Thursday, September 18, 2025

 

कंगाल पाकिस्तान को मिला महाशक्तियों का समर्थन!




श्रीगंगानगर। भारत गणराज्य के शासक नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को विश्वभर से जन्मदिन की मुबारकबाद मिलने से काफी उत्साहित नजर आ रहे थे। वहीं विश्व में एक ही रात में काफी कुछ बदल गया। कंगाल पाकिस्तान को अब सउदी अरब का साथ मिल गया है। 

वैश्विक मंच तेजी से बदलता जा रहा है और भारत की विदेश नीति एक हारे हुए सैनिक की तरह की स्थिति में जी रही है। 

जर्मन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन में पिछले कुछ दिनों के भीतर लाखों लोग एकत्र हो गये और सडक़ों पर उतर आये। वे अपने देश में इस्लामिक गतिविधियों के बढ़ावे से तंग आये हुए थे। वे आर्वजन नीति में बदलाव की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे कि इस्लामी नागरिक उन देशों में चले जायें जहां शरीयत कानून लागू है। व्हाइट लोगों के देश को फिर से सुंदर बनाया जाये। 

वैश्विक हालात को बदलते देखकर सउदी अरब ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को फोन कर 17 सितंबर 2025 को रियाद बुला लिया। उनका गर्मजोशी से स्वागत की तस्वीरें प्रदर्शित की गयीं और दोनों देशों ने ‘इस्लामिक नाटो’ की शुरुआत कर दी। अब पाक और सउदी अरब ने एक समझौते में हस्ताक्षर किये हैं, जिसमें यह माना जायेगा कि एक देश पर हुए आक्रमण को दूसरे देश पर भी आक्रमण माना जायेगा। 

यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि सउदी अरब दुनिया में सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है और उसके पास विदेशी मुद्रा और अमेरिकी हथियारों की कमी नहीं है। 

बीबीसी ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रियाद और इस्लामाबाद में जो समझौता हुआ है, वह भारत के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। 

सउदी की यमन से लगती सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी पाक सैनिकों ने उठायी हुई है और बदले में पाकिस्तान को आसानी से कर्जा रियाद देता रहा है। पाकिस्तान ने अपने एटमी हथियार को इस्लामिक देशों की रक्षा का सूत्र बताया था। अब रियाद और इस्लामाबाद ने समझौते पर हस्ताक्षर कर उस झुमले को एक सरकारी दस्तावेज बना दिया है। 


भारत की विदेश नीति फीकी हो रही है

विदेशी मीडिया की रिपोर्ट बता रही है कि भारतीय राजनीति अब अपने देश तक ही सीमित होकर रह गयी है। पश्चिम एशिया में पाकिस्तान ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है। सउदी, कतर और अन्य अरब देश लगातार पाक सरकार के साथ सम्पर्क में हैं। इसी से मालूम हो जाता है कि विदेश नीति किस कदर कमजोर हो रही है। 


इजरायल की एक गलती और बिगड़ गया संतुलन!

इजरायल ने कतर पर मिसाइल दागकर अमेरिका के लिए परेशानी का कारण बना दिया। कतर पर हमले को सउदी अरब ने गंभीरता से लिया और नाटो की तरह एक संगठन बनाने की तैयारी आरंभ कर दी। सबसे पहले परमाणु शक्ति सम्पन्न पाकिस्तान से सम्पर्क किया गया। 

पीएम मोदी पुरस्कार लेकर ही खुश होते रहे

भारत गणराज्य के शासक नरेन्द्र मोदी अरब के देशों से सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त कर ही खुश होते रहे और एक ही झटके में सउदी अरब ने पूरे विश्व को बदलकर रख दिया। जब पीएम का जन्मदिन मनाया जा रहा था, उसी समय अरब ने रात को पाकिस्तान के साथ अबूझ समझौता कर लिया। अब अरब का धनशक्ति और पाक की परमाणु शक्ति मिल गयी हैं। इस तरह से दुनिया को एक चेतावनी दे दी गयी है। 

