चाबहार के विकास को लेकर समझौता किया था और अडाणी समूह ने 80 हजार करोड़ का निवेश करने का एलान किया। इस एलान को पूर्ण करने के लिए भारत से तत्काल एसबीआई के चेयरमैन को तेहरान बुलाया गया और वहीं पर लोन स्वीकृति जारी कर दी। 

अमेरिका ने उस समय छूट प्रदान की हुई थी किंतु अब रूसी तेल की खरीद को लेकर संबंधों में खटास आयी तो चाबहार को दी गयी छूट को वापिस ले लिया गया है। इस तरह से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का 80 हजार करोड़ रुपये का ऋण पर भी संकट गहरा गया है। 

भारतीय व्यापारी नेताओं के वीजा और उसके बाद नो एंट्री तथा कई अन्य प्रतिबंधों के बीच रुपया 88.30 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया है। 

हालांकि दोनों देश आपसी मतभेद दूर करने के लिए बैठकें कर रहे हैं, किंतु अभी कोई नतीजा नहीं निकला है और वाणिज्य मंत्री का मानना है कि नवंबर तक समझौता हो सकता है। इस बीच यह भी संभव है कि ट्रम्प प्रशासन द्वितीय प्रतिबंधों की घोषणा कर दे जो भारतीय उद्योगपतियों के लिए फायदे का सौदा नहीं हो। 

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल ही में यस बैंक द्वारा अनिल अम्बानी को दिया गया 50 हजार करोड़ का ऋण मामला भी गर्माया हुआ है। 

विदेशी मीडिया का मानना है कि भारतीयों पर भारी-भरकम टैक्स लगाकर सरकार ने अपने नजदीकी मित्रों को बड़े-बड़े ऋण दिये।  






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