Sunday, September 21, 2025

 

एच 1 बी वीजा में बदलाव के लिए मोदी की नीतियां जिम्मेदार नहीं?



श्रीगंगानगर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एच 1 बी वीजा धारकों को प्रतिवर्ष 1 लाख डॉलर अदा करने का आदेश जारी किया। इससे यूएसए की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी टेक कंपनियों में हडक़म्प मच गया। उधर भारत सरकार में भी इसी तरह का हाल था। आखिर में देर रात को ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्टीकरण दिया या बैकफुट पर आकर एक लाख डॉलर की राशि को एकमुश्त बताया अर्थात हर साल पैसे नहीं देने होंगे। इसके बाद भारत और अमेरिका में माहौल शांत हुआ। 

अमेरिका सरकार ने जो फैसला किया, उसके लिए किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

असल में यह भारतीय शासक नरेन्द्र मोदी की अहम की लड़ाई बन गयी है। वे भारतीयों के बीच अपनी पैठ बनाये रखने के लिए जन्मदिन को एक पखवाड़ा तक मनाते हैं। फ्रांस, जापान, जर्मनी आदि विकसित राज्यों या बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे गरीब स्टेट में शासनाध्यक्ष इस तरह का माहौल नहीं बनाते हैं। 

अब अगर फैक्ट को चैक किया जाये तो सामने आता है कि ट्रम्प से अपनी मित्रता का गुणगान स्वयं पीएम मोदी करते थे। अमेरिका की टेक और अन्य बड़ी कंपनियों के मालिकों के साथ विशेष बैठक किया करते थे। अब वही मोदी स्वदेशी का गुणगान कर रहे हैं। 

वर्ष 2019 में हाउडी मोदी और 2020 के गुजरात में नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। यह सब आज भी वीडियो के रूप में सोशल मीडिया पर मौजूद है। इस सबके पीछे मोदी अपनी कूटनीति और विदेश नीति का गुणगान करते थे। 

अमेरिका में भारतीय हितों को बरकरार रखने के लिए भारत सरकार की एक लॉबिंग कंपनी कार्यरत है जिसको हर वर्ष बड़ी रकम दी जाती है। अब मोदी-ट्रम्प के बीच टकराव हुआ तो एक अन्य लॉबिंग को हायर किया गया। इस लॉबिस्ट ने ट्रम्प से मुलाकात भी की और इसके बाद एक माह से रूकी हुई व्यापार वार्ता फिर से आरंभ हो गयी। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नरेन्द्र मोदी के जन्मोत्सव पर उन्हें फोन कर बधाई दी। इसके बाद मोदी समर्थक सोशल मीडिया पर ट्रम्प झुके आदि के अभियान आरंभ हो गये। 

अब प्रधानमंत्री के सबसे नजदीकी मित्र डोनाल्ड ट्रम्प ने एच 1 बी वीजा का शुल्क बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया। इससे पूरी दुनिया में हडकम्प मच गया। 

अब याद कीजिये 2024 के अमेरिकी चुनाव के समय को। उन्होंने उसी समय अमेरिका फस्र्ट की नीति को प्रस्तुत किया था। इसके बाद जो कार्यक्रम घटित हुआ और एच 1 बी वीजा को लेकर विवाद सामने आया, उसकी जानकारी भारत सरकार की एजेंसियों को नहीं थी?

पीएम मोदी का अमेरिका जाना इस माह तय था। उन्होंने अपने कार्यक्रम को टाल दिया। अब यूएन में विदेश मंत्री भारत सरकार का पक्ष रखेंगे। 

अगर मोदी अपने 56 ईंच के सीने के साथ अमेरिका जाते और राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात करते तो शायद संबंधों में आई खटास समाप्त हो जाती। लेकिन उन्होंने अपने अहम अर्थात अहंकार को  प्राथमिकता दी और यूएसए का कार्यक्रम टाल दिया। अगले साल अमेरिका में ही जी-20 की बैठक होनी है, क्या पीएम उसका भी बहिष्कार करेंगे?

वहीं क्वाड की बैठक नवंबर माह में भारत में होनी है, क्या उस समय ट्रम्प आयेंगे?

जब मलाई खाने की बात आये तो भारत के प्रथम लोक सेवक खुद खा जायें और जब विदेश नीति/कूटनीति विफल हो जाये तो इसका ठीकरा किसी व्यक्ति विशेष पर फोडऩे का प्रयास किया जाये। यह कैसी जिम्मेदारी है। 

असल में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे पत्रकार बोरिस जॉनसन के साथ इस तरह का व्यवहार मोदी कर चुके हैं और जी-7 बैठक में व्यक्तिगत रूप से जाने से इन्कार कर दिया था क्योंकि जॉनसन भी गणतंत्र दिवस पर भारत नहीं आये थे। उन्होंने सरकार का निमंत्रण ठुकरा दिया था। 






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