वक्त बदल रहा था, पीएम समझ नहीं पाये

2025 के अगस्त माह की 22 तारीख को पीएम मोदी सउदी अरब की यात्रा पर थे और उसी दिन पहलगाम में आतंकवादी हमला हो गया। यह खबर सुनते ही मोदी वहां से रवाना हो गये। मेजबान का भोजन भी ग्रहण नहीं किया। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व पीएम के बीच गर्मागर्म बहस हो गयी। अमेरिका की विदेश नीति ने पाकिस्तान को प्राथमिकता पर ले लिया। उसके सेनाध्यक्ष को दो बार व्हाइट हाउस में भोज दिया गया। यह बदलते हालात का एक प्रमाण थे। 


जुलाई के बाद फिर यूके पहुंचे ट्रम्प

अभी हाल ही में जुलाई माह की 26 तारीख को राष्ट्रपति ट्रम्प यूके का दौरा करके आये थे और दो माह भी नहीं बीते कि वे फिर ये यूनाइटेड किंगडम में हैं। ब्रिटिश किंग चाल्र्स तृतीय ने सदियों पुराने अपने निवास पर उनका भव्य स्वागत किया। ट्रम्प को 17 सितंबर 2025 को ही शाही सम्मान दिया गया। उनको सोने की पारंपरिक ब्रिटिश बग्गी में यात्रा करवायी गयी। रॉयल फैमिली के सैनिकों ने उन्हें गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया। प्रथम महिला मेलनिया ट्रम्प भी उनके साथ थीं। गुरुवार को 18 सितंबर को प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ उनके सरकारी निवास पर वार्ता की और प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया गया। यहां उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। 

ब्रिटेन के राजशाही इतिहास में इस तरह का सम्मान किसी भी राष्ट्राध्यक्ष को नहीं मिल पाया था। ट्रम्प ने इसे विश्व के दो प्रमुख केन्द्रों के मजबूत संबंधों का हवाला दिया। 


फ्रांस के राष्ट्रपति मुश्किलों में

यूरोप के प्रमुख देश फ्रांस की राजनीति में काफी उथल पुथल मची हुई है। दो सालों के भीतर 5 प्रधानमंत्री बन चुके हैं और मौजूदा पीएम भी हालात को नियंत्रित  नहीं कर पा रहे हैं। वे बजट की तैयारियां कर रहे हैं किंतु उनका मानना है कि फ्रांस के अमीर लोगों पर अतिरिक्त टैक्स लगाये जाने से ही आर्थिक हालात को सुधारा जा सकता है। 


यूरोपीय देशों में चल रहे बड़े आंदोलन और इस्लामिक देशों की एकता से यह साफ दिखाई दे रहा है कि विश्व की राजनीति तेजी से बदल रही है। भारत के शासक नरेन्द्र मोदी का एक हैं तो सेफ हैं, का नारा भी कमजोर होता जा रहा है। वहीं भारतीय नागरिकों पर थोपा गया जीएसटी में सुधार को भी शासक मोदी अपनी सफलता मान रहे हैं। उन्होंने यह कभी स्वीकार नहीं किया कि दो लाख करोड़ की जो सहायता जीएसटी में बदलाव से मिली है, उस जीएसटी से जुटाये गये पैसों का कहां उपयोग किया गया। 


एस जयशंकर कहां गये?

विदेश नीति को लेकर भारत सरकार की जय-जयकार हो रही थी और कुछ एनजीओ भी वही दिखा रहे थे जो सरकार चाह रही थी। चीन में शंघाई सहयोग संगठन में मोदी ने अपने कूटनीति को बड़ी सफलता बताया था। उनके दिल्ली लौटने के बाद रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने पाकिस्तान को अपना गहरा दोस्त बता दिया। उनको पारंपरिक सहयोगी देश बताया। रूस, चीन के नेताओं के साथ वार्ता और सेना प्रमुख की अमेरिका यात्रा तथा अब सउदी अरब का समझौता भारत सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का मौका दे रहा है। 






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